Expert Secrets (Hindi)


क्या आप भी अपनी नॉलेज को रद्दी के भाव बेच रहे हैं। जबकि दुनिया के महान गुरु करोड़ों छाप रहे हैं और आप बस सोशल मीडिया पर दूसरों की सक्सेस देखकर जल रहे हैं। अगर आपको लगता है कि सिर्फ मेहनत से पैसा आता है तो बधाई हो आप अपनी जिंदगी बर्बाद करने की रेस में सबसे आगे खड़े हैं।

अगर आप भी वही घिसी पिटी सलाह देकर थक चुके हैं तो रुक जाइए। रसेल ब्रन्सन की किताब एक्सपर्ट सीक्रेट्स आपको सिखाती है कि कैसे अपनी स्किल्स को एक मास मूवमेंट में बदलकर लोग आपको फॉलो करने के लिए मजबूर हो जाएं। चलिए इसके ३ पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : अपनी आवाज पहचानें और एक करिश्माई लीडर बनें

क्या आपको लगता है कि आप बहुत टैलेंटेड हैं पर फिर भी दुनिया आपको घास नहीं डाल रही। असलियत तो यह है कि आपके पास ज्ञान का भंडार तो है पर उसे बेचने की कला यानी एक मैग्नेटिक पर्सनालिटी की भारी कमी है। रसेल ब्रन्सन कहते हैं कि अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको अपना गुरु मानकर आपके पीछे चलें तो आपको सबसे पहले अपनी वह आवाज ढूंढनी होगी जो भीड़ से अलग हो। लोग किसी बोरिंग टीचर को फॉलो नहीं करते जो बस किताबों की बातें दोहराता रहे। वे उसे फॉलो करते हैं जिसके पास एक विजन हो और जो थोड़ा अतरंगी हो।

सोचिए आप एक पार्टी में गए हैं जहाँ हर कोई स्टॉक मार्केट की बातें कर रहा है। वहीं एक कोपचे में खड़ा इंसान चिल्लाकर कहता है कि स्टॉक मार्केट तो जुआ है और असली पैसा तो पुराने सिक्के बेचने में है। अचानक सब उसे देखने लगते हैं। बस यही वह करिश्मा है जिसकी बात रसेल कर रहे हैं। आपको दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञानी होने की जरूरत नहीं है। आपको बस उन लोगों से एक कदम आगे होना है जिन्हें आप सिखाना चाहते हैं। अगर आप खुद को एक अट्रैक्टिव कैरेक्टर की तरह पेश नहीं करेंगे तो लोग आपको वैसे ही इग्नोर करेंगे जैसे आप यूट्यूब पर आने वाले फालतू के एड्स को करते हैं।

भारतीय समाज में हम अक्सर अपनी असलियत छुपाने की कोशिश करते हैं क्योंकि हमें लगता है कि लोग क्या कहेंगे। लेकिन रसेल कहते हैं कि अपनी कमियों को अपनी ताकत बनाइये। अगर आपकी हिंदी कमजोर है या आप बोलते समय हकलाते हैं तो उसे छुपाइए मत बल्कि उसे अपनी पहचान बना लीजिये। लोग परफेक्ट रोबोट्स को नहीं बल्कि उन इंसानों को पसंद करते हैं जो उनकी तरह ही टूटे हुए और असली हों। जब आप अपनी असली आवाज में बात करना शुरू करते हैं तो आप उन लोगों को अपनी तरफ खींचते हैं जो आपके जैसे हैं। इसे ही रसेल मास मूवमेंट की पहली सीढ़ी कहते हैं।

