अगर आप आज भी पुराने जमाने के विज्ञापन और बोरिंग मार्केटिंग पर पैसे लुटा रहे हैं तो मुबारक हो। आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। दुनिया सोशल टेक्नोलॉजी के समुंदर में गोते लगा रही है और आप अभी भी किनारे पर बैठकर कागज की नाव चला रहे हैं। यह आर्टिकल छोड़िए और सो जाइए क्योंकि आपकी ग्रोथ वैसे भी अब भगवान भरोसे ही है।
लेकिन अगर आप अपनी डूबती हुई नैया को बचाना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि सोशल मीडिया का असली गेम क्या है तो यह ३ लेसन आपकी आँखें खोल देंगे। चलिए समझते हैं कि ग्राउंडस्वेल आखिर है क्या और यह आपको करोड़पति या रोडपति कैसे बना सकता है।
लेसन १ : ग्राउंडस्वेल को पहचानो वरना भीड़ में खो जाओगे
आज के समय में अगर आप सोचते हैं कि एक बढ़िया सा टीवी विज्ञापन बना लिया और लोग आपकी दुकान पर लाइन लगा देंगे तो आप शायद अभी भी १९९० के दशक में जी रहे हैं। बुक के लेखक हमें समझाते हैं कि असली ताकत अब बड़ी कंपनियों के पास नहीं बल्कि आम लोगों के हाथ में है। इसी को ग्राउंडस्वेल कहते हैं। यह एक ऐसा सामाजिक तूफान है जहाँ लोग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एक दूसरे से जुड़ते हैं और अपनी बात रखते हैं। अगर आप एक बिजनेस चला रहे हैं और आपको लगता है कि आप कस्टमर को कंट्रोल कर सकते हैं तो आप उतने ही गलत हैं जितने कि वो लोग जो सोचते हैं कि जिम जाने के पहले दिन ही बॉडी बन जाएगी।
मान लीजिए आपने एक नया रेस्टोरेंट खोला और बहुत सारा पैसा खर्च करके बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगवा दिए। लेकिन आपके समोसे में आलू कम और गुस्सा ज्यादा निकलता है। अब पुराने जमाने में क्या होता था। कस्टमर बेचारा गुस्सा पीकर रह जाता था। लेकिन आज का दौर ग्राउंडस्वेल का है। वो कस्टमर तुरंत अपने फोन से फोटो खींचेगा और गूगल रिव्यु या इंस्टाग्राम पर आपकी ऐसी बैंड बजाएगा कि अगले दिन से वहां केवल मक्खियां ही डिनर करने आएंगी। लोग अब आपकी मार्केटिंग वाली चिकनी-चुपड़ी बातों पर नहीं बल्कि अपने जैसे दूसरे लोगों के रिव्यु पर भरोसा करते हैं। आप चिल्लाते रहिए कि मेरा प्रोडक्ट बेस्ट है लेकिन अगर ग्राउंडस्वेल ने कह दिया कि आप बेकार हैं तो समझो खेल खत्म।
ग्राउंडस्वेल कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप रोक सकें। यह एक बहती हुई नदी की तरह है। या तो आप इसके साथ तैरना सीख लो या फिर डूबने के लिए तैयार रहो। समस्या यह है कि ज्यादातर कंपनियां इस बदलाव से डरती हैं। उन्हें लगता है कि अगर लोग सोशल मीडिया पर उनके बारे में बात करेंगे तो उनकी इमेज खराब हो जाएगी। अरे भाई इमेज तो वैसे भी खराब है अगर आपका प्रोडक्ट बुरा है। कम से कम सोशल मीडिया पर आपको पता तो चलेगा कि लोग क्या सोच रहे हैं। इसे इग्नोर करना वैसा ही है जैसे अपनी जलती हुई कार में बैठकर यह सोचना कि बाहर बहुत ठंड है और हीटर अच्छा काम कर रहा है।
सच्चाई यह है कि लोग अब आपस में बात करके अपना फैसला लेते हैं। वो फेसबुक ग्रुप्स पर पूछते हैं कि कौन सा फोन खरीदें या कौन सा साबुन अच्छा है। अगर आप वहां मौजूद नहीं हैं तो आप गायब हैं। आप एक ऐसी पार्टी में हैं जहाँ सब डांस कर रहे हैं और आप कोने में बैठकर पुराने जमाने के रेडियो पर न्यूज सुन रहे हैं। ग्राउंडस्वेल को समझने का मतलब है यह मानना कि अब आप ड्राइवर की सीट पर नहीं हैं बल्कि आपका कस्टमर है। आपको उनके साथ चलना होगा न कि उनके खिलाफ। जब आप इस ताकत को पहचान लेते हैं तब आप केवल एक सेलर नहीं बल्कि एक कम्युनिटी का हिस्सा बन जाते हैं। और याद रखिए जो कम्युनिटी का हिस्सा है वही मार्केट में टिका है बाकी सब तो बस इतिहास के पन्नों में दबकर रह गए हैं।
