The Third Wave (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आप केवल एक एप बनाकर और फेसबुक पर एड्स चलाकर अगले करोड़पति बन जाएंगे तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का इंतजार कर रहे हैं। बिना पार्टनरशिप और पॉलिसी समझे बिजनेस करना वैसा ही है जैसे बिना पानी के तैरना सीखना। अपनी पुरानी सोच बदलिए वरना दुनिया आपको पीछे छोड़ देगी।

आज हम स्टीव केस की किताब द थर्ड वेव के जरिए इंटरनेट की उस अगली लहर को समझेंगे जो आपके बिजनेस करने के तरीके को पूरी तरह बदलने वाली है। चलिए जानते हैं वो ३ लेसन जो आपको भविष्य के लिए तैयार करेंगे।


लेसन १ : पार्टनरशिप ही असली पावर है

आजकल के नए नवेले स्टार्टअप फाउंडर्स को लगता है कि वो अपने गैरेज में बैठकर दुनिया हिला देंगे। उनको लगता है कि बस एक कूल सा एप बना लिया और कोडिंग कर ली तो मार्क जुकरबर्ग उनके घर चाय पीने आएगा। लेकिन स्टीव केस कहते हैं कि भाई साहब जाग जाइए। इंटरनेट की पहली लहर में सब कुछ नया था। दूसरी लहर में एप्स और सोशल मीडिया का बोलबाला था। लेकिन अब हम तीसरी लहर में हैं जहाँ आप अकेले कुछ नहीं उखाड़ सकते। यहाँ आपको पार्टनरशिप करनी ही पड़ेगी।

सोचिए आप एक बहुत शानदार हेल्थ टेक एप बनाते हैं। आपका एप इतना स्मार्ट है कि वो इंसान की धड़कन सुनकर बता दे कि उसे कल जुकाम होने वाला है। अब आप जोश में आकर मार्केट में उतरते हैं लेकिन तभी आपको पता चलता है कि हॉस्पिटल वाले आपको घास भी नहीं डाल रहे। क्यों? क्योंकि आपने उनके साथ पार्टनरशिप नहीं की। आप सोच रहे थे कि आप अकेले ही पूरा मेडिकल सिस्टम बदल देंगे। यह वैसा ही है जैसे आप एक बहुत बड़ी शादी में बिना बुलाए मेहमान की तरह घुस जाएँ और उम्मीद करें कि दूल्हा आपको अपनी बगल में बिठाएगा। बिना सही तालमेल और पार्टनरशिप के आपका आइडिया कितना भी बड़ा क्यों न हो वह कचरे के डिब्बे में ही जाएगा।

तीसरी लहर में आपको उन लोगों के साथ हाथ मिलाना होगा जो पहले से उस सेक्टर में जमे हुए हैं। अगर आप एजुकेशन में कुछ करना चाहते हैं तो आपको स्कूलों और यूनिवर्सिटीज के चक्कर लगाने होंगे। अगर आप एनर्जी सेक्टर में हैं तो आपको पावर ग्रिड कंपनियों के साथ बैठना होगा। यह ईगो का गेम नहीं है यह सर्वाइवल का गेम है। स्टीव केस ने एओएल के समय यही किया था। उन्होंने कंप्यूटर बनाने वाली कंपनियों के साथ हाथ मिलाया ताकि जब भी कोई नया पीसी खरीदे तो एओएल का सॉफ्टवेयर पहले से उसमें हो। आज के जमाने में लोग सोचते हैं कि कंपटीटर को खत्म कर दो। लेकिन असल समझदारी उसे अपना पार्टनर बनाने में है ताकि आप दोनों मिलकर उस बड़ी मछली को पकड़ सकें जिसे अकेले पकड़ना मुमकिन नहीं है।

आज के इंडियन स्टार्टअप इकोसिस्टम को देखिए। जो लोग कहते थे कि हम बैंकों को बंद करवा देंगे आज वही लोग बैंकों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। क्यों? क्योंकि उनको समझ आ गया है कि बिना सिस्टम के साथ जुड़े आप सिस्टम को नहीं बदल सकते। अगर आप अपनी जिद पर अड़े रहे कि मैं तो अकेला ही काफी हूँ तो यकीन मानिए आप अकेले ही रह जाएंगे और आपकी कंपनी का नाम इतिहास के पन्नों में कहीं खो जाएगा। पार्टनरशिप का मतलब यह नहीं है कि आप कमजोर हैं। इसका मतलब यह है कि आप इतने स्मार्ट हैं कि आपको पता है कि रास्ता कैसे साफ करना है।


