Business Plan in a Day (Hindi)


क्या आप अभी भी अपने उस करोड़ों के बिजनेस आईडिया को डायरी के आखिरी पन्ने पर दबाकर बैठे हैं। मुबारक हो क्योंकि आप अपनी आलस और डर की वजह से दुनिया के सबसे बड़े फेलियर बनने की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। जब दूसरे लोग रोंडा अब्राम्स की टेक्निक से एक दिन में अपना फ्यूचर लिख रहे हैं तब आप शायद अगले जन्म का इन्तजार कर रहे हैं।

अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस सिर्फ आपके सपनों में न रहे बल्कि असलियत में नोट छापे तो रोंडा अब्राम्स की यह बुक समरी आपके लिए गेम चेंजर साबित होगी। चलिए इस आर्टिकल में उन तीन बड़े लेसन को समझते हैं जो आपके बिजनेस करने के तरीके को हमेशा के लिए बदल देंगे।


लेसन १ : परफेक्शन का मोह त्यागें और एक्शन लें

ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करने से पहले ही हार मान लेते हैं। उनका सबसे बड़ा दुश्मन कोई कॉम्पिटिटर नहीं बल्कि उनके दिमाग का वो कीड़ा है जिसे हम परफेक्शन कहते हैं। रोंडा अब्राम्स साफ कहती हैं कि अगर आप दुनिया का सबसे परफेक्ट बिजनेस प्लान बनाने की फिराक में हैं तो यकीन मानिए आप कभी दुकान का शटर नहीं खोल पाएंगे। लोग महीनों तक बैठ कर यह सोचते रहते हैं कि लोगो का कलर क्या होगा या ऑफिस की दीवारों पर पेंट कौन सा होगा। भाई साहब अभी आपका बिजनेस शुरू भी नहीं हुआ है और आप इंटीरियर डेकोरेटर बनने की ट्रेनिंग ले रहे हैं।

असलियत तो यह है कि मार्केट को आपके कलर पैलेट से कोई लेना देना नहीं है। मार्केट को मतलब है आपकी सर्विस और प्रोडक्ट से। रोंडा अब्राम्स की यह किताब हमें सिखाती है कि एक ही दिन में अपने प्लान का ढांचा तैयार करें। इसे वह बिजनेस प्लान इन ए डे कहती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी कचरा लिख दें। इसका मतलब है कि आप उन जरूरी सवालों के जवाब ढूँढें जो आपके बिजनेस की जान हैं। जैसे कि आप क्या बेच रहे हैं और कौन इसे खरीदेगा। बाकी की सजावट तो रास्ते में होती रहेगी।

इमेजिन कीजिए कि आपको एक ढाबा खोलना है। अब आप छह महीने तक इस पर रिसर्च कर रहे हैं कि चम्मच कौन से ब्रांड की होगी और वेटर की वर्दी का कपड़ा क्या होगा। इतने में आपके पड़ोस वाले चिंटू ने एक टेंट लगाया और समोसे बेचना शुरू भी कर दिया। जब तक आपका प्लान तैयार होगा तब तक चिंटू अपनी दूसरी ब्रांच खोल चुका होगा। यही कड़वा सच है। परफेक्शन एक ऐसी बीमारी है जो आपको पंगु बना देती है। आपको लगता है कि आप बहुत मेहनत कर रहे हैं क्योंकि आप दिन भर एक्सेल शीट पर काम कर रहे हैं। लेकिन असल में आप सिर्फ डर रहे हैं।

किताब हमें बताती है कि अपना पहला ड्राफ्ट जल्दी से तैयार करें। यह ड्राफ्ट गंदा हो सकता है और इसमें गलतियां भी हो सकती हैं। लेकिन यह एक कागज का टुकड़ा होगा जिसे आप देख सकते हैं और जिस पर काम शुरू कर सकते हैं। एक अधूरा प्लान जो एक्शन में है वह उस परफेक्ट प्लान से हजार गुना बेहतर है जो सिर्फ आपके दिमाग की तिजोरी में बंद है। रोंडा का कहना है कि बिजनेस प्लान कोई पत्थर की लकीर नहीं है जिसे बदला न जा सके। यह एक जिंदा दस्तावेज है। जैसे जैसे आप मार्केट में उतरेंगे और ठोकर खाएंगे यह प्लान अपने आप सुधरता जाएगा।

इसलिए अगली बार जब आपको लगे कि अभी कुछ कमी है तो समझ जाइए कि आपका डर आपसे बातें कर रहा है। रोंडा अब्राम्स की इस फिलॉसफी को अपनाएं और खुद को एक डेडलाइन दें। केवल 24 घंटे। इन 24 घंटों में आपको तय करना है कि आपका बिजनेस क्या है और वह कैसे चलेगा। अगर आप एक दिन में अपना विजन क्लियर नहीं कर सकते तो शायद आप बिजनेस के लिए अभी तैयार ही नहीं हैं। चलिए अब देखते हैं कि यह विजन क्लियर होने के बाद आपको मार्केट में किसके खिलाफ खड़े होना है।


