Engaged (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो डिस्काउंट देकर कस्टमर को भीख की तरह बुलाते हैं? मुबारक हो, आप बहुत जल्द अपना बिजनेस बंद करने वाले हैं। जब आपका कॉम्पिटिटर आपके कस्टमर्स को छीन ले जाएगा, तब बैठ कर केवल यूट्यूब पर मोटिवेशनल वीडियो ही देखिएगा। असली गेम तो आप पहले ही हार चुके हैं।

लेकिन फिक्र मत करिए, आज हम ग्रेग लेडरमैन की बुक एंगेज्ड से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपके कॉम्पिटिशन की छुट्टी कर देंगे। चलिए देखते हैं वह 3 पावरफुल लेसन जो आपके बिजनेस को बदल देंगे।


लेसन १ : कस्टमर एक्सपीरियंस केवल सर्विस नहीं बल्कि एक यादगार एहसास है

जरा सोचिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और वहां का वेटर आपको ऐसे देखता है जैसे आपने उसकी जायदाद अपने नाम करवा ली हो। खाना टेबल पर ऐसे पटका जाता है जैसे कोई एहसान किया जा रहा हो। अब भले ही वहां का पनीर टिक्का स्वर्ग जैसा हो, क्या आप वहां दोबारा जाएंगे? कभी नहीं। ग्रेग लेडरमैन अपनी बुक एंगेज्ड में यही समझाते हैं कि आज के दौर में लोग प्रोडक्ट नहीं खरीदते, वे वह फीलिंग खरीदते हैं जो आपका बिजनेस उन्हें देता है।

ज्यादातर इंडियन बिजनेस ओनर्स को लगता है कि अच्छा माल बेच दिया तो कस्टमर तो बाप का नौकर है, वापस आएगा ही। लेकिन भाई साहब, मार्केट में आपसे सस्ते और आपसे बेहतर लोग गली के नुक्कड़ पर बैठे हैं। अगर आप केवल सर्विस बेच रहे हैं तो आप एक कोमोडिटी हैं, और कोमोडिटी की कोई इज्जत नहीं होती। असली पैसा तो एक्सपीरियंस में है। मान लीजिए आपकी एक मोबाइल की दुकान है। एक कस्टमर आता है जिसका स्क्रीन टूट गया है। आप उसे केवल नया स्क्रीन लगाकर दे सकते हैं, वह सर्विस है। लेकिन अगर आप उसे स्क्रीन के साथ एक टेम्पर्ड ग्लास फ्री दे दें और साथ में यह कहें कि अगली बार संभाल कर रखिएगा भाई साहब, तो वह एक्सपीरियंस है।

अब इसमें थोड़ा सरकाज्म जोड़ते हैं। कुछ लोग कस्टमर सर्विस के नाम पर केवल चिपचिपी मुस्कान और सर-मैम की रट लगाते हैं। उन्हें लगता है कि दांत दिखाने से कस्टमर लॉयल हो जाएगा। अरे भाई, कस्टमर को आपकी दांतों की सफेदी में कोई इंटरेस्ट नहीं है। उसे इंटरेस्ट है इस बात में कि जब उसे प्रॉब्लम आई, तब आपने उसे कैसा फील कराया। क्या आपने उसे यह महसूस कराया कि वह स्पेशल है या फिर आपने उसे सिर्फ एक चलते-फिरते बटुए की तरह देखा?

इंडिया में हम लोग इमोशनल लोग हैं। अगर किसी दुकानदार ने हमें भाई बोलकर चाय पिला दी, तो हम अगली बार पांच किलोमीटर दूर से भी उसी के पास आएंगे। ग्रेग कहते हैं कि आपको हर ट्रांजेक्शन को एक रिलेशनशिप में बदलना होगा। कॉम्पिटिशन आपको तब तक नहीं हरा सकता जब तक आपके कस्टमर के दिल में आपके लिए जगह है। लेकिन अगर आप केवल पैसों के पीछे भागेंगे, तो कस्टमर भी वहीं जाएगा जहां उसे दो रुपये सस्ता मिलेगा। याद रखिए, वफादारी खरीदी नहीं जाती, वह कमाई जाती है और उसे कमाने का रास्ता केवल और केवल एक शानदार एक्सपीरियंस से होकर गुजरता है।


