क्या आप अभी भी उस ९ से ५ वाली जेल में सड़ रहे हैं और सोचते हैं कि बिजनेस करना आपके बस की बात नहीं है। कितनी बेवकूफी है कि आप अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ एक सैलरी के भरोसे छोड़ रहे हैं जबकि दुनिया के स्मार्ट लोग आपकी मेहनत पर अमीर बन रहे हैं। बिना रिस्क लिए आप बस एक एवरेज लाइफ जी रहे हैं और यकीन मानिए यह बहुत शर्म की बात है।
लेकिन फिक्र मत करिए क्योंकि आज हम पैट्रिक मगिनिस की बेहतरीन बुक द १० परसेंट एंटरप्रेन्योर से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपको बिना नौकरी छोड़े एक कामयाब बिजनेस मालिक बना सकते हैं। चलिए इन ३ पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं।
लेसन १ : अपनी जॉब छोड़ना सबसे बड़ी बेवकूफी है
अक्सर लोग समझते हैं कि एंटरप्रेन्योर बनने का मतलब है अपनी नौकरी को लात मारना और पहाड़ों पर जाकर तपस्या करना या फिर दिन रात ऑफिस में गधे की तरह खटना। लेकिन पैट्रिक मगिनिस कहते हैं कि अगर आप अपनी सैलरी की सुरक्षा छोड़कर सीधा स्टार्टअप की आग में कूद रहे हैं तो आप साहसी नहीं बल्कि थोड़े से पागल हैं। असल में १० परसेंट एंटरप्रेन्योर वह इंसान है जो अपनी ९ से ५ वाली नौकरी को एक ढाल की तरह इस्तेमाल करता है। आपकी नौकरी वह एटीएम मशीन है जो आपको हर महीने की ३० तारीख को वह फंड देती है जिससे आप अपना नया आइडिया टेस्ट कर सकते हैं। जरा सोचिए अगर आपके पास घर का रेंट देने के पैसे नहीं होंगे तो क्या आप शांति से कोई नया बिजनेस खड़ा कर पाएंगे। बिलकुल नहीं। तब आपका दिमाग सिर्फ भूख और बिल के बारे में सोचेगा न कि किसी इनोवेशन के बारे में।
हमारे पड़ोस के शर्मा जी को ही देख लीजिए। जोश में आकर उन्होंने अपनी १५ साल की सरकारी नौकरी छोड़ दी और मोमोज की दुकान खोल ली। उन्हें लगा कि वह रातों रात अमीर बन जाएंगे पर हुआ क्या। न नौकरी रही और न ही मोमोज बिके क्योंकि वह सारा समय और पैसा सिर्फ उसी एक चीज में झोंक चुके थे। वहीं दूसरी तरफ हमारे राहुल भाई हैं। वह दिन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और शाम को अपना १० परसेंट समय एक ऑनलाइन सप्लीमेंट स्टोर को देते हैं। राहुल को इस बात की टेंशन नहीं है कि कल क्लाइंट पैसे देगा या नहीं क्योंकि उनकी कंपनी उन्हें मोटा पैकेज दे रही है। यही वह कॉन्फिडेंस है जो आपको बड़े रिस्क लेने की हिम्मत देता है। जब आपके पास पीछे मुड़ने के लिए एक पक्की जमीन होती है तब आप आसमान में ऊँची उड़ान भर सकते हैं।
नौकरी को बोझ मत समझिए बल्कि उसे अपना सबसे बड़ा इन्वेस्टर मानिए। जब आप अपनी सैलरी का एक हिस्सा और अपने दिन का थोड़ा सा वक्त किसी साइड प्रोजेक्ट में लगाते हैं तो आप धीरे धीरे एक साम्राज्य खड़ा कर रहे होते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप जिम जाते हैं। आप पहले ही दिन १०० किलो का वजन नहीं उठाते बल्कि धीरे धीरे अपनी मसल्स बनाते हैं। बिजनेस भी एक मसल है। इसे धीरे धीरे तैयार करिए। जब आपका साइड बिजनेस आपकी सैलरी से ज्यादा पैसे देने लगे तब आप फुल टाइम बनने का सोच सकते हैं। उससे पहले अपनी कुर्सी से चिपके रहिए और सिस्टम का फायदा उठाइए। याद रखिए असली विनर वह नहीं जो सब कुछ दांव पर लगा दे बल्कि वह है जिसके पास हमेशा एक बैकअप प्लान तैयार हो।