लेसन २ : पोस्ट (POST) मेथड को अपनाओ वरना भटकते रह जाओगे
ज्यादातर लोग और कंपनियां सोशल मीडिया पर ऐसे कूदते हैं जैसे बिना तैरना सीखे कोई गहरे पानी में छलांग लगा दे। आपने देखा होगा कि कल एक नया ऐप आया और आज हर कोई उस पर नाचने लगा क्योंकि सबको लगता है कि बस वहां होने से ही सेल बढ़ जाएगी। यह वैसा ही है जैसे आप शादी में बिना कार्ड के घुस जाएं और उम्मीद करें कि दूल्हा आपको गले लगाएगा। लेखक यहाँ हमें एक जबरदस्त फ्रेमवर्क देते हैं जिसका नाम है पोस्ट यानी पी। ओ। एस। टी। यह चार अक्षरों का मंत्र आपकी मार्केटिंग की नैया पार लगा सकता है।
सबसे पहले आता है पी यानी पीपल। आप किसके लिए यह सब कर रहे हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आपका कस्टमर कौन है। लोग अक्सर अपनी बात कहने के लिए इतने उतावले होते हैं कि वो भूल जाते हैं कि सामने वाला सुनना भी चाहता है या नहीं। मान लीजिए आप ८० साल के बुजुर्गों को गेमिंग कंसोल बेचने की कोशिश कर रहे हैं और उसके लिए टिकटॉक पर वीडियो बना रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे आप भैंस के आगे बीन बजा रहे हों और उम्मीद कर रहे हों कि वो आपको दूध की जगह कोल्ड ड्रिंक दे देगी। पहले अपने लोगों को समझो। वो कहाँ बैठते हैं। वो क्या बातें करते हैं। उन्हें क्या तकलीफ है। जब तक आप अपने लोगों को नहीं समझेंगे तब तक आपका हर पोस्ट कचरे के डिब्बे में जाएगा।
दूसरा है ओ यानी ऑब्जेक्टिव। आपका मकसद क्या है। क्या आप सिर्फ फेमस होना चाहते हैं या आप सच में कुछ बेचना चाहते हैं। बहुत से लोग बस लाइक और कमेंट्स के पीछे ऐसे भागते हैं जैसे कोई प्यासा रेगिस्तान में पानी के पीछे। भाई लाइक से घर का राशन नहीं आता। आपको तय करना होगा कि आप लोगों की बात सुनना चाहते हैं या उन्हें कुछ नया सिखाना चाहते हैं या फिर उन्हें अपने साथ जोड़ना चाहते हैं। बिना मकसद के सोशल मीडिया पर होना वैसा ही है जैसे आप बिना पते के ऑटो में बैठ जाएं और ड्राइवर से कहें कि बस चलते रहो। अंत में बस आपका मीटर और सरदर्द ही बढ़ेगा।
तीसरा आता है एस यानी स्ट्रेटजी। अब जब आप लोगों और मकसद को जानते हैं तो प्लान क्या है। आप उनके साथ रिश्ता कैसे बनाएंगे। क्या आप रोज उन्हें बस अपना सामान खरीदने के लिए परेशान करेंगे। अगर आप किसी से पहली मुलाकात में ही शादी के लिए पूछ लेंगे तो थप्पड़ ही मिलेगा। सोशल मीडिया पर भी यही होता है। आपको धीरे-धीरे भरोसा जीतना पड़ता है। आपको यह सोचना होगा कि आप लोगों की जिंदगी में क्या वैल्यू जोड़ रहे हैं।
और आखिरी है टी यानी टेक्नोलॉजी। ध्यान दीजिए कि टेक्नोलॉजी सबसे आखिर में आती है। लेकिन हम लोग क्या करते हैं। पहले फेसबुक पेज बनाते हैं फिर सोचते हैं कि अब क्या करें। यह वैसा ही है जैसे आपने कार खरीद ली लेकिन आपको पता ही नहीं कि जाना कहाँ है और किसके साथ जाना है। टेक्नोलॉजी सिर्फ एक जरिया है। अगर आपके पहले के तीन स्टेप्स यानी पीपल ओब्जेक्टिव और स्ट्रेटजी सही नहीं हैं तो दुनिया की कोई भी टेक्नोलॉजी आपको बचा नहीं सकती। तो अगली बार जब कोई नया ट्रेंड आए तो बंदरों की तरह उस पर कूदने से पहले रुकिए और सोचिए कि क्या यह आपके पोस्ट फ्रेमवर्क में फिट बैठता है। वरना आप बस एक और डिजिटल शोर बनकर रह जाएंगे जिसे हर कोई म्यूट करना चाहता है।
लेसन ३ : कस्टमर्स की बातें सुनो और उनके साथ सच्चे बनो
