Remote (Hindi)


क्या आप भी हर सुबह उस भीड़ भरी बस और ऑफिस की पॉलिटिक्स में अपनी जिंदगी बर्बाद करने के शौकीन हैं। शायद आपको अपनी डेस्क पर बैठकर बॉस की झूठी तारीफें सुनना बहुत पसंद है। वरना अब तक आप रिह्रिमोट वर्क की ताकत समझ चुके होते और घर बैठे सुकून से काम कर रहे होते।

इस ब्लॉग में हम जेसन फ्राइड और डेविड हेन्सन की बुक रिह्रिमोट से तीन ऐसे पावरफुल लेसन सीखेंगे जो आपके काम करने के तरीके और सोच को पूरी तरह बदल देंगे। चलिए जानते हैं कैसे आप ऑफिस की जेल से आजाद हो सकते हैं।


लेसन १ : ऑफिस जाना सिर्फ एक पुरानी आदत है, काम की जरूरत नहीं

क्या आपको याद है वो दिन जब आपको लगता था कि अगर आप ऑफिस की उस टूटी हुई कुर्सी पर नौ से पांच नहीं बैठेंगे, तो दुनिया रुक जाएगी। सच तो यह है कि ऑफिस जाना आज के दौर में वैसा ही है जैसे आज भी कोई चिट्ठी भेजने के लिए कबूतर का इंतजार करे। जेसन फ्राइड और डेविड हेन्सन अपनी बुक में साफ कहते हैं कि काम वह नहीं है जहाँ आप जाते हैं, बल्कि काम वह है जो आप करते हैं। हम में से ज्यादातर लोग ऑफिस सिर्फ इसलिए जाते हैं क्योंकि हमारे दादा-परदादा भी जाते थे। यह एक ऐसी आदत बन चुकी है जिसे हम ढो रहे हैं।

सोचिए, आप सुबह दो घंटे ट्रैफिक में बिताते हैं, जहाँ आपकी आधी एनर्जी तो सामने वाली गाड़ी के धुएं और हॉर्न को झेलने में निकल जाती है। फिर आप ऑफिस पहुँचते हैं और क्या करते हैं। आप सीधे काम शुरू नहीं करते। आप पहले चाय पीते हैं, फिर कल के मैच की चर्चा करते हैं और फिर लंच का इंतजार करते हैं। ऑफिस असल में काम करने की जगह कम और रुकावटों का अड्डा ज्यादा बन गया है। वहाँ कभी कोई मीटिंग शुरू हो जाती है तो कभी कोई कलीग आकर अपनी दुख भरी कहानी सुनाने लगता है। आपको लगता है कि आप काम कर रहे हैं, लेकिन असल में आप बस वहां मौजूद हैं।

मान लीजिए राहुल एक ग्राफिक डिजाइनर है। वह रोज सुबह उठकर मुंबई के लोकल ट्रेन के धक्के खाता है ताकि वह ऑफिस पहुँचकर एक कंप्यूटर पर काम कर सके। अब मजे की बात यह है कि वही कंप्यूटर उसके घर पर भी है और वही इंटरनेट भी। लेकिन राहुल को लगता है कि जब तक बॉस उसके पीछे खड़े होकर उसे घूरेंगे नहीं, तब तक उसका डिजाइन अच्छा नहीं बनेगा। यह सोच वैसी ही है जैसे कोई कहे कि जिम जाए बिना डोले नहीं बन सकते, भले ही आप घर पर डम्बल उठा रहे हों।

ऑफिस की चारदीवारी में बैठकर आप सिर्फ अपनी आजादी का गला घोंट रहे हैं। रिह्रिमोट वर्क आपको वह लग्जरी देता है कि आप अपने सबसे प्रोडक्टिव समय में काम करें। अगर आपको रात को दो बजे काम करना पसंद है, तो ऑफिस आपको वह आजादी कभी नहीं देगा। वहाँ तो आपको उसी टाइम टेबल का गुलाम बनना पड़ेगा जो किसी और ने आपके लिए बनाया है। ऑफिस असल में एक ऐसी जेल है जहाँ कैदी खुद अपनी मर्जी से हर सुबह हाजिरी लगाने जाते हैं।

