From Impossible to Inevitable (Hindi)


क्या आप अभी भी उसी घिसे पिटे तरीके से सेल्स बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और फिर भी बैंक बैलेंस खाली पड़ा है। बधाई हो आप अपनी मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद करने में एक्सपर्ट बन चुके हैं। बिना सही सिस्टम के ग्रोथ की उम्मीद करना खुद को धोखा देने जैसा है।

आज हम एरोन रॉस और जेसन लेमकिन की किताब फ्रॉम इम्पॉसिबल टू इनएविटेबल से वो सीक्रेट तरीके सीखेंगे जो आपके बिजनेस को रॉकेट की तरह उड़ा देंगे। चलिए इन 3 पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं जो आपकी पूरी सोच बदल देंगे।


लेसन १ : नेलिंग अ नीश - अपनी छोटी दुनिया के राजा बनिए

ज्यादातर लोग बिजनेस शुरू करते ही पूरी दुनिया को अपना सामान बेचना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि जितना बड़ा मार्केट होगा उतनी ज्यादा कमाई होगी। लेकिन असलियत में यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। अगर आप सबको खुश करने की कोशिश करेंगे तो आप किसी को भी खुश नहीं कर पाएंगे। आप उस मोहल्ले के हलवाई की तरह बन जाएंगे जो समोसा भी बेचता है और मोबाइल रिचार्ज भी करता है। नतीजा यह होता है कि लोग समोसे के लिए कहीं और जाते हैं और मोबाइल के लिए कहीं और। इस किताब का पहला पावरफुल लेसन यही है कि आपको अपनी नीश यानी अपना खास कोना पकड़ना होगा। जब तक आप एक छोटी जगह के एक्सपर्ट नहीं बनेंगे तब तक आप बड़े मार्केट में नहीं टिक पाएंगे।

सोचिए आप एक डॉक्टर के पास जाते हैं। एक डॉक्टर जनरल फिजिशियन है जो जुकाम से लेकर घुटने के दर्द तक सब देखता है। दूसरा डॉक्टर केवल दिल का ऑपरेशन करता है। अब आप खुद सोचिए कि ज्यादा इज्जत और पैसा किसके पास होगा। जाहिर है उस स्पेशलिस्ट के पास जिसके पास लोग अपनी जान बचाने जाते हैं। बिजनेस में भी यही लॉजिक काम करता है। आपको अपना कस्टमर बेस इतना छोटा और सटीक बनाना होगा कि आपकी सर्विस उनके लिए ऑक्सीजन बन जाए। अगर आप एक सॉफ्टवेयर बना रहे हैं तो यह मत कहिए कि यह सबके काम आएगा। इसके बजाय यह कहिए कि यह केवल उन जिम मालिकों के लिए है जिनके पास 500 से ज्यादा मेंबर्स हैं। सुनने में यह छोटा लग सकता है लेकिन यही आपकी असली ताकत है।

जब आपकी नीश क्लियर होती है तो आपकी मार्केटिंग आसान हो जाती है। आपको फेसबुक या गूगल पर पैसा पानी की तरह नहीं बहाना पड़ता। आप सीधे उन लोगों तक पहुँचते हैं जिन्हें आपकी सच में जरूरत है। मान लीजिए आप एक फिटनेस कोच हैं। अगर आप सबको वजन कम करने की सलाह देंगे तो आप करोड़ों लोगों की भीड़ में खो जाएंगे। लेकिन अगर आप कहें कि आप केवल उन आईटी प्रोफेशनल्स की मदद करते हैं जो दिन भर कुर्सी पर बैठते हैं और जिन्हें कमर दर्द की समस्या है तो आप एक झटके में यूनिक बन जाएंगे। अब वो आईटी प्रोफेशनल आपको ढूंढता हुआ आएगा क्योंकि आपने उसकी दुखती रग पर हाथ रखा है।

