The Creator's Code (Hindi)


क्या आप अभी भी वही घिसी पिटी ९ से ५ वाली लाइफ जी रहे हैं। जबकि दुनिया के टॉप एंटरप्रेन्योर्स आपकी आँखों के सामने करोड़ों का बिजनेस खड़ा कर रहे हैं। आप बस अपनी किस्मत को कोसते रहिये और देखिये कैसे दूसरे लोग द क्रिएटर्स कोड के सीक्रेट्स यूज़ करके आपसे कोसों आगे निकल जाते हैं। आप शायद कभी जान ही नहीं पाएंगे कि वह कौन सा जादू है जो उन्हें सुपर सक्सेसफुल बनाता है और आपको एक एवरेज लाइफ में फँसा कर रखता है।

लेकिन फिक्र मत कीजिये। आज हम एमी विल्किन्सन की रिसर्च से निकले उन ३ खास लेसन्स पर बात करेंगे जो एक साधारण इंसान को भी एक्स्ट्राऑर्डिनरी बना सकते हैं। यह स्किल्स आपकी सोच और काम करने का तरीका पूरी तरह बदल देंगे।


लेसन १ : फाइंड द गैप: अपनी आँखें खोलिये वरना अंधेरे में ही रहेंगे

आज के दौर में अगर आप सोच रहे हैं कि कोई नया आईडिया आसमान से टपकेगा तो शायद आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। द क्रिएटर्स कोड का पहला और सबसे जरूरी लेसन है फाइंड द गैप। इसका सीधा मतलब है कि आपको दुनिया को एक अलग नजरिये से देखना होगा। एमी विल्किन्सन कहती हैं कि एक्स्ट्राऑर्डिनरी एंटरप्रेन्योर्स कोई जादूगर नहीं होते। वे बस उन छोटी छोटी दिक्कतों को देख लेते हैं जिन्हें हम और आप नजरअंदाज कर देते हैं।

मान लीजिये आप रोज सुबह बस का इंतजार करते हैं और बस हमेशा लेट होती है। एक आम इंसान क्या करेगा। वह बस कंडक्टर को गाली देगा या अपनी किस्मत को कोसेगा और ऑफिस जाकर बॉस की चिक चिक सुनेगा। लेकिन एक क्रिएटर माइंडसेट वाला बंदा सोचेगा कि अगर मुझे यह दिक्कत हो रही है तो शहर के लाखों लोगों को भी हो रही होगी। वह गाली देने के बजाय एक ऐसा ऐप बनाने के बारे में सोचेगा जो बसों की लाइव लोकेशन बता सके। यही वह गैप है जिसे पहचानना आपको करोड़पति बना सकता है। पर नहीं हमें तो बस शिकायत करने में ही मजा आता है।

इंडिया में देखिये। जब लोग टैक्सी वालों के नखरों से परेशान थे तब किसी ने यह गैप देखा कि क्यों न एक बटन दबाते ही गाड़ी दरवाजे पर आ जाए। और ओला उबर खड़ी हो गई। हम लोग क्या कर रहे थे। हम तो बस मीटर से ज्यादा पैसे मांगने वाले ड्राइवर से झगड़ा कर रहे थे। अगर आप वही देख रहे हैं जो सब देख रहे हैं तो आप वही पाएंगे जो सबको मिल रहा है। यानी कुछ भी नहीं।

गैप ढूँढने का मतलब यह नहीं कि आप मंगल ग्रह पर जाने वाली रॉकेट कंपनी खोल लें। इसका मतलब है अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में झाँकना। क्या आपको अपने पड़ोस की दुकान पर ताजी सब्जियां नहीं मिलती। क्या आपके शहर में कोई ढंग की प्लंबिंग सर्विस नहीं है। यह सब खाली जगहें हैं जो सिर्फ आपका इंतजार कर रही हैं। लेकिन दिक्कत यह है कि हमारी नजरें रील देखने में इतनी बिजी हैं कि असली अपॉर्चुनिटी हमारे सामने से गुजर जाती है और हम बस ताली बजाते रह जाते हैं।

अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी इज्जत करें और आपका बैंक बैलेंस बढ़े तो अपनी आँखों पर चढ़ा हुआ आलस का चश्मा उतार फेंकिये। समस्याओं को कोसना बंद कीजिये और उन्हें एक बिजनेस की तरह देखना शुरू कीजिये। याद रखिये जहाँ गैप है वहीं पैसा है। और अगर आप यह गैप नहीं देख पा रहे हैं तो शायद आपको अपनी आँखों के चेकअप की नहीं बल्कि अपनी सोच के चेकअप की जरूरत है।

यह पहला कदम है उस सीढ़ी का जो आपको एक आम इंसान से एक क्रिएटर बनाती है। जब आप मार्केट की खाली जगह को भरते हैं तो आप कॉम्पिटिशन से बाहर हो जाते हैं क्योंकि आप वह दे रहे होते हैं जो कोई और नहीं दे रहा। अब सवाल यह है कि क्या आप अपनी अगली बड़ी अपॉर्चुनिटी को इग्नोर करेंगे या उसे पकड़कर इतिहास रचेंगे। यह फैसला आपको अभी करना होगा क्योंकि समय किसी के लिए नहीं रुकता और गैप्स भी बहुत जल्दी भर जाते हैं।


लेसन २ : फेल फास्ट टू सक्सीड फास्टर: फेल होने का शौक पालिये वर्ना सक्सेस का सपना छोड़ दीजिये

अक्सर हम इंडियंस को बचपन से ही सिखाया जाता है कि बेटा फेल मत होना वर्ना मोहल्ले वाले क्या कहेंगे। लेकिन द क्रिएटर्स कोड का यह दूसरा लेसन आपके इस डर की धज्जियां उड़ा देगा। एमी विल्किन्सन कहती हैं कि अगर आप बहुत जल्दी और बहुत बार फेल नहीं हो रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप कुछ नया ट्राई ही नहीं कर रहे हैं। एक्स्ट्राऑर्डिनरी एंटरप्रेन्योर्स हार को अंत नहीं बल्कि एक डेटा पॉइंट की तरह देखते हैं। वे अपनी गलतियों से इतनी जल्दी सीखते हैं कि सफलता को उनके पास झख मारकर आना पड़ता है।

कल्पना कीजिये आप एक नई डिश बनाना सीख रहे हैं। अब आप पहली बार में ही फाइव स्टार शेफ बनने की कोशिश करेंगे तो यकीनन रायता ही फैलाएंगे। स्मार्ट तरीका यह है कि आप छोटा सा सैंपल बनाएं और अगर नमक ज्यादा हो जाए तो उसे फेंक दें और तुरंत सुधार करें। पर नहीं हमें तो पहले ही दिन पूरी दुनिया को दावत देनी होती है। हम लोग सालों तक अपना परफेक्ट आईडिया लेकर कमरे में बैठे रहते हैं और जब उसे बाहर निकालते हैं तो पता चलता है कि मार्केट को उसकी जरूरत ही नहीं थी। बधाई हो आपने अपना पैसा और समय दोनों बर्बाद कर दिया क्योंकि आप फेल होने से डर रहे थे।

मान लीजिये आप अपनी क्रश को इम्प्रेस करने के लिए छह महीने तक जिम जाते हैं और बढ़िया कपड़े खरीदते हैं। फिर एक दिन जाकर उसे प्रोपोज करते हैं और वह कहती है कि उसे तो चश्मे वाले पढ़ाकू लड़के पसंद हैं। यहाँ आपका फेलियर छह महीने बाद आया। अगर आपने पहले दिन ही जाकर बात की होती तो आपका कीमती वक्त बच जाता। बिजनेस में भी यही होता है। बड़े बड़े स्टार्टअप्स अपने प्रोडक्ट्स के छोटे वर्जन्स यानी एमवीपी लॉन्च करते हैं ताकि वे जल्दी फेल होकर यह जान सकें कि असली प्रॉब्लम क्या है।

