अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो आज भी पुराने घिसे पिटे बिजनेस आइडियाज लेकर बैठे हैं तो यकीन मानिए आप अपनी बर्बादी का सामान खुद तैयार कर रहे हैं। जबकि दुनिया एमेजन के सीक्रेट्स चुराकर करोड़ों छाप रही है आप शायद अपनी ईगो और आलस के पीछे छुपकर असली ग्रोथ को टाटा बाय-बाय कह रहे हैं।
आज हम दुनिया की सबसे खतरनाक और कामयाब कंपनी एमेजन के उन १४ प्रिंसिपल्स का पोस्टमार्टम करेंगे जो आपकी सोच बदल देंगे। जॉन रॉसमैन की किताब द एमेजन वे से निकले ये ३ पावरफुल लेसन आपको एक लीडर की तरह सोचना सिखाएंगे ताकि आप मार्केट में सिर्फ टिके न रहें बल्कि राज करें।
लेसन १ : कस्टमर ऑब्सेशन: जब आप कस्टमर के लिए जासूस बन जाते हैं
देखिए बॉस, आज के दौर में हर कोई कहता है कि हम कस्टमर को प्यार करते हैं। लेकिन क्या आप वाकई करते हैं। एमेजन की डिक्शनरी में कस्टमर को खुश करना सिर्फ एक सर्विस नहीं है बल्कि एक पागलपन है जिसे वे कस्टमर ऑब्सेशन कहते हैं। आम कंपनियाँ क्या करती हैं। वे अपने कॉम्पिटिटर को देखती हैं कि पड़ोस वाली दुकान क्या बेच रही है। लेकिन जेफ बेजोस ने सिखाया कि अगर आप सिर्फ कॉम्पिटिटर को देखेंगे तो आप कभी उनके आगे नहीं निकल पाएंगे। आपको उस इंसान की नस पकड़नी होगी जो आपको पैसे दे रहा है यानी आपका कस्टमर।
सोचिए आप एक रेस्टोरेंट में जाते हैं और वेटर आपसे पूछता है कि खाना कैसा था। आप बस औपचारिकता के लिए कह देते हैं कि बढ़िया था। अब एक आम रेस्टोरेंट वाला खुश होकर सो जाएगा। लेकिन एमेजन वाला माइंडसेट यहाँ काम नहीं रुकने देगा। वह आपके चेहरे के उस हल्के से शिकन को पढ़ेगा जो आपने बिल देखते वक्त या नमक कम होने पर महसूस किया था। एमेजन में मीटिंग्स के दौरान एक खाली कुर्सी रखी जाती है। यह कोई मजाक या भूत प्रेत के लिए नहीं है। वह खाली कुर्सी सबसे इम्पोर्टेन्ट इंसान के लिए होती है और वह है कस्टमर।
अगर आप आज एक छोटा सा स्टार्टअप चला रहे हैं या किसी ऑफिस में मैनेजर हैं तो क्या आप वाकई जानते हैं कि आपका यूजर रात को क्यों नहीं सो पा रहा है। क्या उसे आपके प्रोडक्ट से वह सुकून मिल रहा है जिसका आपने वादा किया था। ज्यादातर लोग सिर्फ नंबर्स और ग्राफ के पीछे भागते हैं। उन्हें लगता है कि प्रॉफिट बढ़ गया मतलब सब ठीक है। लेकिन प्रॉफिट तो एक बाय-प्रोडक्ट है। असली खेल तो उस भरोसे का है जो आप अपने कस्टमर के साथ बनाते हैं।
मान लीजिए आप एक ऑनलाइन कपड़े की दुकान चलाते हैं। अब अगर डिलीवरी में देरी हो गई तो एक औसत दुकानदार बहाने बनाएगा कि बारिश हो रही थी या कूरियर वाला बीमार था। लेकिन एक एमेजन जैसा लीडर तुरंत माफी मांगेगा और शायद अगले ऑर्डर पर डिस्काउंट भी दे देगा क्योंकि उसे पता है कि एक नाराज कस्टमर दस नए लोगों को आपसे दूर ले जाएगा। यह सार्काज्म नहीं है बल्कि कड़वी सच्चाई है कि हम अक्सर अपनी ईगो को कस्टमर की जरूरत से ऊपर रखते हैं।
जेफ बेजोस कहते हैं कि कॉम्पिटिटर से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि वे आपको पैसे नहीं देने वाले। डरना है तो कस्टमर से डरिए क्योंकि वही है जो आपकी कंपनी को फर्श से अर्श पर ले जा सकता है। क्या आप अपने काम में इतने जुनूनी हैं कि आप कस्टमर की अनकही बात भी सुन सकें। अगर नहीं तो आप सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा हैं। एमेजन का यह पहला लेसन हमें सिखाता है कि कस्टमर के साथ आपका रिश्ता किसी शादी जैसा होना चाहिए जहाँ आपको उनकी हर छोटी बड़ी जरूरत का ख्याल रखना पड़ता है वरना तलाक यानी बिजनेस का बंद होना तो पक्का है।
अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे सिर्फ कस्टमर को खुश करना ही काफी नहीं है बल्कि आपको एक मालिक की तरह सोचना क्यों जरूरी है।
लेसन २ : ओनरशिप मेंटालिटी: किराएदार मत बनिए मालिक की तरह सोचिए
अक्सर ऑफिसों में आपने सुना होगा कि भाई यह मेरा काम नहीं है। जब भी कोई प्रॉब्लम आती है तो लोग एक दूसरे की तरफ उंगली दिखाने लगते हैं जैसे कि कोई नया नवेला जासूस केस सुलझा रहा हो। लेकिन एमेजन में यह लाइन बोलना सुसाइड करने जैसा है। वहाँ का दूसरा सबसे बड़ा लेसन है ओनरशिप। इसका सीधा मतलब यह है कि आप कंपनी के सिर्फ एक पुर्जे नहीं हैं बल्कि आप खुद उस पूरी मशीन के मालिक हैं।
सोचिए आपके घर में अगर पाइप लीक हो रहा हो तो क्या आप यह कहेंगे कि पाइप प्लंबर का काम है मेरा नहीं। आप तुरंत बाल्टी उठाएंगे और पानी रोकना शुरू करेंगे क्योंकि वह घर आपका है। लेकिन वही इंसान जब ऑफिस में होता है और देखता है कि कोई प्रोजेक्ट फेल हो रहा है या किसी फाइल में गलती है तो वह चुपचाप पतली गली से निकल लेता है। उसे लगता है कि उसकी सैलरी तो आ ही जाएगी तो फालतू का सिरदर्द क्यों लेना। एमेजन कहता है कि यही वह सोच है जो एक कंपनी को बर्बाद और एक इंसान को औसत बनाकर छोड़ देती है।
ओनरशिप का मतलब यह नहीं है कि आप चौबीस घंटे काम करें। इसका मतलब यह है कि आप लॉन्ग टर्म के बारे में सोचें। एक किराएदार घर की दीवारों पर कील ठोकते वक्त नहीं सोचता क्योंकि उसे पता है कि अगले साल उसे यह घर छोड़ देना है। लेकिन एक मालिक पेंट की क्वालिटी से लेकर बिजली के तार तक सब चेक करता है। क्या आप अपने करियर में एक किराएदार की तरह रह रहे हैं जो बस महीने के अंत में मिलने वाले रेंट यानी सैलरी का इंतजार कर रहा है।
जो लोग सबसे ज्यादा शिकायत करते हैं कि उनकी तरक्की नहीं हो रही वही लोग सबसे पहले यह कहते हैं कि यह मेरी जिम्मेदारी नहीं है। एमेजन में लीडर्स कभी भी शॉर्ट टर्म फायदों के लिए लॉन्ग टर्म वैल्यू की बलि नहीं चढ़ाते। अगर उन्हें लगता है कि आज थोड़ा नुकसान सहकर भविष्य में कंपनी को बड़ा फायदा होगा तो वे वह रिस्क लेते हैं। वे कभी यह नहीं कहते कि यह काम मेरे जेडी यानी जॉब डिस्क्रिप्शन में नहीं लिखा है।
असल जिंदगी का एक उदाहरण लीजिए। मान लीजिए आप एक टीम का हिस्सा हैं और आप देखते हैं कि आपके साथी से कोई बड़ी चूक हो गई है। एक औसत इंसान मन ही मन खुश होगा कि अब इसकी क्लास लगेगी और मैं चमकूँगा। लेकिन एक ओनरशिप वाला बंदा तुरंत उस गलती को सुधारेगा क्योंकि उसे पता है कि टीम की हार मतलब उसकी हार है। क्या आपके अंदर वह हिम्मत है कि आप दूसरों की गंदगी साफ कर सकें ताकि आपकी कंपनी का नाम खराब न हो।
अगर आप आज अपनी जिंदगी के मालिक नहीं बनेंगे तो हमेशा दूसरों के इशारों पर नाचने वाले किराएदार ही बने रहेंगे। एमेजन का यह लेसन हमें सिखाता है कि जिम्मेदारी ली नहीं जाती बल्कि वह खुद से उठानी पड़ती है। जब आप ओनरशिप लेते हैं तो आप सिर्फ एक एम्प्लॉई नहीं रह जाते बल्कि आप उस लेगेसी का हिस्सा बन जाते हैं जो इतिहास रचती है।
अगले लेसन में हम बात करेंगे उस चीज की जिसके बिना विचार सिर्फ सपने बनकर रह जाते हैं यानी एक्शन लेने की ताकत।
लेसन ३ : बायस फॉर एक्शन: ज्यादा सोचना बंद कीजिए और काम शुरू कीजिए
