आप अभी भी अकेले मेहनत करके अमीर बनने का ख्वाब देख रहे हैं। सच तो यह है कि आपका खाली बैंक अकाउंट आपके कमजोर नेटवर्क का नतीजा है। अगर आप जूडी रॉबिनेट का यह जादुई नियम नहीं जानते तो आप बस भीड़ का हिस्सा बनकर रह जाएंगे। शायद आपको अकेले रहने में ही मजा आता है।
आज हम जूडी रॉबिनेट की किताब हाउ टू बी अ पावर कनेक्टर से ५ ५० १०० नियम के बारे में गहराई से जानेंगे। यह आर्टिकल आपको सिखाएगा कि कैसे आप अपने नेटवर्क को असली प्रॉफिट और तरक्की में बदल सकते हैं। चलिए इन ३ लेसन को विस्तार से समझते हैं।
लेसन १ : ५-५०-१०० का जादुई नियम
क्या आपको भी लगता है कि फेसबुक पर पांच हजार दोस्त होने से आप नेटवर्किंग के किंग बन गए हैं। अगर हां तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी का शिकार हैं। हकीकत तो यह है कि जब असलियत में मदद की जरूरत पड़ती है तब इनमें से पांच लोग भी फोन नहीं उठाते। जूडी रॉबिनेट कहती हैं कि एक पावर कनेक्टर बनने के लिए आपको भीड़ की नहीं बल्कि सही स्ट्रैटेजी की जरूरत है। उन्होंने हमें दिया है ५ ५० १०० का गोल्डन रूल। यह नियम कहता है कि आपका दिमाग एक समय पर केवल १५५ कीमती रिश्तों को ही संभाल सकता है। इससे ज्यादा लोग मतलब सिर्फ शोर और कचरा।
सबसे पहले आते हैं वो ५ खास लोग। ये आपके इनर सर्कल के वो लोग हैं जिनसे आप लगभग रोज बात करते हैं। ये आपके वो यार दोस्त या मेंटर्स हैं जो रात के दो बजे भी आपके एक कॉल पर भागते हुए आएंगे। अगर आपके पास ये ५ लोग नहीं हैं तो समझ लीजिए कि आप लाइफ की रेस में अकेले ही भाग रहे हैं। इसके बाद आते हैं वो ५० लोग जो आपके करियर और पर्सनल लाइफ के लिए बहुत जरूरी हैं। इनसे आपको हफ्ते में कम से कम एक बार जरूर कनेक्ट करना चाहिए। और आखिर में आते हैं वो १०० लोग जिनसे आप महीने में एक बार बात करते हैं ताकि रिश्ता बना रहे।
अब जरा अपने फोन की कॉन्टैक्ट लिस्ट देखिए। क्या वहां वाकई ऐसे लोग हैं या सिर्फ उन प्लबंर्स और पिज्जा डिलीवरी वालों के नंबर भरे हैं जिनसे आपने दो साल पहले बात की थी। लोग अक्सर गलती यही करते हैं कि वो हर किसी को खुश करने की कोशिश करते हैं। वो सोचते हैं कि जितने ज्यादा हाथ मिलाएंगे उतनी ज्यादा तरक्की होगी। पर भाई साहब अगर आप हर किसी के लिए अवेलेबल रहेंगे तो आपकी अपनी वैल्यू दो कौड़ी की हो जाएगी। याद रखिए कि नेटवर्किंग कोई नंबर्स का गेम नहीं है बल्कि यह क्वालिटी का गेम है।
मान लीजिए आप एक नई स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। अब आप उन पांच हजार अनजान लोगों को मैसेज करेंगे या उन ५ खास लोगों को जो आपके विजन को समझते हैं। जाहिर है आप उन ५ लोगों के पास जाएंगे। लेकिन अगर आपने उन ५ लोगों के साथ कभी वक्त ही नहीं बिताया और सीधे पैसे मांगने पहुंच गए तो वो आपको भिखारी ही समझेंगे। जूडी कहती हैं कि रिश्तों में इन्वेस्टमेंट पहले करना पड़ता है और रिटर्न बाद में मिलता है। यह बिलकुल बैंक अकाउंट जैसा है। बिना पैसे डाले आप वहां से कैश नहीं निकाल सकते।
