Crunch Point (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो लाइफ में जरा सा प्रेशर आते ही ऐसे पिघल जाते हैं जैसे धूप में रखी आइसक्रीम। अगर आपको लगता है कि रोने धोने से आपकी मुसीबतें कम हो जाएंगी तो बधाई हो आप अपनी बर्बादी का प्रीमियम सब्स्क्रिप्शन ले चुके हैं।

जब क्रंच पॉइंट आता है तो दुनिया आपको नहीं बल्कि आपके रिएक्शन को देखती है। क्या आप तैयार हैं उन 3 लेसन्स को सीखने के लिए जो आपको हार की कगार से निकालकर सक्सेस की चोटी पर खड़ा कर देंगे। चलिए शुरू करते हैं।


लेसन १ : स्टे काम एंड कंट्रोल योर इमोशंस

इमेजिन कीजिये कि आप एक टाइट रोप पर चल रहे हैं और अचानक नीचे से किसी ने जोर से चिल्ला दिया। अब आपके पास दो ऑप्शन हैं। या तो आप घबराकर नीचे गिर जाएँ और अपनी हड्डियों का हलवा बनवा लें या फिर अपनी पकड़ मजबूत करें और शांति से अगला कदम बढ़ाएं। असल लाइफ में जब बिजनेस डूब रहा होता है या जॉब जाने वाली होती है तो हमारे अंदर का पैनिक बटन दब जाता है। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि क्रंच पॉइंट पर सबसे बड़ी जीत अपने दिमाग को शांत रखना है। जब आग लगी हो तब फायर ब्रिगेड वाला चिल्लाता नहीं है बल्कि पानी की पाइप ढूंढता है। लेकिन हम लोग क्या करते हैं। हम लोग तो आग देखकर उसी में घी डालने का काम शुरू कर देते हैं। हम अपनी किस्मत को कोसते हैं या फिर उस बॉस को गाली देते हैं जिसने शायद हमें इस हाल में पहुंचाया है।

शांति का मतलब यह नहीं है कि आप साधु बन जाएं और आंखें बंद करके बैठ जाएं। इसका मतलब है कि आप अपने इमोशंस को अपनी बुद्धि पर हावी न होने दें। जब प्रेशर बढ़ता है तो हमारे दिमाग का वह हिस्सा जो लॉजिक समझता है वह छुट्टी पर चला जाता है। ऐसे में आपके फैसले किसी नशेड़ी के फैसलों जैसे लगने लगते हैं। मान लीजिये आपके स्टार्टअप का सबसे बड़ा क्लाइंट छोड़कर चला गया। अब आप या तो ऑफिस में बैठकर मातम मना सकते हैं और अपने एम्प्लॉईज को डरा सकते हैं या फिर ठंडे दिमाग से यह सोच सकते हैं कि नया क्लाइंट कहाँ से आएगा। याद रखिये कि एक शांत कप्तान ही डूबते हुए जहाज को किनारे लगा सकता है। अगर कप्तान ही रोने लगे तो क्रू मेंबर्स तो सीधा समुद्र में छलांग लगा देंगे।

हकीकत तो यह है कि दुनिया को आपके दर्द से कोई लेना देना नहीं है। उन्हें बस रिजल्ट चाहिए। अगर आप सिचुएशन में पैनिक करेंगे तो आप अपनी बची कुची इज्जत भी गँवा देंगे। लोग आपको एक लीडर की तरह देखना चाहते हैं न कि एक घबराए हुए बच्चे की तरह। जब भी कोई बड़ा संकट आए तो एक लंबी सांस लें और खुद से कहें कि यह भी बीत जाएगा। प्रेशर में शांत रहना कोई टैलेंट नहीं है बल्कि यह एक प्रैक्टिस है। जितना आप खुद को ट्रेन करेंगे उतना ही आप मुश्किल समय में बाजी मार पाएंगे। अपनी धड़कनों को कंट्रोल में रखिये वरना यह दुनिया आपको कच्चा चबा जाएगी। जब आप शांत होते हैं तो आपको वह रास्ते दिखने लगते हैं जो पैनिक में गायब हो गए थे। इसलिए अगली बार जब लाइफ आपकी बैंड बजाने की कोशिश करे तो आप मुस्कुराकर अपनी स्टिक उठाइये और म्यूजिक को एन्जॉय कीजिये। शांत दिमाग ही आपकी सबसे बड़ी पावर है।


