आप अभी भी पुराने ढर्रे पर बिजनेस चला रहे हैं और सोचते हैं कि आप कोका कोला बन जाएंगे। क्या जोक है। बिना डिजाइन सिस्टम के आप सिर्फ अपनी मेहनत और पैसा बर्बाद कर रहे हैं। मार्केट बदल गया है और आप अभी भी वही घिसी पिटी ग्रोथ स्ट्रेटेजी चिपका रहे हैं।
आज हम दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड कोका कोला के उन सीक्रेट्स को समझेंगे जो आपकी सोच बदल देंगे। डेविड बटलर की बुक डिजाइन टू ग्रो से हम वो 3 लेसन सीखेंगे जो आपके काम को स्केल करने और तेजी लाने में मदद करेंगे।
लेसन १ : डिजाइन का असली मतलब सजावट नहीं बल्कि एक पावरफुल सिस्टम है
ज्यादातर लोग जब डिजाइन शब्द सुनते हैं तो उनके दिमाग में सुंदर कलर्स और फैंसी लोगो आते हैं। अगर आप भी यही सोचते हैं तो यकीन मानिए आप बिजनेस की रेस में अभी पैदल चल रहे हैं। कोका कोला जैसी बड़ी कंपनी के लिए डिजाइन का मतलब सिर्फ एक बोतल का शेप नहीं है बल्कि एक ऐसा सिस्टम है जो पूरी दुनिया में एक जैसा काम करता है। इसे ऐसे समझिए कि अगर आप किसी शादी में बहुत अच्छे कपड़े पहनकर जाएं लेकिन आपको पता ही न हो कि खाना कहाँ मिलेगा या स्टेज कहाँ है तो आपकी वो शेरवानी किसी काम की नहीं है। ठीक वैसे ही अगर आपका बिजनेस बाहर से चमक रहा है लेकिन अंदर का सिस्टम खराब है तो आप फेल होने की तैयारी कर रहे हैं।
डेविड बटलर कहते हैं कि डिजाइन दरअसल एक समस्या को हल करने का जरिया है। मान लीजिए आपने एक चाय की दुकान खोली और वह बहुत चलने लगी। अब आप उसकी दस ब्रांच खोलना चाहते हैं। लेकिन असली चैलेंज यह है कि हर दुकान पर चाय का स्वाद एक जैसा कैसे रहे। अगर एक जगह चाय कड़क है और दूसरी जगह पानी जैसी तो लोग आपको गाली देकर ही जाएंगे। कोका कोला ने यही सीखा कि उन्हें एक ऐसा स्टैंडर्ड डिजाइन करना होगा जो हर देश और हर शहर में फिट बैठे। उन्होंने अपनी बोतल से लेकर अपने डिस्ट्रीब्यूशन तक हर चीज को एक सिस्टम में बांध दिया है।
यहाँ लेसन यह है कि आपको अपनी प्रोसेस को डिजाइन करना होगा। अगर आप हर दिन यह सोचकर ऑफिस जाते हैं कि आज क्या करना है तो आप बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि सिर्फ आग बुझा रहे हैं। कोका कोला ने अपने लोगो को इतना सिंपल रखा कि उसे दुनिया के किसी भी कोने में कोई भी पहचान ले। यह सादगी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। लोग अक्सर चीजों को बहुत ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड बना देते हैं ताकि वो स्मार्ट लग सकें। लेकिन असली स्मार्टनेस चीजों को इतना आसान बनाने में है कि उसे एक बच्चा भी समझ सके।
अगर आप अपने काम को स्केल करना चाहते हैं तो आपको अपने ईगो को साइड में रखकर एक ऐसा सिस्टम बनाना होगा जो आपके बिना भी चल सके। अगर आपके रहने या न रहने से काम पर फर्क पड़ता है तो आपने कोई डिजाइन नहीं बनाया बल्कि आपने खुद को एक जाल में फंसा लिया है। कोका कोला का डिजाइन सिस्टम इतना मजबूत है कि उनका मैनेजर बदल जाए या पूरी टीम बदल जाए ब्रांड की वैल्यू कम नहीं होती।
हम अक्सर सोचते हैं कि बड़ा ब्रांड बनने के लिए बहुत सारे फीचर्स चाहिए। लेकिन सच तो यह है कि आपको सिर्फ एक ऐसा सिस्टम चाहिए जो कभी फेल न हो। अपनी कंपनी के छोटे से छोटे काम को एक फिक्स्ड पैटर्न में डालिए। जब चीजें प्रेडिक्टेबल होती हैं तभी वो ग्रो करती हैं। अगर आपकी हर डिलीवरी एक नया सरप्राइज है तो यकीन मानिए आपके कस्टमर को ऐसे सरप्राइज बिल्कुल पसंद नहीं आएंगे। डिजाइन को अपनी सुदंरता की नुमाइश मत बनाइए इसे अपनी ग्रोथ का इंजन बनाइए।