ज्यादातर लोग नेटवर्किंग को एक बोझ समझते हैं। उन्हें लगता है कि लोगों से बात करना मतलब चापलूसी करना है। लेकिन असल में यह अपने आप को एक सुरक्षित घेरे में रखने जैसा है। अगर आपका ५ ५० १०० का ढांचा तैयार है तो मार्केट में मंदी आए या आपकी नौकरी जाए आपको फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि आपके पास वो लोग हैं जो आपको गिरने नहीं देंगे। तो आज ही अपनी लिस्ट बनाइए और फालतू के लोगों को अनफॉलो करके इन १५५ लोगों पर ध्यान देना शुरू कीजिए। वरना जिंदगी भर अनजान लोगों की पोस्ट लाइक करते रह जाएंगे और खुद की लाइफ में कोई लाइक करने वाला नहीं बचेगा।
लेसन २ : गिवर एटीट्यूड की पावर
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो किसी को फोन सिर्फ तभी करते हैं जब आपको कोई काम निकलवाना होता है। अगर हां तो मुबारक हो आप नेटवर्किंग नहीं बल्कि उधारी मांग रहे हैं। जूडी रॉबिनेट कहती हैं कि एक पावर कनेक्टर कभी भी यह सोचकर किसी से नहीं मिलता कि मुझे इससे क्या मिलेगा। इसके बजाय वो यह सोचता है कि मैं इस इंसान की मदद कैसे कर सकता हूं। लोग बहुत चालाक होते हैं। उन्हें दूर से ही पता चल जाता है कि आप उनके पास अपना मतलब लेकर आए हैं। अगर आपकी नीयत में खोट है तो आपका नेटवर्क कभी भी आपको प्रॉफिट नहीं देगा।
असली जादू तब शुरू होता है जब आप दूसरों की लाइफ में वैल्यू ऐड करते हैं। इसे ही गिवर एटीट्यूड कहते हैं। मान लीजिए आप किसी पार्टी में जाते हैं और वहां किसी ऐसे इंसान से मिलते हैं जो एक अच्छा ग्राफिक डिजाइनर ढूंढ रहा है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। या तो आप चुपचाप अपना समोसा खाएं या फिर उसे अपने नेटवर्क के किसी बेहतरीन डिजाइनर से मिलवा दें। जब आप बिना किसी लालच के दो लोगों को जोड़ते हैं तो आप उनकी नजर में एक कीमती इंसान बन जाते हैं। इसे कहते हैं लोगों के दिल में अपनी जगह बनाना। अगली बार जब आपको किसी चीज की जरूरत होगी तो वो इंसान आपकी मदद के लिए खुद आगे आएगा।
अक्सर लोग सोचते हैं कि मेरे पास तो देने के लिए कुछ है ही नहीं। भाई साहब आपके पास जानकारी है आपके पास अच्छे लोगों के कॉन्टैक्ट्स हैं और सबसे बढ़कर आपके पास वक्त है। अगर आप किसी की प्रॉब्लम को सिर्फ ध्यान से सुन भी लेते हैं तो वो भी एक तरह की मदद ही है। भारतीय समाज में तो वैसे भी हम लोग राय देने में उस्ताद हैं। बस उस राय को सही दिशा में और सही इंसान को देना सीखिए। अगर आप सिर्फ लेने वाले यानी टेकर बने रहेंगे तो लोग आपका नाम देखते ही फोन काटना शुरू कर देंगे। फिर आप अकेले बैठकर दीवारें घूरेंगे और सोचेंगे कि दुनिया कितनी मतलबी है।
