आप अभी भी वही घिसी पिटी सेल्स पिच मार रहे हैं और फिर रोते हैं कि कोई सामान क्यों नहीं खरीद रहा। सच तो यह है कि आपका कस्टमर आपको इग्नोर नहीं कर रहा वह बस आपकी बोरियत से भाग रहा है। अगर आपको जेफ्री गिटोमर के यह सीक्रेट्स नहीं पता तो आप अपनी सेल्स और इज्जत दोनों गँवा रहे हैं।
आज हम जेफ्री गिटोमर की बेहतरीन किताब से वह ३ पावरफुल लेसन्स सीखेंगे जो आपकी सेल्स गेम को पूरी तरह बदल देंगे। यह बातें आपको एक एवरेज सेल्समैन से उठाकर एक टॉप लेवल का क्लोजर बना देंगी।
लेसन १ : वैल्यू देना ही असली सेलिंग है
मार्केट में हर दूसरा इंसान खुद को सेल्स का राजा समझता है। लेकिन असलियत तब पता चलती है जब कस्टमर फोन उठाना बंद कर देता है। जेफ्री गिटोमर अपनी किताब में पहला और सबसे कड़वा सच यही बताते हैं कि लोग बेचे जाने से नफरत करते हैं पर उन्हें खरीदना पसंद है। अब आप सोच रहे होंगे कि यह क्या पहेली है। असल में हम गलती यह करते हैं कि हम कस्टमर के पीछे पड़ जाते हैं जैसे कोई शादी में बिन बुलाया मेहमान। आप अपनी प्रोडक्ट की खूबियाँ गिनाते रहते हैं और कस्टमर मन ही मन सोचता है कि भाई तू कब जाएगा।
असली खेल तब शुरू होता है जब आप सामान बेचना छोड़कर वैल्यू देना शुरू करते हैं। मान लीजिए आप एक जिम के मेंबरशिप बेच रहे हैं। एक एवरेज सेल्समैन बोलेगा कि हमारे पास लेटेस्ट मशीनें हैं और एयर कंडीशनिंग बढ़िया है। लेकिन एक प्रो सेल्समैन क्या करेगा। वह सामने वाले को बताएगा कि कैसे फिट रहने से उसका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और वह अपनी अगली बिजनेस मीटिंग में सबको इम्प्रेस कर पाएगा। यहाँ आप उसे लोहे की मशीनें नहीं बेच रहे बल्कि आप उसे एक बेहतर लाइफस्टाइल बेच रहे हैं। जब आप सामने वाले की लाइफ में वैल्यू ऐड करते हैं तो वह आपको सेल्समैन नहीं अपना दोस्त समझने लगता है।
इमेजिन कीजिए आप एक लड़के हैं जो पहली बार अपनी पसंद की लड़की के घर रिश्ता लेकर गया है। अब वहाँ जाकर आप यह नहीं कहेंगे कि देखिए मेरी आँखें बहुत सुंदर हैं और मैं बहुत अच्छा खाना बनाता हूँ। अगर आप ऐसा करेंगे तो लड़की के पिता आपको सीधा गेट के बाहर छोड़कर आएंगे। वहाँ आपको यह जताना होता है कि आप उनकी बेटी का ख्याल कैसे रखेंगे। सेल्स भी बिल्कुल वैसी ही है। आपको कस्टमर को यह यकीन दिलाना है कि आपका प्रोडक्ट उसके दुखती रग का इलाज है। अगर आप उसकी प्रॉब्लम सॉल्व नहीं कर रहे तो आप सिर्फ शोर मचा रहे हैं।
ज्यादातर लोग सेल्स कॉल पर ऐसे बात करते हैं जैसे कोई रोबोट स्क्रिप्ट पढ़ रहा हो। नमस्ते सर क्या आपके पास दो मिनट हैं। भाई किसी के पास फालतू के दो मिनट नहीं होते। कस्टमर को आपकी कंपनी के टर्नओवर से कोई लेना देना नहीं है। उसे बस एक ही चीज से मतलब है कि इसमें मेरा क्या फायदा है। जेफ्री कहते हैं कि अगर आप अपनी सेल आसान बनाना चाहते हैं तो पहले सामने वाले को जीतना सीखिए। उसे यह महसूस कराइए कि आप उसकी मदद करना चाहते हैं ना कि उसकी जेब खाली करना। जब आपकी नीयत साफ होती है और आप सच में वैल्यू देते हैं तो पैसा पीछे पीछे आता है।
अपनी सेल्स पिच से वह मैं और मेरा शब्द हटा दीजिए। इसकी जगह आप और आपका इस्तेमाल कीजिए। आप देखेंगे कि कैसे लोग आपकी बात सुनने के लिए रुकने लगेंगे। यह लेसन सुनने में सिंपल है लेकिन इसे फॉलो करना उतना ही मुश्किल है क्योंकि हमारा ईगो हमेशा बीच में आ जाता है। हमें लगता है कि हमारा प्रोडक्ट दुनिया में सबसे बेस्ट है। भाई होगा बेस्ट लेकिन क्या वह कस्टमर की आज की जरूरत को पूरा कर रहा है। अगर नहीं तो आपका वह गोल्ड मेडल किसी काम का नहीं है। वैल्यू देना ही वह चाबी है जो बंद से बंद दरवाजे खोल देती है।
