क्या आप अभी भी पुराने घिसे पिटे बिजनेस आइडियाज के भरोसे बैठे हैं। जबकि आपके पड़ोस का छोटा बच्चा भी डिजिटल टूल्स से आपसे ज्यादा पैसे छाप रहा है। अगर आप डिजिटल डिसरप्शन को इग्नोर कर रहे हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द मार्केट से गायब होने वाले हैं।
जेम्स मक्यूवी की यह किताब आपको बताएगी कि कैसे आप अपनी पुरानी सोच की वजह से एक बड़े मौके को हाथ से जाने दे रहे हैं। चलिए जानते हैं वो ३ बड़े लेसन्स जो आपकी डूबी हुई नैया को पार लगा सकते हैं।
लेसन १ : डिजिटल अडॉप्शन का असली मतलब
अगर आपको लगता है कि ऑफिस में चार नए कंप्यूटर लगा लेना या अपनी दुकान का फेसबुक पेज बना लेना ही डिजिटल क्रांति है तो भाई आप अभी भी पत्थर के जमाने में जी रहे हैं। जेम्स मक्यूवी अपनी किताब में बहुत साफ़ शब्दों में कहते हैं कि डिजिटल अडॉप्शन का मतलब सिर्फ लेटेस्ट गैजेट्स खरीदना नहीं है। असली डिजिटल डिसरप्शन तब होता है जब आप तकनीक का इस्तेमाल करके अपने कस्टमर की ऐसी समस्या को सुलझाते हैं जिसके बारे में उसने खुद भी कभी नहीं सोचा था।
आज के दौर में जो लोग सोचते हैं कि उनकी पुरानी दुकान की साख ही उन्हें बचा लेगी तो उन्हें एक बार पुराने जमाने की रेंटल डीवीडी शॉप्स के बारे में सोचना चाहिए। उन दुकानों के मालिक भी यही सोचते थे कि लोग हमारे पास चलकर आएंगे और हम उन्हें अपनी मर्जी की फिल्में देंगे। फिर नेटफ्लिक्स जैसा एक डिजिटल विलेन आया जिसने लोगों को उनके सोफे से उठने की तकलीफ भी नहीं दी। उसने क्या किया। उसने बस एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जो पहले से मौजूद थी लेकिन उसने उसे कस्टमर की सहूलियत से जोड़ दिया।
मान लीजिए आपके शहर में एक बहुत मशहूर हलवाई है जिसका समोसा पूरे इलाके में फेमस है। लेकिन अगर मुझे वह समोसा खाने के लिए अपनी गाड़ी निकालनी पड़े फिर ट्रैफिक में धक्के खाने पड़ें और फिर दुकान पर जाकर लाइन में लगना पड़े तो भाई आज के जमाने का कोई भी आलसी इंसान यह मेहनत नहीं करना चाहेगा। यहीं पर स्विगी और जोमैटो जैसे डिजिटल डिसरप्टर्स की एंट्री होती है। उन्होंने हलवाई की दुकान नहीं खोली बल्कि उन्होंने तकनीक का ऐसा पुल बनाया कि आपको आपके पलंग पर ही गरम समोसे मिल जाएं।
डिजिटल अडॉप्शन का मतलब है अपनी सर्विस को इतना आसान बना देना कि कस्टमर को आपसे जुड़ने के लिए दिमाग न लगाना पड़े। अगर आपका बिजनेस अभी भी कस्टमर से दस फॉर्म भरवा रहा है या उन्हें कॉल पर घंटों वेट करवा रहा है तो समझ लीजिए कि आप डिसरप्शन की रेस में सबसे पीछे खड़े हैं। आज का कस्टमर राजा नहीं है बल्कि आज का कस्टमर एक ऐसा बच्चा है जिसे सब कुछ तुरंत और हाथ में चाहिए। अगर आप उसे वह नहीं दे सकते तो कोई और ऐप एक क्लिक में उसे वह दे देगी।
जेम्स कहते हैं कि डिजिटल टूल्स सिर्फ खिलौने नहीं हैं बल्कि वो आपके और कस्टमर के बीच की दूरी कम करने वाली मशीनें हैं। तकनीक का असली मजा तब है जब वह बैकग्राउंड में रहे और कस्टमर को सिर्फ उसकी सुविधा महसूस हो। याद रखिए लोग आपकी मेहनत के पैसे नहीं देते बल्कि वो उस समय और मेहनत के पैसे देते हैं जो आपने उनके लिए बचाई है। अगर आप अपने बिजनेस में डिजिटल तकनीक का उपयोग सिर्फ दिखावे के लिए कर रहे हैं तो आप बस अपने पैसे बर्बाद कर रहे हैं। असली खिलाड़ी वो है जो तकनीक को इस तरह फिट करता है कि कस्टमर को पता भी न चले और उसकी आदत बदल जाए।
लेसन २ : फ्री और आसान का जादू
