अभी भी सुबह ११ बजे तक सो रहे हो। बहुत बढ़िया। दुनिया के सारे करोड़पति पागल हैं जो सुबह ५ बजे उठकर मेहनत कर रहे हैं। तुम बस अपनी लाइफ बर्बाद होने का वेट करो। अगर तुम अब भी नहीं जागे तो सक्सेस बस तुम्हारे सपनों में ही आएगी।
परेशान मत हो। अगर तुम अपनी घिसी पिटी जिंदगी बदलना चाहते हो तो डेमंड जॉन की यह बुक तुम्हारे लिए आखरी उम्मीद है। चलिए जानते हैं राइज एंड ग्राइंड के वो ३ लेसन जो तुम्हारी पूरी दुनिया बदल देंगे।
लेसन १ : मॉर्निंग रूटीन की असली ताकत
आजकल के यूथ को लगता है कि रात भर जागकर नेटफ्लिक्स देखना या रील्स स्क्रोल करना कूल है। लेकिन डेमंड जॉन कहते हैं कि अगर तुम सूरज उगने के बाद सोकर उठ रहे हो तो तुम रेस में पहले ही हार चुके हो। सक्सेस उन लोगों के पास नहीं आती जो दोपहर में अंगड़ाई लेते हुए उठते हैं। सक्सेस उन लोगों को चूमती है जो दुनिया के जागने से पहले अपनी जंग शुरू कर देते हैं। क्या आपको लगता है कि सुबह ५ बजे उठना सिर्फ एक रस्म है। बिल्कुल नहीं। यह एक माइंडसेट है।
मान लो तुम्हारा एक दोस्त है राहुल। राहुल रात को २ बजे तक मीम्स देखता है और सुबह १० बजे उठता है। उठते ही उसका पहला काम होता है फोन चेक करना। नोटिफिकेशन देखते ही उसका दिमाग दूसरों की लाइफ से खुद को कंपेयर करने लगता है। आधा दिन तो उसका चिड़चिड़ेपन में निकल जाता है। अब दूसरी तरफ देखो डेमंड जॉन को। वो कहते हैं कि सुबह के पहले कुछ घंटे सिर्फ तुम्हारे होने चाहिए। बिना किसी डिस्ट्रैक्शन के। बिना किसी शोर के। जब तुम सुबह जल्दी उठते हो तो तुम अपने दिमाग को कमांड देते हो कि आज का बॉस मैं हूँ।
सुबह का रूटीन मतलब यह नहीं कि बस उठकर जिम चले गए। इसका मतलब है अपने गोल्स को रीकॉल करना। डेमंड अपनी लाइफ में हर सुबह अपने गोल्स को पढ़ते हैं। वो अपने दिमाग को प्रोग्राम करते हैं कि आज उन्हें क्या अचीव करना है। अगर तुम बिना किसी प्लान के उठ रहे हो तो तुम बस एक भटकती हुई आत्मा हो। जिसे सोशल मीडिया की हवा जहाँ चाहे वहां उड़ा ले जाएगी। लोग कहते हैं कि मैं तो नाइट आउल हूँ। मुझे रात में काम करना पसंद है। भाई तुम उल्लू हो सकते हो पर बाज नहीं। बाज को अपनी शिकार के लिए सुबह की पहली किरण के साथ उड़ना पड़ता है।
जरा सोचो जब पूरी दुनिया सो रही होती है तब तुम अपने सपनों पर काम कर रहे होते हो। वो जो शांति होती है ना वो तुम्हें एक अलग लेवल का फोकस देती है। उस समय कोई तुम्हें कॉल करके परेशान नहीं करेगा। कोई फालतू की ईमेल नहीं आएगी। सिर्फ तुम और तुम्हारी मेहनत। डेमंड जॉन ने शार्क टैंक तक का सफर ऐसे ही तय नहीं किया। उन्होंने अपनी ग्राइंड को सुबह के अंधेरे में ही निखारा है। अगर तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारे लिए तालियाँ बजाएं तो तुम्हें उस समय पसीना बहाना होगा जब सब खर्राटे ले रहे हों।
क्या तुम आज भी वही पुराने बहाने बनाओगे। क्या तुम कल भी अलार्म बजने पर उसे स्नूज़ करोगे। याद रखना हर बार जब तुम स्नूज़ बटन दबाते हो तुम अपनी सक्सेस को एक दिन और पीछे धकेल देते हो। सुबह जल्दी उठना कोई सजा नहीं है। यह खुद को बेहतर बनाने का एक गिफ्ट है। तो कल से अलार्म की आवाज से नहीं बल्कि अपने सपनों के डर से उठना शुरू करो। क्योंकि जो सुबह को जीत लेता है वो पूरी दुनिया को जीत लेता है।