क्या आपने कभी उन लोगों को देखा है जो सालों से एक नया बिजनेस शुरू करने का प्लान बना रहे हैं। उनके पास फाइलों के ढेर हैं और हजारों आइडियाज हैं लेकिन हकीकत में उन्होंने एक रुपया भी नहीं कमाया। एमेजन में ऐसे लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। यहाँ का तीसरा सबसे बड़ा लेसन है बायस फॉर एक्शन। एमेजन मानता है कि बिजनेस में और जिंदगी में भी स्पीड बहुत मायने रखती है। ज्यादातर फैसले ऐसे होते हैं जिन्हें बदला जा सकता है यानी वे टू-वे डोर की तरह होते हैं। अगर आपने गलत दरवाजा चुन लिया तो आप वापस आ सकते हैं। तो फिर इतना सोचना किस बात का।
हमारे देश में मीटिंग्स इसलिए की जाती हैं ताकि अगली मीटिंग की तारीख तय की जा सके। हम एनालिसिस पैरालिसिस के इतने बड़े शिकार हैं कि हम डेटा इकट्ठा करते-करते बूढ़े हो जाते हैं लेकिन एक्शन नहीं लेते। एमेजन का मानना है कि अगर आपके पास ७० परसेंट जानकारी भी है तो आपको फैसला ले लेना चाहिए। अगर आप १०० परसेंट जानकारी का इंतजार करेंगे तो यकीन मानिए तब तक आपका कॉम्पिटिटर मार्केट से आपको साफ कर चुका होगा।
सोचिए आप एक रोड ट्रिप पर जाना चाहते हैं। अब अगर आप घर पर बैठकर यह हिसाब लगाते रहेंगे कि रास्ते में कितने गड्ढे मिलेंगे या पेट्रोल कहाँ सस्ता मिलेगा तो आप कभी गैराज से बाहर नहीं निकल पाएंगे। असली मजा और असली सबक तो सड़क पर उतरने के बाद ही मिलता है। एमेजन में लीडर्स को सिखाया जाता है कि कैलकुलेटेड रिस्क लेना ही सफलता की पहली सीढ़ी है। वे जानते हैं कि गलती करना उतना बुरा नहीं है जितना कि कुछ न करना।
आजकल के युवाओं को लगता है कि जब तक सब कुछ परफेक्ट नहीं होगा तब तक वे कुछ शुरू नहीं करेंगे। यह परफेक्शन का चश्मा उतारकर फेंक दीजिए क्योंकि यह आपको अंधा बना रहा है। मान लीजिए आपने एक नया ऐप बनाया। अब आप डर रहे हैं कि इसमें कोई बग न हो या लोग क्या कहेंगे। एमेजन की फिलॉसफी कहती है कि उसे लॉन्च कर दो। जो कमियाँ होंगी वे कस्टमर खुद बता देगा और आप उसे बाद में सुधार सकते हैं। लेकिन अगर आप उसे दबाकर बैठे रहे तो वह सिर्फ आपके लैपटॉप की मेमोरी खाएगा और कुछ नहीं।
एक पुरानी कहावत है कि लोहा गर्म होने पर चोट करो। लेकिन एमेजन कहता है कि चोट कर करके लोहे को गर्म करो। जब आप काम करना शुरू करते हैं तो रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं। क्या आप भी अपनी जिंदगी के फैसले सिर्फ इसलिए टाल रहे हैं क्योंकि आपको डर लगता है। डर तो सबको लगता है लेकिन जो उस डर के बावजूद आगे बढ़ता है वही एमेजन जैसी एम्पायर खड़ी करता है।
अब वक्त आ गया है कि आप अपनी प्लानिंग की फाइलों को आग लगाएं और फील्ड में उतरें। याद रखिए कि एक औसत प्लान जिस पर आज एक्शन लिया गया है वह उस महान प्लान से कहीं बेहतर है जो सिर्फ आपके दिमाग में कल के लिए रखा है। जिंदगी आपको बार-बार मौके नहीं देगी और एमेजन का यह लेसन आपको याद दिलाता रहेगा कि दुनिया सिर्फ उन्हें याद रखती है जो मैदान में उतरे थे न कि उन्हें जो गैलरी में बैठकर कमेंट्री कर रहे थे।
तो दोस्तों, द एमेजन वे सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि एक आइना है। यह आपको दिखाता है कि आप कहाँ आलस कर रहे हैं और कहाँ आप वाकई कुछ बड़ा कर सकते हैं। क्या आप आज से अपने कस्टमर के लिए जुनूनी बनेंगे। क्या आप एक मालिक की तरह जिम्मेदारी उठाएंगे। और सबसे जरूरी क्या आप आज ही वह पहला कदम उठाएंगे जिसका आप सालों से इंतजार कर रहे हैं।
कमेंट में मुझे बताइए कि इन ३ लेसन में से कौन सा लेसन आपकी लाइफ आज बदलने वाला है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करता है लेकिन काम कुछ नहीं। चलिए साथ मिलकर एक ऐसी लेगेसी बनाते हैं जिस पर हमें गर्व हो।
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