एक साहब थे जो हर बड़े आदमी को अपना बिजनेस कार्ड थमा देते थे। वो सोचते थे कि जितना ज्यादा कार्ड बांटेंगे उतना बड़ा बिजनेस बनेगा। एक दिन वो एक बड़े इन्वेस्टर के पास गए और बिना कुछ सोचे अपना कार्ड उसकी जेब में ठूंस दिया। इन्वेस्टर ने वो कार्ड निकाला और उससे अपनी चाय का दाग साफ कर दिया। क्यों। क्योंकि उस साहब ने इन्वेस्टर को कोई वैल्यू नहीं दी बल्कि सिर्फ अपनी परेशानी सुनाई। अगर वही साहब पहले यह पूछते कि सर मैं आपके बिजनेस में क्या मदद कर सकता हूं तो शायद कहानी कुछ और होती।
सच्चाई तो यह है कि दुनिया में हर इंसान किसी न किसी परेशानी से जूझ रहा है। एक पावर कनेक्टर उस परेशानी का हल ढूंढने वाला डॉक्टर होता है। जब आप लोगों की मदद करते हैं तो आप एक ऐसा सोशल बैंक बैलेंस बना रहे होते हैं जो जरूरत पड़ने पर आपको ब्याज समेत वापस मिलता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप हर किसी के चपरासी बन जाएं। इसका मतलब है कि आप उन लोगों की मदद करें जो आपके ५ ५० १०० की लिस्ट में हैं। जब आप अपने नेटवर्क के लिए निस्वार्थ भाव से खड़े होते हैं तो पूरा नेटवर्क आपकी कामयाबी के लिए एक हो जाता है। याद रखिए कि देने वाले का हाथ हमेशा ऊपर होता है और तरक्की भी उन्हीं के कदम चूमती है जो दूसरों को ऊपर उठाना जानते हैं।
लेसन ३ : स्ट्रेटेजिक इकोसिस्टम बनाना
अगर आप एक तालाब में रहते हैं तो आप कभी भी समंदर की लहरों का मजा नहीं ले पाएंगे। जूडी रॉबिनेट कहती हैं कि ज्यादातर लोग अपनी पूरी जिंदगी एक ही तरह के लोगों के बीच गुजार देते हैं। वही पुराने दोस्त वही एक जैसी बातें और वही एक जैसा बैंक बैलेंस। अगर आपके पास मौजूद उन १५५ लोगों की लिस्ट में सब आपके जैसे ही हैं तो समझ लीजिए कि आप एक बंद कमरे में बंद हैं। एक पावर कनेक्टर हमेशा अपना एक स्ट्रैटेजिक इकोसिस्टम बनाता है। इसका मतलब है कि आपके नेटवर्क में अलग-अलग फील्ड के माहिर खिलाड़ी होने चाहिए। अगर आपको सिर्फ इंजीनियरिंग आती है और आपके सारे दोस्त भी इंजीनियर हैं तो बिजनेस शुरू करते वक्त आप मार्केटिंग के लिए दर-दर भटकेंगे।
एक मजबूत इकोसिस्टम वो होता है जहां आपके पास हर मर्ज की दवा हो। आपके पास एक वकील होना चाहिए जो आपके पेपर्स देख सके। एक फाइनेंस वाला दोस्त होना चाहिए जो आपको टैक्स बचाना सिखा सके। और एक ऐसा क्रिएटिव बंदा भी होना चाहिए जो आपकी बोरिंग लाइफ में रंग भर सके। जूडी हमें समझाती हैं कि हमें अलग-अलग इंडस्ट्री के गेटकीपर्स से दोस्ती करनी चाहिए। ये वो लोग होते हैं जो आपको उन कमरों तक ले जा सकते हैं जहां जाने की आम आदमी सिर्फ कल्पना कर सकता है। अगर आप सिर्फ अपने कंफर्ट जोन में छिपे रहेंगे तो आप कभी भी उस बड़ी टेबल पर नहीं बैठ पाएंगे जहां बड़े फैसले लिए जाते हैं।
