आपकी कंपनी बढ़ तो रही है पर आपको लग रहा है कि आप तरक्की कर रहे हैं। असल में आप बस एक डूबते हुए जहाज पर भांगड़ा पा रहे हैं। बिना सिस्टम के ग्रोथ करना मतलब बिना पैराशूट के प्लेन से कूदना है। मुबारक हो। आप खुद को सक्सेसफुल नहीं बस बिजी समझ रहे हैं।
अगर आप भी इस कन्फ्यूजन में जी रहे हैं तो लेस मैककियोन की बुक प्रिडिक्टेबल सक्सेस आपको आईना दिखाएगी। चलिए जानते हैं वो ३ पावरफुल लेसन जो आपके बिजनेस की डूबती नैया पार लगाएंगे।
लेसन १ : ग्रोथ की ७ स्टेजेस का जाल और आपकी असली पोजीशन
ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करते हैं और उन्हें लगता है कि बस काम बढ़ रहा है तो सब बढ़िया है। पर असल में आप किस स्टेज पर हैं यह जानना उतना ही जरूरी है जितना यह जानना कि आपकी गाड़ी में पेट्रोल है या नहीं। लेस मैककियोन कहते हैं कि हर ऑर्गेनाइजेशन ७ स्टेजेस से गुजरती है। पहली स्टेज है अर्ली स्ट्रगल। यहाँ आप बस जिंदा रहने की कोशिश कर रहे होते हैं। आपका पूरा ध्यान इस पर होता है कि अगले महीने का किराया कहाँ से आएगा। यहाँ आप हर वो काम करते हैं जो आपको पैसे कमा कर दे सके।
इसके बाद आती है फन स्टेज। यहाँ पैसा आने लगता है और आपको लगता है कि आप दुनिया के राजा हैं। आप और आपकी छोटी सी टीम दिन रात काम करती है और हर जीत का जश्न मनाती है। पर यहीं से असली खतरा शुरू होता है। जब आप और बड़े होने की कोशिश करते हैं तो आप पहुँच जाते हैं व्हाईट वॉटर में। यह वो स्टेज है जहाँ सब कुछ बिखरने लगता है। आपकी टीम को समझ नहीं आता कि कौन क्या कर रहा है। आपने कल जो वादा क्लाइंट से किया था वो आज पूरा नहीं हो पा रहा है क्योंकि आपके पास कोई सिस्टम नहीं है।
मान लीजिये आपने एक समोसे की दुकान खोली। शुरू में आप खुद समोसे तल रहे थे और खुद ही बेच रहे थे। यह था आपका अर्ली स्ट्रगल। फिर लोगों को आपके समोसे पसंद आने लगे और आपने दो लड़के काम पर रख लिए। अब आप गल्ले पर बैठते हैं और खूब मजे में हैं। यह है आपकी फन स्टेज। पर फिर आपने सोचा कि क्यों न पूरे शहर में ५० आउटलेट खोल दिए जाएं। अब हालत यह है कि एक दुकान पर आलू कम पड़ रहे हैं और दूसरी पर समोसे जल रहे हैं। आपको समझ ही नहीं आ रहा कि कौन सा लड़का छुट्टी पर है और कौन सा पैसे मार रहा है। यह है व्हाईट वॉटर। यहाँ आपकी हंसी गायब हो जाती है और आप बस आग बुझाने में लगे रहते हैं।
ज्यादातर इंडियन स्टार्टअप्स और छोटे बिजनेस इसी व्हाईट वॉटर में दम तोड़ देते हैं। उन्हें लगता है कि और मेहनत करने से सब ठीक हो जाएगा। पर भाई साहब मेहनत तो गधा भी करता है। यहाँ आपको मेहनत की नहीं बल्कि प्रेडिक्टेबल सक्सेस यानी सिस्टम की जरूरत है। अगर आप इस स्टेज से नहीं निकले तो आप वापस अर्ली स्ट्रगल में जा गिरेंगे या फिर आपका बिजनेस पूरी तरह ठप हो जाएगा।
इस लेसन का सबसे बड़ा टेकअवे यही है कि अपनी स्टेज को पहचानिये। अगर आप फन स्टेज में बहुत ज्यादा देर तक रुक गए तो आप आलसी हो जाएंगे। और अगर आप व्हाईट वॉटर में बिना चप्पू के नाव चला रहे हैं तो डूबना तय है। आपको यहाँ से निकलकर प्रेडिक्टेबल सक्सेस की तरफ बढ़ना होगा जहाँ ग्रोथ आपकी मर्जी से होती है न कि तुक्के से। आप जब तक यह नहीं समझेंगे कि आप कहाँ खड़े हैं तब तक आप यह तय नहीं कर पाएंगे कि जाना कहाँ है। अगली बार जब आप अपने ऑफिस में चिला रहे हों कि काम क्यों नहीं हो रहा तो समझ जाइयेगा कि आप व्हाईट वॉटर के भंवर में फंस चुके हैं।
