क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो खुद को बहुत टैलेंटेड समझकर सोफे पर चिपके रहते हैं और सोचते हैं कि एक दिन कामयाबी चलकर उनके पास आएगी। सच तो यह है कि आपका टैलेंट बिना मेहनत के सिर्फ एक सजावट का सामान है जिसे देखकर सिर्फ रिश्तेदार ताने मार सकते हैं। अगर आपके अंदर हार मानने की बीमारी है तो बधाई हो आप लाइफ में बहुत बड़ा फेलियर बनने की रेस में सबसे आगे हैं। बिना ग्रिट के आपकी सारी स्किल्स वैसे ही बेकार हैं जैसे बिना पेट्रोल के एक चमचमाती हुई फरारी कार।
इस ब्लॉग में हम एंजेला डकवर्थ की रिसर्च से जानेंगे कि कैसे मामूली लोग अपने जुनून के दम पर दुनिया हिला देते हैं। हम उन 3 लेसन्स के बारे में बात करेंगे जो आपको एक लूजर से लेजेंड बनाने की ताकत रखते हैं।
लेसन १ : टैलेंट से बड़ा एफर्ट है
अक्सर हमें लगता है कि जो लोग टॉप पर बैठे हैं उनके पास भगवान का दिया हुआ कोई जादुई टैलेंट है। हमें लगता है कि वो तो पैदा ही जीनियस हुए थे और हम ठहरे आम इंसान जिनकी किस्मत में सिर्फ स्ट्रगल लिखा है। लेकिन एंजेला डकवर्थ कहती हैं कि हम टैलेंट को एक बहाने की तरह इस्तेमाल करते हैं ताकि हमें खुद मेहनत न करनी पड़े। जब हम किसी को बहुत अच्छा गाते या खेलते हुए देखते हैं तो हम कहते हैं कि वाह क्या टैलेंट है। असल में हम यह कहकर खुद को तसल्ली देते हैं कि भाई इसके पास तो गॉड गिफ्ट है मैं इसके जैसा कभी नहीं बन सकता इसलिए मुझे मेहनत करने की जरूरत ही नहीं है। यह सोच हमें आलसी बना देती है।
लेखिका ने एक बहुत ही सिंपल फॉर्मूला दिया है। टैलेंट में जब आप एफर्ट यानी अपनी मेहनत जोड़ते हैं तब जाकर कोई स्किल बनती है। अब अगर आप उस स्किल को लेकर बैठ गए और सोचा कि अब तो मैं प्रो बन गया हूँ तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। उस स्किल में जब आप दोबारा एफर्ट और पसीना मिलाते हैं तब जाकर आपको अचीवमेंट मिलती है। यानी कि इस पूरे खेल में मेहनत दो बार आती है जबकि टैलेंट सिर्फ एक बार। अगर आपका टैलेंट 100 है लेकिन आपका एफर्ट जीरो है तो आपकी कामयाबी भी जीरो ही होगी। लेकिन अगर आपका टैलेंट कम भी है और आप दिन रात एक करने का दम रखते हैं तो आप उस तथाकथित जीनियस को भी पीछे छोड़ देंगे जो बस अपनी पुरानी तारीफों के सहारे जी रहा है।
मान लीजिए आपके मोहल्ले में दो लड़के हैं। एक है चिंटू जिसके पास बहुत अच्छी आवाज है उसे सुरों की समझ बचपन से है। दूसरा है पिंटू जो बेसुरों का राजा है लेकिन उसे सिंगर बनने का भूत सवार है। चिंटू को लगता है कि उसे रियाज करने की क्या जरूरत है वह तो पैदाइशी अरिजीत सिंह है। वह पार्टी करता है और सोता रहता है। दूसरी तरफ पिंटू रोज सुबह 4 बजे उठकर हारमोनियम लेकर बैठ जाता है। वह फटे गले से गला फाड़ता है और पड़ोसियों की गालियां सुनता है। साल बीतते हैं और पिंटू की मेहनत उसके गले को तराश देती है जबकि चिंटू का टैलेंट बिना प्रैक्टिस के जंग खा जाता है। अंत में पिंटू स्टेज पर परफॉर्म करता है और चिंटू ऑडियंस में बैठकर ताली बजाता है।