लेसन २ : अपने कॉम्पिटिशन को करीब से पहचानें

जब आप बिजनेस की दुनिया में कदम रखते हैं तो आपको लगता है कि आपका आईडिया एकदम यूनिक है। आपको लगता है कि आप तो मंगल ग्रह से कोई ऐसी चीज लाए हैं जो आज तक किसी ने देखी ही नहीं। रोंडा अब्राम्स आपकी इस गलतफहमी का गुब्बारा बड़े प्यार से फोड़ती हैं। वह कहती हैं कि अगर आपको लगता है कि आपका कोई कॉम्पिटिटर नहीं है तो या तो आप बहुत बड़े जीनियस हैं या फिर आप बहुत बड़े बेवकूफ। और यकीन मानिए ज्यादातर मामलों में दूसरा विकल्प ही सही होता है। कॉम्पिटिशन को न पहचानना वैसा ही है जैसे आप बिना हेलमेट के युद्ध के मैदान में उतर गए हों और उम्मीद कर रहे हों कि सामने वाला आपको चॉकलेट देगा।

किताब हमें सिखाती है कि अपने दुश्मनों को अपने दोस्तों से भी ज्यादा करीब रखना चाहिए। यहाँ दुश्मन का मतलब वो लोग हैं जो वही बेच रहे हैं जो आप बेचना चाहते हैं। आपको उनकी कुंडली निकालनी होगी। वे क्या सही कर रहे हैं और सबसे जरूरी बात यह कि वे क्या गलत कर रहे हैं। अक्सर नए बिजनेसमैन सोचते हैं कि वे बड़े ब्रांड्स को सिर्फ कम कीमत देकर हरा देंगे। यह सोच वैसी ही है जैसे कोई कहे कि मैं टाटा और रिलायंस को इसलिए हरा दूंगा क्योंकि मेरी दुकान पर चाय पांच रुपये सस्ती है। भाई साहब वे आपको कच्चे चबा जाएंगे और आपको पता भी नहीं चलेगा।

रोंडा कहती हैं कि कॉम्पिटिशन का एनालिसिस करने का मतलब उनकी नकल करना नहीं है। इसका मतलब है मार्केट में उस खाली जगह यानी गैप को ढूंढना जिसे कोई और नहीं भर पा रहा। मान लीजिए आप एक जिम खोलना चाहते हैं। आपके इलाके में पहले से ही पांच जिम हैं। अब अगर आप छठा जिम भी वैसा ही खोलेंगे तो लोग आपके पास क्यों आएंगे। लेकिन अगर आप रिसर्च करते हैं और पाते हैं कि बाकी पांचों जिम में कोई भी वर्किंग महिलाओं के लिए स्पेशल बैच नहीं चलाता तो यह आपका असली मौका है। अब आपने कॉम्पिटिशन को समझा और अपनी एक अलग पहचान बनाई।

कॉम्पिटिशन को पहचानने में ईगो को बीच में मत आने दीजिए। अगर आपका पड़ोसी आपसे अच्छा बिजनेस कर रहा है तो जाकर देखिए कि वह ग्राहकों से कैसे बात करता है। क्या उसके यहाँ सफाई ज्यादा है या उसकी डिलीवरी सर्विस तेज है। रोंडा अब्राम्स के अनुसार एक दिन की प्लानिंग में यह रिसर्च सबसे अहम है। आपको इंटरनेट पर जाना होगा और रिव्यूज पढ़ने होंगे। लोग आपके कॉम्पिटिटर्स के बारे में क्या शिकायत कर रहे हैं। वही शिकायत आपके लिए एक नया अवसर है। अगर कोई कहता है कि फलां स्टोर पर सामान तो अच्छा है पर स्टाफ का व्यवहार खराब है तो आप अपनी सर्विस को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना सकते हैं।

बिजनेस में अंधे होकर मत चलिए। रोंडा हमें यह भी याद दिलाती हैं कि कॉम्पिटिशन सिर्फ डायरेक्ट नहीं होता। अगर आप मूवी थिएटर चला रहे हैं तो आपका कॉम्पिटिशन सिर्फ दूसरा सिनेमा हॉल नहीं है। आपका कॉम्पिटिशन नेटफ्लिक्स भी है और वो रेस्टोरेंट भी जहाँ लोग शाम बिताने जा सकते हैं। इस पूरी पिक्चर को समझना ही एक समझदार इंटरप्रेन्योर की निशानी है। जब आप अपने कॉम्पिटिशन को समझ लेते हैं तो आपका आधा डर खत्म हो जाता है। अब आपको पता है कि आपको किससे लड़ना है और कैसे जीतना है। और जब आप यह जंग जीतना सीख जाते हैं तभी असली पैसा आता है जिसे मैनेज करना हम अगले लेसन में सीखेंगे।