यहाँ एक कड़वा सच यह भी है कि अगर आपके कोई दुश्मन नहीं हैं तो इसका मतलब है कि आप बहुत बोरिंग हैं। एक सच्चा लीडर वह है जिसके पास पक्के दोस्त भी हों और तगड़े दुश्मन भी। अगर आप सबको खुश करने की कोशिश कर रहे हैं तो यकीन मानिए आप किसी को भी खुश नहीं कर पाएंगे और आपका बिजनेस उस फुस्स पटाखे जैसा होगा जो दिवाली पर सबको निराश कर देता है। आपको एक स्टैंड लेना होगा। आपको चिल्लाकर कहना होगा कि यह सही है और यह गलत है।

मान लीजिये आप फिटनेस सिखाते हैं। अगर आप कहेंगे कि थोड़ा जिम जाओ और थोड़ा सलाद खाओ तो कोई आपको नहीं सुनेगा। लेकिन अगर आप यह कहें कि जिम जाना समय की बर्बादी है और सिर्फ घर के काम करके आप सिक्स पैक एब्स बना सकते हैं तो लोग अपनी कुर्सियों से उछल पड़ेंगे। यह नयापन और यह भरोसा ही आपको एक लीडर बनाता है। अपनी स्किल्स को एक कहानी के धागे में पिरोइये और उसे ऐसे पेश कीजिये जैसे आप कोई महान क्रांति ला रहे हों। जब तक आप खुद को एक आम इंसान समझते रहेंगे तब तक दुनिया भी आपको वही समझेगी। उठिए अपनी वह दबी हुई आवाज निकालिए और दुनिया को बताइये कि आप यहाँ राज करने आये हैं ना कि सिर्फ लाइन में लगने।


लेसन २ : पुरानी घिसी पिटी बातों को छोड़कर एक नई अपॉर्चुनिटी ऑफर करें

ज्यादातर लोग लाइफ में इसलिए फेल हो जाते हैं क्योंकि वे लोगों को वही चीजें बेचने की कोशिश करते हैं जो पहले से बाजार में सड़ रही हैं। रसेल ब्रन्सन कहते हैं कि अगर आप किसी को वजन घटाने के लिए वही पुराना 'कम खाओ और ज्यादा भागो' वाला ज्ञान देंगे तो वह आपको लात मारकर भगा देगा। क्यों। क्योंकि उसे पता है कि वह पहले भी यह कोशिश कर चुका है और फेल हो गया है। इंसान अपनी नाकामियों का बोझ उठाना पसंद नहीं करता। उसे चाहिए एक नया रास्ता जिस पर चलकर उसे लगे कि इस बार तो पक्का चमत्कार होगा।

यहीं पर काम आता है 'द न्यू अपॉर्चुनिटी' का कांसेप्ट। रसेल कहते हैं कि आपको लोगों के पुराने सिस्टम को सुधारना यानी इम्प्रूवमेंट ऑफर नहीं करना है। आपको उन्हें एक बिलकुल नई अपॉर्चुनिटी देनी है। सुधार का मतलब है कि उन्हें अपनी पुरानी गलतियों को मानना पड़ेगा और मेहनत दोगुनी करनी पड़ेगी। जबकि नई अपॉर्चुनिटी का मतलब है कि पुरानी बातें भूल जाओ क्योंकि वह सिस्टम ही खराब था। अब यह नया रास्ता देखो। यह सुनने में कितना सुकून देता है ना। जैसे कोई आपसे कहे कि आपकी गरीबी आपकी गलती नहीं थी बल्कि वह सरकारी सिस्टम ही खराब था और अब मेरे पास अमीर बनने का एक जादुई तरीका है।

मान लीजिये आप एक मैरिज ब्यूरो चलाते हैं। अगर आप लोगों से कहेंगे कि मैं आपकी पर्सनालिटी सुधार दूंगा ताकि आपको अच्छी लड़की मिले तो लोग कहेंगे रहने दो भाई हम जैसे हैं वैसे ही ठीक हैं। लेकिन अगर आप उनसे कहें कि पर्सनालिटी जाए तेल लेने मैं आपको एक ऐसा ऐप दूंगा जहाँ लड़कियां खुद आपको प्रपोज करेंगी तो देखिये कैसे कुंवारों की लाइन लग जाएगी। यहाँ आपने उनकी पुरानी प्रॉब्लम को ठीक करने के बजाय उन्हें एक बिलकुल नया सपना बेच दिया है।

