Give and Take (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो हर किसी की मदद करके खुद को बड़ा दानी समझते हैं पर असल में दुनिया आपका बेवकूफ काट कर चली जाती है। अगर आप सिर्फ दूसरों का भला सोचते रहे तो यकीन मानिए आप लाइफ की रेस में सबसे पीछे और अकेले रह जाएंगे।

लेकिन रुकिए। क्या आपको लगता है कि सिर्फ मतलबी लोग ही टॉप पर पहुँचते हैं। आज हम एडम ग्रांट की किताब गिव एंड टेक से जानेंगे कि कैसे एक स्मार्ट गिवर बनकर आप पूरी गेम बदल सकते हैं। चलिए इन तीन लेसन को गहराई से समझते हैं।


लेसन १ : दुनिया के तीन खिलाड़ी - गिवर्स, टेकर्स और मैचर्स

क्या आपने कभी सोचा है कि आपके ऑफिस या फ्रेंड सर्कल में कुछ लोग हमेशा दूसरों का काम छीनने के चक्कर में रहते हैं और कुछ बेचारे हर किसी की मदद करते करते खुद का काम भूल जाते हैं। एडम ग्रांट कहते हैं कि इस पूरी दुनिया में सिर्फ तीन तरह के लोग होते हैं। पहले होते हैं टेकर्स जिन्हें लगता है कि दुनिया एक कंपटीशन है जहाँ जीतने के लिए दूसरों को कुचलना जरूरी है। इनका मोटो बहुत सिंपल होता है कि अपना काम बनता और भाड़ में जाए जनता। ये लोग आपसे मीठी बातें तब तक करेंगे जब तक उन्हें आपसे कुछ चाहिए होगा और काम निकलते ही ये आपको ऐसे भूल जाएंगे जैसे पुराने फोन का चार्जर।

फिर आते हैं मैचर्स जो हिसाब किताब रखने में उस्ताद होते हैं। अगर आपने उन्हें एक चाय पिलाई है तो वो अगले हफ्ते आपको कॉफी पिलाने का वादा करेंगे ताकि हिसाब बराबर रहे। ये लोग न बहुत बुरे होते हैं और न बहुत महान। ये बस अपनी लाइफ का बैलेंस बनाकर चलना चाहते हैं। लेकिन असली जादू शुरू होता है गिवर्स के साथ। गिवर्स वो लोग होते हैं जो यह नहीं सोचते कि उन्हें बदले में क्या मिलेगा। वो बस मदद करने में यकीन रखते हैं।

अब आप सोच रहे होंगे कि भाई इंडिया जैसे देश में जहाँ लोग लाइन तोड़ने में अपनी शान समझते हैं वहाँ गिवर बनना मतलब अपनी बलि देना है। आप बिल्कुल सही सोच रहे हैं। डेटा दिखाता है कि सबसे नीचे वाले पायदान पर अक्सर गिवर्स ही होते हैं क्योंकि वो दूसरों की मदद करते करते अपनी डेडलाइन मिस कर देते हैं। लेकिन यहाँ एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है। दुनिया के सबसे टॉप पर बैठे लोग भी गिवर्स ही होते हैं। टेकर्स अक्सर जल्दी ऊपर तो पहुँच जाते हैं पर उनका गिरना भी उतना ही तेज होता है क्योंकि कोई भी गिरते हुए टेकर को सहारा नहीं देना चाहता।

मान लीजिए आपका एक दोस्त है जो हमेशा नोट्स माँगता रहता है पर जब आपकी बारी आती है तो उसका फोन स्विच ऑफ हो जाता है। वो एक क्लासिक टेकर है। वहीं एक दूसरा दोस्त है जो खुद एग्जाम की तैयारी छोड़कर आपको टॉपिक्स समझाता है। हो सकता है एक बार उसका खुद का स्कोर कम आए पर पूरी क्लास उसके लिए खड़ी रहेगी। लॉन्ग टर्म में जब नेटवर्किंग और ट्रस्ट की बात आती है तो गिवर्स का नेटवर्क इतना मजबूत हो जाता है कि कोई टेकर उसका मुकाबला नहीं कर सकता। तो सवाल यह है कि क्या आप एक स्मार्ट गिवर बनने के लिए तैयार हैं या फिर बस दूसरों का बैग उठाने वाले बन कर रहना चाहते हैं।


