अभी भी वही घिसी पिटी सेल्स टीम पाल रखी है जो बस फोन पर गला फाड़ती है। मुबारक हो आप अपने बिजनेस की चिता खुद जला रहे हैं। जब आपके कंपटीटर रेवेन्यू के नए पहाड़ चढ़ रहे होंगे तब आप अपनी पुरानी टीम की सैलरी भरने के लिए लोन ढूंढ रहे होंगे। शर्म तो आती होगी।
आज के डिजिटल युग में पुराना सेल्स मॉडल पूरी तरह मर चुका है। अगर आप भी वही पुरानी गलतियां कर रहे हैं तो यह ब्लॉग आपके डूबते हुए बिजनेस के लिए आखिरी लाइफ जैकेट हो सकता है। चलिए देखते हैं वह ३ पावरफुल लेसन जो आपकी पूरी सोच बदल देंगे।
लेसन १ : सेल्स टीम को हटाओ और गाइड को लेकर आओ
सोचिए आप एक अंधेरी गुफा में फंसे हैं और बाहर निकलने का रास्ता नहीं पता। अचानक एक आदमी आता है और चिल्लाने लगता है कि भाई साहब यह जादुई टॉर्च खरीद लो सिर्फ पांच सौ रुपये में। आप उसे टॉर्च बेचने वाला कहेंगे या अपनी मौत का सौदागर। लेकिन अगर वही आदमी शांति से हाथ में टॉर्च लेकर आए और कहे कि घबराओ मत मैं रास्ता जानता हूँ बस मेरे पीछे चलो। तब आप उसे अपना मसीहा मानेंगे। बस यही फर्क है एक पुराने सेल्समैन और एक मॉडर्न सेल्स गाइड में। एरिक काइल्स और माइक लिबरमैन कहते हैं कि आज का कस्टमर बहुत होशियार हो गया है। उसे इंटरनेट पर सब पता है। उसे आपकी चिकनी चुपड़ी बातों में कोई इंटरेस्ट नहीं है। अगर आपकी टीम अभी भी सुबह से शाम तक बस फोन घुमाकर लोगों का सिर खा रही है तो यकीन मानिए आप सेल्स नहीं बल्कि नफरत कमा रहे हैं।
पुराने जमाने में सेल्समैन का काम होता था कस्टमर को अपनी बातों के जाल में फंसाना। उसे वह चीज बेच देना जिसकी उसे शायद जरूरत भी नहीं थी। लेकिन अब जमाना बदल गया है। आज का कस्टमर किसी ऐसे इंसान से बात करना चाहता है जो उसे सामान न बेचे बल्कि उसकी समस्या का समाधान दे। एक सेल्स गाइड वह होता है जो कस्टमर की जर्नी को समझता है। वह उसे बताता है कि उसका प्रोडक्ट उसकी लाइफ में क्या बदलाव लाएगा। मान लीजिए आप एक जिम के मालिक हैं। एक पुराना सेल्समैन कहेगा कि हमारे पास लेटेस्ट मशीनें हैं आज ही मेम्बरशिप ले लो। लेकिन एक सेल्स गाइड कस्टमर से पूछेगा कि आपका गोल क्या है। वह उसे डाइट प्लान समझाएगा और फिर बताएगा कि यह जिम उसे वहां तक पहुंचने में कैसे मदद करेगा।
लोग अपनी सेल्स टीम को शेर बताते हैं जो शिकार करके लाती है। भाई साहब आपका कस्टमर कोई हिरण नहीं है जो आपके डर से भाग जाएगा। वह तो वह इंसान है जो अपनी जेब में पैसा लेकर बैठा है और सही रास्ता ढूंढ रहा है। अगर आप उस पर झपटेंगे तो वह दूसरी दुकान पर चला जाएगा। इसलिए अपनी टीम को शिकारी बनाना बंद करो और उन्हें एक ऐसा मैप दो जिससे वह कस्टमर को उसकी मंजिल तक पहुंचा सकें। जब आप अपनी टीम को सेल्स गाइड की तरह दोबारा हायर करते हैं तो आप असल में भरोसा जीतना शुरू करते हैं। और याद रखना बिजनेस में पैसा बाद में आता है भरोसा पहले आता है।
अक्सर बिजनेस मालिक डरते हैं कि अगर हमने बेचना छोड़ दिया तो पैसा कैसे आएगा। अरे भाई जब आप किसी की मदद करते हैं तो वह खुद चलकर आपके पास आता है। सेल्स गाइड का काम है कस्टमर के डर को दूर करना और उसे यह महसूस कराना कि वह एक सही फैसला ले रहा है। अगर आप अभी भी अपनी टीम से वही पुराने रटे रटाए डायलॉग बुलवा रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपने बिजनेस के पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। इस बदलाव के बिना आपकी सेल्स बस एक नंबर बनकर रह जाएगी जो कभी नहीं बढ़ेगी।