नीश पकड़ने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी ग्रोथ रोक रहे हैं। इसका मतलब है कि आप एक मजबूत नींव बना रहे हैं। एक बार जब आप एक छोटे मार्केट में अपनी धाक जमा लेते हैं तब आप दूसरे मार्केट में पैर फैला सकते हैं। जैसे अमेजन ने सबसे पहले केवल किताबें बेचना शुरू किया था। वो चाहते तो पहले दिन से ही सुई से लेकर हवाई जहाज तक बेच सकते थे लेकिन उन्होंने अपनी नीश को पकड़े रखा। जब वो किताबों के बादशाह बन गए तब उन्होंने बाकी दुनिया पर कब्जा किया। अगर आप शुरुआत में ही सब कुछ करने की कोशिश करेंगे तो आप बीच में ही थक कर बैठ जाएंगे और आपका कंपटीटर आपसे आगे निकल जाएगा।

इसलिए अपनी ईगो को थोड़ा साइड में रखिए। यह सोचना बंद कीजिए कि आपका प्रोडक्ट हर इंसान के लिए बना है। सच तो यह है कि आपका प्रोडक्ट उन लोगों के लिए है जो उसकी असली वैल्यू समझते हैं। जब आप अपनी नीश को छोटा करते हैं तो आपका मैसेज लाउड और क्लियर हो जाता है। लोग आप पर भरोसा करने लगते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आप उनकी प्रॉब्लम को अच्छी तरह समझते हैं। यही वो सीक्रेट है जो एक इम्पॉसिबल बिजनेस को इनएविटेबल यानी सफल होने के लिए मजबूर कर देता है। अब जब आप अपना इलाका चुन चुके हैं तो अगला सवाल यह है कि वहां शिकार कैसे किया जाए।


लेसन २ : क्रिएटिंग प्रेडिक्टेबल पाइपलाइन - लक के भरोसे बैठना छोड़िए

ज्यादातर बिजनेस मालिक एक बहुत बड़ी गलती करते हैं। वो उम्मीद के सहारे अपना बिजनेस चलाते हैं। आज एक बड़ा आर्डर मिल गया तो पार्टी शुरू और कल अगर फोन नहीं बजा तो मातम छा जाता है। इसे 'होप मार्केटिंग' कहते हैं और यकीन मानिए यह आपके बिजनेस को बर्बाद करने का सबसे तेज तरीका है। अगर आप अपने रेवेन्यू के लिए केवल किस्मत या किसी चमत्कार का इंतजार कर रहे हैं तो आप बिजनेस नहीं कर रहे बल्कि जुआ खेल रहे हैं। इस किताब का दूसरा सबसे बड़ा लेसन यह है कि आपको एक ऐसी पाइपलाइन बनानी होगी जो प्रेडिक्टेबल हो। यानी आपको महीने की पहली तारीख को पता होना चाहिए कि महीने के आखिर तक आपके पास कितनी लीड्स आएंगी और कितना पैसा अंदर आएगा।

सोचिए आपके पास एक जादुई नल है। जब आपको पानी चाहिए आप उसे खोलते हैं और पानी आने लगता है। सेल्स पाइपलाइन भी बिल्कुल वैसी ही होनी चाहिए। इसके लिए आपको 'लीड जनरेशन' को एक सिस्टम की तरह देखना होगा। लोग अक्सर सोचते हैं कि सेल्स टीम का काम सिर्फ बेचना है। लेकिन लेखक कहते हैं कि सेल्स टीम को दो हिस्सों में बांटना बहुत जरूरी है। एक वो जो सिर्फ नए दरवाजे खटखटाते हैं यानी लीड्स ढूंढते हैं और दूसरे वो जो उन लीड्स को क्लोज करके पैसा लाते हैं। अगर आप अपने बेस्ट सेल्समैन से कहेंगे कि भाई तू खुद ही कोल्ड कॉलिंग कर और खुद ही मीटिंग भी कर तो वो बेचारा खिचड़ी बन जाएगा। वह न तो ढंग से लीड्स ढूंढ पाएगा और न ही सेल क्लोज कर पाएगा।