आज के जमाने में अगर आप किसी को अपनी सर्विस बेचना चाहते हैं और आपका प्रोसेस सरकारी दफ्तर की फाइलों जैसा पेचीदा है तो भाई आप भूल जाइए कि कोई आपके पास आएगा। जेम्स मक्यूवी इस किताब में एक बहुत ही कड़वा सच बताते हैं जिसे वो फ्री और ईजी का जादू कहते हैं। देखिए बात बहुत सिंपल है। हम उस दौर में जी रहे हैं जहाँ इंसान को अपनी बीवी का जन्मदिन याद रहे न रहे लेकिन उसे यह जरूर पता होता है कि कौन सा ऐप उसे ज्यादा डिस्काउंट दे रहा है।
डिजिटल डिसरप्शन का दूसरा सबसे बड़ा नियम यही है कि आपको अपनी सर्विस को इतना सस्ता और इतना आसान बनाना होगा कि कस्टमर को मना करने में शर्म आए। पुराने जमाने में बिजनेस का मतलब होता था कि पहले अपनी लागत निकालो और फिर मुनाफा कमाओ। लेकिन आज के डिजिटल गुरु कहते हैं कि पहले कस्टमर को अपनी लत लगाओ और उसे इतनी वैल्यू फ्री में दे दो कि वह आपके बिना रह ही न पाए। अब आप कहेंगे कि भाई अगर सब कुछ फ्री में दे दिया तो घर कैसे चलेगा। तो इसका जवाब भी इसी डिजिटल दुनिया के पास है।
याद कीजिए वो दिन जब हमें एक जीबी इंटरनेट के लिए करीब ढाई सौ रुपये देने पड़ते थे और हम उसे ऐसे इस्तेमाल करते थे जैसे वो गंगा जल हो। फिर मार्केट में जिओ की एंट्री हुई। उन्होंने क्या किया। उन्होंने पहले आपको फ्री में डेटा दिया और फिर उसे इतना सस्ता कर दिया कि आज एक रिक्शा वाला भी यूट्यूब पर कॉमेडी वीडियो देख रहा है। उन्होंने आपको सस्ते डेटा की ऐसी आदत डाली कि अब आप बिना इंटरनेट के खुद को अधूरा महसूस करते हैं। यह है डिजिटल डिसरप्शन का असली खेल। उन्होंने आपको सर्विस फ्री और आसान दी और बदले में आपका सबसे कीमती असेट ले लिया जो है आपका टाइम और अटेंशन।
आज के सफल ऐप्स जैसे व्हाट्सऐप या इंस्टाग्राम को ही देख लीजिए। आपसे एक रुपया भी नहीं लिया जाता लेकिन फिर भी आप दिन में सौ बार उसे खोलते हैं। क्यों। क्योंकि वो ईजी टू यूज हैं। अगर व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजने के लिए आपको लॉगिन करना पड़ता या कैप्चा कोड भरना पड़ता तो आप कब का उसे डिलीट कर चुके होते। डिजिटल डिसरप्शन का मतलब है बाधाओं को खत्म करना। अगर आपका कस्टमर आपके प्रोडक्ट तक पहुँचने के लिए तीन से ज्यादा क्लिक कर रहा है तो समझ लीजिए आप उसे खो रहे हैं।
जेम्स कहते हैं कि डिजिटल दुनिया में वैल्यू का मतलब बदल चुका है। अब वैल्यू का मतलब भारी भरकम फीचर्स नहीं बल्कि सादगी है। अगर आप अपने कस्टमर की लाइफ में से फ्रिक्शन यानी रगड़ को कम कर सकते हैं तो आप एक डिसरप्टर हैं। मान लीजिए आप एक फिटनेस ऐप बनाते हैं। अगर वह ऐप यूजर को रोज सुबह बस एक नोटिफिकेशन भेजती है और उसे बताती है कि आज उसे क्या खाना है तो वह सफल है। लेकिन अगर यूजर को खुद अपनी कैलोरी कैलकुलेट करनी पड़े और हर चीज मैनुअली भरनी पड़े तो वह ऐप बहुत जल्द फोन के कचरे के डिब्बे में होगी।
डिजिटल युग में लोग उन चीजों को चुनते हैं जो उनके दिमाग पर बोझ नहीं डालतीं। इसलिए अगर आप अपना बिजनेस बढ़ाना चाहते हैं तो अपने आप से एक सवाल पूछिए कि मैं अपने कस्टमर के लिए अपनी सर्विस को और कितना आसान बना सकता हूं। क्या मैं उसे कुछ ऐसा दे सकता हूं जो उसे पहली बार में फ्री लगे लेकिन लंबे समय में उसे मेरी आदत डाल दे। याद रखिए आज के दौर में सादगी ही सबसे बड़ी लग्जरी है।
लेसन ३ : डिजिटल डिसरप्टर माइंडसेट