ज्यादातर कंपनियों को लगता है कि मार्केटिंग का मतलब है एक बड़ा सा लाउडस्पीकर लेकर लोगों के कान में चिल्लाना। वो बस अपना गुणगान करना जानते हैं। लेकिन ग्राउंडस्वेल की दुनिया में जीत उसकी नहीं होती जो सबसे तेज चिल्लाता है बल्कि उसकी होती है जो सबसे ध्यान से सुनता है। लेखक कहते हैं कि अगर आप अपने कस्टमर की बात नहीं सुन रहे हैं तो आप अपनी ही कब्र खोद रहे हैं। लिसनिंग यानी सुनना ही सोशल टेक्नोलॉजी का असली जादू है। लोग इंटरनेट पर आपके बारे में पहले से ही बातें कर रहे हैं। अब यह आप पर है कि आप उन बातों को सुनकर खुद को सुधारते हैं या फिर घमंड में आकर अपनी ही धुन में मगन रहते हैं।
मान लीजिए आप एक जूते की कंपनी चलाते हैं। अब सोशल मीडिया पर लोग शिकायत कर रहे हैं कि आपके जूते का सोल दो दिन में ही साथ छोड़ देता है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला रास्ता यह कि आप उन कमेंट्स को डिलीट कर दें और उस कस्टमर को ब्लॉक कर दें। यह वैसा ही है जैसे घर में आग लगी हो और आप अलार्म का तार काट दें ताकि आप चैन से सो सकें। दूसरा रास्ता यह है कि आप उस कस्टमर से बात करें और उससे कहें कि भाई हमें दुख है और हम इसे ठीक करेंगे। जब आप लोगों की सुनते हैं और अपनी गलती सुधारते हैं तो वही गुस्से वाला कस्टमर आपका सबसे बड़ा फैन बन जाता है। वह चार लोगों को और जाकर कहेगा कि यह कंपनी दिल की साफ है।
सच्चाई और ईमानदारी इस खेल के सबसे बड़े हथियार हैं। आज के दौर में लोग फेक पर्सनालिटी को मिनटों में पहचान लेते हैं। अगर आप सोशल मीडिया पर बहुत शरीफ और कूल बनने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन असलियत में आपका प्रोडक्ट और सर्विस घटिया है तो आपका पर्दाफाश होना तय है। यह वैसा ही है जैसे कोई फिल्टर लगाकर फोटो डाले और असलियत में मिलने पर उसे कोई पहचान ही न पाए। लोग आपसे परफेक्शन की उम्मीद नहीं करते बल्कि वो आपसे ईमानदारी की उम्मीद करते हैं। अगर कुछ गलत हुआ है तो उसे मान लीजिए। इंसान बनिए कोई रोबोट नहीं जो सिर्फ रटे-रटाए जवाब देता है।
जब आप अपने कस्टमर्स के साथ एक्टिवली एंगेज होते हैं यानी उनके साथ जुड़ते हैं तो आप एक ऐसी आर्मी तैयार कर लेते हैं जो आपकी ब्रांड को प्रोटेक्ट करती है। जब कोई आपके बारे में झूठ फैलाएगा तो आपको सफाई देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आपकी कम्युनिटी खुद आकर उन लोगों को जवाब देगी। इसे कहते हैं असली पावर। लेकिन इसके लिए आपको अपना ईगो साइड में रखना होगा। आपको समझना होगा कि हर फीडबैक एक तोहफा है। जो कंपनी अपने कस्टमर्स को अपना दोस्त मानती है वो कभी फेल नहीं होती। तो अब चुनाव आपका है। क्या आप एक बंद कमरे में बैठकर अपनी तारीफ सुनना चाहते हैं या फिर ग्राउंडस्वेल के मैदान में उतरकर अपने लोगों के साथ एक सच्चा रिश्ता बनाना चाहते हैं।
तो दोस्तों, यह था ग्राउंडस्वेल का असली सच। याद रखिए कि टेक्नोलॉजी बदलती रहेगी लेकिन लोगों का आपस में जुड़ने का तरीका हमेशा वैसा ही रहेगा। क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोशल मीडिया को सिर्फ टाइमपास समझते हैं या फिर आप इस तूफान का हिस्सा बनकर अपनी तकदीर बदलना चाहते हैं। नीचे कमेंट्स में बताएं कि आप अपने बिजनेस या लाइफ में पोस्ट (POST) मेथड को कैसे लागू करेंगे। इस आर्टिकल को उन लोगों के साथ शेयर करें जो आज भी पुरानी मार्केटिंग के भरोसे बैठे हैं। उठिए और इस बदलाव का हिस्सा बनिए।
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