लेसन २ : कंसिस्टेंसी और असली ग्राइंड की कहानी
क्या तुम्हें लगता है कि एक दिन जिम जाकर तुम बाहुबली बन जाओगे। या एक रात पढ़कर तुम सीधा टॉपर बन जाओगे। अगर ऐसा होता तो आज गली का हर लड़का करोड़पति होता। डेमंड जॉन कहते हैं कि टैलेंटेड होना अच्छी बात है पर कंसिस्टेंट होना उससे भी बड़ी बात है। दुनिया उन लोगों से भरी पड़ी है जिनके पास बहुत दिमाग था पर वो आलसी थे। असल में जीत उसकी होती है जो हर दिन मैदान में उतरता है। चाहे उसका मन हो या ना हो।
सोचो तुम्हारे पास एक कुल्हाड़ी है और तुम्हें एक बड़ा पेड़ गिराना है। अगर तुम एक दिन में १००० बार वार करोगे तो शायद तुम थक जाओगे और पेड़ भी नहीं गिरेगा। लेकिन अगर तुम हर दिन सिर्फ ५ बार वार करोगे तो एक दिन वो पेड़ जरूर गिरे जाएगा। यही है कंसिस्टेंसी का जादू। लोग अक्सर जोश में आकर काम शुरू तो कर देते हैं। पहले दो दिन खूब मेहनत करेंगे। फिर तीसरे दिन कहेंगे कि आज मन नहीं है। भाई तुम्हारा मन है या कोई चंचल बच्चा। जो कभी भी मचल जाता है। सक्सेस को तुम्हारे मूड से कोई लेना देना नहीं है।
डेमंड जॉन जब अपनी कपड़े की कंपनी फूबू शुरू कर रहे थे तब उनके पास कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं थी। वो सुबह से रात तक काम करते थे। फिर रेड लॉबस्टर नाम के रेस्टोरेंट में वेटिंग का काम करते थे ताकि घर चल सके। क्या उन्हें थकान नहीं होती होगी। क्या उनका मन नहीं करता होगा कि सब छोड़कर सो जाएँ। बिल्कुल करता होगा। लेकिन उन्हें पता था कि अगर आज नहीं घिसा तो कल कभी नहीं चमकेगा। लोग अक्सर कहते हैं कि भाई मैं बहुत बिजी हूँ। पर सच तो यह है कि तुम बिजी नहीं हो। तुम बस अपने टाइम को कचरे की तरह बर्बाद कर रहे हो।
आजकल के लड़कों को देखो। एक हफ्ता मेहनत करेंगे और फिर यूट्यूब पर सर्च करेंगे कि जल्दी अमीर कैसे बनें। जैसे कोई जादू की छड़ी हो। सक्सेस कोई इंस्टेंट नूडल्स नहीं है जो दो मिनट में बन जाए। यह एक धीमी आंच पर पकने वाला पकवान है। तुम्हें हर दिन पसीना बहाना होगा। तुम्हें वो बोरिंग काम भी करने होंगे जो तुम्हें पसंद नहीं हैं। क्योंकि ग्राइंड का असली मतलब ही यही है। वो काम करना जो जरूरी है। चाहे तुम्हारी हालत कैसी भी हो।
मजेदार बात तो यह है कि जब तुम हर दिन एक ही काम को बार बार करते हो तो तुम उसमें मास्टर बन जाते हो। फिर लोग कहते हैं कि वाह इसकी किस्मत कितनी अच्छी है। किस्मत जैसी कोई चीज नहीं होती। यह बस तुम्हारी सालों की मेहनत का नतीजा होता है जो लोगों को एक दिन में दिखता है। तो अगर तुम भी अपनी लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हो तो बहाने बनाना बंद करो। अपनी ग्राइंड को अपनी आदत बना लो। जब मेहनत तुम्हारी मजबूरी नहीं बल्कि तुम्हारी पहचान बन जाएगी तब समझ लेना कि तुम सही रास्ते पर हो।
लेसन ३ : संसाधनों का सही इस्तेमाल और ओ पी एम का जादू
