क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो डिग्री हाथ में लेकर ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं और सोच रहे हैं कि दुनिया आपकी कदर क्यों नहीं कर रही। सच तो यह है कि बिना पर्सनल ब्रांडिंग के आपकी डिग्री रद्दी का टुकड़ा है जिसे कोई नहीं पूछने वाला। बधाई हो आप अपनी लाइफ बर्बाद करने के सही रास्ते पर हैं।
अगर आप इस हारने वाली भीड़ से बाहर निकलना चाहते हैं और कॉलेज के बाद एक दमदार करियर बनाना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए है। यहाँ हम उन सीक्रेट्स की बात करेंगे जो आपको एक एम्प्लॉई नहीं बल्कि एक ब्रांड बना देंगे।
लेसन १ : ब्रांड यू की शक्ति - खुद को एक प्रोडक्ट की तरह पेश करें
जरा सोचिए आप एक दुकान पर जाते हैं और वहां दो बिस्किट के पैकेट रखे हैं। एक पैकेट पर शानदार चमकती हुई पैकिंग है और दूसरे पर धूल जमी है जिस पर कोई नाम भी नहीं लिखा है। अब आप इतने बड़े दानवीर तो हैं नहीं कि बिना नाम वाला पैकेट उठा लें भले ही उसके अंदर का माल कितना ही अच्छा क्यों न हो। असल जिंदगी में भी आपकी डिग्री उस धूल जमे पैकेट जैसी ही है अगर आपने उस पर ब्रांड यू का लेबल नहीं लगाया है। कैथरीन कपुटा साफ कहती हैं कि आज के जमाने में सिर्फ काबिल होना काफी नहीं है बल्कि काबिल दिखना भी उतना ही जरूरी है। अगर आप खुद को मार्केट करना नहीं जानते तो समझ लीजिए कि आप उस टैलेंटेड सिंगर की तरह हैं जो बाथरूम में गाकर खुश हो रहा है और बाहर दुनिया उसे जानती तक नहीं।
ज्यादातर नौजवानों को लगता है कि बस कॉलेज खत्म करो और कंपनियां फूलों का हार लेकर आपका इंतजार करेंगी। लेकिन हकीकत यह है कि वहां आपके जैसे लाखों टैलेंटेड लोग लाइन लगाकर खड़े हैं जिनके पास वही पुरानी घिसी पिटी सीवी है जिसमें लिखा है कि मुझे कोडिंग आती है या मुझे मार्केटिंग पसंद है। अरे भाई यह तो सबको आता है। अगर आप भीड़ का हिस्सा बनेंगे तो भीड़ वाले दाम ही मिलेंगे। आपको खुद को एक प्रोडक्ट समझना होगा। जैसे आईफोन अपने फीचर्स नहीं बल्कि अपनी पहचान बेचता है वैसे ही आपको अपनी स्किल्स को एक पहचान देनी होगी। क्या आप वह इंसान हैं जो हर मुश्किल प्रॉब्लम को चुटकी में हल कर देता है या फिर आप वह हैं जिसकी कम्युनिकेशन स्किल्स इतनी घातक हैं कि वह फ्रिज वाले को भी बर्फ बेच दे। अपनी इस यूनिक क्वालिटी को पहचानिए और उसे अपना ट्रेडमार्क बना लीजिए।
भारत में हमें बचपन से सिखाया जाता है कि चुपचाप काम करो फल की चिंता मत करो। लेकिन आज का जमाना कहता है कि काम भी करो और उसका ढिंढोरा भी पीटो वरना कोई और आपके काम का क्रेडिट लेकर निकल जाएगा और आप बस देखते रह जाएंगे। खुद को एक ब्रांड बनाने का मतलब यह नहीं है कि आप हवा में बातें करें बल्कि इसका मतलब है कि आप अपनी वैल्यू को सही तरीके से दुनिया के सामने रखें। जब कोई आपका नाम सुने तो उसके दिमाग में एक खास इमेज बननी चाहिए। अगर आपका नाम सुनकर लोगों को सिर्फ यह याद आता है कि आप लंच ब्रेक में सबसे ज्यादा समोसे खाते हैं तो समझ लीजिए कि आपका ब्रांड खतरे में है। आपको अपनी प्रोफेशनल पहचान को इतना शार्प बनाना होगा कि रिक्रूटर्स को लगे कि इस बंदे को छोड़ना मतलब कंपनी का नुकसान है।
याद रखिए कि ब्रांडिंग रातों रात नहीं होती। यह आपके बात करने के तरीके से लेकर आपके काम करने के अंदाज तक हर चीज में झलकनी चाहिए। अगर आप एक मीटिंग में बैठे हैं और वहां बस सर हिला रहे हैं तो आप एक फर्नीचर से ज्यादा कुछ नहीं हैं। अपनी राय रखिए और अपनी एक्सपर्टीज का लोहा मनवाइए। जब आप खुद को एक ब्रांड की तरह ट्रीट करने लगते हैं तो लोग भी आपको वैसे ही इज्जत देने लगते हैं। तो अब फैसला आपका है कि आपको जिंदगी भर एक सस्ता लोकल ब्रांड बनकर रहना है या फिर वह प्रीमियम प्रोडक्ट जिसकी डिमांड मार्केट में सबसे ज्यादा हो। यह पहला कदम है एक ऐसे करियर की ओर जो सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि आपकी पहचान होगी।