लेसन २ : व्हाईट वॉटर का भंवर और सिस्टम की कड़वी दवा
जब आपका छोटा सा बिजनेस बड़ा होने लगता है तो आपको लगता है कि आप अंबानी बनने वाले हैं। पर असल में आप एक ऐसी स्टेज में घुस रहे होते हैं जिसे लेस मैककियोन व्हाईट वॉटर कहते हैं। यह नाम उन खतरनाक लहरों से आया है जहाँ नाव चलाना लगभग नामुमकिन होता है। यहाँ आपकी पुरानी आदतें और आपका वो 'जुगाड़' वाला माइंडसेट काम करना बंद कर देता है। कल तक आप अपने ऑफिस में सबको नाम से जानते थे और हर काम आपकी मर्जी से होता था। पर आज स्थिति यह है कि आपको पता ही नहीं कि आपके नए एम्प्लॉई का नाम क्या है और वो लंच ब्रेक में कहाँ गायब हो जाता है।
व्हाईट वॉटर तब आता है जब आपकी ग्रोथ आपके कंट्रोल से बाहर निकल जाती है। यहाँ हर दिन एक नया ड्रामा होता है। सेल्स टीम कहती है कि मार्केटिंग वाले बेकार हैं और ऑपरेशन वाले कहते हैं कि सेल्स वालों ने झूठे वादे कर दिए। आप बीच में खड़े होकर सबको शांत करने की कोशिश करते हैं। यहाँ असली समस्या यह नहीं है कि लोग खराब हैं बल्कि समस्या यह है कि आपके पास कोई प्रोसेस नहीं है। आप अभी भी उसी तरह काम करना चाहते हैं जैसे आपने पहले दिन किया था। पर भाई साहब एक छोटे बच्चे की चड्डी अब आपको फिट नहीं आएगी। आपको बड़ा साइज यानी बड़े सिस्टम अपनाने ही होंगे।
मान लीजिये आपने एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी शुरू की। शुरू में आप और आपका जिगरी दोस्त मिलकर शादियां करवाते थे। आप दूल्हे के दोस्त भी थे और टेंट वाले के भाई भी। सब कुछ बढ़िया था। फिर आपने एक साथ १० शादियों का कॉन्ट्रैक्ट ले लिया। अब दूल्हे की शेरवानी गायब है और खाने में नमक की जगह चीनी डाल दी गई है। आप फोन पर चिल्ला रहे हैं और आपका दोस्त दूसरी तरफ रो रहा है क्योंकि उसे पता ही नहीं कि वेटर कहाँ से आएंगे। यह है व्हाईट वॉटर का असली सार्केस्म। आप अमीर तो दिख रहे हैं पर अंदर से आपकी रूह कांप रही है।
यहाँ लोग अक्सर दो गलतियां करते हैं। या तो वो वापस अपनी छोटी सी फन स्टेज में भाग जाते हैं यानी काम कम कर देते हैं। या फिर वो इसी अफरातफरी में खुद को जला लेते हैं। लेस मैककियोन कहते हैं कि यहाँ आपको एडमिनिस्ट्रेटर की जरूरत होती है। वो लोग जो नियम बनाते हैं। जो लिस्ट बनाते हैं। जो आपकी फाइलों को सही जगह रखते हैं। आपको लग सकता है कि ये लोग आपकी क्रिएटिविटी को मार रहे हैं पर असल में ये आपकी कंपनी को मरने से बचा रहे हैं।
आपको समझना होगा कि बिना पॉलिसी और बिना रूल्स के आप कभी भी प्रेडिक्टेबल सक्सेस तक नहीं पहुँच सकते। अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस आपके बिना भी चले तो आपको खुद को रिप्लेस करना होगा। आपको अपनी ईगो को साइड में रखकर सिस्टम को ऊपर रखना होगा। जब तक आप हर छोटी बात में अपनी टांग अड़ाएंगे तब तक आपकी कंपनी व्हाईट वॉटर के गंदे पानी में हिचकोले खाती रहेगी। असली लीडर वो नहीं है जो हर आग को खुद बुझाए बल्कि वो है जो ऐसा फायर सिस्टम लगाए कि आग लगे ही नहीं।
