अगर आपको लगता है कि आपकी मेहनत ही आपको सक्सेस दिलाएगी तो आप बहुत बड़े धोखे में जी रहे हैं। बिना बढ़िया कम्युनिकेशन के आप ऑफिस के उस एवरेज लड़के से भी पीछे रह जाएंगे जो बस बातें बनाना जानता है। अपनी स्किल्स बर्बाद होते देखना है तो यह आर्टिकल मत पढ़ना।
करियर में गुड से ग्रेट बनने के लिए कार्माइन गैलो की बुक फाइव स्टार्स एक वरदान है। आइए समझते हैं वह ३ लेसन्स जो आपकी बात करने का तरीका और आपकी लाइफ दोनों को पूरी तरह बदल देंगे।
लेसन १ : एरिस्टोटल का जादुई फार्मूला - भरोसा, तर्क और भावना
क्या आपको लगता है कि ऑफिस की मीटिंग में सिर्फ डेटा और एक्सेल शीट दिखा देने से बॉस आपकी सैलरी बढ़ा देगा। अगर हाँ, तो आप उस दुनिया में जी रहे हैं जहाँ लोग रोबोट्स से बात करते हैं। असल दुनिया में लोग इंसानों से बात करते हैं। कार्माइन गैलो अपनी बुक फाइव स्टार्स में हमें सदियों पुराना एक राज बताते हैं जिसे एरिस्टोटल ने ईजाद किया था। इसे कहते हैं थ्री पिलर्स ऑफ पर्सुएजन। इसमें तीन चीजें आती हैं इथोस, लोगोस और पैथोस। अगर आपकी बात में ये तीनों नहीं हैं, तो आपकी बात की वैल्यू कबाड़ जितनी भी नहीं है।
सबसे पहले बात करते हैं इथोस यानी आपकी साख की। मान लीजिए गली का कोई आवारा कुत्ता आपको आकर बताए कि शेयर मार्केट में पैसा कैसे लगाना है, तो क्या आप उसकी बात मानेंगे। बिल्कुल नहीं। भले ही वह कुत्ता कुत्ता न होकर कोई स्टॉक मार्केट जीनियस ही क्यों न हो। क्यों। क्योंकि उसका इथोस यानी उसकी क्रेडिबिलिटी जीरो है। जब आप अपनी बात रखते हैं, तो लोग सबसे पहले यह देखते हैं कि आप कौन हैं और आपकी औकात क्या है। अगर आपने पास्ट में अपना काम ढंग से किया है, तो ही लोग आपको सुनेंगे। वरना आप बस हवा में तीर चला रहे हैं।
दूसरा पिलर है लोगोस। इसका मतलब है लॉजिक या तर्क। हमारे पास कुछ ऐसे दोस्त होते हैं जो बस लंबी लंबी फेंकते हैं जिनका न कोई सिर होता है और न पैर। जैसे यह कहना कि मेरे चाचा विधायक हैं तो मुझे ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने का हक है। यह लॉजिक नहीं है, यह बेवकूफी है। लोगोस का मतलब है अपनी बात को फैक्ट्स और सबूतों के साथ पेश करना। अगर आप कह रहे हैं कि कंपनी का फायदा होगा, तो भाई कैसे होगा। डेटा दिखाओ। लेकिन यहाँ एक ट्विस्ट है। सिर्फ डेटा दिखाकर आप किसी का दिल नहीं जीत सकते। डेटा तो कैलकुलेटर के पास भी बहुत होता है, पर क्या कोई कैलकुलेटर से प्यार करता है।
यहीं एंट्री होती है सबसे जरूरी पिलर की जिसे पैथोस कहते हैं। पैथोस यानी इमोशनल कनेक्शन। इंसानी दिमाग भावनाओं से चलता है, लॉजिक से नहीं। अगर ऐसा होता तो कोई भी इंसान सिगरेट नहीं पीता क्योंकि पैकेट पर लॉजिकली लिखा होता है कि इससे कैंसर होता है। लोग सिगरेट छोड़ते हैं जब उन्हें अपने परिवार की फिक्र होती है। वह भावना है। जब आप अपनी बात में जज्बात जोड़ते हैं, तभी वह किसी के दिल को छूती है।
सोचिए आप एक नया बिजनेस आईडिया पिच कर रहे हैं। आप बताते हैं कि आप कितने एक्सपर्ट हैं (इथोस)। आप दिखाते हैं कि मार्केट में कितनी डिमांड है (लोगोस)। और आखिर में आप एक ऐसी कहानी सुनाते हैं कि कैसे आपका यह आईडिया किसी गरीब की जिंदगी बदल देगा (पैथोस)। बस, गेम ओवर। आपने सामने वाले को अपना मुरीद बना लिया है। अगर आप सिर्फ लॉजिक पर अटके रहे, तो लोग आपको बोरिंग समझकर इग्नोर कर देंगे। और अगर सिर्फ इमोशनल हुए, तो लोग आपको ड्रामेबाज कहेंगे। इन तीनों का सही मिक्स ही आपको एक फाइव स्टार कम्युनिकेटर बनाता है। वरना आप बस भीड़ का हिस्सा बने रहेंगे और लोग आपकी बातों पर ऐसे ही ध्यान देंगे जैसे आप यूट्यूब के एड्स पर देते हैं।
