क्या आप भी अपनी टीम के लिए वह खडूस बॉस बन चुके हैं जिसे देखते ही लोग कॉफी ब्रेक के बहाने गायब हो जाते हैं। बधाई हो। आपकी नेगेटिविटी जल्द ही आपकी कंपनी और करियर दोनों का कबाड़ा करने वाली है और आप हाथ मलते रह जाएंगे।
लेकिन रुकिए। अगर आप अपनी सड़ी हुई लीडरशिप को बदलकर एक जादुई बदलाव लाना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए है। आज हम जॉन गॉर्डन की किताब से वह ३ सीक्रेट लेसन सीखेंगे जो आपको एक असली और पॉजिटिव लीडर बनाएंगे।
लेसन १ : पॉजिटिविटी कोई चॉइस नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है
अक्सर लोगों को लगता है कि पॉजिटिव होना एक सॉफ्ट स्किल है। मतलब अगर आप ऑफिस में मुस्कुराकर बात करते हैं तो लोग आपको हल्का समझने लगते हैं। आपको लगता होगा कि जब तक आप टेबल पर हाथ मारकर चिल्लाएंगे नहीं तब तक लोग काम नहीं करेंगे। लेकिन जॉन गॉर्डन कहते हैं कि असली लीडरशिप वह नहीं है जहाँ आप डर पैदा करें। असली लीडरशिप वह है जहाँ आप अपनी टीम के लिए एनर्जी का सोर्स बनें।
सोचिए आप एक ऐसे कैप्टन हैं जिसकी नाव बीच समंदर में फंस गई है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला यह कि आप अपनी टीम के साथ बैठकर किस्मत को कोसें और रोना धोना शुरू कर दें। दूसरा रास्ता यह है कि आप मुस्कुराएं और कहें कि भाई लोग चिंता मत करो हम इसे भी पार कर लेंगे। अगर आप पहले वाले रास्ते पर चले तो आपकी टीम आपसे पहले पानी में कूद जाएगी। लीडर की पॉजिटिविटी वह गोंद है जो मुश्किल समय में पूरी टीम को जोड़कर रखती है।
अक्सर हम देखते हैं कि कुछ मैनेजर्स सोमवार की सुबह ऐसे चेहरा बनाकर आते हैं जैसे उनका ब्रेकअप हो गया हो। अब जब दूल्हा ही उदास है तो बाराती नाचेंगे कैसे। आपकी टीम वही रिफ्लेक्ट करती है जो आप उन्हें देते हैं। अगर आप चिड़चिड़े रहेंगे तो आपकी टीम भी आपस में लड़ती रहेगी। लोग अक्सर कहते हैं कि सर काम का प्रेशर बहुत है। भाई प्रेशर तो कुकर में भी होता है लेकिन वह भी सीटी मारकर खुद को शांत कर लेता है। आप तो इंसान हैं।
जॉन गॉर्डन के अनुसार पॉजिटिव लीडरशिप का मतलब यह नहीं है कि आप सच को नकार दें। इसका मतलब यह है कि आप अपनी टीम को उस अंधेरे से बाहर निकलने का रास्ता दिखाएं। अगर सेल्स डाउन है तो टीम को डांटने से सेल्स नहीं बढ़ेगी। उन्हें यह विश्वास दिलाने से बढ़ेगी कि हम इसे वापस ऊपर ले जा सकते हैं। पॉजिटिविटी एक ऐसी दवा है जो बिना साइड इफेक्ट के टीम की परफॉरमेंस को रॉकेट बना देती है।
जब आप पॉजिटिव होते हैं तो आप समस्याओं के बजाय समाधान पर फोकस करते हैं। एक नेगेटिव लीडर हमेशा यह ढूंढता है कि गलती किसकी थी। जबकि एक पॉजिटिव लीडर यह देखता है कि अब क्या किया जा सकता है। आप अपनी टीम के लिए वह सूरज बनिए जो सबसे घने बादलों के बीच से भी रोशनी ढूंढ लेता है। यकीन मानिए अगर आप खुश रहकर काम करेंगे तो आपकी टीम भी आपके लिए जान देने को तैयार रहेगी। वरना मजबूरी में तो गधा भी घास चरता ही है।
लेसन २ : कल्चर के लिए विजन और मिशन का होना बहुत जरूरी है
एक बिना विजन वाला लीडर उस टैक्सी ड्राइवर की तरह है जिसे खुद नहीं पता कि उसे जाना कहाँ है। वह बस मीटर चालू करके घूम रहा है और पीछे बैठी टीम का बिल बढ़ता जा रहा है। जॉन गॉर्डन कहते हैं कि अगर आपकी टीम को अपना 'व्हाई' यानी मकसद नहीं पता तो वे सिर्फ शरीर से ऑफिस आएंगे और दिमाग घर पर छोड़ आएंगे। एक लीडर का सबसे बड़ा काम है अपनी टीम को एक ऐसा सपना बेचना जिसे वे अपना मान सकें।
मान लीजिए आप एक ईंट भट्टे पर काम करने वाले मजदूर के पास जाते हैं और पूछते हैं कि तुम क्या कर रहे हो। पहला कहता है कि मैं ईंटें ढो रहा हूँ। दूसरा कहता है कि मैं अपनी रोजी रोटी कमा रहा हूँ। लेकिन तीसरा कहता है कि मैं दुनिया का सबसे सुंदर महल बना रहा हूँ। अब आप खुद सोचिए कि सबसे ज्यादा जोश किसके पास होगा। लीडर वही है जो अपनी टीम को यह महसूस कराए कि वे सिर्फ एक्सेल शीट नहीं भर रहे हैं बल्कि किसी की जिंदगी बदल रहे हैं।