लेसन २ : फाइव मिनट फेवर की ताकत

अक्सर हमें लगता है कि किसी की मदद करने का मतलब है अपनी किडनी दान कर देना या फिर अपना पूरा बैंक बैलेंस खाली कर देना। लेकिन एडम ग्रांट हमें सिखाते हैं एक बहुत ही सिंपल और पावरफुल आइडिया जिसे कहते हैं फाइव मिनट फेवर। इसका मतलब है कि अगर आप किसी के लिए कुछ ऐसा कर सकते हैं जिसमें आपके सिर्फ पांच मिनट लगेंगे पर सामने वाले का बड़ा फायदा हो जाएगा तो उसे बिना सोचे कर दीजिए। यह कोई बहुत बड़ी समाज सेवा नहीं है बल्कि एक स्मार्ट नेटवर्किंग ट्रिक है जो आपको एक पावरफुल गिवर की लिस्ट में डाल देती है।

आज के दौर में हम सब इतने बिजी हैं कि बगल में बैठे कलीग को पानी पिलाने में भी हमें लगता है कि हमारा टाइम वेस्ट हो रहा है। हम सोचते हैं कि अगर मैं इसकी मदद कर दूँ तो क्या यह मुझे अगले महीने प्रमोशन दिलाएगा। अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो बधाई हो आप एक मैच्योर या फिर एक छुपे हुए टेकर हैं। लेकिन एक सफल गिवर जानता है कि छोटी छोटी मदद के बीज आगे चलकर एक बहुत बड़ा बरगद का पेड़ बनते हैं। मान लीजिए आपने किसी पुराने दोस्त को एक ऐसी जॉब ओपनिंग का लिंक भेज दिया जिसके लिए वो परफेक्ट है। आपको सिर्फ दो मिनट लगे पर उसके लिए यह उसकी पूरी लाइफ बदल देने वाला मौका हो सकता है।

कल्पना कीजिए कि आप एक मेट्रो स्टेशन पर हैं और किसी अंकल को समझ नहीं आ रहा कि टोकन कहाँ से लेना है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। या तो आप अपने कान में ईयरफोन लगाकर पतली गली से निकल लें या फिर सिर्फ तीस सेकंड रुक कर उन्हें मशीन चलाना सिखा दें। उस वक्त आपको लगेगा कि आपने टाइम वेस्ट किया है। लेकिन असल में आपने अपनी गुडविल की बैंक में एक डिपॉजिट जमा कर दिया है। लाइफ बहुत छोटी है और यह दुनिया गोल है। आज आपने किसी के लिए दरवाजा खोला है तो कल कोई आपके लिए कामयाबी का रास्ता खोल सकता है।

ज्यादातर लोग नेटवर्किंग का मतलब समझते हैं बड़े बड़े इवेंट्स में जाकर अपना कार्ड बांटना और झूठ मूठ की तारीफ करना। पर सच तो यह है कि लोग उन लोगों को याद रखते हैं जो उनके काम आए थे न कि उन्हें जिन्होंने सबसे महंगी घड़ी पहनी थी। फाइव मिनट फेवर आपको बिना थके दूसरों की नजरों में एक हीरो बना देता है। आप बस लोगों को कनेक्ट करते जाइए या किसी के काम को एप्रीशिएट कर दीजिए। यह छोटे छोटे निवेश आपको भविष्य में इतना बड़ा रिटर्न देंगे कि आप सोच भी नहीं सकते। बस याद रहे कि यह सब दिल से होना चाहिए न कि किसी लालच में वरना लोग आपकी चालाकी को दो मिनट में पकड़ लेंगे।