लेसन २ : पर्सनल ब्रांड की पावर
अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ अच्छे प्रोडक्ट से काम चल जाएगा तो आप शायद किसी और ही दुनिया में जी रहे हैं। मार्केट में आज एक ही चीज के हजार ऑप्शंस मौजूद हैं। फिर कोई आपसे ही क्यों खरीदे। यहाँ काम आता है आपका पर्सनल ब्रांड। जेफ्री गिटोमर कहते हैं कि सेल्स में प्रोडक्ट बाद में बिकता है पहले आप बिकते हैं। अगर कस्टमर को आप पसंद नहीं आए तो वह आपके ब्रांड की तरफ देखेगा भी नहीं। लोग उन लोगों से खरीदना पसंद करते हैं जिन्हें वे जानते हैं और जिन पर वे भरोसा करते हैं। अब भरोसा कोई ऐसी चीज तो है नहीं जो बाजार में किलो के भाव मिलती है। इसे कमाना पड़ता है।
आज के सोशल मीडिया के दौर में अगर आपकी कोई ऑनलाइन पहचान नहीं है तो आप एक गुमनाम सेल्समैन हैं। इमेजिन कीजिए एक तरफ एक ऐसा सेल्समैन है जिसे कोई नहीं जानता और दूसरी तरफ एक ऐसा बंदा है जिसके लिंक्डइन पर पोस्ट देखकर लोग कहते हैं कि यार इसे तो जानकारी है। आप अपनी गाड़ी ठीक कराने किसके पास जाएंगे। उस मैकेनिक के पास जो चुपचाप कोने में बैठा है या उसके पास जिसके काम के चर्चे पूरे शहर में हैं। पर्सनल ब्रांडिंग का मतलब यह नहीं है कि आप हर जगह अपनी फोटो लगाते फिरें। इसका मतलब है कि जब आपका नाम लिया जाए तो लोगों के दिमाग में ट्रस्ट और क्वालिटी की इमेज आए।
मान लीजिए आप एक मोहल्ले के सबसे मशहूर पंडित जी हैं। अब अगर मोहल्ले में किसी के घर सत्यनारायण की कथा होनी है तो लोग लाइन लगाकर आपके पास आएंगे। क्यों। क्योंकि आपने अपनी एक इमेज बनाई है कि आपसे बढ़िया मंत्र कोई नहीं पढ़ता। आपको घर घर जाकर यह नहीं कहना पड़ता कि जजमान मुझसे पूजा करवा लो। लोग खुद आपको ढूंढते हुए आते हैं। सेल्स में भी यही लेवल अचीव करना असली सक्सेस है। जब आपका नाम ही आपकी सबसे बड़ी मार्केटिंग बन जाए तो सेल्स क्लोज करना बच्चों का खेल हो जाता है।
लेकिन पर्सनल ब्रांड बनाना कोई एक दिन का काम नहीं है। इसमें आपको कंसिस्टेंट रहना पड़ता है। अगर आप आज बहुत जोश में हैं और कल गायब हो गए तो लोग आपको भूल जाएंगे। आपको अपनी फील्ड का एक्सपर्ट बनना होगा। अगर आप इंश्योरेंस बेच रहे हैं तो आपको फाइनेंस की ऐसी नॉलेज होनी चाहिए कि सामने वाला आपसे सलाह लेने के लिए तरसे। जब आप सेल्समैन की जगह एक एडवाइजर बन जाते हैं तो आपकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है। फिर आप प्राइस पर नहीं बल्कि अपनी क्वालिटी पर बात करते हैं। कस्टमर तब यह नहीं कहता कि फलां जगह तो सस्ता मिल रहा है क्योंकि उसे पता है कि जो सर्विस आप देंगे वह कोई और नहीं दे सकता।
ज्यादातर सेल्स के लोग अपनी पहचान अपनी कंपनी से जोड़ लेते हैं। मैं फलां कंपनी का मैनेजर हूँ। अरे भाई कंपनी तो कल बंद भी हो सकती है तब आपकी क्या पहचान बचेगी। अपनी खुद की एक अलग पहचान बनाइए। नेटवर्किंग कीजिए और लोगों की बिना किसी स्वार्थ के मदद कीजिए। जब आप लोगों के नेटवर्क में अपनी जगह बना लेते हैं तो रेफरल्स अपने आप आने लगते हैं। जेफ्री कहते हैं कि दुनिया का सबसे अच्छा सेल्समैन वह है जिसे कभी कॉल ही न करना पड़े क्योंकि लोग खुद उसे कॉल करते हैं। अपनी पर्सनैलिटी में वह चुंबक पैदा कीजिए कि लोग आपकी तरफ खिंचे चले आएं।
लेसन ३ : एटीट्यूड ही सब कुछ है