सच्चाई तो यही है कि दुनिया को आपके टैलेंट से कोई लेना देना नहीं है। दुनिया सिर्फ आपका रिजल्ट देखती है। और रिजल्ट बिना घिसे नहीं आता। अगर आप जिम जाते हैं और पहले दिन ही बॉडी बनाने का सपना देखते हैं तो आप से बड़ा जोकर कोई नहीं है। टैलेंट आपको जिम के दरवाजे तक ला सकता है लेकिन वो डोले और सिक्स पैक सिर्फ रोज पसीना बहाने से ही आएंगे। लोग अक्सर पूछते हैं कि भाई तूने यह कैसे किया। उन्हें लगता है कि कोई शॉर्टकट होगा। लेकिन शॉर्टकट सिर्फ फिल्मों में अच्छे लगते हैं। असल जिंदगी में तो आपको अपनी स्किल्स को रगड़ना पड़ता है।
जब आप मेहनत करना छोड़ देते हैं तो आपका टैलेंट सिर्फ एक म्यूजियम का पीस बनकर रह जाता है जिसे लोग देखते तो हैं पर उसकी कोई वैल्यू नहीं होती। इसलिए अगर आप खुद को कमजोर समझते हैं या सोचते हैं कि आप स्मार्ट नहीं हैं तो खुश हो जाइए। क्योंकि आपके पास अब भी मेहनत करने का ऑप्शन खुला है। और यकीन मानिए इतिहास गवाह है कि टफ टाइम में वही टिकता है जिसके अंदर हार न मानने वाला जज्बा होता है न कि वो जो सिर्फ अच्छे स्कूल या अच्छी डिग्री का ठप्पा लेकर घूमता है। टैलेंट एक चाबी हो सकती है लेकिन उस चाबी को घुमाकर दरवाजा खोलने के लिए जो ताकत चाहिए उसे ही हम एफर्ट कहते हैं।
लेसन २ : इंटरेस्ट को डेवलप करना
ज्यादातर लोग लाइफ में इस इंतजार में बैठे रहते हैं कि एक दिन आसमान से बिजली गिरेगी और उन्हें अपना पैशन मिल जाएगा। उन्हें लगता है कि पैशन कोई ऐसी चीज है जो रास्ते में पड़ा हुआ मिलेगा और उसे उठाते ही उनकी जिंदगी बदल जाएगी। लेकिन एंजेला डकवर्थ कहती हैं कि पैशन ढूंढा नहीं जाता बल्कि उसे बनाया जाता है। अगर आप आज भी यह सोचकर बेरोजगार बैठे हैं कि अभी तक मुझे मेरा कॉल आया नहीं है तो आप अपनी लाइफ की सबसे बड़ी गलती कर रहे हैं। असल में पैशन एक पौधा है जिसे आपको खुद पानी देकर बढ़ाना पड़ता है न कि कोई बना बनाया पेड़ जिसे आप बस काट लेंगे।
शुरुआत हमेशा एक छोटे से इंटरेस्ट से होती है। कोई चीज आपको अच्छी लगती है और आप उसे करना शुरू करते हैं। लेकिन दिक्कत तब आती है जब उस काम में थोड़ी सी मुश्किल आती है। जैसे ही काम बोरिंग होने लगता है आप उसे छोड़कर किसी दूसरी चीज की तलाश में निकल जाते हैं। आपको लगता है कि शायद यह मेरा पैशन नहीं था। असल में आप पैशन नहीं ढूंढ रहे आप बस नयापन ढूंढ रहे हैं। और नयापन तो हर काम में कुछ समय बाद खत्म हो जाता है। जब तक आप किसी काम को गहराई से नहीं सीखेंगे तब तक आपको उसमें मजा नहीं आएगा। बिना गहराई के कोई भी काम आपको ज्यादा समय तक खुश नहीं रख सकता।
