क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो मार्केट में भेड़ चाल चल रहे हैं। बधाई हो। आप बहुत जल्द अपना बिजनेस और पैसा दोनों डुबाने वाले हैं। जब आपके पास कोई ठोस कारण ही नहीं है तो कस्टमर आपके पास क्यों आएगा। बस देखते रहिए अपना बैंक बैलेंस जीरो होते हुए।
रिचर्ड वेयलमैन की किताब द पावर ऑफ व्हाई हमें बताती है कि कैसे हम कॉम्पिटिशन की इस अंधी दौड़ से बाहर निकल सकते हैं। चलिए जानते हैं वो ३ कमाल के लेसन्स जो आपके ब्रांड को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : वॉट नहीं व्हाई पर फोकस करे
आजकल हर गली नुक्कड़ पर एक नया स्टार्टअप खुल रहा है। सबको लगता है कि बस एक अच्छा प्रोडक्ट बना लो और लोग लाइन लगा देंगे। पर सच तो यह है कि मार्केट में आपके जैसे हजार लोग वही सेम चीज बेच रहे हैं। आप क्या बेच रहे हैं यानी वॉट पर तो सबका ध्यान है। लेकिन आप वो चीज क्यों बेच रहे हैं और कस्टमर उसे आपसे ही क्यों खरीदे यह सबसे बड़ा सवाल है। ज्यादातर बिजनेसमैन बस एक मशीन की तरह काम करते हैं। वे सुबह दुकान खोलते हैं और शाम तक बस सामान की खूबियां गिनाते रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लोग आईफोन के लिए किडनी बेचने को तैयार क्यों हो जाते हैं। क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका कैमरा अच्छा है। बिल्कुल नहीं। लोग एप्पल का व्हाई खरीदते हैं। वे उस स्टेटस और उस फीलिंग को खरीदते हैं जो एप्पल उन्हें देता है।
अगर आप आज भी बस अपने प्रोडक्ट के फीचर्स गिनवा रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप एक बोरिंग इंसान हैं जिससे कोई बात नहीं करना चाहता। मान लीजिए आप एक जिम चलाते हैं। अब अगर आप मार्केटिंग में सिर्फ यह कहेंगे कि हमारे पास सबसे अच्छी मशीनें हैं तो भाई साहब मशीनें तो पड़ोस वाले जिम में भी हैं। कस्टमर को इससे घंटा फर्क नहीं पड़ता। लेकिन अगर आप अपना व्हाई क्लियर करते हैं कि आप लोगों को एक कॉन्फिडेंट लाइफस्टाइल देना चाहते हैं तो खेल बदल जाएगा। लोग जिम नहीं जॉइन करते वे उस नए वर्जन को जॉइन करते हैं जो वे बनना चाहते हैं। आपका व्हाई ही वह चुम्बक है जो सही कस्टमर्स को आपकी तरफ खींचता है।
बिना व्हाई के बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना पेट्रोल के फरारी चलाना। दिखने में तो सब बढ़िया लगता है पर गाड़ी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ती। लोग अक्सर पूछते हैं कि भाई मेरा धंधा क्यों नहीं चल रहा। अरे भाई जब तुझे खुद नहीं पता कि तू यह क्यों कर रहा है तो कस्टमर को क्या खाक पता चलेगा। मार्केट में कॉम्पिटिशन इतना ज्यादा है कि अगर आप अलग नहीं दिखे तो आप खत्म हो जाएंगे। अलग दिखने का मतलब यह नहीं है कि आप जोकर बन जाए। इसका मतलब है कि आपके पास एक ऐसी वजह होनी चाहिए जो सीधे कस्टमर के दिल पर चोट करे। जब आप व्हाई पर फोकस करते हैं तो आप सिर्फ एक दुकानदार नहीं बल्कि एक लीडर बन जाते हैं।