लेसन २ : टेक फुल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड एक्ट इमीडिएटली

जब लाइफ आपके चेहरे पर नींबू निचोड़ दे तो आपके पास दो रास्ते होते हैं। या तो आप बैठकर अपनी किस्मत को कोसें और आँखों में जलन का ड्रामा करें या फिर उस नींबू का शरबत बनाकर मार्केट में बेच दें। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि क्रंच पॉइंट पर सबसे बड़ा विलेन वह इंसान होता है जो विक्टिम कार्ड खेलता है। हम में से ज्यादातर लोग मुसीबत आते ही एक ही सवाल पूछते हैं कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ। जैसे भगवान ने सिर्फ आपको परेशान करने के लिए ही दुनिया बनाई हो। सच्चाई तो यह है कि जब आप दूसरों को ब्लेम करते हैं तो आप अपनी पावर उन्हें दे देते हैं। अगर मंदी की वजह से आपका बिजनेस गिरा है और आप सरकार को गाली दे रहे हैं तो आप अपनी सिचुएशन सुधारने की चाबी भी सरकार के हाथ में थमा चुके हैं।

रिस्पॉन्सिबिलिटी लेने का मतलब यह नहीं है कि हर गलती आपकी ही है। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि उस सिचुएशन को ठीक करने का ठेका सिर्फ आपका है। जब आप कहते हैं कि मैं जिम्मेदार हूँ तो अचानक आपके दिमाग के बंद दरवाजे खुलने लगते हैं। मान लीजिये आपकी टीम ने कोई बड़ी गलती कर दी जिसकी वजह से प्रोजेक्ट हाथ से निकल गया। अब आप उन पर चिल्लाकर अपना गला खराब कर सकते हैं या फिर शांति से यह देख सकते हैं कि अब डैमेज कंट्रोल कैसे होगा। लोग अक्सर बहाने बनाने में इतनी एनर्जी लगा देते हैं कि अगर उतनी मेहनत काम करने में लगाते तो शायद बिल गेट्स के बगल में बंगला होता। बहाने आपको थोड़े समय के लिए सुकून दे सकते हैं लेकिन वह आपकी बैंक ईएमआई नहीं भर सकते।

क्रंच पॉइंट पर रुकना मना है। यहाँ देरी का मतलब है बर्बादी। जब आग लगी हो तो आप यह डिस्कस नहीं करते कि बाल्टी का कलर कौन सा होना चाहिए। आप बस पानी डालते हैं। लाइफ में भी जब मुश्किल आती है तो हम सोचने में बहुत वक्त बर्बाद करते हैं। हम परफेक्ट प्लान का इन्तजार करते हैं जबकि परफेक्ट जैसा कुछ होता ही नहीं है। ब्रायन ट्रेसी का सिंपल मंत्र है कि जो भी करना है अभी करो। अगर आपको किसी से माफ़ी मांगनी है तो अभी मांगो। अगर कोई मुश्किल फैसला लेना है तो अभी लो। याद रखिये कि एक गलत फैसला जो समय पर लिया गया हो वह उस सही फैसले से बेहतर है जो बहुत देर से लिया गया।

अपनी जिंदगी के ड्राइवर खुद बनिए वरना लोग आपको अपनी गाड़ी के पीछे बांधकर घसीटेंगे। जब आप जिम्मेदारी लेते हैं तो आपके अंदर का डर गायब होने लगता है। डर हमेशा उन लोगों को लगता है जो सोचते हैं कि उनके साथ कुछ बुरा होगा। लेकिन जो लोग एक्शन लेते हैं उनके पास डरने का टाइम ही नहीं होता। रिस्पॉन्सिबिलिटी लेना एक मैच्योर इंसान की निशानी है। क्या आपने कभी किसी सफल इंसान को यह कहते सुना है कि मैं इसलिए फेल हुआ क्योंकि बिल्ली रास्ता काट गई थी। नहीं ना। तो आप भी अपनी असफलताओं के लिए मौसम विभाग या पड़ोसियों को दोष देना बंद कीजिये। अपनी आस्तीन चढ़ाइये और काम पर लग जाइये क्योंकि आपकी नैया पार लगाने के लिए कोई फरिश्ता नहीं आने वाला। आप खुद ही अपने भगवान हैं और खुद ही अपने रक्षक।


