क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो एक साथ दस काम करके खुद को सुपरमैन समझते हैं? मुबारक हो, आप अपनी जिंदगी बर्बाद करने की रेस में सबसे आगे हैं। बिना फोकस के गधों की तरह मेहनत करके आप सिर्फ थकान और असफलता ही बटोर रहे हैं।
आज की भागदौड़ भरी लाइफ में हम सब कुछ पाने के चक्कर में वो एक चीज खो देते हैं जो सबसे जरूरी है। गेरी केलर की यह किताब हमें सिखाती है कि कैसे सिर्फ एक सही काम पर फोकस करके आप वो एक्स्ट्राऑर्डिनरी रिजल्ट्स पा सकते हैं जो बाकी लोग सिर्फ सपने में देखते हैं। आइए इन तीन पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : डोमिनो इफेक्ट की पावर को समझना
अक्सर हमें लगता है कि लाइफ में बड़ी सक्सेस पाने के लिए हमें कोई बहुत बड़ा और पहाड़ जैसा काम एक ही दिन में करना होगा। सच तो यह है कि यह सोच ही गलत है। गेरी केलर कहते हैं कि सफलता कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप एक झटके में हासिल कर लें। यह तो एक के बाद एक सही फैसले लेने का नतीजा है। इसे समझने के लिए डोमिनो इफेक्ट का उदाहरण लेते हैं। आपने शायद सोशल मीडिया पर वो वीडियो देखे होंगे जहाँ एक छोटा सा डोमिनो का टुकड़ा गिरता है और अपने से बड़े टुकड़े को गिरा देता है। देखते ही देखते वह एक विशाल दीवार को भी नीचे गिरा देता है।
इमेजिन कीजिए कि आपकी लाइफ के गोल्स भी उन डोमिनो ब्लॉक्स की तरह हैं। अगर आप पहले दिन ही सबसे बड़े ब्लॉक यानी अपने सबसे बड़े सपने को गिराने की कोशिश करेंगे तो आप मुंह के बल गिरेंगे और शायद आपकी पीठ में ऐसा दर्द होगा कि आप जिम जाने का नाम भी नहीं लेंगे। लोग गलती यही करते हैं। वे पहले ही दिन करोड़पति बनना चाहते हैं या एक ही रात में एब्स बनाना चाहते हैं। भाई साहब यह कोई बॉलीवुड फिल्म नहीं है जहाँ एक गाने में हीरो गरीब से अमीर हो जाता है।
असल जिंदगी में आपको उस पहले छोटे डोमिनो को ढूंढना होता है। यह वो छोटा सा काम है जो इतना आसान है कि इसे करने में आपको आलस भी नहीं आएगा। लेकिन मजे की बात यह है कि जब आप उस एक छोटे काम को पूरा करते हैं तो वह अगले थोड़े बड़े काम के लिए मोमेंटम तैयार कर देता है। धीरे धीरे आपकी प्रोग्रेस की स्पीड इतनी बढ़ जाती है कि आप उन बड़े गोल्स को भी हासिल कर लेते हैं जो पहले नामुमकिन लगते थे।
मान लीजिए आप एक राइटर बनना चाहते हैं। अब अगर आप पहले दिन ही सोचेंगे कि आज मैं 500 पेज का उपन्यास लिख डालूँगा तो यकीन मानिए आप उस सफेद कागज को घूरते घूरते ही सो जाएंगे। लेकिन अगर आपका पहला डोमिनो सिर्फ रोज एक पैराग्राफ लिखना है तो यह काम बहुत आसान है। यही एक पैराग्राफ कल दो बनेंगे और एक दिन आपकी पूरी किताब तैयार होगी।
दिक्कत यह है कि हम सबको बहुत जल्दी है। हमें लगता है कि अगर हम दस काम एक साथ शुरू करेंगे तो जल्दी सफल होंगे। पर हकीकत में आप उस बंदर की तरह बन जाते हैं जो दो पेड़ों के बीच कूदते कूदते जमीन पर गिर जाता है। फोकस का मतलब यह नहीं है कि आप बहुत कुछ कर रहे हैं। फोकस का मतलब है कि आप सिर्फ वही कर रहे हैं जो उस वक्त सबसे ज्यादा जरूरी है।
जब आप अपनी एनर्जी को बिखेरना बंद कर देते हैं और उसे सिर्फ एक पॉइंट पर लगा देते हैं तो कमाल होता है। जैसे एक मैग्निफाइंग ग्लास सूरज की किरणों को एक जगह इकट्ठा करके कागज जला देता है वैसे ही आपका फोकस आपकी लाइफ की मुश्किलों को जलाकर राख कर सकता है। लेकिन अगर आप उस ग्लास को हिलाते रहेंगे तो कागज तो क्या एक मामूली तिनका भी नहीं जलेगा। इसलिए अपनी लिस्ट से फालतू के कचरे को बाहर निकालिए और उस पहले डोमिनो पर ध्यान दीजिए।
