क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि सिर्फ एक कूल आइडिया से आप अगले करोड़पति बन जाएंगे? आपकी इसी नासमझी की वजह से ९० परसेंट स्टार्टअप्स कचरे के ढेर में मिलते हैं। बिना सिस्टम के बिजनेस करना अंधेरे में तीर चलाने जैसा है जो सीधे आपके बैंक बैलेंस को खत्म करेगा।
अगर आप फेल होने का रिस्क नहीं लेना चाहते तो बिल ऑलेट के ये २४ स्टेप्स आपके लिए लाइफलाइन हैं। चलिए इस आर्टिकल में उन ३ बड़े लेसन्स को समझते हैं जो आपके बिजनेस करने के नजरिए को हमेशा के लिए बदल देंगे।
लेसन १ : सही कस्टमर को पहचानना ही असली गेम है
आजकल हर दूसरा इंसान खुद को फाउंडर समझता है क्योंकि उसके पास एक आधा अधूरा आइडिया है। लोग सोचते हैं कि दुनिया का हर इंसान उनका कस्टमर है। अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द सड़क पर आने वाले हैं। बिल ऑलेट कहते हैं कि जब आप सबको खुश करने की कोशिश करते हैं तो असल में आप किसी को भी खुश नहीं कर पाते। मान लीजिए आपने एक बहुत ही फैंसी जिम खोला और आप चाहते हैं कि शहर के सारे दादा दादी और जवान लड़के एक साथ वहीं आ जाएं। अब जिम में एक तरफ लाउड म्यूजिक बज रहा है और दूसरी तरफ दादा जी अपनी कमर पकड़े शांति ढूंढ रहे हैं। नतीजा यह होगा कि न तो वो लड़के रुकेंगे और न ही वो बुजुर्ग। आपका बिजनेस एक खिचड़ी बन जाएगा जिसे कोई खाना नहीं चाहेगा।
यहीं पर काम आता है बीचहेड मार्केट का कांसेप्ट। यह शब्द आर्मी से आया है जहाँ पहले एक छोटी सी जगह पर कब्जा किया जाता है ताकि बाद में पूरे देश को जीता जा सके। स्टार्टअप में भी आपको सबसे पहले एक बहुत छोटे और स्पेसिफिक ग्रुप को पकड़ना होता है। यह वो लोग होने चाहिए जिनकी प्रॉब्लम बहुत बड़ी है और उनके पास उसका कोई सोल्यूशन नहीं है। अगर आप एक ऐसा जूता बना रहे हैं जो कभी खराब नहीं होता तो पहले सिर्फ उन लोगों को बेचिए जो पहाड़ों पर ट्रैकिंग करते हैं। पूरे शहर को बेचने की कोशिश करेंगे तो मार्केटिंग का बजट खत्म हो जाएगा और लोग आपके ब्रांड को भूल जाएंगे।
हकीकत यह है कि लोग अपनी ईगो में आकर मार्केट रिसर्च को इग्नोर करते हैं। उन्हें लगता है कि उनका प्रोडक्ट इतना महान है कि लोग खुद चलकर आएंगे। भाई आप एप्पल के स्टीव जॉब्स नहीं हैं और यह कोई फिल्म नहीं चल रही है। अगर आप अपने कस्टमर की प्रोफाइल नहीं जानते तो आप अंधेरे कमरे में काली बिल्ली ढूंढ रहे हैं जो वहां है ही नहीं। आपको पता होना चाहिए कि आपका कस्टमर सुबह उठकर क्या देखता है उसे किस बात से डर लगता है और वो पैसे खर्च करने से पहले कितनी बार सोचता है।
जब तक आप अपने पहले १० कस्टमर के नाम और उनकी पसंद नहीं जानते तब तक आप बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि सिर्फ टाइम पास कर रहे हैं। इस लेसन का सार यह है कि बड़ा बनने के लिए पहले छोटा बनना पड़ता है। अपने मार्केट को इतना छोटा कर दीजिए कि आप वहां के राजा बन जाएं। जब एक छोटी जगह पर आपकी धाक जम जाएगी तब बाकी दुनिया खुद आपके पास आएगी। याद रखिए अगर आपका फोकस हर जगह है तो आपका प्रॉफिट कहीं नहीं है।
लेसन २ : अपनी वैल्यू को समझें वरना मार्केट आपको खा जाएगा