लेसन २ : स्टोरीटेलिंग - डेटा को भूल जाओ, कहानी सुनाओ
क्या आपको अपने स्कूल की वह मैथ की क्लास याद है जहाँ टीचर बस ब्लैकबोर्ड पर नंबर्स घिसता रहता था। शायद नहीं। लेकिन क्या आपको वह कहानी याद है जो आपकी दादी ने बचपन में सुनाई थी। बिल्कुल याद होगी। क्यों। क्योंकि हमारा दिमाग फैक्ट्स के लिए नहीं, बल्कि कहानियों के लिए बना है। कार्माइन गैलो कहते हैं कि अगर आप अपनी प्रेजेंटेशन में सिर्फ ग्राफ और चार्ट्स लेकर जाते हैं, तो आप सामने वाले को लोरी सुना रहे हैं। वह सोएगा नहीं तो और क्या करेगा।
सोचिए आप अपने ऑफिस में एक नया सॉफ्टवेयर बेचने की कोशिश कर रहे हैं। आप कहते हैं कि यह सॉफ्टवेयर ३० परसेंट तेज है और इसमें ५० नए फीचर्स हैं। सामने वाला बैठा इंसान मन ही मन सोच रहा है कि आज खाने में क्या बना होगा। उसे रत्ती भर फर्क नहीं पड़ता आपके फीचर्स से। लेकिन अगर आप उसे एक कहानी सुनाएं। आप कहें कि पिछले महीने राहुल नाम का एक एम्प्लॉई रात के २ बजे तक ऑफिस में बैठा रो रहा था क्योंकि उसका पुराना सिस्टम क्रैश हो गया था। उसकी बेटी का जन्मदिन था और वह घर नहीं जा पाया। फिर हमने उसे यह नया सॉफ्टवेयर दिया। अब राहुल शाम को ६ बजे घर जाता है और अपनी बेटी के साथ पार्क में खेलता है।
अब आपने सामने वाले का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। क्यों। क्योंकि अब यह सॉफ्टवेयर की बात नहीं है, अब यह राहुल की जिंदगी और उसकी खुशियों की बात है। कहानियाँ हमारे दिमाग में एक ऐसा केमिकल रिलीज करती हैं जिसे डोपामाइन कहते हैं। यह केमिकल हमें फोकस करने पर मजबूर कर देता है। अगर आप बिना कहानी के बात कर रहे हैं, तो आप बस शोर मचा रहे हैं। और यकीन मानिए, दुनिया में शोर की कोई कमी नहीं है।
अक्सर लोग कहते हैं कि भाई हम तो प्रोफेशनल हैं, हम कहानियाँ क्यों सुनाएं। यह कोई फिल्म थोड़ी ही है। तो सुनिए, दुनिया के सबसे सफल लोग, चाहे वह स्टीव जॉब्स हों या एलोन मस्क, वे सब बेहतरीन कहानीकार हैं। स्टीव जॉब्स जब आईफोन लॉन्च कर रहे थे, तो उन्होंने यह नहीं कहा कि यह एक फोन है जिसमें इंटरनेट चलता है। उन्होंने कहा कि आज हम तीन क्रांतिकारी डिवाइस लॉन्च कर रहे हैं। लोग चौंक गए। बाद में पता चला कि वह तीनों डिवाइस एक ही थे। यह होती है स्टोरीटेलिंग की ताकत।
अगर आप किसी को इम्प्रेस करना चाहते हैं, तो उसे अपनी जीत के साथ-साथ अपनी हार की कहानी भी सुनाइए। लोग परफेक्ट लोगों से नफरत करते हैं, पर वे उन लोगों से जुड़ते हैं जो अपनी कमियां दिखाने की हिम्मत रखते हैं। अगर आप सिर्फ अपनी तारीफों के पुल बांधेंगे, तो लोग सोचेंगे कि आप कितने बड़े फेकू हैं। लेकिन अगर आप बताएंगे कि कैसे आप एक बार बुरी तरह फेल हुए और फिर आपने वापसी की, तो लोग आपके फैन बन जाएंगे।
तो अगली बार जब आप किसी इंटरव्यू में बैठें या किसी क्लाइंट से बात करें, तो बोरिंग डेटा की जगह एक छोटी सी कहानी सुनाना। ऐसी कहानी जिसमें एक विलेन हो (जैसे कि कोई प्रॉब्लम), एक हीरो हो (जैसे कि आपका सोल्यूशन), और एक हैप्पी एंडिंग हो। वरना आप बस डेटा के समंदर में डूब जाएंगे और कोई आपको बचाने भी नहीं आएगा।