मान लीजिए आपको कुकिंग का शौक चढ़ा। आपने एक दिन बढ़िया पनीर बटर मसाला बनाया और सबको पसंद आया। अब आपको लगा कि आप तो मास्टर शेफ बनने के लिए पैदा हुए हैं। लेकिन अगले ही दिन जब आपको 50 लोगों के लिए सब्जी काटनी पड़ी और प्याज ने आपकी आंखों से आंसू निकाल दिए तो आपका पैशन गायब हो गया। आपने सोचा कि नहीं यार मेरा असली पैशन तो गिटार बजाना है। अब आप गिटार लेकर आए और दो दिन में आपकी उंगलियों में छाले पड़ गए। फिर आपने सोचा कि गिटार भी बेकार है मुझे तो फोटोग्राफी करनी चाहिए। यह सिलसिला चलता रहता है और अंत में आपके पास स्किल्स के नाम पर कुछ नहीं होता।
पैशन को डेवलप करने के लिए आपको उस बोरियत और दर्द से गुजरना पड़ता है। आपको एक ही चीज को बार बार करना पड़ता है जब तक कि आप उसमें माहिर न हो जाएं। जब आप किसी काम में एक्सपर्ट बन जाते हैं तो वह काम अपने आप आपका पैशन बन जाता है। दुनिया के जितने भी बड़े लोग हैं उन्होंने सालों तक एक ही कमरे में बंद होकर बोरिंग काम किए हैं तब जाकर वो आज स्टेज पर चमक रहे हैं। अगर आप हर हफ्ते अपना गोल बदलते हैं तो आप सिर्फ एक कन्फ्यूज्ड इंसान हैं जिसके पास जोश तो है पर होश और धैर्य बिलकुल नहीं है।
इंटरेस्ट को पैशन में बदलने के लिए आपको उसे दुनिया से जोड़ना पड़ता है। आपको यह सोचना पड़ता है कि जो काम आप कर रहे हैं उससे दूसरों का क्या भला होगा। जब आप अपने काम में कोई बड़ा मकसद जोड़ देते हैं तो वो बोरियत खत्म हो जाती है। फिर आप सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि किसी बड़े लक्ष्य के लिए काम करते हैं। अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ पैसा कमाना ही आपका पैशन है तो आप बहुत जल्दी हार मान लेंगे। क्योंकि पैसा आने में समय लगता है और उस खाली समय में आपका ग्रिट ही आपको बचा सकता है। इसलिए एक चीज पकड़िए और उसमें इतने गहरे उतर जाइए कि कुआं खोदकर ही दम लें।
लेसन ३ : कभी हार न मानने वाला एटीट्यूड
लाइफ में सक्सेसफुल होने का सबसे बड़ा सीक्रेट यह नहीं है कि आप कितने स्मार्ट हैं, बल्कि यह है कि जब आप गिरते हैं तो कितनी जल्दी वापस खड़े होते हैं। एंजेला डकवर्थ कहती हैं कि "ग़्रिट" का मतलब है अपनी आंखों में एक लंबी दूरी का सपना पालना और उस सपने को हकीकत में बदलने के लिए हर दिन घिसना। बहुत से लोग रेस शुरू तो बड़े जोश के साथ करते हैं, लेकिन जैसे ही पहला कांटा चुभता है, वो लंगड़ाकर बैठ जाते हैं। अगर आप हार मिलने पर रोने लगते हैं और अपनी किस्मत को कोसने लगते हैं, तो समझ लीजिए कि आपके अंदर ग्रिट की भारी कमी है। असली खिलाड़ी वही है जो मैदान तब तक नहीं छोड़ता जब तक कि खेल खत्म न हो जाए।
अक्सर हम फेलियर को एक एंड की तरह देखते हैं, जबकि वो सिर्फ एक फीडबैक है। जब आप फेल होते हैं, तो लाइफ आपसे कह रही होती है कि भाई यह तरीका काम नहीं कर रहा, कुछ नया ट्राई कर। लेकिन हम ठहरे इमोशनल ड्रामा करने वाले लोग, हम फेलियर को अपने दिल से लगा लेते हैं और देवदास बनकर बैठ जाते हैं। ग्रिट वाले इंसान के लिए फेलियर सिर्फ एक रुकावट है, मंजिल नहीं। वो जानता है कि अगर रास्ता बंद है, तो दीवार फांदकर जाना होगा, लेकिन वापस मुड़ने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। यह जिद ही है जो आपको एक आम इंसान से जीनियस बनाती है।
