The 5 Choices (Hindi)


अगर आप आज भी गधों की तरह दिन भर मेहनत कर रहे हैं और फिर भी बैंक बैलेंस और करियर वही का वही है तो मुबारक हो। आप अपनी लाइफ के सबसे कीमती साल उन फालतू कामों में फूंक रहे हैं जिनका कोई मतलब नहीं है। बिना सही चॉइस के आपकी मेहनत बस एक बड़ा जीरो है।

इस ब्लॉग में हम कोरी कोगन की किताब द 5 चॉइसेस से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपको सिर्फ बिजी नहीं बल्कि असली मायने में कामयाब बनाएंगे। चलिए देखते हैं वह 3 लेसन जो आपकी प्रोडक्टिविटी को अगले लेवल पर ले जाएंगे।


लेसन १ : अर्जेंट और इम्पॉर्टेंट के बीच का असली अंतर पहचानें

ज्यादातर लोग अपनी लाइफ में एक ऐसी रेस दौड़ रहे हैं जिसका कोई फिनिश लाइन नहीं है। आप सुबह उठते हैं और सीधे अपने फोन पर झपट पड़ते हैं। ईमेल चेक करना और व्हाट्सएप के फालतू मैसेज पढ़ना आपको लगता है कि आप काम कर रहे हैं। पर सच तो यह है कि आप सिर्फ रिएक्ट कर रहे हैं। कोरी कोगन अपनी किताब में इसे क्यू 1 और क्यू 3 का चक्कर कहती हैं। दुनिया में दो तरह के काम होते हैं। एक वह जो बहुत अर्जेंट लगते हैं और दूसरे वह जो वाकई इम्पॉर्टेंट होते हैं। हम में से 90 परसेंट लोग उन कामों में अपना खून पसीना एक कर देते हैं जो सिर्फ अर्जेंट होते हैं पर जरूरी नहीं होते। जैसे कि वह अचानक आया हुआ फोन कॉल जो आपके काम के बीच में आपकी एकाग्रता की धज्जियां उड़ा देता है। या फिर वह मीटिंग जिसमें आपका होना या न होना बराबर है पर आप वहां बैठ कर समोसे तोड़ रहे हैं।

सोचिए कि आप एक डूबती हुई नाव में हैं और आप छेद बंद करने के बजाय पानी बाहर फेंकने में लगे हैं। पानी फेंकना अर्जेंट लग रहा है पर छेद बंद करना इम्पॉर्टेंट है। अगर आप छेद बंद नहीं करेंगे तो आप चाहे जितनी ताकत लगा लें आप डूबेंगे ही। ठीक यही हाल हमारी डेली लाइफ का है। हम उन लोगों की तरह हैं जो जिम तो जाते हैं पर वहां वर्कआउट करने के बजाय सिर्फ सेल्फी लेते हैं और सोचते हैं कि बॉडी क्यों नहीं बन रही। लेसन बहुत सीधा है। आपको अपनी लाइफ को चार हिस्सों में बांटना होगा। जिसे ऑथर टाइम मैनेजमेंट मैट्रिक्स कहती हैं। अगर आप अपना पूरा दिन उन कामों में निकाल रहे हैं जो दूसरों के लिए जरूरी हैं पर आपके लॉन्ग टर्म गोल के लिए कचरा हैं तो आप खुद के साथ गद्दारी कर रहे हैं।

सक्सेसफुल लोग हमेशा क्यू 2 में समय बिताते हैं। क्यू 2 यानी वह काम जो अर्जेंट नहीं दिखते पर आपकी जिंदगी बदल सकते हैं। जैसे नई स्किल सीखना या एक्सरसाइज करना या अपने बिजनेस की प्लानिंग करना। यह काम आपको आज नहीं चिल्लाएंगे कि मुझे अभी करो। पर अगर आप इन्हें नहीं करेंगे तो कल आप पक्का चिल्लाएंगे। हम अक्सर उन चीजों को टालते हैं जो हमें असल में आगे बढ़ा सकती हैं क्योंकि हमें लगता है कि अभी तो बहुत टाइम है। पर टाइम किसी के चाचा का नहीं है जो रुक जाएगा। अगर आप आज भी फालतू की ईमेल्स और बिन बुलाए मेहमानों को अटेंड करने में बिजी हैं तो समझ लीजिए कि आप अपनी लाइफ की फिल्म में साइड एक्टर का रोल कर रहे हैं।

असली हीरो वह है जो ना कहना जानता है। अगर आप हर उस चीज को हां कह रहे हैं जो आपके सामने आती है तो आपकी वैल्यू उस रद्दी वाले जैसी है जो हर कूड़ा अपने थैले में भर लेता है। अपनी प्रायोरिटी को सेट कीजिए। वह लिस्ट बनाइए जो आपके सपनों को हकीकत में बदलेगी। वह काम जो आपको डराते हैं अक्सर वही सबसे ज्यादा जरूरी होते हैं। फालतू के शोर को पीछे छोड़िए और उस एक काम पर फोकस कीजिए जो आपको कल के मुकाबले एक कदम आगे ले जाए। वरना आप बस भागते रहेंगे और साल के आखिर में सोचेंगे कि टाइम कहां गया।