लेसन २ : स्केल और एजिलिटी के बीच का परफेक्ट बैलेंस ही असली खेल है
अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर कंपनी कोका कोला जितनी बड़ी हो गई तो वह एक भारी भरकम हाथी की तरह हो जाती है जो हिल भी नहीं सकता। वहीं छोटे स्टार्टअप्स को लगता है कि वे चीते की तरह फुर्तीले हैं इसलिए वे दुनिया जीत लेंगे। लेकिन हकीकत यह है कि हाथी को चीते जैसी फुर्ती चाहिए और चीते को हाथी जैसी ताकत। कोका कोला ने यही सिखाया है कि बड़े साइज यानी स्केल का फायदा उठाओ लेकिन मार्केट की डिमांड के हिसाब से मुड़ने की हिम्मत यानी एजिलिटी भी रखो। अगर आप सिर्फ बड़े बन गए और बदलना भूल गए तो आप नोकिया की तरह इतिहास बन जाएंगे जिसे लोग अब सिर्फ यादों में रखते हैं।
मान लीजिए एक बहुत बड़ा जॉइंट फॅमिली वाला घर है जहाँ 50 लोग रहते हैं। अब अगर संडे को सबको बाहर खाना खाने जाना है और कोई यह तय नहीं कर पा रहा कि पिज्जा खाना है या दाल मखनी तो शाम तक सब घर पर ही भूखे बैठे रहेंगे। यहाँ 'स्केल' तो है पर 'एजिलिटी' जीरो है। दूसरी तरफ एक अकेला लड़का है जो तुरंत डिसाइड करता है और निकल जाता है लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह अच्छे रेस्टोरेंट में जा सके। यहाँ 'एजिलिटी' तो है पर 'स्केल' नहीं है। कोका कोला ने ऐसी सेटिंग की है कि उनके पास 50 लोगों का बजट भी है और वे 2 मिनट में यह फैसला भी ले लेते हैं कि कहाँ जाना है।
बिजनेस में स्केल का मतलब है कि आपके पास रिसोर्स हैं, पैसा है और एक बड़ा नाम है। लेकिन यही स्केल अक्सर आपकी गर्दन की हड्डी बन जाता है क्योंकि आप नए आइडियाज पर काम करने से डरते हैं। कोका कोला ने अपनी सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग को इतना मजबूत बनाया कि वे दुनिया के हर कोने में पहुँच गए। लेकिन जब उन्होंने देखा कि लोग अब कम चीनी वाली ड्रिंक्स मांग रहे हैं तो उन्होंने तुरंत अपनी स्ट्रैटेजी बदली और डाइट कोक या जीरो शुगर जैसे ऑप्शंस पेश किए। उन्होंने अपने भारी शरीर को जकड़ने नहीं दिया बल्कि उसे लचीला बनाए रखा।
ज्यादातर बिजनेसमैन एक बार सक्सेस मिलने के बाद आलसी हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि जो कल काम किया था वही आज भी करेगा। यह वैसी ही बात है जैसे आप आज भी वही बचपन वाली हाफ पैंट पहनकर ऑफिस जाने की जिद करें क्योंकि वह आपको कभी बहुत पसंद थी। भाई साहब आपका साइज बदल गया है और दुनिया का फैशन भी। अपनी कंपनी की जड़ों को मजबूत रखिए लेकिन अपनी टहनियों को हवा के हिसाब से हिलने दीजिए। अगर आप बहुत ज्यादा सख्त हो गए तो पहली तेज हवा में ही टूट जाएंगे।
स्केल आपको स्टेबिलिटी देता है और एजिलिटी आपको सर्वाइवल देती है। अगर आप छोटे हैं तो इस बात का रोना मत रोइए कि आपके पास फंड्स नहीं हैं बल्कि इस बात का फायदा उठाइए कि आप कोका कोला से ज्यादा जल्दी फैसले ले सकते हैं। और अगर आप बड़े हो चुके हैं तो अपनी मीटिंग्स को इतना लंबा मत खींचिए कि फैसला आने तक मार्केट ही गायब हो जाए। कोका कोला ने अपनी ब्रांड वैल्यू का इस्तेमाल करके नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए और अपनी पुरानी इमेज को बोझ नहीं बनने दिया। असली ग्रोथ वही है जहाँ आप अपनी ताकत का इस्तेमाल अपनी कमजोरी छुपाने के लिए नहीं बल्कि नई ऊंचाइयां छूने के लिए करें।
