Contagious (Hindi)


आप दिन रात गधों की तरह कंटेंट बना रहे हैं पर व्यूज वही दो टके के आ रहे हैं। सच तो यह है कि आपका कंटेंट कचरा नहीं है बस आपको वह सीक्रेट पता ही नहीं है जो किसी भी चीज को रातों रात वायरल बना देता है। अपनी किस्मत को कोसना बंद कीजिए और यह पढ़िए।

क्या आप भी अपनी मार्केटिंग और आइडियाज को फेल होते देख थक चुके हैं। इस आर्टिकल में हम जोनाह बर्जर की किताब कंटेजियस से वह तीन जादुई लेसन सीखेंगे जो आपके ब्रांड को हर किसी की जुबान पर ला देंगे।


लेसन १ : सोशल करेंसी का जादू

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग हमेशा उस नई और कूल जगह के बारे में सबसे पहले क्यों जानते हैं जहाँ अभी तक भीड़ भी नहीं पहुँची होती। या फिर वह दोस्त जो हमेशा ऐसी खबरें लाता है कि सब दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। असल में वह कोई जासूस नहीं हैं बल्कि वह सोशल करेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। जोनाह बर्जर कहते हैं कि हम जो शेयर करते हैं वह यह बताता है कि हम कौन हैं। अगर मैं आपको किसी ऐसी सीक्रेट पार्टी के बारे में बताऊं जिसका रास्ता सिर्फ एक टेलीफोन बूथ के अंदर से जाता है तो मैं कूल लगूंगा और आप भी उसे दूसरों को बताकर स्मार्ट बनना चाहेंगे। यही सोशल करेंसी का असली खेल है।

सोचिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और वहां आपको पता चलता है कि मेन्यू कार्ड के पीछे एक गुप्त डिश लिखी है जो सिर्फ खास लोगों को मिलती है। अब आपके पेट में चूहे सिर्फ भूख से नहीं बल्कि इसे बताने की तड़प से दौड़ेंगे। आप तुरंत उसका फोटो खींचकर इंस्टाग्राम पर डालेंगे क्योंकि यह आपको एक इनसाइडर फील देता है। हम सब अपनी इमेज को लेकर इतने ज्यादा फिक्रमंद हैं कि हम वही चीजें शेयर करते हैं जो हमें दूसरों की नजरों में अमीर स्मार्ट या कूल दिखाती हैं। अगर आपका प्रोडक्ट या सर्विस लोगों को दूसरों के सामने हीरो नहीं बना रही है तो भूल जाइए कि कोई उसे शेयर भी करेगा।

भारत में तो यह और भी खतरनाक लेवल पर काम करता है। हमारे यहाँ शर्मा जी का बेटा इसलिए मशहूर नहीं है कि वह पढ़ता बहुत है बल्कि इसलिए है क्योंकि शर्मा जी ने उसकी सफलता को अपनी सोशल करेंसी बना लिया है। लोग गॉसिप भी इसलिए करते हैं क्योंकि नई जानकारी होना आपको ग्रुप में पावरफुल बनाता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका आईडिया जंगल की आग की तरह फैले तो आपको उसे एक राज की तरह पेश करना होगा। लोगों को ऐसा महसूस कराइए कि आपके पास जो जानकारी है वह हर किसी के पास नहीं है।

जब आप किसी को खास महसूस कराते हैं तो वह मुफ्त में आपका ब्रांड एंबेसडर बन जाता है। वह चिल्ला चिल्ला कर दुनिया को आपके बारे में बताएगा सिर्फ इसलिए नहीं कि वह आपका भला चाहता है बल्कि इसलिए क्योंकि आपको जानने से उसकी अपनी वैल्यू बढ़ती है। इसे हम इनर रिमार्कबिलिटी कहते हैं। यानी कुछ ऐसा जो इतना अलग हो कि लोग उस पर बात करने को मजबूर हो जाएं। बिना किसी खर्चे के वायरल होने का इससे बड़ा तरीका और कोई नहीं हो सकता। अपनी चीजों में वह सीक्रेट फैक्टर जोड़िए और देखिए कैसे दुनिया आपकी दीवानी होती है।