भारत में हम अक्सर 'जुगाड़' के पीछे भागते हैं। रसेल का यह लेसन भी एक तरह का स्मार्ट जुगाड़ ही है। आपको अपने क्लाइंट को यह महसूस कराना है कि जो पुराना तरीका वह इस्तेमाल कर रहा था वह एक टूटी हुई साइकिल की तरह था जिस पर कितनी भी तेज पैडल मार लो आप मंजिल तक नहीं पहुँचते। और आप उसे एक ब्रांड न्यू स्पोर्ट्स कार की चाबी दे रहे हैं। जब आप एक नई अपॉर्चुनिटी क्रिएट करते हैं तो आप कॉम्पिटिशन को जड़ से खत्म कर देते हैं। अब आप किसी से तुलना नहीं कर रहे क्योंकि आपके जैसा कोई दूसरा मार्केट में है ही नहीं।

अक्सर लोग डरते हैं कि अगर मैं कुछ नया कहूँगा तो लोग मेरा मजाक उड़ाएंगे। लेकिन याद रखिये जब तक लोग आपको पागल कहना शुरू न कर दें तब तक समझ लीजिये कि आपकी बात में कोई दम नहीं है। रसेल कहते हैं कि आपकी नई अपॉर्चुनिटी इतनी लुभावनी होनी चाहिए कि सामने वाले को अपनी पुरानी लाइफ एक जेल की तरह लगने लगे। उसे लगना चाहिए कि अगर उसने आज आपकी बात नहीं मानी तो वह जिंदगी भर उसी अंधेरे कुएं में सड़ता रहेगा। आपको एक ऐसा मसीहा बनना है जो लोगों को उनकी पुरानी और बोरिंग जिंदगी से आजाद करा सके।

तो क्या आप अपनी वही पुरानी घिसी पिटी सर्विस बेच रहे हैं या आपके पास दुनिया को देने के लिए कुछ ऐसा है जो उन्हें कुर्सी छोड़कर नाचने पर मजबूर कर दे। अगर नहीं है तो आज ही बैठिये और सोचिये कि आप कैसे अपनी स्किल्स को एक नए अवतार में पेश कर सकते हैं। याद रखिये लोग सोल्यूशन नहीं खरीदते वे एक नया और बेहतर भविष्य खरीदते हैं।


लेसन ३ : द इपिफनी ब्रिज और कहानियों का जादू

क्या आपने कभी गौर किया है कि जब कोई आपको ज्ञान झाड़ता है तो आपका मन करता है कि उसे वहीं चुप करा दें। लेकिन वही इंसान जब कोई चटपटी कहानी सुनाता है तो आप पलकें झपकाना भी भूल जाते हैं। रसेल ब्रन्सन का तीसरा सबसे बड़ा सीक्रेट यही है जिसे वे द इपिफनी ब्रिज कहते हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि लोगों को फैक्ट्स और डेटा से मत डराइए बल्कि उन्हें उस एहसास तक ले जाइये जहाँ उन्हें खुद लगे कि हाँ यही तो मुझे चाहिए था।

इंसान का दिमाग लॉजिक से नहीं बल्कि इमोशन से फैसले लेता है। अगर आप किसी को बताएंगे कि आपके कोर्स में ५० वीडियो हैं और १०० पीडीएफ हैं तो वह सोचेगा कि यार इतना कौन पढ़ेगा। लेकिन अगर आप उसे अपनी वह कहानी सुनाएंगे कि कैसे आप एक छोटी सी झोपड़ी में रहते थे और एक खास तरकीब ने आपकी जिंदगी बदल दी तो वह खुद-ब-खुद आपसे जुड़ जाएगा। आपको उसे उस जादुई पल यानी इपिफनी तक लेकर जाना है जहाँ उसे वह 'आहा' मोमेंट महसूस हो। उसे लगना चाहिए कि जो चमत्कार आपके साथ हुआ वह उसके साथ भी हो सकता है।