अब तक आपने जान लिया कि तकनीक और फ्री सर्विस का क्या खेल है। लेकिन भाई असली खेल तो आपके दिमाग के अंदर छिपा है। जेम्स मक्यूवी कहते हैं कि अगर आपके पास दुनिया का सबसे महंगा सॉफ्टवेयर है लेकिन आपकी सोच अभी भी अस्सी के दशक वाली है तो आप एक फेलियर ही रहेंगे। डिजिटल डिसरप्टर बनने के लिए आपको अपनी उन पुरानी आदतों की बलि देनी होगी जो आपको सुरक्षित महसूस कराती हैं। आज की दुनिया में सुरक्षित रहने का मतलब है धीरे धीरे खत्म हो जाना।
डिजिटल डिसरप्टर माइंडसेट का मतलब है कि आपको हर उस चीज पर सवाल उठाना होगा जो अब तक सही मानी जाती थी। पुराने जमाने में कहा जाता था कि जो चल रहा है उसे मत बदलो। लेकिन आज का डिजिटल मंत्र है कि अगर कुछ सही चल रहा है तो उसे तोड़कर और बेहतर बनाओ वरना कोई और आकर उसे तहस नहस कर देगा। आपको उस इंसान की तरह नहीं बनना है जो अपनी पुरानी बैलगाड़ी पर नए टायर लगाकर उसे फेरारी समझने की गलती करता है। आपको पूरी गाड़ी ही बदलनी होगी।
हम सबके घर में वो पुराने चचा या ताऊ होते हैं जो आज भी बैंक की पासबुक अपडेट कराने के लिए कड़ी धूप में लाइन में लगना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि जब तक मशीन पर ठप्पा नहीं लगेगा तब तक उनके पैसे सुरक्षित नहीं हैं। यह एक ट्रेडिशनल माइंडसेट है। दूसरी तरफ एक डिजिटल माइंडसेट वाला लड़का अपने फोन से दो सेकंड में बैलेंस चेक करता है और अपना समय बचाता है। अब आप खुद सोचिए कि बिजनेस में कौन जीतेगा। वो जो ठप्पे के पीछे भाग रहा है या वो जिसने समय की कीमत समझ ली है।
डिजिटल डिसरप्टर बनने का मतलब है अपने कस्टमर के साथ एक गहरा रिश्ता बनाना। आपको यह नहीं सोचना है कि मैं क्या बेच सकता हूं बल्कि यह सोचना है कि मैं कस्टमर की लाइफ का हिस्सा कैसे बन सकता हूं। आज की बड़ी कंपनियां जैसे अमेज़न सिर्फ सामान नहीं बेचतीं वो आपको एक पूरा इकोसिस्टम देती हैं। प्राइम वीडियो से लेकर क्लाउड स्टोरेज तक वो आपके दिन के हर हिस्से में मौजूद हैं। यह होता है माइंडसेट का जादू। उन्होंने यह नहीं सोचा कि हम सिर्फ एक ऑनलाइन दुकान हैं बल्कि उन्होंने सोचा कि हम कस्टमर की हर जरूरत का हल हैं।
अगर आप इस डिजिटल लहर में तैरना चाहते हैं तो आपको फेलियर से डरना छोड़ना होगा। डिजिटल दुनिया में सब कुछ डेटा पर चलता है। अगर कोई आइडिया काम नहीं कर रहा तो उसे तुरंत छोड़िए और अगला ट्राई कीजिए। यहाँ वफादारी अपने आइडिया से नहीं बल्कि अपने कस्टमर की सुविधा से होनी चाहिए। अगर आप अपनी पुरानी जीत का जश्न मनाते रहेंगे तो आप कब पीछे छूट जाएंगे आपको पता भी नहीं चलेगा। याद रखिए नोकिया और कोडक जैसी कंपनियां कोई छोटी कंपनियां नहीं थीं लेकिन वो अपनी पुरानी सोच के पिंजरे से बाहर नहीं निकल पाईं और आज वो इतिहास के पन्नों में खो चुकी हैं।
तो भाई अब फैसला आपके हाथ में है। क्या आप भी उन लोगों में शामिल होना चाहते हैं जो बदलाव को देखकर डर जाते हैं या आप वो लीडर बनना चाहते हैं जो इस बदलाव की लहर पर सवार होकर अपनी किस्मत खुद लिखता है। डिजिटल डिसरप्शन कोई खतरा नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा मौका है। बस अपनी नजरें खुली रखिए और अपनी सोच को अपडेट करते रहिए।
अगर आपको आज का यह आर्टिकल पसंद आया और आप भी अपनी लाइफ में डिजिटल डिसरप्शन लाना चाहते हैं तो नीचे कमेंट में यस जरूर लिखें। इस जानकारी को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी पुरानी सोच में फंसे हैं ताकि वो भी समय रहते जाग सकें। अपनी ग्रोथ की जिम्मेदारी खुद लें और आज ही एक डिजिटल डिसरप्टर बनने का संकल्प लें।
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