लेसन २ : सही नेटवर्क और विजिबिलिटी - अंधेरे में तीर मारना बंद करें
अगर आपने खुद को एक चमचमाता ब्रांड बना लिया है लेकिन आप एक अंधेरे कमरे में बैठे हैं तो उसका कोई फायदा नहीं है। यह वैसा ही है जैसे आप दुनिया के सबसे बड़े शेफ हों लेकिन अपना रेस्टोरेंट रेगिस्तान के बीचों बीच खोल लें जहाँ कोई प्यासा ऊँट भी नहीं आता। कैथरीन कपुटा समझाती हैं कि करियर की रेस में वह इंसान नहीं जीतता जो सबसे ज्यादा मेहनत करता है बल्कि वह जीतता है जिसे सही लोग जानते हैं। हमारे यहाँ कहा जाता है कि मेहनत का फल मीठा होता है लेकिन अगर आप गलत जगह मेहनत कर रहे हैं तो फल मिलना तो दूर की बात है आपको कोई पानी भी नहीं पूछेगा। विजिबिलिटी का मतलब यह नहीं है कि आप हर जगह जाकर अपनी तारीफ करें बल्कि इसका मतलब है कि सही लोगों की रडार पर होना।
भारत में अक्सर लोग नेटवर्किंग का मतलब चापलूसी समझ लेते हैं। लेकिन भाई साहब चापलूसी और नेटवर्किंग में उतना ही फर्क है जितना असली पनीर और प्लास्टिक के पनीर में होता है। नेटवर्किंग का मतलब है ऐसे रिश्ते बनाना जहाँ आप दूसरों की मदद करें और समय आने पर वे आपकी वैल्यू समझें। अगर आप अपने ऑफिस या कॉलेज के कोने में बैठकर सिर्फ अपने काम से काम रखते हैं तो बधाई हो आप कंपनी के सबसे कीमती गुमनाम सिपाही बन चुके हैं जिसे प्रमोशन के वक्त सब भूल जाएंगे। आपको बाहर निकलना होगा और अपनी विजिबिलिटी बढ़ानी होगी। क्या आप उन इवेंट्स में जा रहे हैं जहाँ आपके फील्ड के धुरंधर आते हैं या फिर आप अभी भी अपने स्कूल के दोस्तों के साथ बैठकर सिर्फ पॉलिटिक्स की बुराई कर रहे हैं।
विजिबिलिटी बढ़ाने का एक और बेहतरीन तरीका है बोलना और लिखना। अगर आपको लगता है कि आप किसी चीज में एक्सपर्ट हैं तो उसके बारे में बात कीजिए। मीटिंग्स में चुपचाप पीछे वाली सीट पर मत बैठिए वरना लोग आपको ऑफिस का हिस्सा नहीं बल्कि ऑफिस का डेकोरेशन समझने लगेंगे। जब आप अपनी बात पूरे कॉन्फिडेंस के साथ रखते हैं तो लोगों को पता चलता है कि आपके पास दिमाग भी है। सरकाज्म की बात तो यह है कि कई बार कम अक्ल वाले लोग सिर्फ अपनी नेटवर्किंग के दम पर आपसे आगे निकल जाते हैं और आप अपनी डिग्री को फ्रेम करवाकर दीवार पर टांग कर देखते रह जाते हैं। यह दुनिया फेयर नहीं है दोस्त यहाँ जो दिखता है वही बिकता है।
लेकिन याद रखिए कि विजिबिलिटी का मतलब शोर मचाना नहीं है। आपको अपनी एक ऐसी इमेज बनानी है कि जब आपकी फील्ड में किसी बड़ी प्रॉब्लम की बात हो तो सबसे पहले आपका नाम दिमाग में आए। इसे कहते हैं टॉप ऑफ माइंड अवेयरनेस। अगर आप एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और लोग आपको सिर्फ इसलिए याद करते हैं क्योंकि आप सबका वाईफाई ठीक कर देते हैं तो आपकी नेटवर्किंग गलत दिशा में जा रही है। आपको उन लोगों से जुड़ना होगा जो आपके करियर को लिफ्ट दे सकें। जैसे एक छोटा सा धक्का एक रुकी हुई कार को स्टार्ट कर देता है वैसे ही सही नेटवर्क का एक कॉल आपके करियर को रॉकेट बना सकता है। तो अपनी गुफा से बाहर निकलिए और दुनिया को देखने दीजिए कि ब्रांड यू आखिर क्या चीज है।
लेसन ३ : डिजिटल फुटप्रिंट और ऑनलाइन प्रेजेंस - इंटरनेट को अपना गुलाम बनाएँ