लेसन २ : जब आपके एम्प्लॉई खुश होंगे तभी आपके कस्टमर्स को प्यार मिलेगा

अक्सर बिजनेस चलाने वाले लाला टाइप लोग सोचते हैं कि एम्प्लॉई को सैलरी दे दी तो बहुत बड़ा उपकार कर दिया। अब वह कोल्हू के बैल की तरह बस काम करता रहे। ग्रेग लेडरमैन कहते हैं कि अगर आपका स्टाफ अंदर से दुखी है और उसे अपनी नौकरी से नफरत है, तो वह आपके कस्टमर को कभी खुश नहीं रख सकता। आपने वह एयरलाइंस या बैंक तो देखे ही होंगे जहां काउंटर पर बैठा इंसान आपको ऐसे देखता है जैसे आप उसकी नींद खराब करने आए हों। वह चिड़चिड़ा है क्योंकि उसे अपना काम बोझ लगता है।

अब जरा देसी तड़का लगाइए। हमारे यहाँ बॉस को लगता है कि स्टाफ को डराकर रखने से काम अच्छा होता है। लेकिन हकीकत यह है कि डरा हुआ एम्प्लॉई सिर्फ उतना ही काम करता है जिससे उसकी नौकरी बची रहे। वह कभी एक्स्ट्रा एफर्ट नहीं डालेगा। अगर आपके ऑफिस का माहौल जहरीला है, तो वहां से निकलने वाली सर्विस भी जहरीली ही होगी। एक एंगेज्ड एम्प्लॉई वह है जिसे पता है कि उसका काम क्यों जरूरी है। उसे सिर्फ टास्क नहीं बल्कि पर्पस पता होना चाहिए। अगर झाड़ू लगाने वाले को यह पता है कि वह सफाई नहीं बल्कि हॉस्पिटल को इन्फेक्शन फ्री रख रहा है, तो उसके काम करने का तरीका बदल जाएगा।

कुछ महान मैनेजर्स को लगता है कि साल में एक बार दिवाली पर मिठाई का डिब्बा और कैलेंडर दे दिया तो टीम मोटिवेट हो जाएगी। भाई साहब, साल भर खून चूसकर दिवाली पर सोन पापड़ी खिलाने से एंगेजमेंट नहीं बढ़ता। एंगेजमेंट तब बढ़ता है जब आप उनके काम को रिकग्नाइज करते हैं। ग्रेग बताते हैं कि आपको अपने एम्प्लॉई के बिहेवियर को वैसे ही रिवॉर्ड देना चाहिए जैसे आप प्रॉफिट को देते हैं। अगर आपके स्टाफ का कोई बंदा कस्टमर की मदद के लिए अपनी ड्यूटी से आगे बढ़कर काम करता है, तो उसे सबके सामने शाबाशी दीजिए।

कुछ कंपनियां मिशन स्टेटमेंट तो ऐसे लिखती हैं जैसे वे कल ही दुनिया बदल देंगी, लेकिन उनके अपने ऑफिस में पानी पीने की भी सही व्यवस्था नहीं होती। अगर आप अपने एम्प्लॉई को सिर्फ एक नंबर या मशीन का पुर्जा समझेंगे, तो वे भी आपके बिजनेस को सिर्फ एक तनख्वाह का जरिया समझेंगे। जब तक आपके लोग आपके विजन से प्यार नहीं करेंगे, वे कस्टमर के साथ कभी सच्चा रिश्ता नहीं बना पाएंगे। कॉम्पिटिशन आपको तब डराता है जब आपकी अपनी टीम ही आपके साथ नहीं खड़ी होती। इसलिए पहले अपनी अंदरूनी सेना को मजबूत करिए, बाहर की जंग तो वे खुद जीत लेंगे।


