Taking People with You (Hindi)


क्या आपको भी लगता है कि आप अकेले ही पूरी दुनिया जीत लेंगे। अगर हाँ तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की स्क्रिप्ट खुद लिख रहे हैं। अपनी टीम को इग्नोर करके आप सिर्फ अपनी हार पक्की कर रहे हैं और यह सच में काफी शर्मनाक है।

आज हम डेविड नोवाक की किताब से वह राज सीखेंगे जो आपको एक अकेला खिलाड़ी नहीं बल्कि एक असली लीडर बनाएंगे। चलिए देखते हैं वह ३ कीमती लेसन जो आपके काम करने के तरीके को हमेशा के लिए बदल देंगे।


लेसन १ : द बिग गोल (बड़ा लक्ष्य)

दोस्तों, अगर आपको लगता है कि ऑफिस में अपनी टेबल पर बैठकर जोर से चिल्लाने या लोगों को डराने से काम होता है तो शायद आप किसी पुरानी फिल्म के विलेन हैं। असल जिंदगी में बिजनेस और करियर ऐसे नहीं चलते। डेविड नोवाक अपनी किताब में सबसे पहले जिस चीज पर जोर देते हैं वह है एक बड़ा और साफ लक्ष्य यानी द बिग गोल।

सोचिए आप एक ट्रिप पर जा रहे हैं और आपने अपने दोस्तों को बस में बिठा लिया है पर किसी को यह नहीं पता कि जाना कहाँ है। आधे लोग गोवा जाने की तैयारी में शॉर्ट्स पहन कर बैठे हैं और आधे लोग लद्दाख की ठंड के लिए जैकेट लेकर आए हैं। अब आप बस चला रहे हैं और पीछे सब आपस में लड़ रहे हैं। क्या आप कभी अपनी मंजिल पर पहुंच पाएंगे। कभी नहीं। टीम के साथ भी यही होता है। जब तक आप उन्हें यह नहीं बताते कि हम आखिर कर क्या रहे हैं और क्यों कर रहे हैं तब तक वे सिर्फ अपनी अपनी दिशा में भागते रहेंगे।

डेविड कहते हैं कि एक लीडर का काम सिर्फ काम बांटना नहीं बल्कि एक ऐसा सपना बेचना है जिसे देखकर सबकी आंखों में चमक आ जाए। इसे एक मजेदार मिसाल से समझते हैं। मान लीजिए आपकी एक समोसे की दुकान है। अब अगर आप अपने कारीगर से सिर्फ यह कहेंगे कि भाई दिन के हजार समोसे बनाने हैं तो वह बेचारा बोर हो जाएगा। वह बस जैसे तैसे आलू भरेगा और काम खत्म करेगा। लेकिन अगर आप उसे यह विजन दें कि हमें शहर का सबसे क्रिस्पी और मशहूर समोसा बनाना है ताकि हर घर की चाय के साथ सिर्फ हमारा ही नाम हो तो उसके काम करने का तरीका बदल जाएगा। अब उसे लगेगा कि वह सिर्फ समोसे नहीं तल रहा बल्कि वह एक ब्रांड बना रहा है।

ज्यादातर लोग गलती यह करते हैं कि वे अपने गोल्स को इतना बोरिंग और मुश्किल बना देते हैं कि टीम उसे सुनकर ही थक जाती है। अगर आपका लक्ष्य सुनकर किसी को एक्साइटमेंट नहीं हो रहा तो समझ लीजिए कि आप अकेले ही दौड़ रहे हैं। लोग आपके लिए तब काम करते हैं जब उन्हें लगता है कि इस बड़े लक्ष्य में उनका भी कोई फायदा है। क्या उन्हें कुछ नया सीखने को मिलेगा। क्या उनकी लाइफ बेहतर होगी।

अगर आप सबको एक ही सुर में गाना गवाना चाहते हैं तो आपको पहले धुन खुद गुनगुनानी होगी। एक क्लियर विजन ही वह गोंद है जो बिखरती हुई टीम को आपस में जोड़कर रखती है। जब सबको पता होता है कि आखिरी निशाना कहाँ लगाना है तो कोई भी इधर उधर की बातों में वक्त बर्बाद नहीं करता। और यही एक असली लीडर की पहली पहचान है। बिना लक्ष्य के टीम वैसी ही है जैसे बिना इंटरनेट के स्मार्टफोन। दिखने में तो अच्छा है पर काम कुछ नहीं आता।