लेसन २ : मार्केटिंग और सेल्स का झगड़ा खत्म करो और रेवेन्यू डिपार्टमेंट बनाओ
जरा सोचिए, एक क्रिकेट मैच चल रहा है। बॉलर अपनी पूरी जान लगाकर गेंद फेंकता है ताकि विकेट मिले, लेकिन फील्डर बाउंड्री पर सो रहा है। जब चौका जाता है, तो बॉलर फील्डर को गाली देता है और फील्डर कहता है कि तूने बॉल ही खराब डाली थी। यही हाल आज के ज्यादातर बिजनेस का है। मार्केटिंग वाले कहते हैं कि हमने तो इतने सारे लीड्स ला कर दिए, लेकिन सेल्स वाले निकम्मे हैं, वो क्लोज ही नहीं कर पाते। वहीं सेल्स वाले रोते रहते हैं कि मार्केटिंग वालों ने कचरा डेटा दिया है, इनमें से कोई खरीदेगा ही नहीं। इस तू-तू मैं-मैं में नुकसान सिर्फ एक इंसान का होता है और वो हैं आप, यानी बिजनेस के मालिक।
एरिक काइल्स और माइक लिबरमैन एक कड़वा सच बताते हैं। वो कहते हैं कि अगर आप सेल्स और मार्केटिंग को अलग-अलग कमरे में बिठाकर काम करवा रहे हैं, तो आप असल में दो अलग-अलग फौजें लड़वा रहे हैं जो एक ही राजा के लिए काम कर रही हैं। यह तो वही बात हो गई कि आपके शरीर का दायां हाथ बाएं हाथ से लड़ रहा है कि खाना मुँह तक कौन ले जाएगा। नतीजा? खाना जमीन पर गिर जाता है। इस बुक का सबसे बड़ा लेसन यही है कि इन दोनों को खत्म करो और एक नया रेवेन्यू डिपार्टमेंट खड़ा करो। एक ऐसा डिपार्टमेंट जिसका सिर्फ एक ही मकसद हो: पैसा अंदर आना चाहिए।
अब आप कहेंगे कि यह तो सुनने में अच्छा लगता है, पर होगा कैसे? इसे एक देसी उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप एक मिठाई की दुकान चलाते हैं। मार्केटिंग का काम सिर्फ बाहर बोर्ड लगाना या अखबार में पर्चे बांटना नहीं है। उसका काम है कस्टमर के मन में लड्डू फोड़ना। और सेल्स का काम सिर्फ पैसे गिनना नहीं है, बल्कि यह देखना है कि कस्टमर को स्वाद लगा या नहीं। जब यह दोनों मिलकर एक टीम की तरह काम करते हैं, तो उन्हें पता होता है कि कौन सा कस्टमर सिर्फ खुशबू लेने आया है और कौन सच में शादी का ऑर्डर देने आया है। रेवेन्यू डिपार्टमेंट में मार्केटिंग वाले सेल्स वालों से पूछते हैं कि भाई, आपको किस तरह के लोग चाहिए? और सेल्स वाले बताते हैं कि जो लोग क्वालिटी मांगते हैं, उन्हें भेजो, रेट कम करने वालों को नहीं।
लोग सेल्स और मार्केटिंग हेड को अलग-अलग मोटी सैलरी देते हैं ताकि वो एक दूसरे की बुराई करने के नए तरीके ढूंढ सकें। अगर आप अपने बिजनेस को एक नई ऊँचाई पर देखना चाहते हैं, तो यह ईगो का खेल बंद करना होगा। रेवेन्यू डिपार्टमेंट एक ऐसी मशीन की तरह काम करता है जहाँ मार्केटिंग 'फ्यूल' है और सेल्स 'इंजन'। बिना फ्यूल के इंजन नहीं चलेगा और बिना इंजन के फ्यूल का कोई फायदा नहीं। जब आप इन दोनों को एक ही छतरी के नीचे लाते हैं, तो कस्टमर को एक जैसा अनुभव मिलता है। उसे ऐसा नहीं लगता कि विज्ञापन में कुछ और दिखाया गया और दुकान पर आने के बाद कोई और ही कहानी सुनाई जा रही है। अगर आपकी मार्केटिंग और सेल्स के बीच अभी भी ३६ का आंकड़ा है, तो समझ लीजिए कि आपका रेवेन्यू कभी भी १०० तक नहीं पहुँचेगा।