लेसन ३ : कॉम्पिटिशन को हराने के लिए प्रोडक्ट नहीं बल्कि अपने व्यवहार को बदलिए

दुनिया में लाखों लोग वही बेच रहे हैं जो आप बेच रहे हैं। अगर आप शर्ट बेचते हैं, तो बगल वाली गली में भी दस लोग शर्ट ही बेच रहे हैं। अगर आप सॉफ्टवेयर बना रहे हैं, तो सिलिकॉन वैली से लेकर बेंगलुरु तक हजारों लोग वही कोडिंग कर रहे हैं। ग्रेग लेडरमैन बहुत कड़वा सच बोलते हैं कि आपका प्रोडक्ट आपको कभी भी कॉम्पिटिशन से परमानेंट जीत नहीं दिला सकता। क्योंकि कोई न कोई आएगा जो आपसे सस्ता और बेहतर वर्जन बना देगा। तो फिर आप जीतेंगे कैसे? आप जीतेंगे अपने व्यवहार यानी बिहेवियर से।

इसे ऐसे समझिए, इंडिया में हम लोग उसी डॉक्टर के पास जाना पसंद करते हैं जो हमारी बात शांति से सुनता है, भले ही उसकी फीस थोड़ी ज्यादा हो। हम उस मैकेनिक के पास जाते हैं जो हमें यह नहीं समझाता कि पूरी गाड़ी खराब है, बल्कि वह जो ईमानदारी से छोटी सी तार जोड़कर कहता है कि अब ठीक है। यह ईमानदारी और व्यवहार ही वह सीक्रेट सॉस है जिसे कोई कॉपी नहीं कर सकता। आपके कॉम्पिटिटर आपकी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी चुरा सकते हैं, आपका रेट कम कर सकते हैं, लेकिन वे वह रिश्ता नहीं चुरा सकते जो आपने अपने व्यवहार से कस्टमर के साथ बनाया है।

आजकल के स्टार्टअप फाउंडर्स को लगता है कि एक बढ़िया ऐप और करोड़ों की फंडिंग से वे मार्केट जीत लेंगे। वे अपना सारा समय डेटा और नंबर्स देखने में बिताते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि नंबर्स के पीछे इंसान बैठे हैं। सरकाज्म की हद तो तब होती है जब कंपनियां कहती हैं कि कस्टमर हमारे लिए भगवान है, लेकिन जब वही भगवान रिफंड मांगता है, तो उसे कस्टमर केयर के चक्कर लगवा-लगवा कर नास्तिक बना दिया जाता है। अगर आपका व्यवहार आपके शब्दों से मेल नहीं खाता, तो आपका ब्रांड सिर्फ एक झूठ है।

ग्रेग कहते हैं कि आउटबिहेव (Outbehave) करने का मतलब है वह करना जो दूसरे करने की जहमत नहीं उठाते। हर छोटी चीज मायने रखती है। आप फोन कैसे उठाते हैं, आप शिकायत का निपटारा कैसे करते हैं, और क्या आप तब भी मदद करते हैं जब आपको कोई मुनाफा नहीं हो रहा? यह छोटी-छोटी आदतें ही एक बड़ी दीवार खड़ी कर देती हैं जिसे कॉम्पिटिशन कभी पार नहीं कर पाता। जब आप लोगों के साथ इंसान की तरह व्यवहार करना शुरू करते हैं, तो वे आपके कस्टमर नहीं बल्कि आपके ब्रांड एम्बेसडर बन जाते हैं। और याद रखिए, एक खुश कस्टमर की दुआ और उसकी माउथ पब्लिसिटी से बड़ी कोई मार्केटिंग नहीं होती।


बिजनेस सिर्फ लेनदेन का नाम नहीं है, यह भरोसे का नाम है। अगर आप आज भी पुराने तरीकों से लोगों को सिर्फ एक सेल्स टारगेट समझ रहे हैं, तो अपनी विदाई की तैयारी कर लीजिए। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपका बिजनेस सालों-साल फले-फूले, तो आज से ही अपने व्यवहार और अपने एम्प्लॉई के साथ रिश्तों पर काम करना शुरू करें।

नीचे कमेंट्स में बताइए, आपके हिसाब से एक अच्छे बिजनेस की सबसे बड़ी खूबी क्या है? क्या आपने कभी किसी दुकान से सिर्फ इसलिए सामान लेना बंद किया क्योंकि उनका व्यवहार खराब था? अपनी कहानी शेयर करें और इस आर्टिकल को उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपना नया बिजनेस शुरू कर रहा है।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#CustomerEngagement #BusinessGrowth #LeadershipTips #IndiaBusiness #SuccessMindset


_

Post a Comment

Previous Post Next Post