लेसन २ : अलाइनमेंट (तालमेल)

जब आपने सबको बता दिया कि मंजिल कहाँ है तो अगला बड़ा चैलेंज आता है सबको एक साथ एक ही रफ़्तार पर चलाने का। इसे डेविड नोवाक अलाइनमेंट कहते हैं। यानी सबका तालमेल। अब मान लीजिए आपने तय कर लिया कि पहाड़ पर चढ़ना है। लेकिन आपकी टीम का एक बंदा रस्सी घर भूल आया है और दूसरा कह रहा है कि उसे तो पहाड़ों से डर लगता है। ऐसे में आपका वह बड़ा विजन धरा का धरा रह जाएगा।

अलाइनमेंट का मतलब यह नहीं है कि आपने मीटिंग में चिल्लाकर सबको कह दिया कि सब समझ गए ना। और सबने डर के मारे हाँ में सर हिला दिया। असल में अलाइनमेंट तब होता है जब लोग दिल से आपकी बात मान लेते हैं। इंडिया में हम इसे अक्सर जुगाड़ से चलाने की कोशिश करते हैं। बॉस ने कुछ कहा और पीछे से एम्प्लॉई बोल रहा है कि भाई इसे तो खुद कुछ नहीं पता बस हमसे काम करवाना आता है। अगर आपकी टीम आपके पीठ पीछे ऐसा बोल रही है तो समझ जाइए कि आपका अलाइनमेंट जीरो है।

मान लीजिए आपने एक नया सॉफ्टवेयर सिस्टम लागू किया। अब आप जोश में हैं कि काम तेज होगा। लेकिन जो पुराने अंकल ऑफिस में सालों से फाइलें पलट रहे हैं उन्हें लग रहा है कि यह उनकी नौकरी खाने की साजिश है। अब वे उस सिस्टम को ठीक से चलने ही नहीं देंगे। कहीं पासवर्ड भूल जाएंगे तो कभी कहेंगे कि कंप्यूटर हैंग हो गया। यहाँ प्रॉब्लम सॉफ्टवेयर की नहीं बल्कि अलाइनमेंट की है। आपने उन्हें यह समझाया ही नहीं कि यह उनकी लाइफ आसान बनाने के लिए है न कि उन्हें बाहर निकालने के लिए।

डेविड नोवाक कहते हैं कि अगर आपको लोगों को साथ लेकर चलना है तो आपको उनके डर और उनकी चिंताओं को समझना होगा। आपको उनसे पूछना होगा कि भाई तुम्हें क्या लगता है। जब आप लोगों से राय मांगते हैं तो उन्हें लगता है कि वे भी इस गेम का हिस्सा हैं। वरना वे बस एक मशीन की तरह काम करेंगे जो कभी भी खराब हो सकती है।

सच्चाई तो यह है कि लोग उन प्लान्स को कभी फेल नहीं होने देते जिन्हें बनाने में उनका भी हाथ होता है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी टीम संडे को भी खुशी खुशी काम करे तो उन्हें यह महसूस कराइए कि यह कंपनी उनकी भी है। वरना आप सिर्फ डंडे के जोर पर भीड़ जमा कर सकते हैं लेकिन एक मजबूत टीम कभी नहीं बना पाएंगे। तालमेल बिठाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है बस लोगों को यह यकीन दिलाना है कि अगर नाव डूबेगी तो हम सब डूबेंगे और अगर पार लगेगी तो जश्न भी सब साथ मनाएंगे।


लेसन ३ : रिकग्निशन (पहचान)