लेसन ३ : कस्टमर की खरीदने की जर्नी को आसान बनाओ, न कि अपनी बेचने की प्रोसेस को
दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहले वो, जो आपको जबरदस्ती रास्ता दिखाते हैं जब आपको जाना ही नहीं होता। और दूसरे वो, जो चुपचाप आपके रास्ते के पत्थर हटा देते हैं ताकि आप आराम से चल सकें। ज्यादातर बिजनेस पहले वाले इंसान की तरह व्यवहार करते हैं। वो कस्टमर को अपनी 'सेल्स प्रोसेस' के पिंजरे में डालने की कोशिश करते हैं। "पहले आपको यह फॉर्म भरना होगा, फिर हमारा बंदा आपको कॉल करेगा, फिर हम आपको प्रेजेंटेशन दिखाएंगे।" भाई साहब, कस्टमर को आपकी प्रेजेंटेशन में कोई दिलचस्पी नहीं है, उसे अपनी समस्या का हल चाहिए और वो भी अभी के अभी।
लेखक कहते हैं कि हमें अपनी सेल्स प्रोसेस को भूलकर कस्टमर की 'बाइंग जर्नी' पर फोकस करना चाहिए। इसे ऐसे समझिए जैसे आप किसी शादी के लिए शेरवानी खरीदने गए हैं। दुकानदार आपको जबरदस्ती सोफे पर बिठाकर अपनी दुकान का इतिहास सुनाने लगे तो आप वहां से भाग जाएंगे। आपको तो बस यह देखना है कि क्या यह कपड़ा आप पर जचेगा और क्या यह आपके बजट में है। अगर दुकानदार आपको सीधे ट्रायल रूम दिखा दे और एक अच्छा सा शीशा सामने रख दे, तो आपकी जर्नी आसान हो गई। बस यही काम एक रेवेन्यू गाइड का है। उसे यह देखना है कि कस्टमर कहाँ अटक रहा है। क्या उसे कीमत ज्यादा लग रही है? क्या उसे आपके प्रोडक्ट पर भरोसा नहीं है? या उसे बस यह समझ नहीं आ रहा कि इसे इस्तेमाल कैसे करना है?
हम खुद जब कस्टमर होते हैं तो हमें सेल्समैन से नफरत होती है, लेकिन जैसे ही अपनी दुकान पर बैठते हैं, हम खुद दुनिया के सबसे पकाऊ सेल्समैन बन जाते हैं। हम भूल जाते हैं कि सामने वाला भी एक इंसान है जिसके पास समय की कमी है। अगर आप कस्टमर के रास्ते के कांटे हटा देंगे, तो वो खुद दौड़कर आपके पास आएगा। आपको उसे धक्का मारने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जब आप अपनी पूरी टीम को एक गाइड की तरह तैयार करते हैं, तो आपका काम बेचना नहीं बल्कि 'खरीदने में मदद करना' बन जाता है। और यकीन मानिए, जब लोग खुद से खरीदते हैं, तो वो कभी पछताते नहीं हैं और बार-बार वापस आते हैं।
दोस्तो, बिजनेस करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, यह सिर्फ लोगों के साथ रिश्ता बनाने का एक तरीका है। अगर आप आज भी वही पुराने घिसे-पिटे तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आप सिर्फ अपना समय और पैसा बर्बाद कर रहे हैं। अपनी टीम को शिकारी बनाना छोड़िए और उन्हें एक सच्चा गाइड बनाइए। याद रखिए, शेरवानी वही बिकती है जो पहनने वाले को राजा जैसा महसूस कराए, न कि वो जो जबरदस्ती गले में डाली जाए।
आज ही बैठिए और सोचिए कि क्या आपकी टीम सच में कस्टमर की मदद कर रही है या सिर्फ अपना टारगेट पूरा करने के पीछे भाग रही है? अगर आपको यह लेसन समझ आए हैं, तो इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो अपनी सेल्स टीम से परेशान है। और हाँ, कमेंट्स में बताइए कि क्या आप अपने बिजनेस में 'रेवेन्यू डिपार्टमेंट' बनाने के लिए तैयार हैं? आपकी एक छोटी सी शुरुआत आपके बिजनेस की तकदीर बदल सकती है।
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