कॉम्पिटिशन को हराने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप उनके साथ रेस लगाना बंद कर दें। जब आपका व्हाई मजबूत होता है तो आप अपनी एक अलग कैटेगरी बना लेते हैं। फिर लोग आपसे प्राइस पर बहस नहीं करते क्योंकि उन्हें पता है कि जो वैल्यू आप दे रहे हैं वो और कहीं नहीं मिलेगी। यह लेसन हमें सिखाता है कि बिजनेस दिमाग से नहीं बल्कि उस गहरे कारण से चलता है जो आपको रात को सोने नहीं देता। अगर आपका व्हाई कमजोर है तो आपका बिजनेस बस एक मजबूरी है। और मजबूरी वाले काम में कभी तरक्की नहीं होती। इसलिए आज ही बैठिए और सोचिए कि आपके बिजनेस का असली मकसद क्या है। क्या आप सिर्फ पैसे कमाना चाहते हैं या सच में किसी की लाइफ में कोई बदलाव लाना चाहते हैं।
लेसन २ : ट्रांजैक्शन नहीं रिलेशनशिप बनाए
आज के दौर में दुकानदार और कस्टमर का रिश्ता कैसा हो गया है। बिल्कुल वैसा ही जैसा एक अनजान शहर में लिफ्ट मांगने वाले और देने वाले का होता है। काम निकला और बात खत्म। अगर आप भी इसी सोच के साथ जी रहे हैं कि एक बार सामान बेच दिया और पल्ला झाड़ लिया तो यकीन मानिए आप बिजनेस नहीं बल्कि चैरिटी कर रहे हैं। वो भी अपने कॉम्पिटिटर के लिए। क्योंकि वो दुखी कस्टमर अगली बार सीधे आपके दुश्मन की दुकान पर जाएगा और आपकी बुराई के फ्री विज्ञापन भी करेगा। मार्केट में लोग ट्रांजैक्शन यानी लेन-देन के पीछे भागते हैं। लेकिन जो खिलाड़ी होते हैं वे रिलेशनशिप यानी रिश्ते बनाने पर ध्यान देते हैं।
मान लीजिए आप एक मोबाइल की दुकान पर गए। दुकानदार ने आपको फोन चिपकाया और जैसे ही आपने पैसे दिए उसके चेहरे से मुस्कान ऐसे गायब हुई जैसे गधे के सिर से सींग। अब खुदा ना खास्ता उस फोन में कोई दिक्कत आ गई और आप वापस गए। अब दुकानदार आपको ऐसे देख रहा है जैसे आप उसकी जायदाद मांगने आ गए हों। क्या आप वहां दोबारा जाएंगे। कभी नहीं। बल्कि आप तो अपने रिश्तेदारों को भी वहां जाने से रोकेंगे। यही फर्क है एक लालची दुकानदार और एक स्मार्ट बिजनेसमैन में। स्मार्ट वाला जानता है कि एक पुराना कस्टमर बनाए रखना नए कस्टमर को ढूंढने से दस गुना सस्ता और बेहतर होता है।
रिलेशनशिप बनाने का मतलब यह नहीं है कि आप कस्टमर के घर जाकर उनके साथ चाय पिएं। इसका मतलब है कि आप उनकी परवाह करें। उन्हें यह महसूस कराएं कि वे आपके लिए सिर्फ एक नंबर या नोटों की गड्डी नहीं हैं। जब आप ट्रांजैक्शन से ऊपर उठकर सोचते हैं तो आप कस्टमर की लाइफ में वैल्यू ऐड करते हैं। लोग उन ब्रांड्स को प्यार करते हैं जो उनकी मुश्किलों को समझते हैं। अगर आपके पास कोई आता है और आप उसे उसकी जरूरत से ज्यादा महंगा सामान नहीं बल्कि सही सामान बेचते हैं तो आपने एक रिश्ता जीत लिया है। वो कस्टमर अब आपका परमानेंट सेल्समैन बन चुका है जो बिना सैलरी के आपकी तारीफ करेगा।
सच्चाई तो यह है कि लोग सामान नहीं खरीदते वे भरोसा खरीदते हैं। और भरोसा कभी भी एक बार के लेन-देन से नहीं आता। यह आता है बार-बार की अच्छी सर्विस और ईमानदारी से। अगर आप अपने कॉम्पिटिशन को धूल चटाना चाहते हैं तो अपने कस्टमर्स के साथ एक इमोशनल कनेक्शन जोड़िए। उन्हें सरप्राइज दीजिए या उनकी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखिए। जब कस्टमर को लगता है कि यह ब्रांड मेरे लिए खड़ा है तो वो आपके लिए वफादार बन जाता है। और इस वफादारी को कोई भी डिस्काउंट या ऑफर नहीं तोड़ सकता। याद रखिए कि धंधा नोटों से नहीं बल्कि उन लोगों से चलता है जो उन नोटों को खर्च करते हैं।