इस सिस्टम को एक क्रिकेट टीम की तरह समझिए। एक ओपनर का काम है टीम को अच्छी शुरुआत देना और फिनिशर का काम है मैच जिताना। अगर आप फिनिशर को कहेंगे कि तू ही जाकर ओपनिंग कर तो शायद वो जल्दी आउट हो जाए। बिजनेस में भी जो लोग लीड्स निकालते हैं उन्हें 'सेल्स डेवलपमेंट रिप्रेजेंटेटिव' कहा जाता है। उनका काम सिर्फ यह पक्का करना है कि पाइपलाइन में हमेशा फ्रेश पानी बहता रहे। जब पाइपलाइन भरी होती है तो आपके क्लोजर्स यानी सेल्स एक्सपर्ट्स को डर नहीं लगता। उन्हें पता होता है कि अगर एक डील हाथ से निकल भी गई तो पीछे दस और खड़ी हैं। यही वो कॉन्फिडेंस है जो आपको मार्केट में एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है।

अब बात करते हैं उस सबसे बड़े डर की जिसे 'कोल्ड आउटरीच' कहते हैं। बहुत से लोगों को अनजान लोगों को कॉल या ईमेल करने में शर्म आती है। उन्हें लगता है कि लोग उन्हें रिजेक्ट कर देंगे। लेकिन यहाँ एक कड़वा सच सुन लीजिए। अगर आप अपनी शर्म नहीं छोड़ सकते तो आप पैसा कमाना भी भूल जाइए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप पागलों की तरह सबको स्पैम करना शुरू कर दें। आपको 'सेल्स स्पेशलाइजेशन' का सहारा लेना होगा। जब आप सही नीश के लोगों को सही मैसेज भेजते हैं तो वो इसे डिस्टरबेंस नहीं बल्कि अपनी समस्या का समाधान मानते हैं। अगर आप किसी प्यासे को पानी ऑफर करेंगे तो वो आपको गाली नहीं देगा बल्कि शुक्रिया कहेगा।

प्रेडिक्टेबल पाइपलाइन बनाने का असली मजा तब आता है जब आप डेटा पर ध्यान देते हैं। आपको पता होना चाहिए कि अगर आप 100 लोगों को ईमेल भेजते हैं तो उनमें से 10 लोग आपसे बात करेंगे और उन 10 में से 2 लोग आपका सामान खरीदेंगे। जब आपको यह गणित समझ आ जाता है तो बिजनेस एक खेल बन जाता है। अब अगर आपको 20 सेल्स चाहिए तो आपको बस अपनी मेहनत को दस गुना बढ़ाना है और 1000 लोगों तक पहुँचना है। लक का यहाँ कोई काम नहीं है। यह शुद्ध रूप से मैथ है। जब आपका सिस्टम इतना सॉलिड हो जाता है तो आपकी नींद भी अच्छी आती है और आपका बैंक अकाउंट भी हमेशा मुस्कुराता रहता है।


लेसन ३ : स्केलिंग द टीम - खुद को फ्री कीजिए और सिस्टम को बड़ा बनाइए

जब पैसा आने लगता है और बिजनेस बढ़ने लगता है, तो ज्यादातर फाउंडर्स एक बहुत बड़े जाल में फंस जाते हैं। उन्हें लगता है कि वो 'सुपरमैन' हैं। वो सेल्स भी खुद देखना चाहते हैं, कस्टमर सपोर्ट भी खुद संभालते हैं और ऑफिस की चाय पत्ती खत्म हो जाए तो उसका हिसाब भी खुद रखते हैं। अगर आप भी ऐसा ही कर रहे हैं, तो मुबारक हो, आपने खुद के लिए एक बहुत थका देने वाली नौकरी पैदा कर ली है, बिजनेस नहीं। इस किताब का तीसरा और सबसे क्रिटिकल लेसन यह है कि ग्रोथ को सस्टेन करने के लिए आपको 'स्केलिंग' करनी पड़ेगी। और स्केलिंग का मतलब सिर्फ ज्यादा लोग भर्ती करना नहीं है, बल्कि सही लोगों को सही सिस्टम में डालना है ताकि आपके बिना भी काम मक्खन की तरह चलता रहे।