हकीकत तो यह है कि फेल होना कोई बुरी बात नहीं है बल्कि फेल होकर वहीं बैठे रहना असली बेवकूफी है। हमारे यहाँ लोग एक बार बिजनेस में मात खाते हैं तो ऐसे बैठ जाते हैं जैसे उनकी पूरी खानदानी जायदाद लुट गई हो। अरे भाई अगर गिरोगे नहीं तो चलना कैसे सीखोगे। जो इंसान रिस्क लेने से डरता है वह कभी भी लीडर नहीं बन सकता। वह बस दूसरों के बनाए रास्तों पर धूल फांकता रह जाता है। एमी हमें समझाती हैं कि आपको हार को गले लगाना सीखना होगा क्योंकि वही आपको जीत का सही रास्ता दिखाएगी।

जितना जल्दी आप अपनी गलतियों को सुधारेंगे उतना ही कम नुकसान होगा। नाकामयाबी आपको वह सबक सिखाती है जो कोई टॉप की यूनिवर्सिटी या करोड़ों की डिग्री नहीं सिखा सकती। लेकिन दिक्कत यह है कि हम लोग अपनी ईगो को बहुत ऊपर रखते हैं। हमें लगता है कि अगर हमने कोई आईडिया सोचा है तो वह फेल कैसे हो सकता है। यह घमंड ही आपको ले डूबता है। स्मार्ट बनिए और छोटे छोटे रिस्क लेकर देखिये कि क्या काम कर रहा है और क्या नहीं।

याद रखिये दुनिया के जितने भी बड़े ब्रांड्स आज आप देख रहे हैं उनके पीछे सैकड़ों फेलियर्स की लंबी लिस्ट है। फर्क बस इतना है कि उन्होंने उन फेलियर्स को अपना टीचर बनाया और आप उसे अपना दुश्मन मानते हैं। अगर आप अभी भी इस डर में जी रहे हैं कि लोग हँसेंगे तो यकीन मानिए आप कभी हँसने लायक कामयाबी हासिल नहीं कर पाएंगे। तो क्या आप तैयार हैं अपने अगले बड़े फेलियर से मिलने के लिए। क्योंकि वहीं से आपकी असली सक्सेस का रास्ता शुरू होता है।


लेसन ३ : नेटवर्क गिल्ड: अकेले चने फोड़ने की कोशिश छोड़िये और फौज बनाइये

अगर आपको लगता है कि आप अकेले अपने कमरे में बैठकर अगला फेसबुक या जोमैटो खड़ा कर लेंगे तो शायद आप किसी दूसरी दुनिया में जी रहे हैं। द क्रिएटर्स कोड का तीसरा सबसे बड़ा लेसन है नेटवर्क गिल्ड। एमी विल्किन्सन साफ़ कहती हैं कि आज की दुनिया इतनी कॉम्प्लेक्स हो गई है कि कोई भी एक इंसान सब कुछ नहीं कर सकता। एक्स्ट्राऑर्डिनरी एंटरप्रेन्योर्स एक ऐसा नेटवर्क बुनते हैं जहाँ अलग अलग फील्ड के धुरंधर एक साथ आकर काम करते हैं। वे जानते हैं कि अगर उन्हें हिमालय चढ़ना है तो उन्हें शेरपा भी चाहिए और गाइड भी।

मान लीजिये आपको एक बहुत बड़ी शादी ऑर्गेनाइज करनी है। अब आप खुद ही खाना भी बनाएंगे खुद ही टेंट भी लगाएंगे और खुद ही स्टेज पर नाचेंगे भी तो मेहमान आपकी तारीफ नहीं करेंगे बल्कि आप पर हँसेंगे और भूखे घर जाएंगे। स्मार्ट इंसान वह है जो बेस्ट हलवाई को पकड़ेगा बेस्ट डेकोरेटर को बुलाएगा और खुद सिर्फ सबको मैनेज करेगा। लेकिन इंडिया में हमारे साथ दिक्कत क्या है। हम सोचते हैं कि जो पैसा दूसरों को देंगे वह खुद ही बचा लेते हैं। इसी चक्कर में हम कभी छोटे बिजनेस से ऊपर उठ ही नहीं पाते और जिंदगी भर खुद ही कोल्हू का बैल बने रहते हैं।