लेसन ३ : फोकस ऑन सोल्यूशन एंड प्रायरिटाइज योर टास्क

जब लाइफ में रायता फैल जाता है तो ज्यादातर लोग चम्मच लेकर यह नापने लगते हैं कि रायता कितना दूर तक गया है। ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। क्रंच पॉइंट पर आपका सारा फोकस प्रॉब्लम से हटकर सोल्यूशन पर होना चाहिए। अगर आपका सिर दर्द कर रहा है तो यह सोचने से दर्द कम नहीं होगा कि कल रात क्या खाया था। आपको बस एक डिस्प्रिन ढूंढनी होगी। बिजनेस हो या पर्सनल लाइफ जब संकट आता है तो समस्याओं की लिस्ट इतनी लंबी हो जाती है कि इंसान घबराकर चादर तानकर सो जाना चाहता है। लेकिन असली खिलाड़ी वही है जो उस भीड़ में से सबसे जरूरी काम को पकड़ ले।

हमें लगता है कि हम एक साथ दस काम निपटा लेंगे लेकिन असलियत में हम बस अपनी उंगलियां फंसा लेते हैं। इसे कहते हैं 'मेजर माइनरिंग'। मतलब छोटे छोटे बेकार के कामों में अपनी पूरी एनर्जी लगा देना और सबसे बड़े काम को छोड़ देना। मान लीजिये आपके घर में पाइप फट गया है और पानी भर रहा है। अब आप पहले सोफे की धूल साफ़ करेंगे या मेन वाल्व बंद करेंगे। जाहिर है आप वाल्व बंद करेंगे। लेकिन अपनी लाइफ की मुश्किलों में हम अक्सर सोफे की धूल ही साफ़ करते रहते हैं। हम उन ईमेल का जवाब देते हैं जो जरूरी नहीं हैं या उन लोगों से बहस करते हैं जिनका हमारी जीत से कोई लेना देना नहीं है। ब्रायन ट्रेसी का 80/20 रूल यहाँ रामबाण है। आपके 20 परसेंट काम ही आपको 80 परसेंट रिजल्ट देंगे। उन 20 परसेंट कामों को पहचानिये और उन पर टूट पड़िये।

संकट के समय में आपका दिमाग एक लेजर लाइट की तरह होना चाहिए न कि किसी पुराने बल्ब की तरह जो हर तरफ रोशनी तो फेंकता है पर जलता कुछ भी नहीं। लेजर की तरह एक पॉइंट पर फोकस कीजिये। जब आप एक बड़ी समस्या को हल कर लेते हैं तो बाकी छोटी समस्याएं खुद ब खुद दम तोड़ देती हैं। और हाँ इसमें भी अपनी ईगो को बीच में मत लाइये। अगर सोल्यूशन के लिए किसी की मदद चाहिए तो मांग लीजिये। लोग अक्सर डूबना पसंद करते हैं लेकिन मदद मांगना उन्हें अपनी शान के खिलाफ लगता है। याद रखिये श्मशान में आपकी शान कोई देखने नहीं आएगा। वहां बस आपकी राख बचेगी। इसलिए स्मार्ट बनिए और सोल्यूशन ओरिएंटेड माइंडसेट बनाइये।

क्रंच पॉइंट आपकी बर्बादी के लिए नहीं बल्कि आपको यह बताने के लिए आता है कि आपके अंदर कितनी जान बाकी है। यह एक आग है। अगर आप कागज के बने हैं तो जल जाएंगे और अगर लोहे के बने हैं तो तपकर और मजबूत निकलेंगे। अब फैसला आपका है कि आपको राख बनना है या फौलाद। अपनी मुश्किलों को अपना टीचर बनाइये और हर चोट पर एक नया लेसन सीखिए। उठिए अपने पसीने को पोंछिए और दुनिया को दिखा दीजिये कि जब खेल सबसे मुश्किल होता है तभी आप सबसे अच्छा खेलते हैं।


दोस्तो, लाइफ में मुश्किलें बिना अपॉइंटमेंट के आती हैं। अब यह आप पर है कि आप उनका स्वागत आंसू बहाकर करते हैं या एक्शन लेकर। अगर आपने आज इस आर्टिकल से कुछ सीखा है तो नीचे कमेंट में I AM RESPONSIBLE जरूर लिखें। इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो प्रेशर में जल्दी टूट जाता है। याद रखिये आपकी एक शेयरिंग किसी की डूबती नैया बचा सकती है।

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