लेसन ३ : फाइनेंशियल क्लेरिटी ही असली सक्सेस है

बिजनेस की दुनिया में जोश होना अच्छी बात है पर सिर्फ जोश से घर का चूल्हा नहीं जलता। रोंडा अब्राम्स बहुत ही कड़वे शब्दों में समझाती हैं कि अगर आपको अपने नंबर्स की समझ नहीं है तो आप बिजनेस नहीं बल्कि एक बहुत ही महंगा और थका देने वाला शौक पाल रहे हैं। लोग अक्सर कहते हैं कि मुझे पैसों की चिंता नहीं है मुझे बस लोगों की सेवा करनी है। सुनने में यह बात बहुत महान लगती है पर बिना प्रॉफिट के आपकी सेवा चंद दिनों में दम तोड़ देगी। रोंडा कहती हैं कि एक दिन के प्लान में सबसे ज्यादा दिमाग आपको अपनी जेब और आने वाले खर्चों पर लगाना चाहिए।

फाइनेंशियल क्लेरिटी का मतलब यह नहीं है कि आपको चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना पड़ेगा। इसका सीधा सा मतलब है कि आपको पता होना चाहिए कि पैसा कहाँ से आएगा और कहाँ जाएगा। अक्सर नए स्टार्टअप वाले एक ऑफिस लेते हैं और उसमें लाखों का फर्नीचर भर देते हैं। उन्हें लगता है कि दिखने में बॉस लगेंगे तो क्लाइंट अपने आप आ जाएंगे। रोंडा इसे बेवकूफी का सबसे बड़ा मेडल मानती हैं। किताब हमें सिखाती है कि शुरुआत में अपने खर्चों को इतना कम रखें कि आपको खुद पर हंसी आ जाए। जब तक पहला रुपया कमा न लें तब तक खर्चा करने का हक आपको नहीं है।

इमेजिन कीजिए कि आपने एक कॉफी शॉप खोली। आपने बहुत महंगी मशीन खरीदी और इटली से कॉफी बीन्स मंगवाए। लेकिन आपने यह हिसाब ही नहीं लगाया कि एक कप कॉफी बनाने में आपको कितना खर्च आ रहा है। महीने के आखिर में पता चला कि आप हर कप पर दस रुपये का घाटा सह रहे हैं। अब जितनी ज्यादा कॉफी बिकेगी आप उतने ही जल्दी कंगाल होंगे। रोंडा अब्राम्स कहती हैं कि नंबर्स झूठ नहीं बोलते। आपको अपनी फिक्स्ड कॉस्ट और वेरिएबल कॉस्ट का पता होना चाहिए। अगर आप एक दिन में बैठकर यह बेसिक कैलकुलेशन नहीं कर सकते तो यकीन मानिए आप अपनी बर्बादी का डेथ वारंट साइन कर रहे हैं।

किताब में एक और जरूरी बात बताई गई है जिसे कैश फ्लो कहते हैं। लोग सोचते हैं कि अगर उनकी सेल अच्छी हो रही है तो बिजनेस बढ़िया चल रहा है। लेकिन अगर वो पैसा आपके हाथ में नहीं आ रहा और उधार में फंसा हुआ है तो आपका बिजनेस कभी भी बंद हो सकता है। रोंडा हमें सिखाती हैं कि एक दिन के प्लान में यह जरूर लिखें कि आपके पास कम से कम छह महीने का बैकअप प्लान क्या है। बिजनेस पहले दिन से ही छप्पर फाड़ कमाई नहीं देता। यह एक पौधा है जिसे शुरू में आपको खाद और पानी देना पड़ता है।

जब आपके पास नंबर्स की क्लेरिटी होती है तो आपका कॉन्फिडेंस अलग ही लेवल पर होता है। तब आप किसी इन्वेस्टर या बैंक मैनेजर के सामने हकलाते नहीं हैं। आप सीना तानकर बता सकते हैं कि आपका बिजनेस कैसे और कब मुनाफे में आएगा। रोंडा अब्राम्स की यह गाइड हमें एक समझदार बिजनेसमैन बनाती है न कि एक जुआरी। तो अब बहाने बनाना बंद कीजिए और अपनी डायरी उठाइए। अगर आप आज एक दिन लगाकर अपना भविष्य तय नहीं कर सकते तो फिर जिंदगी भर दूसरों के इशारों पर नाचने के लिए तैयार रहिए। यह मौका है अपना खुद का साम्राज्य खड़ा करने का। अभी नहीं तो कभी नहीं।


अगर आप सच में अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आज ही रोंडा अब्राम्स के इन रूल्स को फॉलो करें। कमेंट में बताएं कि आपका वो कौन सा बिजनेस आईडिया है जिसे आप कल से शुरू करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो सालों से सिर्फ प्लान बना रहा है। चलिए मिलकर एक नई शुरुआत करते हैं।

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