लेसन ३ : सरलता का जादू - मुश्किल शब्दों से पीछा छुड़ाओ
क्या आपको लगता है कि भारी भरकम अंग्रेजी शब्द बोलने से या बहुत ही टेक्निकल भाषा का इस्तेमाल करने से आप कूल और इंटेलिजेंट दिखेंगे। अगर आप ऐसा सोचते हैं, तो मुबारक हो, आप पूरी तरह से गलत हैं। असल में, जब आप अपनी बात को मुश्किल बना देते हैं, तो सामने वाले का दिमाग शटडाउन मोड में चला जाता है। कार्माइन गैलो अपनी किताब फाइव स्टार्स में बताते हैं कि जो इंसान अपनी बात को एक छोटे बच्चे को नहीं समझा सकता, उसे खुद वह बात समझ में नहीं आई है।
अक्सर लोग अपनी नॉलेज झाड़ने के चक्कर में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जिन्हें सुनकर डिक्शनरी भी शरमा जाए। मान लीजिए आप एक डॉक्टर के पास गए और उसने आपसे कहा कि आपको 'एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्कशन' हुआ है। आप तो वहीं बेहोश हो जाएंगे यह सोचकर कि अब यमराज आने ही वाले हैं। लेकिन अगर वही डॉक्टर कहे कि आपको हल्का सा हार्ट अटैक आया है और आप ठीक हो जाएंगे, तो आपको तसल्ली होगी। सरलता में ही असली ताकत है।
फाइव स्टार्स बुक में गैलो एक बहुत मजेदार बात बताते हैं। रिसर्च कहती है कि जब आप आसान भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो लोग आपको ज्यादा स्मार्ट समझते हैं। जी हाँ, आपने सही सुना। मुश्किल शब्द आपको स्मार्ट नहीं, बल्कि अहंकारी और कन्फ्यूज्ड दिखाते हैं। सोचिए, अगर कोई आपको समझा रहा है कि कैसे पानी पीना चाहिए और वह उसमें 'H2O' का मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर और 'हाइड्रेशन काइनेटिक्स' घुसा दे, तो आप उसे पानी पिलाने के बजाय धक्का दे देंगे।
महान कम्युनिकेटर्स जैसे वारेन बफेट हमेशा बहुत ही सिंपल भाषा का प्रयोग करते हैं। वे जटिल से जटिल फाइनेंशियल बातों को ऐसे समझाते हैं जैसे कोई पड़ोस का अंकल बातें कर रहा हो। वे जानते हैं कि अगर सामने वाले को आपकी बात समझ ही नहीं आई, तो वह आप पर भरोसा कभी नहीं करेगा। और बिना भरोसे के कोई भी डील क्लोज नहीं होती।
सरलता का मतलब यह नहीं है कि आप बचकानी बातें करें। इसका मतलब है कि आप अपनी बात को इतना साफ रखें कि उसमें कोई मिलावट न हो। जब आप छोटे वाक्यों का उपयोग करते हैं और सीधा पॉइंट पर आते हैं, तो आप सामने वाले का समय बचाते हैं। और आज के दौर में समय ही सबसे कीमती चीज है। अगर आप किसी का समय बर्बाद करेंगे अपनी फालतू की शब्दावली से, तो वह अगली बार आपका फोन भी नहीं उठाएगा।
तो अपने अंदर के उस 'शशि थरूर' को थोड़ा शांत रखिए और आम आदमी की भाषा में बात करना सीखिए। अगर आपकी बात एक चाय वाले से लेकर एक सीईओ तक सबको समझ आ रही है, तो समझ लीजिए कि आप एक फाइव स्टार कम्युनिकेटर बन चुके हैं। वरना आप बस अपनी ही दुनिया के राजा बने रहेंगे जहाँ आपकी प्रजा यानी आपकी बातें किसी को समझ नहीं आतीं।
दोस्तों, कम्युनिकेशन सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है, यह दिल तक पहुँचने का रास्ता है। क्या आप आज से अपनी बातचीत में सरलता लाएंगे। कमेंट्स में बताएं कि इन तीन लेसन्स में से कौन सा आपकी जिंदगी बदल सकता है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जरूर शेयर करें जो बहुत ज्यादा 'फेंकता' है। याद रखिए, आपकी आवाज ही आपकी पहचान है।
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