लेसन २ : केवल पैसा ही निवेश नहीं होता
ज्यादातर लोग बिजनेस का नाम सुनते ही अपना खाली बटुआ देखने लगते हैं और फिर ठंडी आह भरकर सो जाते हैं। उन्हें लगता है कि जब तक बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपये नहीं होंगे तब तक वह मालिक नहीं बन सकते। लेकिन यह लेसन आपको सिखाएगा कि आप असल में कितने अमीर हैं। पैट्रिक मगिनिस कहते हैं कि एक १० परसेंट एंटरप्रेन्योर सिर्फ नोट नहीं गिनता बल्कि वह अपना समय अपना नेटवर्क और अपना खास हुनर निवेश करता है। मान लीजिए आपका कोई दोस्त एक नया कैफे खोल रहा है। उसके पास पैसा है पर उसे मार्केटिंग का एम भी नहीं पता। अब आप ठहरे सोशल मीडिया के उस्ताद। आप उसे कहते हैं कि भाई मैं तेरी मार्केटिंग संभालूँगा और बदले में मुझे तेरे प्रॉफिट में ५ परसेंट का हिस्सा चाहिए। बधाई हो अब आप बिना एक रुपया लगाए एक कैफे के मालिक बन चुके हैं।
यह सुनने में शायद फिल्मी लगे पर असल दुनिया ऐसे ही चलती है। लोग अक्सर टैलेंट के भूखे होते हैं। हमारे एक मित्र हैं अमित जो दिन भर बैंक में फाइलें दबाते हैं। लेकिन अमित को कोडिंग का बड़ा शौक है। उनके एक जान पहचान वाले को अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट के लिए एक भरोसेमंद पार्टनर चाहिए था। अमित ने ऑफिस के बाद रात को दो घंटे कोडिंग की और उस स्टार्टअप में हिस्सेदारी ले ली। आज वह स्टार्टअप बढ़ रहा है और अमित की हिस्सेदारी की कीमत उनकी साल भर की सैलरी से ज्यादा हो चुकी है। क्या अमित ने अपनी जमीन बेची। नहीं। क्या उन्होंने कोई लोन लिया। बिलकुल नहीं। उन्होंने बस अपने उस हुनर का इस्तेमाल किया जो वह दफ्तर की डेस्क पर धूल फांकने के लिए छोड़ आए थे।
इसे ही हम स्वेट इक्विटी कहते हैं। यानी पसीना बहाकर मालिकाना हक पाना। आपके पास क्या है जो दूसरों के काम आ सकता है। शायद आप अच्छी सलाह दे सकते हैं या शायद आपकी जान पहचान बहुत बड़े बड़े लोगों से है। अपने नेटवर्क का इस्तेमाल कीजिए। किसी को सेल्स में मदद चाहिए तो किसी को ऑपरेशंस संभालने वाला चाहिए। जब आप दूसरों की समस्याओं को अपने टैलेंट से हल करते हैं तो आप उनके बिजनेस के अनमोल रत्न बन जाते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप किसी पार्टी में बिना इनविटेशन के घुस जाएं और अपनी बातों से सबको इतना इम्प्रेस कर दें कि होस्ट खुद आपको वीआईपी टेबल पर बिठा दे। पैसा तो कोई भी लगा सकता है पर सही दिमाग और सही कनेक्शन हर किसी के पास नहीं होते। इसलिए अपने ज्ञान को हथियार बनाइए और दूसरों की सफलता की गाड़ी में अपनी सीट पक्की कीजिए।
लेसन ३ : रिस्क को मैनेज करना सीखें न कि उससे डरें