लेसन २ : अपने दिमाग की बैटरी को फालतू चीजों में ड्रेन न करें

क्या आपने कभी सोचा है कि आपका स्मार्टफोन आपसे ज्यादा स्मार्ट क्यों लग रहा है। क्योंकि आप उसे तो हर रात चार्ज पर लगाते हैं पर खुद के दिमाग को खाली छोड़ देते हैं। लेसन 02 बात करता है आपके 'ब्रेन पावर' को सही तरीके से मैनेज करने की। ज्यादातर लोग अपनी मेंटल एनर्जी को ऐसे खर्च करते हैं जैसे उनके पास कोई अनलिमिटेड रिचार्ज पैक हो। सुबह उठते ही सोशल मीडिया पर दूसरों की खुशियां देखकर जलना या न्यूज चैनल पर चिल्लाते हुए लोगों को सुनना आपकी दिमागी बैटरी को सुबह 9 बजे ही लाल निशान पर ले आता है। जब तक असली काम करने का समय आता है तब तक आपका दिमाग घुटने टेक चुका होता है। फिर आप कॉफी के सहारे खुद को खींचते हैं और सोचते हैं कि आप बहुत हार्ड वर्क कर रहे हैं। सच तो यह है कि आप बस थके हुए और चिड़चिड़े इंसान हैं जो किसी तरह दिन काट रहा है।

कोरी कोगन कहती हैं कि एक्स्ट्राऑर्डिनरी प्रोडक्टिविटी के लिए आपको अपने शरीर और दिमाग को एक रेसिंग कार की तरह ट्रीट करना होगा। आप एक फरारी में सस्ता मिट्टी का तेल नहीं डाल सकते और फिर उम्मीद नहीं कर सकते कि वह रेस जीतेगी। लेकिन हम यही करते हैं। घटिया खाना और बिना मतलब का तनाव लेना हमारा डेली रूटीन बन गया है। हम रात को देर तक स्क्रीन से चिपके रहते हैं और फिर सुबह ऐसे उठते हैं जैसे किसी ने हमें नींद से नहीं बल्कि कोमा से जगाया हो। अगर आपकी फिजिकल और मेंटल एनर्जी जीरो है तो आपकी सारी प्लानिंग और सारे टूल्स धरे के धरे रह जाएंगे। एक थका हुआ दिमाग कभी भी बेहतरीन फैसले नहीं ले सकता। वह बस वही पुराने घिसे पिटे रास्तों पर चलता है।

ह्यूमन ब्रेन की एक लिमिट होती है। अगर आप दिन भर में 50 छोटे छोटे फालतू फैसले ले रहे हैं जैसे कि 'लंच में क्या खाऊं' या 'कौन सी रील देखूं' तो आप अपनी डिसीजन मेकिंग पावर को खत्म कर रहे हैं। इसे डिसीजन फटीग कहते हैं। बड़े लोग हमेशा अपनी एनर्जी को बचाकर रखते हैं ताकि जब बड़ा मौका आए तो वह पूरी ताकत से हमला कर सकें। आप अपनी लाइफ के छोटे मोटे ड्रामों में उलझे रहते हैं और फिर रोते हैं कि आपके पास कुछ बड़ा करने का दम नहीं बचा। अपनी एनर्जी को मैनेज करना ही असली टाइम मैनेजमेंट है। अगर आप खुद को रिचार्ज करना नहीं सीखेंगे तो आप बहुत जल्द एक आउटडेटेड मॉडल बनकर रह जाएंगे जिसे कोई याद नहीं रखेगा।

सोचिए कि आपका दिमाग एक बैंक अकाउंट है। हर बार जब आप किसी फालतू बहस में पड़ते हैं या किसी की बुराई करते हैं तो आप वहां से पैसे निकाल रहे हैं। और जब आप कुछ नया सीखते हैं या अच्छी नींद लेते हैं तो आप वहां पैसे जमा कर रहे हैं। अब आप खुद सोचिए कि आपका अकाउंट बैलेंस क्या है। ज्यादातर लोग तो दिवालिया होने की कगार पर हैं। अपनी लाइफ से उन 'एनर्जी वैम्पायर्स' को बाहर निकालिए जो आपका खून चूस रहे हैं। चाहे वह नेगेटिव लोग हों या वह नोटिफिकेशन जो आपको हर 2 मिनट में डिस्टर्ब करते हैं। जब आप अपनी एनर्जी को प्रोटेक्ट करना सीख जाएंगे तब आपको एहसास होगा कि असली काम करना कितना आसान था।