आपने वैल्यू दे दी और अपना ब्रांड भी चमका लिया लेकिन अगर आपका एटीट्यूड एक भीगे हुए चूहे जैसा है तो यकीन मानिए आप एक सुई भी नहीं बेच पाएंगे। जेफ्री गिटोमर कहते हैं कि सेल्स की दुनिया में आपका एटीट्यूड ही आपका असली हथियार है। यहाँ एटीट्यूड का मतलब अकड़ दिखाना नहीं है बल्कि खुद पर वह अटूट विश्वास रखना है कि हाँ मैं यह डील क्लोज कर सकता हूँ। सेल्स का काम दिल टूटने जैसा है जहाँ आपको दिन भर में दस लोग मना करते हैं। अब अगर आप हर रिजेक्शन के बाद कोने में बैठकर देवदास बन जाएंगे तो भाई साहब बिजनेस आपके बस की बात नहीं है।
सेल्स में जीत उसी की होती है जिसकी खाल गेंडे जैसी मोटी होती है। जब कोई कस्टमर आपको मना करता है तो वह आपके प्रोडक्ट को मना कर रहा है आपको नहीं। लेकिन हम इसे दिल पर पत्थर की लकीर की तरह ले लेते हैं। एक पॉजिटिव एटीट्यूड वाला सेल्समैन जानता है कि हर नो के बाद एक यस छिपा होता है। वह गिरता है धूल झाड़ता है और अगले दरवाजे पर फिर उसी मुस्कुराहट के साथ खड़ा हो जाता है। अगर आप खुद ही अपनी शक्ल पर बारह बजाकर कस्टमर के पास जाएंगे तो वह आपको सामान का ऑर्डर नहीं बल्कि सहानुभूति में एक गिलास पानी पिलाकर विदा कर देगा।
इमेजिन कीजिए आप एक छोटे बच्चे हैं जिसे अपनी मम्मी से चॉकलेट चाहिए। मम्मी ने मना किया फिर भी आप हार नहीं मानते। आप कभी रोते हैं कभी हंसते हैं कभी पैर पटकते हैं और आखिर में चॉकलेट लेकर ही मानते हैं। वह जिद वह एटीट्यूड ही सेल्स की जान है। बड़े होते होते हम इतने सभ्य बन जाते हैं कि एक बार मना सुनने पर ही शर्म के मारे पानी पानी हो जाते हैं। भाई अगर आप शर्माएंगे तो आपके हिस्से का पैसा वह ले जाएगा जो बेशर्म होकर दोबारा फॉलो अप करने की हिम्मत रखता है। सेल्स में इज्जत बाद में आती है पहले एग्रीमेंट पर साइन आते हैं।
आपका एटीट्यूड आपकी बातों से ज्यादा आपकी बॉडी लैंग्वेज से झलकता है। अगर आप कंधे झुकाकर और दबी हुई आवाज में बात करेंगे तो कस्टमर को लगेगा कि आप खुद ही अपने प्रोडक्ट पर भरोसा नहीं करते। जेफ्री का मानना है कि सेल्स एक संक्रामक बीमारी की तरह है। अगर आप पूरे जोश और यकीन के साथ बात करेंगे तो सामने वाला भी उस एनर्जी को महसूस करेगा। आपका काम सिर्फ जानकारी देना नहीं है बल्कि अपना विश्वास ट्रांसफर करना है। जब आपकी आँखों में वह चमक होती है कि यह चीज सच में कमाल की है तो कस्टमर बिना ज्यादा सवाल किए अपना चेकबुक निकाल लेता है।
सेल्स कोई सजा नहीं बल्कि एक सर्विस है। अगर आपका एटीट्यूड यह है कि आप किसी की लाइफ आसान बना रहे हैं तो आपको कभी डर नहीं लगेगा। पिछले दो लेसन्स में हमने सीखा कि कैसे वैल्यू देनी है और कैसे अपनी पहचान बनानी है। लेकिन यह तीसरा लेसन यानी आपका एटीट्यूड ही उन दोनों को जोड़कर रखता है। बिना सही माइंडसेट के आपकी सारी टेक्निक धरी की धरी रह जाएंगी। तो अपनी टाई सीधी कीजिए चेहरे पर एक दमदार स्माइल लाइए और मार्केट में ऐसे उतरिए जैसे आप वहाँ के मालिक हों। क्योंकि दुनिया उन्हीं को सलाम करती है जो अपनी शर्तों पर खेल जीतना जानते हैं।
अगर आप भी वही पुराने तरीकों से सेल्स क्लोज करने की कोशिश कर रहे हैं तो आज ही रुक जाइए। जेफ्री गिटोमर के यह लेसन्स सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं बल्कि आज से ही अपनी लाइफ में उतारने के लिए हैं। नीचे कमेंट करके बताइए कि आपको इन ३ लेसन्स में से कौन सी बात सबसे ज्यादा चुभी या पसंद आई। इस आर्टिकल को अपने उस सेल्स वाले दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो टारगेट पूरा न होने की वजह से परेशान है। याद रखिए सेल्स सिर्फ एक जॉब नहीं यह एक कला है और आप इसके कलाकार हैं।
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