पहला लेसन समझकर अगर आपको लग रहा है कि कस्टमर मिल गया तो जंग जीत ली, तो थोड़ा संभल जाइए। मार्केट में आपके जैसे हजार लोग पहले से दुकान सजाकर बैठे हैं। अगर आपका प्रोडक्ट दूसरों जैसा ही है, तो कस्टमर आपके पास क्यों आएगा? क्या आप उसे कोई खास डिस्काउंट दे रहे हैं या फिर आपका चेहरा बहुत प्यारा है? असलियत यह है कि बिजनेस इमोशन्स से नहीं बल्कि 'वैल्यू प्रपोजिशन' से चलता है। बिल ऑलेट कहते हैं कि आपको यह साबित करना होगा कि आपका प्रोडक्ट कस्टमर की लाइफ में क्या बड़ा बदलाव ला रहा है।
मान लीजिए आप एक ऐसी चाय की दुकान खोलते हैं जहाँ चाय के साथ आप 'शांति' बेचते हैं। शहर के शोर शराबे के बीच आपकी दुकान इकलौती ऐसी जगह है जहाँ फोन ले जाना मना है। अब यहाँ लोग सिर्फ चाय पीने नहीं आ रहे, वो उस ३० मिनट के सुकून के लिए आ रहे हैं जो उन्हें कहीं और नहीं मिल रहा। यह आपका 'यूनिक सेलिंग पॉइंट' है। अगर आप भी वही पुरानी अदरक वाली चाय प्लास्टिक के कप में देंगे जो नुक्कड़ वाला छोटू दे रहा है, तो लोग आपको भाव क्यों देंगे? लोग अक्सर अपने प्रोडक्ट के फीचर्स गिनाने लगते हैं कि इसमें यह बटन है, इसमें वो टेक्नोलॉजी है। भाई, कस्टमर को आपकी टेक्नोलॉजी से मतलब नहीं है, उसे मतलब है अपने फायदे से।
अगर आप किसी को यह नहीं बता पा रहे कि आपका प्रोडक्ट उसके दुख को कैसे कम कर रहा है, तो आपकी सेल जीरो होने वाली है। यहाँ लोग अक्सर 'कॉम्पिटिशन' देखकर डर जाते हैं। वो सोचते हैं कि बड़ी कंपनियां तो पहले से ही मार्केट पर राज कर रही हैं। लेकिन बड़ी कंपनियों की एक कमजोरी होती है, वो हर किसी के लिए एक जैसा प्रोडक्ट बनाती हैं। आप एक छोटे और खास ग्रुप के लिए कुछ ऐसा बना सकते हैं जो उनकी पर्सनल प्रॉब्लम सॉल्व करे।
सोचिए अगर आप एक जिम ट्रेनर हैं और आप कहते हैं कि मैं वजन कम करवाता हूँ, तो आप भीड़ का हिस्सा हैं। लेकिन अगर आप कहते हैं कि मैं सिर्फ उन आईटी प्रोफेशनल्स की कमर का दर्द ठीक करता हूँ जो १० घंटे कुर्सी पर बैठते हैं, तो आप एक एक्सपर्ट हैं। अब आप अपनी मर्जी की फीस मांग सकते हैं। लोग आपको पैसे आपकी मेहनत के नहीं, बल्कि उस प्रॉब्लम के सोल्यूशन के देते हैं जो और कोई नहीं दे पा रहा।
ज्यादातर स्टार्टअप्स यहीं पर दम तोड़ देते हैं क्योंकि वो 'मी टू' प्रोडक्ट्स बनाते हैं। यानी जैसा उसने किया वैसा ही मैं भी करूँगा। यह स्ट्रेटेजी सिर्फ तब काम करती है जब आपके पास अंबानी जैसा पैसा हो। अगर जेब खाली है और दिमाग चलाना है, तो कुछ ऐसा लाइए जो मार्केट में 'गैप' को भरे। बिना किसी ठोस वैल्यू के बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के गाड़ी को धक्का मारना। शुरू में तो लगेगा कि आप आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन जल्दी ही आप थककर हार मान लेंगे। इसलिए अपनी वैल्यू को इतना साफ रखिए कि कस्टमर को आपका प्रोडक्ट छोड़ना घाटे का सौदा लगे।
लेसन ३ : पैसा कहाँ है और बिजनेस कब तक टिकेगा
अब बात करते हैं उस चीज की जिसके लिए आपने यह सारा तामझाम शुरू किया है, यानी कि पैसा। बहुत से लोग स्टार्टअप को एक चैरिटी की तरह चलाने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि अगर बहुत सारे लोग उनका ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं या उनकी दुकान पर भीड़ लग रही है, तो वो कामयाब हैं। भाई, अगर जेब में मुनाफा नहीं आ रहा, तो आप बिजनेस नहीं कर रहे, आप बस एक महंगा शौक पाल रहे हैं। बिल ऑलेट अपनी किताब में 'बिजनेस मॉडल' पर बहुत जोर देते हैं। यह सिर्फ यह तय करना नहीं है कि आप कितने में बेचेंगे, बल्कि यह है कि आप पैसा 'कैसे' कमाएंगे।
