क्या आप अभी भी उस पुराने बिजनेस मॉडल में फंसे हैं जहाँ सिर्फ बॉस अमीर होता है और आप कद्दू काटते हैं। बधाई हो आप अपनी जिंदगी के सबसे कीमती साल और पैसा दोनों बर्बाद कर रहे हैं। अगर आपको लगता है कि बिना सबको जिताए आप अकेले रेस जीत लेंगे तो शायद आप गलत ग्रह पर हैं।
आज हम बात करेंगे उस बुक की जिसने रियल एस्टेट की दुनिया को हिला कर रख दिया। फिल हार्किन्स और कीथ होलीहन की यह बुक हमे सिखाती है कि कैसे रीमैक्स ने एक ऐसा सिस्टम बनाया जहाँ हर कोई जीतता है। चलिए इन ३ लेसन्स को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : विन-विन मॉडल की पावर
दुनिया में ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बिजनेस एक जीरो सम गेम है। यानी अगर मुझे जीतना है तो सामने वाले को हारना ही होगा। पुराने जमाने के रियल एस्टेट ऑफिस भी इसी सोच पर चलते थे। वहां बॉस मोटा पैसा कमाता था और काम करने वाले एजेंट बेचारे बस छोटी सी मूंगफली जैसे कमीशन से खुश रहते थे। लेकिन रीमैक्स के फाउंडर डेव लिनेगर ने इस पुरानी और बोरिंग सोच को कचरे के डिब्बे में डाल दिया। उन्होंने एक ऐसा सिस्टम बनाया जहाँ कंपनी और एजेंट दोनों एक साथ जीत सकें। इसे ही कहते हैं असली विन-विन मॉडल।
जरा सोचिए आप एक ऐसी कंपनी में काम कर रहे हैं जहाँ आपका बॉस आपकी मेहनत की कमाई का आधा हिस्सा खुद रख लेता है। वह खुद तो नई गाड़ी में घूमता है और आपको ऑफिस के खराब कॉफी वेंडिंग मशीन के भरोसे छोड़ देता है। क्या आपका मन करेगा वहां जी जान लगाकर काम करने का। बिल्कुल नहीं। आप तो बस घड़ी देखेंगे कि कब पांच बजें और आप वहां से भागें। रीमैक्स ने इस दर्द को समझा। उन्होंने कहा कि भाई हम तुम्हें ऑफिस की छत देंगे और तुम हमें बस एक फिक्स मंथली फीस दे दो। बाकी तुम जितना भी कमाओगे वह सब तुम्हारा। १०० परसेंट तुम्हारा।
यह सुनकर पुराने जमाने के दिग्गज बिजनेसमैन ऐसे चौंके जैसे किसी ने उनके पैर के नीचे से जमीन खिसका दी हो। उनको लगा कि यह कंपनी तो दो दिन में बंद हो जाएगी। लेकिन हुआ इसके बिल्कुल उलट। जब एजेंट को पता चला कि उनकी मेहनत का एक एक पैसा उनकी अपनी जेब में जाएगा तो उन्होंने दिन रात एक कर दिया। जो एजेंट पहले महीने में दो घर बेचते थे वह अब हफ्ते में चार घर बेचने लगे। क्यों। क्योंकि अब उनके पास जीतने की एक असली वजह थी।
यही लाइफ का भी लेसन है। अगर आप अपने आसपास के लोगों को सिर्फ इस्तेमाल करेंगे तो वह एक दिन साथ छोड़ देंगे। लेकिन अगर आप ऐसा रास्ता ढूंढ लें जिसमें आपका भी भला हो और सामने वाले का भी तो समझो आपने तरक्की का जैकपॉट लगा लिया है। बिजनेस हो या दोस्ती लोग वहीं टिकते हैं जहाँ उन्हें अपनी जीत नजर आती है। रीमैक्स की सफलता का सबसे बड़ा राज यही है कि उन्होंने लोगों को नौकर नहीं बल्कि पार्टनर समझा। जब आप दूसरों के फायदे के बारे में सोचते हैं तो कुदरत आपका फायदा अपने आप करवा देती है।
लेसन २ : टॉप टैलेंट को रोकना
ज्यादातर कंपनियों की हालत उन मोहल्ले वाली आंटियों जैसी होती है जो चाहती तो हैं कि उनके घर में सबसे सुंदर बहू आए पर आजादी उसे एक मिनट की भी नहीं देना चाहतीं। बिजनेस की दुनिया में भी यही होता है। कंपनियां चाहती हैं कि उनके पास दुनिया के सबसे टैलेंटेड और स्मार्ट लोग काम करें पर जैसे ही वह बंदा अपना दिमाग चलाना शुरू करता है बॉस की ईगो बीच में आ जाती है। रीमैक्स ने इस ईगो को साइड में रखकर एक बहुत ही कूल लेसन दिया। अगर आपको अपनी फील्ड के शेरों के साथ काम करना है तो आपको उन्हें पिंजरे में बंद करने की आदत छोड़नी होगी।
पुराने सिस्टम में क्या होता था। अगर कोई एजेंट बहुत अच्छा काम कर रहा है तो मैनेजर उसे और ज्यादा दबाने की कोशिश करता था ताकि वह कहीं उससे आगे न निकल जाए। यह तो वही बात हुई कि आपने अपने घर में सचिन तेंदुलकर को बुलाया है पर उसे बैटिंग करने से मना कर रहे हैं क्योंकि आपको डर है कि वह छक्का मारकर आपकी खिड़की का कांच तोड़ देगा। रीमैक्स ने इसके ठीक उलट काम किया। उन्होंने कहा कि हमें औसत लोग चाहिए ही नहीं। हमें सिर्फ वही लोग चाहिए जो अपनी फील्ड के खिलाड़ी हैं। और उन खिलाड़ियों को रोकने का सिर्फ एक ही तरीका है उन्हें पूरी आजादी और सबसे ज्यादा रिवॉर्ड देना।
