अभी भी आपको लगता है कि आपका फोन आपको डिस्ट्रैक्ट करता है? क्या जोक मार रहे हो यार। असलियत तो यह है कि आपका दिमाग ही कमजोर है। जब तक आप नोटिफिकेशन के गुलाम बने रहेंगे आपकी लाइफ और सक्सेस दोनों ही दूसरों के इशारों पर नाचती रहेगी। यह कड़वा सच है।
इस आर्टिकल में हम निर इयाल की किताब इन्डिस्ट्रेक्टेबल के जरिए उन ३ लेसन को समझेंगे जो आपको फोकस का मास्टर बना देंगे। अब समय आ गया है कि आप अपनी लाइफ का कंट्रोल वापस अपने हाथों में ले लें।
लेसन १ : इंटरनल ट्रिगर को पहचानना और कंट्रोल करना
आज की दुनिया में हम सब खुद को बहुत बिजी समझते हैं। पर सच तो यह है कि हम बिजी नहीं सिर्फ डिस्ट्रैक्टेड हैं। हम सोचते हैं कि वह पिंक वाला व्हाट्सएप नोटिफिकेशन ही हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा दुश्मन है। लेकिन निर इयाल अपनी किताब इन्डिस्ट्रेक्टेबल में एक बहुत ही कड़वा सच बताते हैं। वह कहते हैं कि डिस्ट्रैक्शन कभी भी बाहर से नहीं आता। यह हमेशा हमारे अंदर से शुरू होता है।
क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप कोई बोरिंग काम कर रहे होते हैं तो अचानक आपका हाथ फोन की तरफ क्यों भागता है? क्या उस फोन में कोई चुंबक लगा है? बिल्कुल नहीं। असल में आप उस काम की बोरियत से भागना चाहते हैं। आप उस अकेलेपन या डर से बचना चाहते हैं जो उस वक्त आपको महसूस हो रहा होता है। हम इंसानों की फितरत है कि हम दर्द से दूर भागते हैं और तुरंत मिलने वाली खुशी की तलाश करते हैं। इसे ही लेखक इंटरनल ट्रिगर कहते हैं।
मान लीजिए आप ऑफिस में एक बहुत ही मुश्किल रिपोर्ट बना रहे हैं। अचानक आपके दिमाग में आता है कि चलो जरा इंस्टाग्राम चेक कर लेते हैं। यहाँ इंस्टाग्राम की गलती नहीं है। आपके अंदर जो उस मुश्किल काम को लेकर तनाव पैदा हुआ था यह उसका नतीजा है। आप उस तनाव को झेल नहीं पाए और आपने हार मान ली। यह वैसा ही है जैसे किसी को खुजली हो और वह उसे खुजलाने लगे। खुजलाने से थोड़ी देर के लिए तो मजा आता है पर बाद में जख्म और गहरा हो जाता है।
हम अक्सर अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ देते हैं। मेरा बॉस बहुत टॉक्सिक है इसलिए मैं काम नहीं कर पाता। मेरा फोन बहुत बजता है इसलिए मैं फोकस नहीं कर पाता। अरे भाई खुद को आईने में देखो। क्या आप सच में इतने लाचार हैं? सच तो यह है कि हमें अपनी भावनाओं को मैनेज करना नहीं आता। जब तक आप यह नहीं समझेंगे कि आप क्यों भाग रहे हैं तब तक आप कहीं नहीं पहुँच पाएंगे।
इस लेसन को अपनी लाइफ में उतारने का सबसे बढ़िया तरीका है १० मिनट का रूल। जब भी आपका मन करे कि अभी फोन उठाना है या कोई फालतू काम करना है तो खुद से कहिए कि मैं यह काम जरूर करूँगा पर अभी नहीं सिर्फ १० मिनट बाद। उन १० मिनट में बस शांत बैठिए और उस फीलिंग को महसूस कीजिए जो आपको डिस्ट्रैक्ट कर रही है। आप देखेंगे कि १० मिनट खत्म होने से पहले ही वह इच्छा गायब हो जाएगी। यह जादू नहीं है यह सिर्फ अपने दिमाग को ट्रेन करने का एक तरीका है।
याद रखिए जो इंसान अपनी भावनाओं का गुलाम है वह कभी भी अपनी लाइफ का मालिक नहीं बन सकता। आप दुनिया को नहीं बदल सकते पर आप यह जरूर तय कर सकते हैं कि आप अपनी बोरियत और डर को कैसे रिस्पोंड करेंगे। अगर आप आज इस इंटरनल ट्रिगर को नहीं समझेंगे तो कल कोई और ऐप या कोई और फालतू चीज आपका समय बर्बाद करने के लिए तैयार खड़ी होगी।
लेसन २ : टाइम के लिए लड़ना सीखिए क्योंकि कोई और उसे चुरा रहा है
पहले लेसन में हमने समझा कि आग हमारे अंदर लगी है। अब बात करते हैं उस तिजोरी की जिसकी चाबी आपने मोहल्ले भर में बाँट रखी है। वह तिजोरी है आपका समय। हम लोग बड़े शौक से कहते हैं कि यार टाइम ही नहीं मिलता। सच तो यह है कि टाइम मिलता नहीं है टाइम निकालना पड़ता है। निर इयाल कहते हैं कि अगर आप अपना दिन प्लान नहीं करते तो कोई और उसे आपके लिए प्लान कर लेगा। और यकीन मानिए दूसरों के पास आपके लिए कोई बहुत महान प्लान नहीं है।