लेसन २ : मल्टीटास्किंग एक बहुत बड़ा झूठ है
आजकल की दुनिया में मल्टीटास्किंग को एक सुपरपावर की तरह दिखाया जाता है। लोग बड़े गर्व से कहते हैं कि मैं फोन पर बात करते हुए ईमेल लिख सकता हूँ और साथ में चाय भी पी सकता हूँ। भाई साहब आप इंसान हैं या कोई स्विस आर्मी नाइफ? सच तो यह है कि मल्टीटास्किंग न तो आपको स्मार्ट बनाती है और न ही प्रोडेक्टिव। यह सिर्फ आपकी एफिशिएंसी को दीमक की तरह चाट जाती है।
साइंटिफिकली देखा जाए तो हमारा दिमाग एक समय में केवल एक ही जटिल काम पर फोकस कर सकता है। जब आप सोचते हैं कि आप मल्टीटास्किंग कर रहे हैं तो असल में आप अपने दिमाग को एक काम से दूसरे काम पर बहुत तेजी से स्विच कर रहे होते हैं। और इस स्विचिंग की एक भारी कीमत चुकानी पड़ती है जिसे टास्क स्विचिंग कॉस्ट कहते हैं। हर बार जब आप काम के बीच में अपना फोन चेक करते हैं तो आपके दिमाग को वापस उसी फोकस मोड में आने के लिए कीमती समय और एनर्जी खर्च करनी पड़ती है।
इमेजिन कीजिए कि आप एक बहुत ही सीरियस डेट पर गए हैं। अब अगर आप सामने वाली की बात सुनते हुए साथ में अपने ऑफिस के ग्रुप पर मीम्स शेयर कर रहे हैं तो यकीन मानिए उस डेट का अंजाम बहुत बुरा होने वाला है। न तो आप ऑफिस का काम ठीक से कर पाएंगे और न ही आपको दूसरी डेट मिलेगी। आपका ध्यान कहीं भी पूरा नहीं होगा और आप बीच में लटके रहेंगे। यही हाल हमारे काम का होता है।
हम अक्सर सोचते हैं कि हम बहुत बिजी हैं इसलिए हम सफल हो रहे हैं। लेकिन बिजी होना और प्रोडेक्टिव होना दो अलग बातें हैं। एक मधुमक्खी भी बिजी होती है और एक मक्खी भी। लेकिन मधुमक्खी शहद बनाती है और मक्खी सिर्फ गंदगी पर बैठती है। अगर आप दिन भर में 50 छोटे छोटे काम निपटा रहे हैं जिनका आपकी लाइफ के बड़े गोल से कोई लेना देना नहीं है तो आप सिर्फ एक बिजी मक्खी हैं।
मल्टीटास्किंग का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि यह आपके काम की क्वालिटी को गिरा देता है। जब आप एक साथ कई दिशाओं में भागने की कोशिश करते हैं तो आप कहीं भी गहराई तक नहीं पहुँच पाते। आप हर चीज की सतह पर ही तैरते रहते हैं। गेरी केलर कहते हैं कि अगर आप दो खरगोशों का पीछा करेंगे तो आपके हाथ एक भी नहीं आएगा। और सच तो यह है कि शायद आप थक कर गिर जाएंगे और वो खरगोश दूर से खड़े होकर आपका मजाक उड़ाएंगे।
अपनी लाइफ को एक कंप्यूटर की तरह देखिए। जब आप उसमें एक साथ 20 टैब खोल लेते हैं तो क्या होता है? कंप्यूटर हैंग होने लगता है और पंखा शोर मचाने लगता है। आपकी लाइफ भी वैसे ही हैंग हो रही है क्योंकि आपने फालतू के टैब्स खोल रखे हैं। अपनी एनर्जी को बचाना सीखिए। जब आप किसी एक काम को पूरे दिल और दिमाग से करते हैं तो उसमें जो रिजल्ट मिलता है वो दस अधूरे कामों से कहीं बेहतर होता है।
इसलिए अगली बार जब आपको लगे कि आप एक साथ बहुत सारे काम निपटा कर बहुत महान बन रहे हैं तो रुक जाइए। खुद को याद दिलाइए कि आप कोई मशीन नहीं हैं। अपनी डेस्क से वो फोन हटाइए फालतू की नोटिफिकेशन्स बंद कीजिए और उस एक काम में डूब जाइए जो इस वक्त सबसे ज्यादा मायने रखता है। गहराई में ही मोती मिलते हैं सतह पर तो सिर्फ झाग होता है।
लेसन ३ : फोकसिंग क्वेश्चन का जादू
अब आप सोच रहे होंगे कि भाई यह सब तो ठीक है, लेकिन मुझे पता कैसे चलेगा कि वो एक काम कौन सा है? लाइफ में तो हजारों काम हैं और सब के सब जरूरी लगते हैं। यहीं पर काम आता है गेरी केलर का सबसे बड़ा हथियार जिसे वो फोकसिंग क्वेश्चन कहते हैं। यह सवाल आपकी जिंदगी का कंपास बन सकता है। सवाल यह है: वह एक काम कौन सा है जिसे करने से बाकी सब कुछ आसान या बेकार हो जाए?