अक्सर इंडिया के ऑफिसों में क्या होता है। बॉस आता है और कहता है कि इस महीने का टारगेट पूरा करना है वरना बोनस भूल जाओ। यह विजन नहीं है यह तो धमकी है। लोग डर से काम तो करेंगे लेकिन अपनी आत्मा नहीं डालेंगे। जब विजन बड़ा होता है तो छोटे मोटे झगड़े अपने आप खत्म हो जाते हैं। जब सबको पता होता है कि हमें वर्ल्ड कप जीतना है तो खिलाड़ी आपस में यह नहीं लड़ते कि मेरी जर्सी ज्यादा नीली क्यों है।
विजन को सिर्फ दीवार पर लिखकर फ्रेम करवा देने से कुछ नहीं होता। उसे टीम के खून में दौड़ाना पड़ता है। आपको हर मीटिंग और हर बातचीत में उस बड़े मकसद की याद दिलानी होगी। लोग अक्सर भूल जाते हैं कि वे क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। उन्हें बार बार रिमाइंड कराना आपकी जॉब है। अगर आप खुद अपने विजन को लेकर कन्फ्यूज हैं तो आपकी टीम तो भगवान भरोसे ही है।
पॉजिटिव लीडरशिप में विजन का मतलब केवल पैसे कमाना नहीं होता। इसका मतलब एक इम्पैक्ट पैदा करना होता है। जब आपकी टीम को लगता है कि उनका लीडर सिर्फ अपने प्रमोशन के लिए नहीं बल्कि पूरी टीम की तरक्की के लिए लड़ रहा है तो वे आपके पीछे पहाड़ पर चढ़ने को भी तैयार हो जाते हैं। विजन वह रोशनी है जो सुरंग के उस पार दिखती है। जब तक वह रोशनी दिखेगी तब तक आपकी टीम थककर नहीं रुकेगी।
लेसन ३ : जहरीले लोगों को बाहर का रास्ता दिखाएं
पॉजिटिव लीडरशिप का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप हर किसी के साथ 'जी हुजूर' करें और कोई गलती करे तो भी उसे लड्डू खिलाएं। असल में एक सच्चा लीडर वह होता है जो अपनी टीम के कल्चर को बचाने के लिए कड़े फैसले लेता है। जॉन गॉर्डन कहते हैं कि आपकी टीम में एक भी 'एनर्जी वैम्पायर' पूरी टीम का खून चूस सकता है। यह वह लोग होते हैं जो हर आईडिया में मीन मेख निकालते हैं और कैंटीन में बैठकर दूसरों की बुराई करने को ही अपना फुल टाइम करियर समझते हैं।
सोचिए आपने एक बहुत ही शानदार बिरयानी बनाई है लेकिन उसमें एक छोटा सा कंकड़ आ जाए। अब आप उस बिरयानी का स्वाद भूल जाएंगे और उस कंकड़ को कोसते रहेंगे। आपकी टीम भी उस बिरयानी की तरह है और वह नेगेटिव इंसान उस कंकड़ की तरह। अगर आप एक लीडर के तौर पर उस कंकड़ को बाहर नहीं फेंकते तो लोग यह नहीं कहेंगे कि आप बहुत दयालु हैं बल्कि वे कहेंगे कि आपको मैनेजमेंट करना ही नहीं आता।
अक्सर हम ऐसे लोगों को झेलते रहते हैं क्योंकि वे काम में बहुत अच्छे होते हैं। हमें लगता है कि अगर यह चला गया तो प्रोजेक्ट रुक जाएगा। लेकिन सच तो यह है कि वह इंसान अपनी स्किल्स से जितना फायदा नहीं पहुंचा रहा उससे ज्यादा नुकसान अपनी नेगेटिविटी से कर रहा है। वह बाकी नौ लोगों का मोटिवेशन भी खत्म कर देता है। एक सड़ा हुआ आम पूरी पेटी को खराब कर देता है और यहाँ तो बात आपके सपनों की टीम की है।
पॉजिटिव लीडरशिप में आपको माली बनना पड़ता है। एक माली फूलों को पानी तो देता ही है लेकिन साथ ही वह उन खरपतवारों को भी उखाड़ देता है जो पौधों की धूप और खाद चुरा रहे होते हैं। आपको अपनी टीम के साथ बैठकर साफ़ शब्दों में बात करनी होगी। उन्हें बदलना होगा या फिर उन्हें अलविदा कहना होगा। इसमें कोई शर्म की बात नहीं है। याद रखिए जो इंसान आपकी टीम के विजन के साथ नहीं चल सकता उसे बस में बैठने का कोई हक नहीं है।
जब आप इन जहरीले लोगों को बाहर निकालते हैं तो बाकी टीम को एक मैसेज जाता है कि आप उनके सुख और शांति के लिए गंभीर हैं। इससे टीम के अंदर एक नई एनर्जी आती है और लोग ज्यादा खुल कर काम करने लगते हैं। एक लीडर का काम सिर्फ भीड़ इकट्ठा करना नहीं है बल्कि एक ऐसी फौज तैयार करना है जो एक दूसरे के पैर खींचने के बजाय एक दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़े।
लीडरशिप कोई पद नहीं है जिसे आप विजिटिंग कार्ड पर छपवा लें। यह एक जिम्मेदारी है जो हर दिन निभानी पड़ती है। क्या आप आज से अपनी टीम के लिए वह उम्मीद की किरण बनने को तैयार हैं। जाइए और आज ही अपनी टीम से बात कीजिए और देखिए कि क्या आप उनकी लाइफ में कोई पॉजिटिव बदलाव ला पा रहे हैं। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो कल ही अपने बॉस की बुराई कर रहा था।
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