एक क्रिएटर माइंडसेट वाला बंदा उन लोगों को अपने साथ जोड़ता है जो उससे भी ज्यादा होशियार हों। अगर आप अपनी टीम में सबसे ज्यादा स्मार्ट इंसान हैं तो यकीन मानिए आप बहुत बड़ी मुसीबत में हैं। आपको ऐसे लोगों की जरूरत है जो आपके गैप्स को भर सकें। मान लीजिये आपका आईडिया कमाल का है पर आपको कोडिंग नहीं आती तो एक ऐसे पार्टनर को ढूंढिए जो कीबोर्ड पर जादू करता हो। अगर आप सिर्फ अपने जैसे दोस्तों के साथ बैठकर समोसे खाएंगे और वही बातें करेंगे जो आप पिछले १० साल से कर रहे हैं तो आपकी ग्रोथ जीरो ही रहेगी।

नेटवर्किंग का मतलब यह नहीं है कि आप इवेंट्स में जाकर लोगों को अपना कार्ड चिपकाएं। इसका मतलब है एक ऐसा गिव एंड टेक सिस्टम बनाना जहाँ हर कोई एक दूसरे की वैल्यू बढ़ा रहा हो। इसे एक गिल्ड की तरह देखिये जैसे पुराने समय में कलाकार और कारीगर मिलकर एक कम्युनिटी बनाते थे। आज के दौर में यह डिजिटल गिल्ड है। अगर आप सिर्फ लेना जानते हैं और देना नहीं तो आपका नेटवर्क बहुत जल्दी टूट जाएगा। स्वार्थी लोगों का साथ कोई नहीं देना चाहता।

असली सक्सेस तब आती है जब आप अपने ईगो को साइड में रखकर दूसरों के टैलेंट की इज्जत करना सीखते हैं। एमी बताती हैं कि कैसे सिलिकॉन वैली के बड़े नाम एक दूसरे की मदद करते हैं चाहे वे कॉम्पिटिटर ही क्यों न हों। और हमारे यहाँ अगर पड़ोसी ने नया बिजनेस शुरू किया तो हम यह सोचने में लग जाते हैं कि इसकी टांग कैसे खींची जाए। यही वह छोटी सोच है जो हमें बड़ा बनने से रोकती है। अगर आप बड़े सपने देख रहे हैं तो आपको बड़े लोगों के साथ बैठना होगा और उनसे सीखना होगा।

याद रखिये आपकी नेट वर्थ आपके नेटवर्क पर निर्भर करती है। अकेले दौड़कर आप रेस जीत सकते हैं पर साम्राज्य नहीं खड़ा कर सकते। साम्राज्य खड़ा करने के लिए आपको वफादार और काबिल लोगों की फौज चाहिए होती है। तो अब खुद से पूछिए कि आपके पास ऐसे कितने लोग हैं जो आपको आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं और आप उनकी लाइफ में क्या वैल्यू ऐड कर रहे हैं। अगर आपके पास कोई नेटवर्क नहीं है तो आप सिर्फ एक मजदूर हैं चाहे आप खुद को सीईओ ही क्यों न कहें।


तो दोस्तों, यह थे एमी विल्किन्सन की द क्रिएटर्स कोड के वो ३ पावरफुल लेसन्स जो आपकी लाइफ बदल सकते हैं। गैप ढूंढिए जल्दी फेल होकर सीखिए और एक तगड़ा नेटवर्क बनाइये। यह सिर्फ किताबी बातें नहीं हैं बल्कि उन लोगों का निचोड़ है जिन्होंने दुनिया को बदला है।

अब आपकी बारी है। नीचे कमेंट में लिखिए कि इन ३ लेसन्स में से कौन सा लेसन आपको सबसे ज्यादा चुभा और आप कल से अपनी लाइफ में क्या बदलाव करने वाले हैं। इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो हमेशा नए बिजनेस के आइडियाज तो देता है पर कुछ करता नहीं। उठिए और अपनी दुनिया खुद बनाइये।

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