सोचिये आप एक सेल्समैन हैं जो एक नया वैक्यूम क्लीनर बेच रहा है। अगर आप कहेंगे कि इसमें ५०० वाट की मोटर है तो कोई नहीं खरीदेगा। लेकिन अगर आप कहानी सुनाएं कि कैसे आपकी सास के घर आने से पहले आपने सिर्फ २ मिनट में पूरा घर चमका दिया और अपनी इज्जत बचा ली तो हर बहू वह मशीन खरीदने के लिए तैयार हो जाएगी। यहाँ आपने कोई लॉजिक नहीं दिया बल्कि एक ऐसी स्थिति पैदा कर दी जहाँ सामने वाला खुद को आपकी जगह रखकर देखने लगा। यही वह पुल है जो आपके और आपके कस्टमर के बीच के भरोसे की दूरी को खत्म कर देता है।

भारत में हम कहानियों के दीवाने हैं। हमारे यहाँ दादा-दादी की कहानियों से लेकर बॉलीवुड की फिल्मों तक हर चीज में इमोशन का तड़का होता है। रसेल कहते हैं कि अगर आप अपने बिजनेस में इस तड़के का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। आपको अपनी कहानी ऐसे सुनानी है कि सुनने वाले को लगे कि आप उसके मन की बात कर रहे हैं। जब आप अपनी स्ट्रगल अपनी हार और अपनी जीत के बारे में बताते हैं तो लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि आप कोई ऊंचे सिंहासन पर बैठे भगवान नहीं हैं बल्कि उनके जैसे ही एक इंसान हैं जिसने रास्ता ढूंढ लिया है।

अक्सर एक्सपर्ट्स को लगता है कि उन्हें बहुत गंभीर और पढ़ा-लिखा दिखना चाहिए। लेकिन सच तो यह है कि लोग डिग्री से ज्यादा तजुर्बे की कद्र करते हैं। अपनी कहानी में अपनी कमियां बताने से डरिए मत। जब आप बताते हैं कि आप भी कभी फेल हुए थे तो लोग आपसे जुड़ाव महसूस करते हैं। यह इपिफनी ब्रिज ही वह जादुई चाबी है जो लोगों के दिमाग के ताले खोल देती है और उनके हाथ सीधे उनकी जेब में चले जाते हैं ताकि वे आपका प्रोडक्ट खरीद सकें।

तो क्या आप सिर्फ फीचर्स गिना रहे हैं या लोगों के दिल तक पहुँचने के लिए कहानियों का पुल बना रहे हैं। याद रखिये लोग सामान नहीं खरीदते वे उस सामान के साथ जुड़ी भावनाएं और कहानियां खरीदते हैं। अगर आप अपनी कहानी सही से सुना पाए तो यकीन मानिए आपको बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि दुनिया खुद आपसे खरीदने के लिए लाइन लगाएगी।


दुनिया में ज्ञान की कमी नहीं है कमी है तो सिर्फ उन लोगों की जो उस ज्ञान को सही तरीके से दुनिया के सामने रख सकें। क्या आप तैयार हैं अपनी उस दबी हुई आवाज को बाहर निकालने के लिए और एक ऐसी क्रांति शुरू करने के लिए जो आपकी और हजारों लोगों की जिंदगी बदल दे। कमेंट में बताइये कि इन ३ लेसन में से कौन सा लेसन आपकी लाइफ की सिचुएशन से सबसे ज्यादा मैच करता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो टैलेंटेड तो है पर अपनी पहचान बनाने से डरता है। उठिए और अपना साम्राज्य बनाना शुरू कीजिये क्योंकि वक्त किसी का इंतजार नहीं करता।

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