बिजनेस की दुनिया में अक्सर लोग दो तरह के होते हैं। पहले वो जो डर के मारे कभी घर से बाहर ही नहीं निकलते और दूसरे वो जो बिना पैराशूट के जहाज से कूद जाते हैं। पैट्रिक मगिनिस कहते हैं कि आपको इन दोनों के बीच का रास्ता चुनना है। एक १० परसेंट एंटरप्रेन्योर कभी भी अपना सारा पैसा या पूरा वक्त किसी एक ही आइडिया पर बर्बाद नहीं करता। इसे आप अपनी थाली की तरह समझ सकते हैं। क्या आप रोज सिर्फ चावल खाते हैं। नहीं न। आप दाल सब्जी और अचार भी रखते हैं ताकि अगर दाल फीकी लगे तो अचार से काम चल जाए। ठीक वैसे ही आपको अपने साइड बिजनेस का एक पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। रिस्क को मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप एक साथ दो या तीन छोटे प्रोजेक्ट्स पर काम करें।
जरा हमारे विक्की भाई की कहानी सुनिए। विक्की ने एक बार जोश में आकर अपनी जमा पूंजी से एक बहुत बड़ा जिम खोला। उन्हें लगा कि मोहल्ले के सारे लड़के बॉडी बनाने वहीं आएंगे। लेकिन तभी लॉकडाउन लग गया और विक्की भाई का सारा पैसा डूब गया। उनकी सबसे बड़ी गलती यह थी कि उन्होंने अपना १०० परसेंट एक ही टोकरी में रख दिया था। अगर विक्की भाई ने जिम के साथ साथ एक छोटा सा ऑनलाइन डाइट प्लान का बिजनेस और एक सप्लीमेंट ब्रांड में छोटी सी हिस्सेदारी ली होती तो जिम बंद होने पर भी उनकी बाकी दो दुकानें चल रही होतीं। रिस्क लेना बुरी बात नहीं है पर बिना दिमाग के रिस्क लेना खुदकुशी जैसा है। आपको अपनी इनकम के अलग अलग पाइप बनाने होंगे ताकि अगर एक पाइप में कचरा फंस जाए तो दूसरे से पानी आता रहे।
जब आप १० परसेंट समय और पैसा अलग अलग जगह लगाते हैं तो आप असल में फेल होने के चांस को बहुत कम कर देते हैं। अगर एक प्रोजेक्ट फेल भी हो गया तो आपको सदमा नहीं लगेगा क्योंकि आपके पास अभी भी आपकी नौकरी और दूसरे दो प्रोजेक्ट्स सलामत हैं। यह वैसा ही है जैसे आप स्टॉक मार्केट में पैसा लगाते हैं। आप सारा पैसा एक ही कंपनी में नहीं डालते बल्कि डाइवर्सिफाई करते हैं। स्मार्ट एंटरप्रेन्योर वह नहीं है जो बहुत बड़े रिस्क लेता है बल्कि वह है जो बहुत सारे छोटे छोटे रिस्क लेता है। जब आप इस माइंडसेट से काम करते हैं तो आप हारने के डर से आजाद हो जाते हैं और यही आजादी आपको बड़े फैसले लेने की ताकत देती है। अपनी लाइफ को एक जुआ मत बनाइए बल्कि इसे एक सोची समझी रणनीति की तरह खेलिए।
आज हमने सीखा कि कैसे आप अपनी सुरक्षित नौकरी के साथ एक बड़ा बिजनेस खड़ा कर सकते हैं। जिंदगी में अमीर बनने के लिए सब कुछ छोड़ देना जरूरी नहीं है बल्कि सही दिशा में १० परसेंट मेहनत करना काफी है। तो क्या आप आज से ही अपना वह पहला कदम उठाने के लिए तैयार हैं। नीचे कमेंट्स में हमें जरूर बताएं कि आपका वह कौन सा टैलेंट है जिसे आप अपना साइड हसल बनाना चाहते हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा अपनी जॉब का रोना रोता है पर कुछ नया करने से डरता है। उठिए और अपना साम्राज्य बनाना शुरू कीजिए।
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