लेसन २ : परसेवरेंस यानी लंबी रेस का धैर्य

आजकल के युवाओं को हर चीज इंस्टेंट चाहिए। दो मिनट में नूडल्स चाहिए और दो महीने में स्टार्टअप से एक्जिट चाहिए। अगर किसी ने कह दिया कि स्टार्टअप में बहुत पैसा है तो लोग अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़कर ऑफिस के बाहर बोर्ड लगा देते हैं। लेकिन भाई साहब तीसरी लहर कोई टी-२० मैच नहीं है बल्कि यह एक लंबा टेस्ट मैच है जहाँ पिच पर टिके रहना ही असली जीत है। स्टीव केस कहते हैं कि आने वाले समय में वही बिजनेस बचेंगे जिनमें धैर्य होगा। इंटरनेट की दूसरी लहर में आपने एक एप बनाया और रातों रात आप वायरल हो गए। लेकिन अब ऐसा नहीं होने वाला।

सोचिए आप एक नया इलेक्ट्रिक व्हीकल का स्टार्टअप शुरू करते हैं। आप पहले दिन से ही टेस्ला को टक्कर देने के सपने देख रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि आपको पहले चार्जिंग स्टेशन के लिए जगह ढूंढनी होगी फिर सरकार से परमिशन लेनी होगी और फिर लोगों का भरोसा जीतना होगा। इसमें सालों लग सकते हैं। अगर आप तीन महीने बाद ही यह कहकर बैठ गए कि यार इसमें तो बहुत सरदर्दी है तो बेहतर है कि आप वापस जाकर अपनी नौ से पांच वाली नौकरी पकड़ लीजिए। यहाँ आपकी कोडिंग से ज्यादा आपकी जिद्द काम आएगी। यह वैसा ही है जैसे आप किसी को प्रपोज करें और वो मना कर दे लेकिन आप हार मानने के बजाय खुद को बेहतर बनाते रहें जब तक कि वो सामने से आकर हाँ न कह दे। बस ध्यान रखिएगा कि यहाँ आपको जेल नहीं जाना है बल्कि मार्केट में जमे रहना है।

तीसरी लहर में टेक्नोलॉजी अब केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं है। यह हमारे खाने में है हमारी सेहत में है और हमारे बच्चों की पढ़ाई में है। इन चीजों को बदलने में वक्त लगता है क्योंकि यहाँ आप इंसानी आदतों से खेल रहे हैं। एओएल के शुरुआती दिनों में स्टीव केस को भी यही दिक्कत आई थी। उस समय लोगों को समझाना पड़ता था कि इंटरनेट क्या बला है। लोग कहते थे कि हमें इसकी क्या जरूरत है। लेकिन स्टीव ने हार नहीं मानी। उन्होंने लाखों फ्लॉपी डिस्क मुफ्त में बांटीं ताकि लोग एक बार इसे चलाकर देखें। आज हम जिस इंटरनेट के बिना एक पल नहीं रह सकते उसे घर घर पहुँचाने के लिए सालों की मेहनत और सब्र लगा है।

अगर आप आज के दौर में स्टार्टअप करना चाहते हैं तो खुद से एक सवाल पूछिए। क्या आप अगले दस साल तक इसी काम को बिना थके कर सकते हैं? अगर आपका जवाब ना है तो फिर आप गलत रास्ते पर हैं। यहाँ सक्सेस का कोई शॉर्टकट नहीं है। आप जितने ज्यादा फेल होंगे आप उतने ही ज्यादा मजबूत बनेंगे। परसेवरेंस का मतलब सिर्फ लगे रहना नहीं है बल्कि अपनी गलतियों से सीखकर बार बार उठना है। याद रखिए तीसरी लहर में कछुआ ही जीतेगा क्योंकि खरगोश तो पहली रुकावट देखते ही सो जाएगा या रास्ता बदल लेगा। अगर आपको लगता है कि आप दुनिया बदलने आए हैं तो पहले खुद में इतना सब्र पैदा कीजिए कि दुनिया आपकी बात सुनने के लिए मजबूर हो जाए।