सोचिए एक ऐसी फुटबॉल टीम के बारे में जहाँ गोलकीपर ही बॉल लेकर आगे भाग रहा है और वही गोल करने की कोशिश भी कर रहा है। ऐसी टीम कभी कोई बड़ा टूर्नामेंट नहीं जीत सकती। स्केलिंग का पहला नियम है कि आप अपनी टीम को स्पेशलाइज्ड बनाएं। जैसा हमने पिछले लेसन में देखा कि सेल्स को बांटना जरूरी है, वैसे ही पूरी कंपनी को बांटना होगा। आपको ऐसे लोग चाहिए जो आपसे भी बेहतर काम कर सकें। अगर आप अपनी कंपनी के सबसे स्मार्ट इंसान हैं, तो यकीन मानिए आपकी कंपनी बहुत बड़ी मुसीबत में है। आपको खुद को धीरे-धीरे 'डे टू डे' कामों से बाहर निकालना होगा ताकि आप भविष्य की प्लानिंग कर सकें। अगर आप हर वक्त आग बुझाने में लगे रहेंगे, तो नया रास्ता कब बनाएंगे।

अक्सर लोग कहते हैं कि अच्छे लोग मिलते नहीं हैं। लेकिन असलियत यह है कि आप अच्छे लोगों को ढूंढना ही नहीं चाहते क्योंकि आपको अपनी कुर्सी और पावर से प्यार है। आपको लगता है कि आपके जितना अच्छा काम कोई और नहीं कर सकता। यह आपकी ईगो है, जो आपकी ग्रोथ की सबसे बड़ी दुश्मन है। एक सफल कंपनी वो होती है जहाँ फाउंडर की जरूरत कम से कम हो। आपको अपनी टीम को फैसले लेने की आजादी देनी होगी। उन्हें गलती करने का मौका दीजिए। जब तक वो खुद गिरेंगे नहीं, वो संभलना कैसे सीखेंगे। एक लीडर का काम रास्ता दिखाना है, न कि रास्ते पर झाड़ू लगाना।

स्केलिंग के दौरान कल्चर पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। जब आपकी टीम 5 लोगों की होती है, तो सब साथ बैठकर समोसे खाते हैं और विजन शेयर करते हैं। लेकिन जब यही टीम 50 या 500 की हो जाती है, तो विजन धुंधला पड़ने लगता है। नए लोगों को पता ही नहीं होता कि कंपनी शुरू क्यों हुई थी। यहाँ आपको प्रोसेस और डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत पड़ती है। हर चीज का एक 'प्लेबुक' होना चाहिए। अगर कोई नया इंसान टीम ज्वाइन करे, तो उसे पता होना चाहिए कि यहाँ काम कैसे होता है। बिना सिस्टम के ग्रोथ सिर्फ एक अफरा-तफरी है, जो कभी भी ढह सकती है।

अंत में, याद रखिए कि हाइपर ग्रोथ एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं। अगर आप शुरुआत में ही अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे और टीम को मशीन की तरह ट्रीट करेंगे, तो लोग थक कर साथ छोड़ देंगे। आपको एक ऐसा माहौल बनाना है जहाँ लोग काम करना चाहें, न कि मजबूरी में आएं। जब आपकी टीम, आपकी पाइपलाइन और आपकी नीश तीनों सिंक में होते हैं, तब आपका बिजनेस उस लेवल पर पहुँच जाता है जहाँ सफलता इम्पॉसिबल नहीं बल्कि इनएविटेबल यानी निश्चित हो जाती है। अब सवाल यह है कि क्या आप अपनी ईगो छोड़कर एक बड़ा साम्राज्य बनाने के लिए तैयार हैं।


बिजनेस बड़ा करना कोई जादू नहीं बल्कि एक साइंस है। अगर आप भी उस पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं जहाँ सिर्फ मेहनत ही सब कुछ है, तो रुक जाइए। आज ही अपनी नीश पहचानिए, एक सिस्टम बनाइए और अपनी टीम पर भरोसा करना सीखिए। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिए जो दिन भर काम में डूबा रहता है लेकिन फिर भी आगे नहीं बढ़ पा रहा। आपकी एक शेयरिंग किसी का बिजनेस और जिंदगी बदल सकती है। चलिए, साथ मिलकर ग्रो करते हैं।

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