जब आप किसी टैलेंटेड इंसान को यह भरोसा दिला देते हैं कि उसकी ग्रोथ की कोई सीमा नहीं है तो वह अपनी पूरी ताकत झोंक देता है। रीमैक्स के ऑफिस में कोई किसी का बॉस नहीं था। हर एजेंट अपने आप में एक ब्रांड था। वहां कोई उन्हें यह बताने वाला नहीं था कि उन्हें सुबह कितने बजे आना है या क्लाइंट से कैसे बात करनी है। जब आप लोगों पर भरोसा करते हैं तो वह उस भरोसे को टूटने नहीं देते। लेकिन हमारे यहाँ तो लोग माइक्रो मैनेजमेंट के इतने शौकीन हैं कि बस चले तो वह कर्मचारी के चाय पीने के घूंट भी गिन लें।
अगर आप लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो याद रखिए कि अकेले आप सब कुछ नहीं कर सकते। आपको अपने साथ ऐसे लोग जोड़ने होंगे जो आपसे भी ज्यादा स्मार्ट हों। और उन स्मार्ट लोगों को आप सिर्फ पैसों से नहीं बल्कि इज्जत और आजादी से ही रोक सकते हैं। रीमैक्स ने दुनिया को दिखाया कि जब आप टॉप टैलेंट को खुलकर खेलने का मौका देते हैं तो पूरी कंपनी की वैल्यू रॉकेट की तरह ऊपर जाती है। लोगों को कंट्रोल करना छोड़िए और उन्हें लीड करना सीखिए। क्योंकि जब लोग दिल से जुड़ते हैं तो वह ऑफिस नहीं बल्कि एक साम्राज्य खड़ा करते हैं।
लेसन ३ : एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट
ज्यादातर लोग ऑफिस ऐसे जाते हैं जैसे उन्हें काला पानी की सजा सुनाई गई हो। वह बस अपनी कुर्सी तोड़ते हैं और महीने की आखिरी तारीख का इंतजार करते हैं ताकि सैलरी का मैसेज मोबाइल पर टिंग से बजे। लेकिन रीमैक्स ने इस थके हुए कल्चर को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने अपने हर एजेंट के अंदर एक बिजनेसमैन यानी एंटरप्रेन्योर जगा दिया। लेसन बहुत साफ है। जब तक आप खुद को एक कर्मचारी समझेंगे तब तक आप सिर्फ गुजारा करेंगे। लेकिन जिस दिन आप खुद को एक बिजनेस का मालिक समझने लगेंगे उस दिन से आपकी असली तरक्की शुरू होगी।
रीमैक्स का मॉडल ऐसा था कि वहां हर एजेंट अपना खुद का खर्चा खुद उठाता था। ऑफिस का किराया हो या विज्ञापन का पैसा वह सब एजेंट की जेब से जाता था। अब आप कहेंगे कि यह तो बड़ी नाइंसाफी है। लेकिन रुकिए। जब पैसा अपनी जेब से लगता है तभी इंसान का दिमाग घोड़े की तरह दौड़ता है। जब तक आपको सब कुछ मुफ्त में मिलता रहेगा आप कभी उसकी कदर नहीं करेंगे। यह वैसा ही है जैसे जिम की मेंबरशिप लेने के बाद ही इंसान को अपनी सेहत की फिक्र होती है क्योंकि वहां उसने गाढ़ी कमाई लगाई होती है।
जब रीमैक्स के एजेंट खुद को एक मालिक की तरह देखने लगे तो उनका काम करने का तरीका ही बदल गया। वह सिर्फ घर नहीं बेच रहे थे बल्कि वह अपना खुद का भविष्य बना रहे थे। उन्होंने नई नई तकनीक अपनाई और मार्केटिंग के ऐसे तरीके खोजे जो किसी मैनेजर के दिमाग में कभी नहीं आते। उन्होंने यह साबित कर दिया कि असली मोटिवेशन किसी बॉस के भाषण से नहीं बल्कि खुद की तरक्की की भूख से आता है। आज के समय में भी अगर आप किसी कंपनी में काम कर रहे हैं और सिर्फ उतना ही कर रहे हैं जितना कहा गया है तो यकीन मानिए आप लाइन में सबसे पीछे खड़े हैं।
इस बुक का सबसे बड़ा सार यही है कि जीत तभी मिलती है जब हर कोई एक बड़े विजन का हिस्सा हो। रीमैक्स ने रियल एस्टेट को सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि एक जुनून बना दिया। अगर आप अपनी जिंदगी में बड़े बदलाव चाहते हैं तो आज ही अपनी सोच बदलिए। दूसरों के भरोसे बैठना छोड़िए और खुद अपनी नाव के कैप्टन बनिए। याद रखिए कि दुनिया सिर्फ उन्हीं को सलाम करती है जो अपनी जिम्मेदारी खुद उठाते हैं और सबको साथ लेकर आगे बढ़ते हैं। सबको जिताना ही असल में खुद को जिताना है।
अगर आप भी उस पुरानी सोच से बाहर निकलकर कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो आज ही अपने काम को एक बिजनेस की तरह देखना शुरू करें। नीचे कमेंट्स में बताएं कि इन ३ लेसन्स में से आपको सबसे ज्यादा कौन सा पसंद आया। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपनी फील्ड में शेर की तरह दहाड़ना चाहते हैं। मिलकर जीतेंगे तभी तो मजा आएगा।
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