क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी टू-डू लिस्ट कभी खत्म क्यों नहीं होती? क्योंकि वह लिस्ट ही गलत है। लोग लिस्ट में वह सब लिख देते हैं जो उन्हें करना है पर यह कभी नहीं लिखते कि कब करना है। इसे लेखक टाइम बॉक्सिंग कहते हैं। अगर आपके कैलेंडर में खाली जगह है तो समझ लीजिए वह कचरा जमा करने का डस्टबिन बन चुका है। कोई भी फालतू कॉल या फालतू नोटिफिकेशन उस खाली जगह पर कब्जा कर लेगा।
मान लीजिए आप सुबह उठे और आपने सोचा कि आज मैं बहुत काम करूँगा। पर आपने यह तय नहीं किया कि कितने बजे क्या करना है। १० बजते ही आपके दोस्त का फोन आता है कि भाई जरा मार्केट तक चलेगा? आप चले जाते हैं क्योंकि आपके पास कोई ठोस वजह नहीं थी मना करने की। दोपहर में कोई रील देखते-देखते २ घंटे निकल जाते हैं। शाम को आप थक कर बैठते हैं और सोचते हैं कि आज तो बहुत मेहनत की पर काम कुछ नहीं हुआ। यह मेहनत नहीं थी यह सिर्फ समय की बर्बादी का सर्कस था जिसमें आप खुद एक कलाकार थे।
हंसी तो तब आती है जब लोग कहते हैं कि मैं तो मल्टीटास्किंग कर रहा हूँ। भाई साहब आप मल्टीटास्किंग नहीं कर रहे आप बस अपने दिमाग का रायता फैला रहे हैं। एक साथ तीन काम करने का मतलब है कि आप किसी भी काम को ढंग से नहीं कर रहे। यह वैसा ही है जैसे एक साथ दो नावों पर पैर रखना। नतीजा सबको पता है। आप पानी में गिरेंगे और लोग आप पर हसेंगे।
असली विनर वह नहीं है जो बहुत सारे काम करता है। असली विनर वह है जो यह जानता है कि उसे क्या नहीं करना है। अपनी लाइफ को टाइम बॉक्सिंग के सांचे में ढालिए। हर घंटे का हिसाब रखिए। अगर आपने तय किया है कि सुबह ९ से १० आप सिर्फ पढ़ाई करेंगे या ऑफिस का काम करेंगे तो उस वक्त दुनिया इधर की उधर हो जाए पर आपको हिलना नहीं है। लोग आपको खडूस कहेंगे या बोरिंग कहेंगे। कहने दीजिए। कम से कम आप उन लोगों की तरह तो नहीं होंगे जो रात को पछतावे के साथ सोते हैं।
याद रखिए जो इंसान अपने समय की इज्जत नहीं करता यह दुनिया उसे कभी इज्जत नहीं देती। अगर आप आज अपने समय के लिए बाउंड्री नहीं बनाएंगे तो कल आप दूसरों की लाइफ के साइड हीरो बनकर रह जाएंगे। अपनी लाइफ की स्क्रिप्ट खुद लिखिए और उस स्क्रिप्ट में खुद को मेन लीड बनाइए।
लेसन ३ : एक्सटर्नल ट्रिगर्स को हैक करना और टेक्नोलॉजी को काबू में रखना
पहले दो लेसन में हमने मन को संभाला और समय का हिसाब किताब किया। अब बारी है उस दुश्मन की जो आपकी जेब में चौबीसों घंटे पड़ा रहता है। आपका स्मार्टफोन। हम लोग बड़े मासूम बनकर कहते हैं कि यार यह फोन बड़ा एडिक्टिव है। भाई साहब फोन एडिक्टिव नहीं है बल्कि आप उसे सही से इस्तेमाल करने में आलसी हैं। लेखक कहते हैं कि एक्सटर्नल ट्रिगर्स यानी वह बाहर की आवाजें जो हमें काम से भटकाती हैं उन्हें हैक करना बहुत जरूरी है। अगर आप अपने फोन के नोटिफिकेशन को कंट्रोल नहीं कर सकते तो आप अपनी लाइफ को कभी कंट्रोल नहीं कर पाएंगे।
सोचिए आप किसी बहुत जरूरी काम में डूबे हैं और अचानक फोन की स्क्रीन चमकती है। किसी दूर के रिश्तेदार ने ग्रुप में गुड मॉर्निंग का मैसेज भेजा है। बस हो गया सत्यानाश। आपका फोकस जो कांच की तरह साफ था वह एक पल में चकनाचूर हो गया। फिर आप उस मैसेज का जवाब देते हैं फिर कोई रील देखते हैं और फिर आधे घंटे बाद होश आता है कि आप कर क्या रहे थे। यह सिर्फ आपकी गलती नहीं है। बड़ी-बड़ी कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं ताकि आपका ध्यान भटका सकें। पर क्या आप इतने सस्ते हैं कि एक मुफ्त के ऐप के लिए अपनी कीमती लाइफ लुटा दें?