अब जब आपने सबको रास्ता दिखा दिया और सब एक साथ चलने को तैयार भी हो गए हैं। तो क्या अब काम खत्म हो गया। बिल्कुल नहीं। अब बारी आती है उस ईधन की जो इस पूरी मशीनरी को चलाता रहता है और उसे डेविड नोवाक कहते हैं रिकग्निशन यानी लोगों के काम की पहचान और तारीफ। हम इंसानों की एक बहुत बड़ी कमजोरी है कि हमें अपनी तारीफ सुनना बहुत पसंद है। चाहे हम कितने भी बड़े मैनेजर बन जाएं पर जब कोई कहता है कि भाई तुमने बहुत गजब काम किया है तो दिल को जो ठंडक मिलती है उसका कोई मुकाबला नहीं है।

लेकिन हमारे यहाँ माहौल थोड़ा अलग है। अक्सर ऑफिस में बॉस तभी याद करता है जब कोई गलती हो जाती है। अगर आपने दिन भर में सौ काम सही किए हैं तो कोई कुछ नहीं बोलेगा। लेकिन जैसे ही एक छोटी सी गलती हुई बॉस आपके सिर पर खड़ा हो जाएगा। यह तो वही बात हुई कि आप अपनी बीवी के लिए रोज फूल लेकर आएं पर वह कुछ न कहे और जिस दिन आप धनिया लाना भूल जाएं उस दिन पूरा घर सिर पर उठा ले। क्या आप अगले दिन फूल लाएंगे। शायद कभी नहीं।

डेविड नोवाक ने यम ब्रांड्स के सीईओ रहते हुए एक बहुत ही अनोखा तरीका अपनाया था। वे अच्छे काम के लिए लोगों को अजीबोगरीब चीजें इनाम में देते थे जैसे रबर के मुर्गे या सजावटी दांत। सुनने में यह बचकाना लग सकता है पर इसके पीछे की सोच बहुत गहरी थी। वे काम को मजेदार बनाना चाहते थे। जब आप किसी की सबके सामने तारीफ करते हैं तो आप सिर्फ उस एक इंसान को खुश नहीं कर रहे होते बल्कि आप पूरी टीम को एक मैसेज दे रहे होते हैं कि भाई यहाँ अच्छे काम की कदर होती है।

मान लीजिए आपकी टीम में एक लड़का है जो बहुत ही चुपचाप अपना काम करता है। वह कभी क्रेडिट नहीं मांगता। अब अगर आप महीने के अंत में उसे एक छोटा सा थैंक यू नोट या सबके सामने एक छोटी सी चॉकलेट भी दे देते हैं तो वह अगले महीने दुगनी मेहनत से काम करेगा। वहीं अगर आप उसे इग्नोर करेंगे तो उसे लगेगा कि मेहनत करने का क्या फायदा जब किसी को फर्क ही नहीं पड़ता।

तारीफ करने में आपका एक पैसा खर्च नहीं होता पर इसका रिटर्न किसी भी स्टॉक मार्केट से ज्यादा मिलता है। लोग पैसों के लिए नौकरी शुरू करते हैं लेकिन वे रुकते सिर्फ इज्जत और पहचान के लिए हैं। अगर आप कंजूसों की तरह तारीफ बचाकर रखेंगे तो आपकी टीम भी धीरे धीरे काम में कंजूसी करने लगेगी। याद रखिए एक खुश टीम ही एक कामयाब टीम होती है।

अगर आप आज से ही यह लेसन अपनी लाइफ में अपना लें तो आप देखेंगे कि लोग आपके पीछे चलने के लिए खुद लाइन लगा लेंगे। क्योंकि हर कोई उस इंसान के साथ काम करना चाहता है जो उसे स्पेशल महसूस कराए। तो बस अब अपनी टीम के पास जाइए और ढूंढिए कि आज किसने क्या अच्छा किया है।


लीडरशिप कोई ओहदा नहीं है बल्कि यह एक जिम्मेदारी है लोगों को बेहतर बनाने की। डेविड नोवाक के ये ३ लेसन आपकी लाइफ बदल सकते हैं। तो आज ही अपनी टीम के साथ बैठें और एक नया विजन सेट करें। क्या आप तैयार हैं एक असली लीडर बनने के लिए। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो टीम को मैनेज करने में परेशान रहते हैं और हमें कमेंट में बताएं कि आपको कौन सा लेसन सबसे अच्छा लगा।

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