इसे भारत के उस पड़ोसी वाले अंकल के उदाहरण से समझिए जो हर किसी को जानते हैं। चाहे गैस कनेक्शन कट जाए या पुलिस का चक्कर हो अंकल का एक फोन कॉल सब सेट कर देता है। क्यों। क्योंकि उन्होंने सालों लगाकर एक इकोसिस्टम बनाया है। वो सिर्फ अपने ऑफिस के लोगों से नहीं मिले बल्कि उन्होंने कॉलोनी के सेक्रेटरी से लेकर बैंक मैनेजर तक से रिश्ते बनाए। लोग इसे पैरवी कहते हैं पर जूडी रॉबिनेट इसे पावर कनेक्टिंग कहती हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि आपका काम चुटकियों में हो तो आपको अपनी पहुंच बढ़ानी होगी। सिर्फ अपने सेक्टर के लोगों के साथ चाय पीना बंद कीजिए और उन लोगों से मिलिए जो आपसे बिल्कुल अलग सोचते हैं।
लोग अक्सर डरते हैं कि वो बड़े लोगों से कैसे बात करेंगे। उन्हें लगता है कि वो इतने छोटे हैं कि कोई बड़ा आदमी उन्हें घास भी नहीं डालेगा। पर असलियत में बड़े लोग हमेशा ऐसे लोगों की तलाश में रहते हैं जो स्मार्ट हों और उनके काम आ सकें। अगर आप एक स्ट्रैटेजिक इकोसिस्टम का हिस्सा हैं तो आप खुद एक पुल बन जाते हैं। आप दो अलग दुनिया के लोगों को मिला सकते हैं। और जिस दिन आप यह करना सीख गए उस दिन पैसा और शोहरत आपके पीछे भागेंगे। याद रखिए कि आपकी नेट वर्थ आपके नेटवर्क के बराबर होती है। अगर आपका नेटवर्क सिर्फ उन लोगों से भरा है जो वीकेंड पर नेटफ्लिक्स देखने की बातें करते हैं तो आपकी ग्रोथ भी वहीं रुक जाएगी।
अंत में जूडी एक बहुत ही कड़वी बात कहती हैं। अगर आप उस कमरे में सबसे समझदार इंसान हैं तो आप गलत कमरे में बैठे हैं। तुरंत वहां से निकलिए और ऐसे लोगों को ढूंढिए जो आपको चुनौती दे सकें और आपको बड़ा सोचने पर मजबूर करें। एक पावर कनेक्टर कभी भी अपने नेटवर्क को सड़ने नहीं देता। वो लगातार नए और प्रभावशाली लोगों को जोड़ता रहता है। तो क्या आपने अपनी बाउंड्री खींची है या आप आज भी वही पुराने घिसे-पिटे सर्कल में घूम रहे हैं। उठिए अपना इकोसिस्टम बदलिए और देखिए कैसे आपकी जिंदगी का प्रॉफिट ग्राफ आसमान छूने लगता है।
अगर आप आज भी अकेले सब कुछ हासिल करने की जिद पर अड़े हैं तो यकीन मानिए आप अपनी बर्बादी का सामान खुद तैयार कर रहे हैं। इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद अपने फोन को उठाएं और उन ५ सबसे खास लोगों को शुक्रिया कहें जो आपकी लाइफ में मायने रखते हैं। अपनी नेटवर्किंग की ताकत को पहचानिए और इस जानकारी को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जो अकेले मेहनत करके थक चुके हैं। याद रखिए कि असली पावर जुड़ने में है टूटने में नहीं। आज ही अपना ५ ५० १०० का लिस्ट बनाना शुरू करें।
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