आपने अपने मोहल्ले के उस मजनू को तो देखा होगा जो किसी लड़की का पीछा तब तक नहीं छोड़ता जब तक कि उसे सैंडल न पड़ जाए। खैर, वह तो गलत काम में मेहनत कर रहा है, लेकिन सोचिए अगर वही पागलपन आप अपने करियर में लगा दें। मान लीजिए आप एक स्टार्टअप शुरू करते हैं। पहले महीने कोई सेल्स नहीं हुई, दूसरे महीने इन्वेस्टर ने मना कर दिया, तीसरे महीने ऑफिस का किराया देने के पैसे नहीं हैं। अब यहाँ दो तरह के लोग होंगे। एक वो जो अपनी पुरानी नौकरी पर वापस भाग जाएंगे और कहेंगे कि बिजनेस करना मेरे बस की बात नहीं है। दूसरे वो होंगे जो अपनी शर्ट बेच देंगे लेकिन अपने आइडिया पर काम करना बंद नहीं करेंगे। इतिहास सिर्फ उन्हीं जिद्दी लोगों को याद रखता है।
ग्रिट का मतलब यह भी है कि आप अपनी प्रोग्रेस को लेकर ईमानदार रहें। सिर्फ मेहनत करना काफी नहीं है, सही दिशा में मेहनत करना जरूरी है। अगर आप दीवार को धक्का मार रहे हैं, तो आप मेहनत तो बहुत कर रहे हैं, पसीना भी निकल रहा है, लेकिन दीवार टस से मस नहीं होगी। आपको यह देखना होगा कि कहाँ सुधार की जरूरत है। जिसे लेखिका "डेलिब्रेट प्रैक्टिस" कहती हैं। यानी अपनी गलतियों को ढूंढना और उन्हें ठीक करने के लिए बार-बार प्रैक्टिस करना। यह प्रोसेस बोरिंग होता है, इसमें मजा नहीं आता, और यही वजह है कि 99 परसेंट लोग बीच में ही दम तोड़ देते हैं।
अंत में, याद रखिए कि कामयाबी कोई स्प्रिंट नहीं है, यह एक मैराथन है। यहाँ वह नहीं जीतता जो सबसे तेज दौड़ता है, बल्कि वह जीतता है जो सबसे देर तक दौड़ सकता है। अगर आप आज भी संघर्ष कर रहे हैं, तो खुद को मुबारकबाद दीजिए, क्योंकि आप निखर रहे हैं। जो लोग आज आपको पागल कह रहे हैं, कल वही लोग आपकी कामयाबी की कहानियां सुनाएंगे। बस रुकना मत, क्योंकि रुक जाना ही असली हार है।
ग्रिट कोई ऐसी चीज नहीं है जिसके साथ आप पैदा होते हैं, यह एक मांसपेशी की तरह है जिसे आप जितना ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, यह उतनी ही मजबूत होगी। अपनी पैशन को ढूंढिए, उस पर मेहनत की पॉलिश चढ़ाइए और जब तक लक्ष्य हासिल न हो जाए, तब तक अपनी जिद पर अड़े रहिए। टैलेंट आपको शुरुआत दिला सकता है, लेकिन केवल ग्रिट ही आपको फिनिश लाइन तक ले जा सकता है।
तो, क्या आप तैयार हैं अपने अंदर के उस जिद्दी इंसान को जगाने के लिए। नीचे कमेंट में "I HAVE GRIT" लिखें और हमें बताएं कि वो कौन सा एक सपना है जिसके लिए आप कभी हार नहीं मानेंगे। इस ब्लॉग को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बार-बार हार मान लेता है, शायद आपकी एक शेयर उसकी जिंदगी बदल दे।
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