ज्यादातर लोग अपनी लाइफ में इसलिए आगे नहीं बढ़ पाते क्योंकि वो रोते रहते हैं। मेरे पास पैसे नहीं हैं। मेरे पास अच्छा कैमरा नहीं है। मेरे पापा के पास बड़ा बिजनेस नहीं है। डेमंड जॉन कहते हैं कि यह सब सिर्फ तुम्हारे बहाने हैं। अगर तुम्हारे पास रिसोर्सेज नहीं हैं तो तुम्हें रिसोर्सफुल बनना पड़ेगा। यानी जो है उसी में रास्ता निकालना पड़ेगा। जब डेमंड ने फूबू शुरू किया था तब उनके पास सिर्फ ४० डॉलर थे। क्या उन्होंने हार मानी। नहीं। उन्होंने अपनी माँ के घर को गिरवी रख दिया और सिलाई मशीन लेकर काम शुरू किया।
आजकल के लड़के नया स्टार्टअप शुरू करने से पहले आईफोन और महंगा लैपटॉप मांगते हैं। भाई पहले काम तो शुरू कर लो। डेमंड एक बहुत बढ़िया कांसेप्ट देते हैं जिसे वो ओ पी एम यानी अदर पीपल्स मनी कहते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि किसी की जेब काट लो। इसका मतलब है दूसरों के संसाधनों का इस्तेमाल करना। उन्होंने बड़े बड़े रॉक स्टार्स और सेलेब्रिटीज को अपनी ब्रांड के कपड़े फ्री में पहनाए। उन्होंने उनके फेम का इस्तेमाल अपनी मार्केटिंग के लिए किया। इसे कहते हैं दिमाग लगाना। तुम भी अपनी लाइफ में यह देख सकते हो कि तुम्हारे आस पास क्या मौजूद है जिसका तुम फायदा उठा सकते हो।
मान लो तुम्हें एक कुकिंग चैनल शुरू करना है। अब तुम बैठकर यह मत सोचो कि जब बड़ा किचन होगा तभी वीडियो बनाऊंगा। अपनी माँ के पुराने चूल्हे से शुरू करो। कंटेंट में दम होगा तो लोग तुम्हें वैसे भी देखेंगे। डेमंड कहते हैं कि जब तुम्हारे पास पैसे कम होते हैं तब तुम्हारा दिमाग सबसे ज्यादा चलता है। खाली पेट इंसान को सबसे ज्यादा क्रिएटिव बनाता है। जब जेब भरी होती है तब इंसान आलसी हो जाता है और फालतू के खर्चे करता है। लेकिन जब जेब खाली हो तब तुम्हें हर एक पैसे की कीमत पता होती है।
सक्सेसफुल होने का मतलब यह नहीं कि तुम बहुत सारा पैसा कमा लो। इसका मतलब यह है कि तुम उस पैसे को कैसे मैनेज करते हो और दूसरों की मदद से कैसे आगे बढ़ते हो। डेमंड जॉन ने कभी यह नहीं कहा कि मैं अकेला सब करूँगा। उन्होंने नेटवर्किंग की। उन्होंने लोगों से रिश्ते बनाए। उन्होंने अपनी ग्राइंड को दूसरों के विजन के साथ जोड़ा। अगर तुम सोचते हो कि तुम अकेले ही पहाड़ तोड़ दोगे तो भाई तुम गलतफहमी में हो। तुम्हें टीम की जरूरत पड़ेगी। तुम्हें लोगों के सपोर्ट की जरूरत पड़ेगी।
तो अगली बार जब तुम कहो कि मेरे पास यह नहीं है तो एक बार डेमंड जॉन के बारे में जरूर सोचना। जिसने सिर्फ कुछ टोपियां बेचकर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर दिया। तुम्हारे पास आज जो भी है वो काफी है। बस तुम्हें अपनी आंखों से पट्टी हटाकर मौकों को देखना होगा। अपनी ग्राइंड को रिसोर्सेज की कमी का शिकार मत होने दो। उठो और जो है उसी से अपनी किस्मत लिखना शुरू करो। क्योंकि दुनिया को तुम्हारे बहानों में कोई इंटरेस्ट नहीं है। दुनिया को सिर्फ तुम्हारा रिजल्ट देखना है।
अगर आज भी तुम बिस्तर पर पड़े रहे तो कल भी वही लाइफ मिलेगी जो आज जी रहे हो। डेमंड जॉन की यह बातें सिर्फ सुनने के लिए नहीं बल्कि फॉलो करने के लिए हैं। आज ही कमेंट बॉक्स में बताओ कि तुम्हारा वो कौन सा एक सपना है जिसके लिए तुम कल सुबह ५ बजे उठने वाले हो। अभी इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करो जो बहुत ज्यादा सोता है। शायद तुम्हारी वजह से उसकी भी किस्मत जाग जाए।
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