लेसन ३ : टेक्नोलॉजी के गुलाम नहीं बल्कि उसके मालिक बनें

आज के जमाने में अगर आपका फोन आपसे दूर हो जाए तो आपको ऐसा लगता है जैसे किसी ने आपकी किडनी निकाल ली हो। हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ टेक्नोलॉजी हमें सर्व करने के लिए बनाई गई थी पर असलियत में हम उसके नौकर बन चुके हैं। लेसन 03 इसी डिजिटल जाल से बाहर निकलने का रास्ता दिखाता है। ऑथर कहती हैं कि आपकी टेक्नोलॉजी या तो आपकी सबसे बड़ी ताकत हो सकती है या आपकी बर्बादी का सबसे बड़ा कारण। ज्यादातर लोग अपने इनबॉक्स और सोशल मीडिया नोटिफिकेशन्स के हिसाब से अपनी जिंदगी नाचते हैं। जैसे ही फोन बजता है आपका ध्यान अपने काम से हटकर उस स्क्रीन पर चला जाता है। यह ऐसा ही है जैसे आप एक बहुत जरूरी सर्जरी कर रहे हों और बीच में रुक कर यह देखने लगें कि पड़ोस वाले शर्मा जी ने डिनर में क्या खाया है।

हम सोचते हैं कि हम मल्टीटास्किंग कर रहे हैं पर सच तो यह है कि हमारा दिमाग बस एक काम से दूसरे काम पर बंदर की तरह कूद रहा है। जब आप एक ईमेल का जवाब देते हुए कोई रिपोर्ट तैयार करने की कोशिश करते हैं तो आप दोनों ही काम घटिया तरीके से कर रहे होते हैं। टेक्नोलॉजी को कंट्रोल करने का मतलब यह नहीं है कि आप हिमालय पर चले जाएं और फोन फेंक दें। इसका मतलब है अपनी डिजिटल लाइफ को ऑर्गनाइज करना। अगर आपका डिजिटल स्पेस कचरे से भरा है तो आपका दिमाग भी कचरा ही सोचेगा। अनगिनत बिना काम के एप्स और वह ईमेल्स जिन्हें आप कभी नहीं पढ़ते सिर्फ आपके समय की चोरी कर रहे हैं। आप अपनी लाइफ के कीमती घंटों को उन लोगों की पोस्ट लाइक करने में बिता देते हैं जिन्हें आपकी मौजूदगी से कोई फर्क नहीं पड़ता।

अपनी टेक्नोलॉजी को एक फिल्टर की तरह इस्तेमाल कीजिए। हर नोटिफिकेशन जो आपकी स्क्रीन पर चमकता है वह आपसे आपकी अटेंशन की भीख मांग रहा है। और अटेंशन आज की दुनिया की सबसे महंगी करेंसी है। अगर आप इसे मुफ्त में बांट रहे हैं तो आपसे बड़ा दानी कोई नहीं है। कोरी कोगन हमें सिखाती हैं कि हमें अपने डिजिटल टूल्स को अपनी जीत के लिए इस्तेमाल करना चाहिए न कि खुद को हराने के लिए। अपने फोन को 'डू नॉट डिस्टर्ब' पर डालना कोई गुनाह नहीं है। असल में यह खुद के प्रति सम्मान है। जब आप अपने काम के समय को प्रोटेक्ट करते हैं तब दुनिया भी आपकी वैल्यू करना शुरू करती है। वरना आप बस उस भीड़ का हिस्सा बने रहेंगे जो सिर्फ दूसरों का कंटेंट कंज्यूम करती है और खुद कभी कुछ क्रिएट नहीं कर पाती।

इमेजिन कीजिए कि आप अपनी लाइफ की कार चला रहे हैं और आपका फोन बगल वाली सीट पर बैठकर लगातार स्टयरिंग घुमाने की कोशिश कर रहा है। क्या आप कभी अपनी मंजिल पर पहुंच पाएंगे। कभी नहीं। आपको उस फोन को पीछे की सीट पर फेंकना होगा और खुद ड्राइविंग सीट संभालनी होगी। अपनी सुबह को डिजिटल फ्री रखिए और अपने सबसे मुश्किल काम तब कीजिए जब पूरी दुनिया सो रही हो या फालतू की ईमेल्स में उलझी हो। जब आप टेक्नोलॉजी को मास्टर कर लेते हैं तो आप वह काम आधे समय में कर सकते हैं जिसे करने में दूसरों को पूरा हफ्ता लग जाता है। याद रखिए कि फोन एक टूल है कोई भगवान नहीं जिसकी आपको हर वक्त पूजा करनी है।


तो दोस्तों, द 5 चॉइसेस सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि एक रियलिटी चेक है। आप बिजी रहने के लिए पैदा नहीं हुए हैं आप कुछ एक्स्ट्राऑर्डिनरी करने के लिए पैदा हुए हैं। अपनी चॉइसेस को आज ही बदलिए वरना कल आपकी पहचान सिर्फ एक थके हुए इंसान की होगी जिसने मेहनत तो बहुत की पर हासिल कुछ नहीं किया। नीचे कमेंट्स में बताइए कि आज से आप कौन सी एक फालतू आदत को छोड़ने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो हमेशा कहता है कि उसके पास टाइम नहीं है। चलिए साथ मिलकर अपनी प्रोडक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं।

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