यह सवाल सुनने में बहुत साधारण लगता है लेकिन इसमें गजब की पावर है। ज्यादातर लोग अपनी टू-डू लिस्ट ऐसे बनाते हैं जैसे किराने की दुकान की पर्ची हो। उसमें दूध लाने से लेकर दुनिया जीतने तक सब लिखा होता है। लेकिन फोकसिंग क्वेश्चन आपको उस लिस्ट में से कचरा साफ करने पर मजबूर करता है। यह आपको बताता है कि हर काम बराबर नहीं होता। कुछ काम ऐसे होते हैं जो आपकी लाइफ का गियर बदल देते हैं और कुछ सिर्फ टाइम पास होते हैं।
मान लीजिए आप अपनी सेहत सुधारना चाहते हैं। अब आप जिम की मेंबरशिप ले सकते हैं, नए जूते खरीद सकते हैं, डाइट चार्ट बना सकते हैं और दस यूट्यूब वीडियो देख सकते हैं। लेकिन अगर आप फोकसिंग क्वेश्चन पूछें कि वह एक काम कौन सा है जिससे बाकी सब आसान हो जाए? तो शायद जवाब होगा: सुबह 6 बजे सोकर उठना और घर से बाहर निकलना। अगर आपने सिर्फ यह एक काम कर लिया तो बाकी चीजें अपने आप लाइन पर आ जाएंगी। लेकिन अगर आप सोकर ही नहीं उठे तो आपके महंगे जूते और डाइट चार्ट सिर्फ अलमारी की शोभा बढ़ाएंगे।
हम अक्सर अपनी मेहनत को ऐसी जगह लगाते हैं जहाँ से रिटर्न बहुत कम मिलता है। इसे परेटो प्रिंसिपल या 80-20 रूल भी कहते हैं। आपके 20 परसेंट काम ही आपके 80 परसेंट रिजल्ट्स के लिए जिम्मेदार होते हैं। फोकसिंग क्वेश्चन आपको उसी 20 परसेंट के अंदर छिपे हुए उस एक परसेंट काम तक ले जाता है जो गेम चेंजर है। यह सवाल आपको एक लेजर बीम बना देता है जो लोहे को भी काट सकती है।
लेकिन दोस्त याद रखना कि इस सवाल का जवाब ढूंढना जितना आसान है उसे फॉलो करना उतना ही मुश्किल। क्योंकि जब आप उस एक काम को चुनते हैं तो आपको बाकी 99 कामों को ना कहना पड़ता है। और हम भारतीयों के लिए ना कहना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। हमें लगता है कि अगर हमने शर्मा जी के लड़के की शादी में जाना मना कर दिया या ऑफिस की उस फालतू मीटिंग को छोड़ दिया तो प्रलय आ जाएगी। यकीन मानिए कुछ नहीं होगा। दुनिया चलती रहेगी और आप अपने गोल के करीब पहुँच जाएंगे।
अपनी लाइफ को गौर से देखिए। क्या आप उन लोगों में से हैं जो दिन भर पसीना बहाते हैं लेकिन शाम को देखते हैं तो पता चलता है कि कुछ खास हासिल नहीं हुआ? अगर हाँ तो आप गलत सवाल पूछ रहे हैं। आप पूछ रहे हैं कि मैं और क्या कर सकता हूँ? जबकि आपको पूछना चाहिए कि मैं और क्या छोड़ सकता हूँ? एक्स्ट्राऑर्डिनरी रिजल्ट्स पाने का रास्ता चीजों को जोड़ने में नहीं बल्कि उन्हें घटाने में है। जब आप अपनी लाइफ से फालतू का शोर कम कर देते हैं तो आपको वो संगीत सुनाई देने लगता है जिसे आप ढूंढ रहे थे।
तो दोस्तों, क्या आप तैयार हैं अपनी लाइफ का वो पहला डोमिनो ढूंढने के लिए? आज ही अपनी टू-डू लिस्ट को डस्टबिन में डालिए और खुद से वो एक सवाल पूछिए। आपकी कामयाबी इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कितने बिजी हैं बल्कि इस बात पर करती है कि आप किस चीज में बिजी हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो हमेशा कहता है कि उसके पास टाइम नहीं है। और कमेंट में हमें बताइए कि आपकी लाइफ की वो एक चीज क्या है जिसे आप आज से शुरू करने वाले हैं। याद रखिए सफलता का रास्ता सिर्फ एक कदम से शुरू होता है पर वो कदम सही दिशा में होना चाहिए।
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