निर इयाल हमें एक बहुत ही बढ़िया तरीका बताते हैं जिसे वह कहते हैं हैक बैक। इसका मतलब है कि टेक्नोलॉजी को अपने हिसाब से मोड़ देना। सबसे पहले अपने फोन के उन सभी ऐप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दीजिए जो आपको पैसा नहीं कमा कर दे रहे या आपकी ग्रोथ में मदद नहीं कर रहे। यकीन मानिए अगर दुनिया में कुछ बहुत बड़ा होगा तो आपको पता चल ही जाएगा। आपको हर सेकंड अपडेट रहने की जरूरत नहीं है।
दूसरा बड़ा डिस्ट्रैक्शन है आपके आसपास के लोग। ऑफिस में अक्सर कोई न कोई बिना काम के आपकी डेस्क पर आ जाता है। यहाँ आपको सिग्नल देने की जरूरत है। लेखक ने अपनी किताब में एक विजुअल सिग्नल की बात की है जैसे कि एक लाल रंग का कार्ड या कोई टोपी। जब आप वह पहनें या डेस्क पर रखें तो इसका मतलब है कि आप अभी डिस्टर्ब नहीं होना चाहते। लोग इसे देखकर आपको परेशान नहीं करेंगे। शुरू में शायद उन्हें बुरा लगे पर धीरे-धीरे वे आपकी वर्क एथिक्स की इज्जत करने लगेंगे।
लोग मीटिंग्स में भी अपना फोन लेकर बैठते हैं। मीटिंग चल रही है करोड़ों के प्रोजेक्ट की और महाशय नीचे टेबल के नीचे छुपकर मीम्स देख रहे हैं। यह सिर्फ समय की बर्बादी नहीं है यह प्रोफेशनलिज्म का अपमान है। अगर आप कहीं हैं तो वहीं रहिए। चाहे वह काम हो या परिवार के साथ बिताया गया समय। डिस्ट्रैक्शन और कुछ नहीं बस एक बहाना है अपनी जिम्मेदारी से भागने का।
एक बहुत ही पावरफुल तरीका आता है जिसे कहते हैं पैक्ट्स यानी खुद से किए गए वादे। आप अपने दोस्तों के साथ या खुद के साथ शर्त लगा सकते हैं। जैसे कि अगर मैंने आज अपने तय किए गए काम पूरे नहीं किए तो मैं किसी दोस्त को ५०० रुपये दूँगा। जब जेब से पैसा जाता है तो दिमाग अपने आप ठिकाने आ जाता है।
दोस्तों, इन्डिस्ट्रेक्टेबल बनना कोई सुपरपावर नहीं है। यह सिर्फ एक चॉइस है। क्या आप वह इंसान बनना चाहते हैं जो हर नोटिफिकेशन पर कुत्ते की तरह पूंछ हिलाता है या वह जो अपनी लाइफ का किंग है? याद रखिए आपका ध्यान ही आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है। इसे फालतू की चीजों में खर्च करना बंद कीजिए। आज ही अपने फोन के फालतू नोटिफिकेशन बंद करें और कमेंट में लिखकर बताएं कि आप अपने फोकस को बेहतर करने के लिए आज कौन सा एक कदम उठाने वाले हैं। अगर यह आर्टिकल अच्छा लगा हो तो इसे उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा फोन में ही घुसा रहता है। उठिए और अपनी लाइफ का कंट्रोल वापस लीजिए।
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