लेसन ३ : प्रेडिक्टेबल सक्सेस का बैलेंस और ईगो का विसर्जन
व्हाईट वॉटर के कीचड़ से निकलने के बाद आप जिस जन्नत में कदम रखते हैं उसे लेखक प्रेडिक्टेबल सक्सेस कहते हैं। यह वो स्टेज है जहाँ आपकी कंपनी एक ऐसी मशीन बन जाती है जो बिना शोर मचाए नोट छापती है। यहाँ ग्रोथ कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची समझी प्लानिंग होती है। पर यहाँ तक पहुँचने का रास्ता बहुत कड़वा है। आपको यहाँ पहुँचने के लिए अपनी उस सबसे प्यारी चीज का गला घोंटना पड़ता है जिसे हम ईगो कहते हैं। अक्सर फाउंडर्स को लगता है कि उनके बिना पत्ता भी नहीं हिलना चाहिए। पर सच तो यह है कि जब तक आप पत्ता हिलाते रहेंगे आपकी कंपनी कभी पेड़ नहीं बन पाएगी।
प्रेडिक्टेबल सक्सेस का मतलब है क्रिएटिविटी और डिसिप्लिन के बीच का वो बैलेंस जो सुनने में तो अच्छा लगता है पर करने में पसीने छुड़ा देता है। यहाँ आपके पास ऐसे लोग होने चाहिए जो नए आइडियाज लाएं पर साथ ही ऐसे लोग भी होने चाहिए जो उन आइडियाज को एक्सेल शीट में उतार सकें। अगर सिर्फ क्रिएटिव लोग होंगे तो कंपनी हवा में उड़ेगी और गिर जाएगी। और अगर सिर्फ सिस्टम वाले लोग होंगे तो कंपनी इतनी बोरिंग हो जाएगी कि लोग उसे भूल जाएंगे। आपको इन दोनों का संगम बनाना होगा।
मान लीजिये आप एक फिल्म डायरेक्टर हैं। आपके पास बहुत बढ़िया कहानी है और आप हीरो को हवा में उड़ाना चाहते हैं। यह आपकी क्रिएटिविटी है। पर अगर आपका प्रोडक्शन मैनेजर आपसे आकर कहे कि सर बजट खत्म हो गया है और कैमरा चलाने वाला लड़का सो गया है तो आपकी फिल्म कभी पूरी नहीं होगी। प्रेडिक्टेबल सक्सेस तब आती है जब डायरेक्टर को पता हो कि उसे क्या चाहिए और मैनेजर को पता हो कि उसे कैसे मुमकिन बनाना है। अगर आप मैनेजर की बात सुनकर उसे डांट देंगे कि तुम मेरी कला नहीं समझते तो मुबारक हो आप वापस व्हाईट वॉटर में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
लेस मैककियोन हमें चेतावनी देते हैं कि प्रेडिक्टेबल सक्सेस कोई मंजिल नहीं है जहाँ पहुँच कर आप सो जाएं। यह एक पतली रस्सी पर चलने जैसा है। अगर आप बहुत ज्यादा नियम कायदे बना देंगे तो आप डेथ रैटल की तरफ बढ़ जाएंगे जहाँ कंपनी इतनी सुस्त हो जाती है कि उसे खत्म होने में भी सालों लग जाते हैं। आपको अपनी कंपनी की आत्मा को जिंदा रखना होगा पर उसके शरीर को सिस्टम का ढांचा देना होगा। आपको वो इंसान बनना होगा जो विजन तो देखता है पर अपनी टीम पर भरोसा भी करता है।
बिजनेस बढ़ाना कोई बहादुरी का काम नहीं है बल्कि उसे सही तरीके से मैनेज करना असली मर्दानगी है। अगर आपका बिजनेस आपकी गैर मौजूदगी में दम तोड़ देता है तो आप एक बिजनेस ओनर नहीं बल्कि एक बहुत महंगे मजदूर हैं। अपनी कंपनी को प्रेडिक्टेबल सक्सेस की पटरी पर लाइए ताकि आप चैन की नींद सो सकें और आपका बैंक बैलेंस जागता रहे।
तो दोस्तों, क्या आप भी अपने बिजनेस के व्हाईट वॉटर में गोते खा रहे हैं या आपने सिस्टम बनाना शुरू कर दिया है। कमेंट्स में अपनी स्टेज के बारे में जरूर बताएं और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे लगता है कि बिना सिस्टम के वो अगला एलन मस्क बन जाएगा। जागते रहिये और ग्रोथ करते रहिये।
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