लेसन ३ : बर्नआउट से बचाव और गिवर्स की जीत

अब तक आप सोच रहे होंगे कि भाई यह गिवर बनना तो बहुत रिस्की काम है। अगर मैं सबकी मदद करता रहा तो लोग मुझे चटनी समझकर चाट जाएंगे। आपकी चिंता बिल्कुल जायज है। एडम ग्रांट भी यही कहते हैं कि जो गिवर्स बिना किसी लिमिट के काम करते हैं वो लाइफ की रेस में सबसे नीचे रह जाते हैं। इसे कहते हैं सेल्फलेस गिविंग। ऐसे लोग दूसरों के चक्कर में अपना करियर और सेहत दोनों दांव पर लगा देते हैं। लेकिन जो गिवर्स दुनिया पर राज करते हैं वो होते हैं अदरिश यानी वो जो दूसरों का भला तो करते हैं पर अपना नुकसान नहीं होने देते।

एक स्मार्ट गिवर बनने के लिए आपको यह समझना होगा कि हर कोई मदद के लायक नहीं होता। अगर आप किसी टेकर की बार-बार मदद कर रहे हैं तो आप उसका भला नहीं कर रहे बल्कि आप उसे और भी बड़ा लालची बना रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे आप किसी ऐसे दोस्त को पैसे उधार दे रहे हैं जो कभी वापस नहीं करता पर हर हफ्ते नई पार्टी की फोटो डालता है। ऐसे में आपको मैच्योर बनना पड़ेगा। गिवर्स को अपनी बाउंड्री सेट करना बहुत जरूरी है ताकि उनका बर्नआउट न हो जाए। आपको ना कहना सीखना होगा ताकि जब आप हाँ कहें तो उस काम की सच में कोई वैल्यू हो।

असली सफलता तब मिलती है जब आप अपने मिशन को दूसरों के फायदे से जोड़ देते हैं। जब एक गिवर को पता होता है कि उसके काम से पूरी टीम या समाज का भला हो रहा है तो उसे थकान कम और मोटिवेशन ज्यादा मिलता है। टेकर्स का फ्यूल बहुत जल्दी खत्म हो जाता है क्योंकि वो सिर्फ खुद के लिए भाग रहे होते हैं। लेकिन गिवर्स के पीछे पूरा एक कारवां होता है जो उन्हें धक्का देकर चोटी तक पहुँचाता है। जब आप दूसरों को ऊपर उठाते हैं तो कुदरत का कानून है कि आप खुद भी ऊपर उठने लगते हैं।

तो दोस्तो, गिव एंड टेक का असली सार यही है कि दुनिया में दो तरह के गिवर्स होते हैं। एक वो जो खुद को खत्म कर लेते हैं और दूसरे वो जो सबको साथ लेकर चलते हैं। आपको दूसरा वाला बनना है। याद रखिए कि देने वाले का हाथ हमेशा ऊपर होता है पर उसका पैर हमेशा जमीन पर और अपनी लिमिट्स के अंदर होना चाहिए। अब यह आपके ऊपर है कि आप एक खाली हाथ वाले दानी बनना चाहते हैं या एक सफल और पावरफुल लीडर जो दूसरों की किस्मत बदल दे।


अगर इस आर्टिकल ने आपकी सोच की खिड़की को थोड़ा भी खोला है तो आज ही किसी एक इंसान के लिए फाइव मिनट फेवर करिए। यह कोई भी छोटा काम हो सकता है। कमेंट में लिखकर बताइए कि आप आज किसकी मदद करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे लोग अक्सर बेवकूफ बना देते हैं ताकि वो भी एक स्मार्ट गिवर बन सके। याद रखिए आपकी एक छोटी सी शेयरिंग किसी की पूरी सोच बदल सकती है।

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