अब जब आप बाहर निकलकर लोगों से मिल रहे हैं तो यकीन मानिए कि आपसे हाथ मिलाने के बाद हर इंसान सबसे पहले गूगल पर आपका नाम टाइप करेगा। अगर गूगल बाबा ने आपके बारे में कुछ नहीं बताया या फिर आपकी ऐसी फोटो दिखाई जिसमें आप किसी शादी में पनीर के लिए लड़ रहे हैं तो समझ लीजिए कि आपकी ब्रांडिंग का वहीं दफन हो गई। कैथरीन कपुटा कहती हैं कि आज के समय में आपकी ऑनलाइन प्रोफाइल ही आपका असली चेहरा है। अगर आपकी डिजिटल प्रेजेंस जीरो है तो प्रोफेशनल दुनिया के लिए आप असल में वजूद ही नहीं रखते। यह वैसा ही है जैसे आप बहुत बड़े बिजनेसमैन होने का दावा करें लेकिन आपकी जेब में फूटी कौड़ी भी न हो।
जरा सोचिए कि एक रिक्रूटटर आपका नाम सर्च करता है और उसे आपका लिंक्डइन प्रोफाइल मिलता है जहाँ आपने पिछले तीन साल से अपनी फोटो भी अपडेट नहीं की है। वहां आपकी स्किल्स के नाम पर सिर्फ यह लिखा है कि आपको एमएस वर्ड आता है। भाई साहब एमएस वर्ड तो आज कल स्कूल के बच्चे भी जानते हैं इसमें कौन सा आपने पहाड़ तोड़ दिया। आपको अपनी ऑनलाइन प्रेजेंस को एक मैग्नेट की तरह बनाना होगा जो अच्छे अवसरों को अपनी तरफ खींचे। आप जो भी पोस्ट करते हैं या जिस तरह से इंटरनेट पर पेश आते हैं वह आपके डिजिटल फुटप्रिंट का हिस्सा बन जाता है। अगर आप दिन भर फेसबुक पर मीम्स शेयर कर रहे हैं तो दुनिया आपको एक सीरियस प्रोफेशनल की तरह कभी नहीं देखेगी।
लोग अपनी वेकेशन की फोटो डालने के लिए घंटों फिल्टर चुनते हैं लेकिन अपने करियर को चमकाने वाली प्रोफाइल के लिए उनके पास पांच मिनट का भी समय नहीं है। आपको अपनी ऑनलाइन इमेज को क्यूरेट करना होगा। लिंक्डइन पर अपनी फील्ड से जुड़ा कंटेंट डालिए और लोगों को बताइए कि आप सिर्फ काम नहीं करते बल्कि उस काम के बारे में गहराई से सोचते भी हैं। जब आप अपनी फील्ड के किसी आर्टिकल पर एक समझदारी भरा कमेंट करते हैं तो वह हजारों लोगों की नजर में आता है। आपकी एक अच्छी पोस्ट किसी भी महंगे एडवर्टाइजमेंट से ज्यादा असरदार हो सकती है। यह फ्री की पब्लिसिटी है जिसे आप अपनी नासमझी की वजह से गंवा रहे हैं।
लेकिन सावधान रहिए क्योंकि डिजिटल दुनिया जितनी जल्दी आपको हीरो बनाती है उतनी ही जल्दी जीरो भी कर सकती है। अगर आप ऑनलाइन किसी से बहस कर रहे हैं या फालतू के विवादों में पड़ रहे हैं तो कंपनियां आपको हायर करने से पहले दस बार सोचेंगी। उन्हें एक प्रोफेशनल चाहिए कोई मोहल्ले का लड़का नहीं जो हर बात पर झगड़ने लगे। आपकी ऑनलाइन प्रेजेंस ऐसी होनी चाहिए कि जब कोई आपकी प्रोफाइल देखे तो उसे लगे कि इस बंदे के पास विजन है। जब आप अपनी डिजिटल दुनिया को कंट्रोल करना सीख जाते हैं तो अवसर चलकर आपके पास आते हैं और आपको नौकरी के पीछे भागने की जरूरत नहीं पड़ती। तो आज ही अपनी प्रोफाइल साफ कीजिए और ब्रांड यू की डिजिटल दुकान खोल लीजिए।
करियर बनाना कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची समझी रणनीति है। कैथरीन कपुटा की यह बातें आपको सिर्फ नौकरी दिलाना नहीं बल्कि आपको एक लीडर बनाना सिखाती हैं। अब वक्त आ गया है कि आप अपनी डिग्री के पीछे छिपना बंद करें और ब्रांड यू को दुनिया के सामने लाएं। याद रखिए कि आपकी पहचान आपके हाथ में है और अगर आप आज खुद पर काम नहीं करेंगे तो कल कोई और आपको अपने सपने पूरे करने के लिए किराए पर रख लेगा।
आज ही अपनी पहली पर्सनल ब्रांडिंग की शुरुआत करें। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका सबसे बड़ा टैलेंट क्या है जिसे आप दुनिया को दिखाना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी जॉब मार्केट की भूलभुलैया में खोए हुए हैं। उठिए और अपना भविष्य खुद लिखिए।
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