मान लीजिए आपने एक शानदार कॉफी मशीन बनाई। अब आपके पास पैसे कमाने के दो तरीके हैं। पहला यह कि आप मशीन को एक ही बार में भारी मुनाफे पर बेच दें। दूसरा यह कि आप मशीन सस्ती दें लेकिन उसकी कॉफी बीन्स सिर्फ आप ही बेचें। अगर आपने दूसरा रास्ता चुना है, तो आप हर महीने कस्टमर से पैसे कमाएंगे। इसे कहते हैं सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल। अक्सर लोग जोश में आकर अपना पूरा बजट मार्केटिंग पर उड़ा देते हैं और बाद में पता चलता है कि एक कस्टमर को लाने का खर्चा उस कस्टमर से होने वाली कमाई से कहीं ज्यादा है। यह तो वही बात हुई कि आप १०० रुपये का नोट कमाने के लिए १५० रुपये का पेट्रोल जला रहे हैं।
बिजनेस की दुनिया में इसे 'यूनिट इकोनॉमिक्स' कहते हैं। अगर आपकी एक यूनिट आपको कमाकर नहीं दे रही, तो एक लाख यूनिट आपको बर्बाद कर देंगी। लोग अक्सर इन्वेस्टर के पैसों पर ऐश करने का सपना देखते हैं। उन्हें लगता है कि कोई फरिश्ता आएगा और उनकी जलती हुई नैया को बचा लेगा। असलियत यह है कि इन्वेस्टर भी उसी को पैसा देता है जिसके पास एक सॉलिड प्लान होता है कि पैसा वापस कैसे आएगा। बिना रेवेन्यू मॉडल के बिजनेस करना वैसा ही है जैसे एक ऐसी बाल्टी में पानी भरना जिसमें नीचे छेद हो। आप जितना भी पानी डाल लें, बाल्टी कभी नहीं भरेगी।
आपका बिजनेस मॉडल आपके कस्टमर की आदतों से मैच करना चाहिए। अगर आप गाँव के लोगों को कोई सर्विस बेच रहे हैं और उनसे मंथली सब्सक्रिप्शन मांग रहे हैं, तो वो आपको कभी पैसे नहीं देंगे। वहां आज भी लोग एक बार में पैसे देना पसंद करते हैं। वहीं अगर आप किसी बड़ी कंपनी को सॉफ्टवेयर बेच रहे हैं, तो वो एक साथ करोड़ों देने के बजाय थोड़ा थोड़ा पैसा हर महीने देना पसंद करेंगे। आपको यह समझना होगा कि आपके कस्टमर की जेब से पैसा निकालने का सबसे आसान और इज्जतदार तरीका क्या है।
आखिरी और सबसे जरूरी बात है कॉम्पिटिटिव एडवांटेज। कल को अगर कोई बड़ा खिलाड़ी आपके जैसा ही प्रोडक्ट आधे दाम में बेचने लगे, तो आप क्या करेंगे? क्या आपके पास कोई ऐसी चीज है जिसे कोई कॉपी नहीं कर सकता? चाहे वो आपकी टेक्नोलॉजी हो, आपका ब्रांड नेम हो या आपका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क। अगर आपके पास कोई 'दीवार' नहीं है जो आपके बिजनेस की रक्षा करे, तो कोई भी आकर आपकी मेहनत की फसल काट ले जाएगा। एक सफल एंटरप्रेन्योर वो नहीं है जो सिर्फ बिजनेस शुरू करता है, बल्कि वो है जो उसे अंत तक चलाता है और प्रॉफिट कमाता है।
दोस्तों, स्टार्टअप करना कोई जादू नहीं है, यह एक डिसिप्लिन है। अगर आप भी अपने आइडिया को एक सफल बिजनेस में बदलना चाहते हैं, तो आज ही इन २४ स्टेप्स पर काम करना शुरू करें। कमेंट में बताएं कि आपके बिजनेस का सबसे बड़ा चैलेंज क्या है और इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो हमेशा नए बिजनेस आइडियाज की बातें करते हैं।
-----
आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now
#StartupIndia #BusinessStrategy #Entrepreneurship #SuccessTips #DYBooks
_