लेसन २ : ट्रिगर्स जो दिमाग की घंटी बजा दें

सोशल करेंसी ने आपको कूल तो बना दिया पर अगर लोग आपको भूल गए तो सब बेकार है। जोनाह बर्जर कहते हैं कि टॉप ऑफ माइंड मतलब टिप ऑफ टंग। यानी जो दिमाग में ऊपर है वही जुबान पर आएगा। यहाँ काम आते हैं ट्रिगर्स। ट्रिगर्स वह छोटी छोटी चीजें हैं जो हमारे आस पास के माहौल में होती हैं और हमें किसी खास प्रोडक्ट की याद दिला देती हैं। जैसे ही आप समोसा देखते हैं आपके दिमाग में तुरंत चटनी या कोल्ड ड्रिंक का ख्याल आता है। समोसा यहाँ एक ट्रिगर है। अगर आपका ब्रांड किसी ऐसी चीज से जुड़ा है जो इंसान रोज देखता है तो आपकी मार्केटिंग अपने आप होती रहेगी।

अमेरिका में एक चॉकलेट कंपनी ने अपनी सेल बढ़ाने के लिए उसे कॉफी के साथ जोड़ दिया। अब जितनी बार लोग कॉफी पीते उन्हें उस चॉकलेट की याद आती। कॉफी एक बहुत ही मजबूत ट्रिगर बन गया क्योंकि लोग इसे दिन में कई बार पीते हैं। अब जरा अपने बारे में सोचिए। आप साल में एक बार आने वाले किसी बड़े त्यौहार जैसा बनना चाहते हैं या रोज सुबह मिलने वाले दूध वाले जैसा। जो चीज रोज दिखती है या महसूस होती है वही असल में वायरल होती है। अगर आपका आईडिया सिर्फ हफ्ते में एक बार याद आता है तो आप गेम से बाहर हैं।

भारत में तो ट्रिगर्स की खान है। जैसे ही बारिश शुरू होती है मम्मी के दिमाग में पकोड़ों का ट्रिगर दब जाता है। जैसे ही शुक्रवार आता है ऑफिस वालों के दिमाग में पार्टी का ट्रिगर बजने लगता है। आपको भी अपने ब्रांड या आईडिया को किसी ऐसी आदत के साथ चिपकाना होगा जो लोग पहले से ही कर रहे हैं। बिना ट्रिगर के सोशल करेंसी वैसी ही है जैसे बिना पेट्रोल की फरारी। देखने में तो बहुत अच्छी है पर कहीं जाएगी नहीं। लोग आपके बारे में बात करना शुरू तो कर देंगे पर उसे जारी रखने के लिए उन्हें माहौल से कोई इशारा चाहिए।

ज़्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि वह बहुत ही अजीब या दुर्लभ चीजों से जुड़ने की कोशिश करते हैं। पर सच तो यह है कि बोरिंग लेकिन बार बार होने वाली चीजें ज्यादा असरदार होती हैं। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी बात को भूलें नहीं तो उसे किसी ऐसी घटना से जोड़िए जो उनके जीवन में बार बार होती हो। जब तक लोगों के दिमाग में आपके नाम की घंटी बार बार नहीं बजेगी तब तक आप उनके दिल में जगह नहीं बना पाएंगे। ट्रिगर्स का असली पावर यही है कि यह लोगों को बिना याद दिलाए याद दिला देता है।