लेसन ३ : मॉडुलर सिस्टम अपनाएं ताकि आप कहीं भी फिट हो सकें
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। एक वो जो अपनी पूरी लाइफ की प्लानिंग एक पत्थर की लकीर की तरह करते हैं और जरा सा बदलाव होने पर बिखर जाते हैं। दूसरे वो होते हैं जो लेगो ब्लॉक्स (Lego Blocks) की तरह होते हैं, जिन्हें आप कैसे भी जोड़ें वो एक नई और शानदार चीज बना लेते हैं। कोका कोला ने अपनी ग्लोबल सक्सेस के लिए इसी मॉडुलर सिस्टम का सहारा लिया है। उनका मानना है कि अगर आपका बिजनेस मॉडल बहुत ज्यादा फिक्स्ड है तो आप एक ही जगह फंसे रह जाएंगे। लेकिन अगर वह मॉडुलर है तो आप उसे किसी भी शहर या देश की जरूरत के हिसाब से ढाल सकते हैं।
मान लीजिए आप एक रेस्टोरेंट खोलते हैं जहाँ सिर्फ और सिर्फ 'मसाला डोसा' मिलता है। अब आप अपनी ब्रांच अमेरिका में खोलते हैं लेकिन वहां लोगों को डोसा समझ ही नहीं आ रहा। अब अगर आपका पूरा किचन और स्टाफ सिर्फ डोसा बनाने के लिए ही डिजाइन है तो आप वहां बुरी तरह पिट जाएंगे। लेकिन अगर आपका सिस्टम मॉडुलर होता तो आप अपनी उसी मशीनरी और स्टाफ का इस्तेमाल करके वहां 'क्रेप्स' या 'पैनकेक्स' बना लेते। कोका कोला ने यही किया है। उनका कोर सिस्टम यानी उनका फॉर्मूला और ब्रांडिंग एक जैसी है लेकिन वे हर देश के लोकल टेस्ट और कल्चर के हिसाब से अपनी मार्केटिंग और पैकेजिंग को बदल देते हैं।
डेविड बटलर कहते हैं कि मॉडुलरिटी आपको बिना फेल हुए एक्सपेरिमेंट करने की आजादी देती है। अगर आप अपने पूरे बिजनेस को एक ही सांचे में ढाल देंगे तो छोटी सी गलती भी पूरे ब्रांड को डुबो सकती है। कोका कोला ने अपने डिस्ट्रीब्यूशन को इतना फ्लेक्सिबल बनाया कि जहाँ बड़ी गाड़ियां नहीं जा सकतीं वहां उन्होंने छोटी गाड़ियां और यहाँ तक कि साइकिल का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया। उन्होंने अपनी बोतल के साइज को भी मार्केट के हिसाब से छोटा बड़ा किया ताकि हर जेब वाला इंसान उसे खरीद सके। यह चालाकी नहीं बल्कि एक बेहतरीन डिजाइन थिंकिंग है।
ज्यादातर स्टार्टअप्स यहीं गलती करते हैं। वे एक ऐसा ऐप या प्रोडक्ट बनाते हैं जो उनके ऑफिस के एसी कमरे में तो बहुत अच्छा लगता है लेकिन जब वह आम जनता के बीच जाता है तो फेल हो जाता है। क्योंकि आपने जनता के हिसाब से उसमें बदलाव करने की जगह नहीं छोड़ी। आपका बिजनेस एक ऐसी शर्ट की तरह होना चाहिए जिसके बटन आप अपनी सुविधा के हिसाब से खोल या बंद कर सकें, न कि किसी ऐसी लोहे की जैकेट की तरह जिसे पहनकर सांस लेना भी मुश्किल हो जाए।
कोका कोला की यह कहानी हमें सिखाती है कि बड़ा बनना बड़ी बात नहीं है, बल्कि बड़े होकर भी जमीन से जुड़े रहना और बदलाव को अपनाना ही असली महानता है। अगर आप अपने काम में इन 3 लेसन्स को उतार लेते हैं—डिजाइन को सिस्टम बनाना, स्केल के साथ फुर्ती रखना और खुद को मॉडुलर बनाना—तो आपको कोका कोला बनने से कोई नहीं रोक सकता। तो बस अब बहाने बनाना छोड़िए और अपनी ग्रोथ को डिजाइन करना शुरू कीजिए। वरना दुनिया आगे निकल जाएगी और आप सिर्फ दूसरों की सक्सेस स्टोरी पढ़ते रह जाएंगे।
सीखना शुरू करें और एक्शन लें। आपका बिजनेस आपकी सोच का रिफ्लेक्शन है। अगर सोच बड़ी है तो सिस्टम भी बड़ा बनाइए।
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