लेसन ३ : कस्टमर की नजर से दुनिया देखे
ज्यादातर बिजनेस मालिक अपने ऑफिस की ए सी वाली कुर्सी पर बैठकर यह सोचते हैं कि वे दुनिया के सबसे बड़े एक्सपर्ट हैं। उन्हें लगता है कि जो वे बना रहे हैं वही जनता को चाहिए। लेकिन असलियत में वे खुद की बनाई हुई काल्पनिक दुनिया में जी रहे होते हैं। अगर आप सच में कॉम्पिटिशन को उखाड़कर फेंकना चाहते हैं तो आपको अपनी कुर्सी छोड़कर कस्टमर के जूतों में पैर डालना होगा। यानी उनकी नजर से दुनिया देखनी होगी। कस्टमर को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी फैक्ट्री कितनी बड़ी है या आपने कितनी डिग्री ली है। उन्हें बस इस बात से मतलब है कि क्या आप उनकी उस खुजली को मिटा सकते हैं जो उन्हें परेशान कर रही है।
सोचिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और आपको बहुत तेज भूख लगी है। वहां का वेटर आकर आपको आधे घंटे तक यह समझाता है कि उनके शेफ ने पेरिस से पढ़ाई की है और नमक हिमालय की चोटी से आता है। क्या आप खुश होंगे। नहीं। आप उस वेटर का सिर फोड़ना चाहेंगे क्योंकि आपकी जरूरत खाना है ज्ञान नहीं। यही गलती हम अपने बिजनेस में करते हैं। हम अपनी खूबियां गाते रहते हैं जबकि कस्टमर अपनी परेशानी का हल ढूंढ रहा होता है। अगर आप कस्टमर के नजरिए से देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि उन्हें लग्जरी नहीं बल्कि सुविधा चाहिए। उन्हें वादे नहीं बल्कि रिजल्ट चाहिए।
रिचर्ड वेयलमैन कहते हैं कि जब आप कस्टमर की आंखों से अपना बिजनेस देखते हैं तो आपको अपनी सारी कमियां नजर आने लगती हैं। वह पैकिंग जो आपको बहुत कूल लग रही थी शायद कस्टमर के लिए उसे खोलना एक सिरदर्द हो। वह वेबसाइट जो आपको बहुत फैंसी लग रही थी शायद कस्टमर को उस पर पेमेंट करने में नानी याद आती हो। जब आप इन छोटी-छोटी परेशानियों को दूर करते हैं तो आप मार्केट के बेताज बादशाह बन जाते हैं। लोग आपके पास इसलिए नहीं आते कि आप सबसे सस्ते हैं बल्कि इसलिए आते हैं क्योंकि आप उन्हें सबसे ज्यादा समझते हैं। समझने की यह कला ही आपको भीड़ से अलग बनाती है।
अंत में यह याद रखिए कि मार्केट में जंग कभी भी प्रोडक्ट्स के बीच नहीं होती। यह जंग हमेशा इस बात की होती है कि कौन कस्टमर के इमोशन्स को बेहतर तरीके से पढ़ पाता है। अगर आप सिर्फ अपनी जेब भरने के बारे में सोचेंगे तो आप एक आम दुकानदार बनकर रह जाएंगे। लेकिन अगर आप कस्टमर की लाइफ को आसान बनाने का मिशन लेकर चलेंगे तो आप एक लेजेंडरी ब्रांड बनेंगे। कॉम्पिटिशन से डरना बंद कीजिए और अपने कस्टमर से प्यार करना शुरू कीजिए। क्योंकि जब आप उनका ख्याल रखते हैं तो वे आपके बिजनेस का ख्याल अपने आप रखते हैं।
मार्केट में सिर्फ जिंदा रहना काफी नहीं है बल्कि राज करना जरूरी है। आज ही अपने बिजनेस का व्हाई ढूंढिए और कस्टमर के साथ एक सच्चा रिश्ता बनाइए। अगर आपको यह लेसन्स पसंद आए तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। कमेंट में बताएं कि आपका सबसे बड़ा व्हाई क्या है। चलिए साथ मिलकर ग्रो करते हैं।
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