लेसन ३ : इमोशंस और प्रैक्टिकल वैल्यू का असली खेल

क्या आपने कभी सोचा है कि आप उन फालतू वीडियो को शेयर क्यों करते हैं जिनमें कोई छोटा बच्चा गिर जाता है या कोई कुत्ता अजीब हरकतें करता है। असल में जब हम किसी चीज को लेकर बहुत ज्यादा एक्साइटेड या गुस्सा महसूस करते हैं तो हमारा दिमाग हमें उसे शेयर करने के लिए मजबूर कर देता है। जोनाह बर्जर कहते हैं कि जब इमोशंस हाई होते हैं तो शेयरिंग भी हाई होती है। लेकिन यहाँ एक ट्विस्ट है। सिर्फ रोना धोना काम नहीं आता। आपको वह भावनाएं जगानी होंगी जो इंसान को सोफे से उठकर कुछ करने पर मजबूर कर दें। जैसे बहुत ज्यादा खुशी या फिर बहुत ज्यादा गुस्सा।

अगर मैं आपको बताऊं कि एक नया फोन आया है तो शायद आप ध्यान न दें। पर अगर मैं आपको यह दिखाऊं कि उस फोन को दस मंजिला इमारत से फेंकने पर भी एक खरोंच तक नहीं आई तो आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएंगी। यहाँ मैंने आपके अंदर आश्चर्य यानी अमेजमेंट का इमोशन जगाया है। और जैसे ही आप हैरान होते हैं आपका हाथ सीधा शेयर बटन की तरफ जाता है। लोग बोरिंग चीजें कभी शेयर नहीं करते। अगर आपका कंटेंट किसी के दिल की धड़कन तेज नहीं कर रहा है तो समझ लीजिए कि आप बस डिजिटल कचरा पैदा कर रहे हैं।

लेकिन सिर्फ भावनाओं से काम नहीं चलता। लोग थोड़े लालची भी होते हैं। यहाँ आती है प्रैक्टिकल वैल्यू। हम ऐसी चीजें शेयर करना पसंद करते हैं जिनसे दूसरों का फायदा हो या उनका समय और पैसा बचे। जैसे वह घरेलू नुस्खे वाली वीडियो जो आपकी चाची आपको रोज सुबह व्हाट्सएप पर भेजती हैं। उन्हें लगता है कि वह आपकी मदद कर रही हैं। अगर आप लोगों को कोई ऐसी जानकारी देते हैं जो उनकी लाइफ की कोई बड़ी प्रॉब्लम सॉल्व कर दे तो वह उसे खुद भी पढ़ेंगे और दस और लोगों को भी भेजेंगे। यह उनके लिए एक मदद करने का जरिया बन जाता है।

तो गेम प्लान बहुत सिंपल है। पहले उनके इमोशंस को पकड़िए और फिर उन्हें कुछ ऐसा दीजिए जो उनके काम आए। इसे पिलर की तरह इस्तेमाल कीजिए जिस पर आपकी कहानी टिकी हो। जब आप किसी को हंसाते हैं या कुछ नया सिखाते हैं तो आप उनके साथ एक रिश्ता बना लेते हैं। यही वह धागा है जो एक अनजान पाठक को आपका पक्का फैन बना देता है। अपनी बात को इस तरह पेश कीजिए कि पढ़ने वाले को लगे कि अगर उसने यह किसी और को नहीं बताया तो वह दुनिया का सबसे बड़ा अपराधी बन जाएगा।


याद रखिए कि कोई भी चीज इत्तेफाक से वायरल नहीं होती। इसके पीछे एक गहरा विज्ञान और इंसानी दिमाग की समझ होती है। अगर आप अपने काम में सोशल करेंसी ट्रिगर्स और सही इमोशंस का तड़का लगाना सीख गए तो आपको दुनिया की कोई ताकत सफल होने से नहीं रोक सकती। अब बस बहुत हुआ दूसरों को वायरल होते देखना। उठिए और अपने अगले आईडिया में इन लेसन का इस्तेमाल कीजिए। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो सालों से मेहनत तो कर रहा है पर उसे रिजल्ट नहीं मिल रहे। चलिए साथ मिलकर ग्रो करते हैं।

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