लेसन ३ : पॉलिसी और रेगुलेशन का गेम

अगर आपको लगता है कि सरकार और कानून केवल वकीलों के लिए हैं तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। इंटरनेट की तीसरी लहर में सरकार आपकी सबसे बड़ी दुश्मन भी हो सकती है और सबसे बड़ी दोस्त भी। स्टीव केस बड़े साफ शब्दों में कहते हैं कि अब आप अपनी मर्जी के मालिक नहीं बन सकते। जब आप लोगों की सेहत, उनके पैसे या उनकी शिक्षा के साथ डील करते हैं तो सरकार की नजर आप पर तिरछी रहती ही है। यह वैसा ही है जैसे आप अपने मोहल्ले के पार्क में क्रिकेट खेल रहे हों और अचानक मोहल्ले का वो अंकल आ जाए जिनकी खिड़की का कांच आपने पिछले हफ्ते तोड़ा था। अब आप चाहे कितना भी अच्छा खेल लें लेकिन बिना अंकल को खुश किए आप मैच पूरा नहीं कर पाएंगे।

सोचिए आप एक नया फिनटेक स्टार्टअप शुरू करते हैं जो लोगों को बिना किसी कागज के लोन देता है। आप बहुत खुश हैं कि टेक्नोलॉजी की मदद से आपने काम आसान कर दिया। लेकिन अचानक एक दिन आरबीआई का नोटिस आता है और आपका पूरा सिस्टम ठप हो जाता है। क्यों? क्योंकि आपने पॉलिसी और रेगुलेशन को हल्के में लिया था। आपको लगा कि आप तो बस एक एप चला रहे हैं जबकि सरकार की नजर में आप लोगों की मेहनत की कमाई के साथ खेल रहे थे। तीसरी लहर में टेक्नोलॉजी और सरकार के बीच का रिश्ता बहुत गहरा होने वाला है। यहाँ आपको केवल कोड लिखना नहीं आना चाहिए बल्कि आपको सरकारी फाइलों की भाषा भी समझनी होगी।

बहुत से फाउंडर्स को लगता है कि रेगुलेशन उनके रास्ते का पत्थर है लेकिन असल में यह आपकी सुरक्षा के लिए है। अगर आप पहले से ही सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे और उनके नियमों का पालन करेंगे तो आप एक ऐसा बिजनेस खड़ा कर पाएंगे जो सालों तक टिकेगा। एओएल के समय भी स्टीव केस ने यही किया था। उन्होंने वॉशिंगटन के चक्कर लगाए और लीडर्स को समझाया कि इंटरनेट भविष्य के लिए कितना जरूरी है। उन्होंने कानून बनने का इंतजार नहीं किया बल्कि कानून बनाने वालों की मदद की। यह एक बहुत बड़ी सीख है कि अगर आप सिस्टम को बदलना चाहते हैं तो आपको सिस्टम के अंदर घुसना ही पड़ेगा। बाहर खड़े होकर चिल्लाने से सिर्फ गला खराब होता है बदलाव नहीं आता।

आज के भारत में भी यही हो रहा है। चाहे वो डिजिटल पेमेंट हो या हेल्थ केयर, सरकार हर जगह नियम बना रही है। जो बिजनेसमैन इन नियमों को बोझ समझकर इनसे भाग रहे हैं वो बहुत जल्द गायब हो जाएंगे। लेकिन जो इन नियमों को समझकर इनके साथ तालमेल बिठा रहे हैं वो असली खिलाड़ी बनेंगे। इसलिए अगली बार जब आप अपना अगला बड़ा आइडिया सोचें तो यह जरूर देख लें कि सरकार उस बारे में क्या सोचती है। अपनी ईगो को साइड में रखिए और पॉलिसी मेकर्स के साथ हाथ मिलाइए। क्योंकि तीसरी लहर में वही राजा बनेगा जिसके पास टेक्नोलॉजी का दिमाग और कानून का साथ होगा।


तो दोस्तों, क्या आप इंटरनेट की इस तीसरी लहर में डूबने के लिए तैयार हैं या फिर स्टीव केस के इन लेसन्स को अपनाकर लहरों पर राज करेंगे? याद रखिए दुनिया बदल रही है और जो खुद को नहीं बदलता उसे वक्त बदल देता है। आज ही अपने बिजनेस और करियर को इन तीन लेसन्स के नजरिए से देखें। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखना चाहते हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपको कौन सा लेसन सबसे ज्यादा पसंद आया। चलिए साथ मिलकर इस तीसरी लहर का स्वागत करते हैं।

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