अगर आप सोचते हैं कि ऑफिस जाने से आपकी अहमियत बढ़ती है, तो आप गलतफहमी के शिकार हैं। कंपनी को आपके वहां बैठने से मतलब नहीं होना चाहिए, बल्कि आपके आउटपुट से मतलब होना चाहिए। क्या फर्क पड़ता है कि आपने पजामा पहनकर काम किया या सूट पहनकर, अगर काम बेस्ट क्वालिटी का है। दुनिया बदल रही है, और अगर आप अभी भी उसी पुरानी घिसी-पिटी सोच से चिपके हुए हैं, तो यकीन मानिए आप अपनी जिंदगी के सबसे कीमती पल उस ट्रैफिक और बेमतलब की मीटिंग्स में गँवा रहे हैं।


लेसन २ : काम के घंटों से ज्यादा काम की क्वालिटी मायने रखती है

क्या आपको भी लगता है कि ऑफिस में आठ घंटे बैठने का मतलब बहुत सारा काम करना होता है। अगर हाँ, तो आप उस रेस के घोड़े हैं जो कोल्हू के बैल की तरह एक ही जगह गोल-गोल घूम रहा है। जेसन फ्राइड कहते हैं कि रिह्रिमोट वर्क का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहाँ कोई आपको देख नहीं रहा होता। इसका मतलब यह है कि अब आप अपने काम को घंटों में नहीं बल्कि रिजल्ट में नाप सकते हैं। ऑफिस में तो लोग इस बात का कॉम्पिटिशन करते हैं कि कौन सबसे देर तक अपनी डेस्क पर बैठा रहता है। चाहे वह वहां बैठकर सिर्फ सोशल मीडिया ही क्यों न चला रहा हो।

मान लीजिए समीर और अमित दो दोस्त हैं। समीर ऑफिस जाता है और रोज दस घंटे वहां बिताता है। वह हर आधे घंटे में बॉस के केबिन के सामने से गुजरता है ताकि बॉस को लगे कि समीर बहुत बिजी है। लेकिन असल में समीर का आधा वक्त गॉसिप और सिगरेट ब्रेक में निकल जाता है। दूसरी तरफ अमित घर से काम करता है। वह सुबह मन लगाकर तीन घंटे काम करता है और वह काम खत्म कर देता है जिसे करने में समीर को पूरा हफ्ता लग जाता। अब समाज की नजर में समीर एक मेहनती कर्मचारी है और अमित एक आलसी इंसान। लेकिन सच तो यह है कि अमित ने अपनी जिंदगी के बाकी सात घंटे बचा लिए हैं।

अक्सर ऑफिस में काम कम और काम करने का नाटक ज्यादा होता है। वहाँ लोग मीटिंग्स में बैठकर बस अपना चेहरा दिखाने जाते हैं। रिह्रिमोट वर्क में यह दिखावा खत्म हो जाता है। जब आप घर से काम करते हैं, तो कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने सुबह ग्यारह बजे काम शुरू किया या शाम को पांच बजे। जरूरी यह है कि जो काम आपको दिया गया था, वह कितना शानदार है। अगर आप अपना काम दो घंटे में खत्म कर सकते हैं, तो बाकी के छह घंटे कंप्यूटर स्क्रीन को घूरने की कोई जरूरत नहीं है।

ऑफिस का माहौल अक्सर आपकी क्रिएटिविटी का दुश्मन होता है। वहाँ हर थोडी देर में कोई न कोई शोर या कोई फालतू का सवाल आपकी एकाग्रता को तोड़ देता है। एक बार जब आपका फोकस टूटता है, तो उसे वापस पाने में कम से कम बीस मिनट लगते हैं। घर पर आप अपना एक कोना बना सकते हैं जहाँ सिर्फ आप और आपका काम हो। वहां कोई मैनेजर आपकी गर्दन पर नहीं चढ़ा होगा। यह आजादी आपको वह क्वालिटी देने पर मजबूर करती है जो किसी भी शोर भरे ऑफिस में मुमकिन नहीं है।

याद रखिए, आप कोई फैक्ट्री वर्कर नहीं हैं जो जितनी ज्यादा देर मशीन चलाएगा उतना ज्यादा प्रोडक्शन होगा। आप एक नॉलेज वर्कर हैं। आपका दिमाग ही आपकी मशीन है। और दिमाग को बेस्ट रिजल्ट देने के लिए सुकून और आजादी चाहिए होती है। अगर आप अभी भी इस बात पर गर्व करते हैं कि आप ऑफिस में सबसे लेट तक रुकते हैं, तो आप मेहनत नहीं कर रहे बल्कि अपनी बेवकूफी का ढिंढोरा पीट रहे हैं। असली सक्सेस वह है जहाँ आप कम समय में बेहतरीन काम करें और अपनी लाइफ को जी सकें।


लेसन ३ : रिमोट वर्क में ट्रस्ट और कम्युनिकेशन ही सबसे बड़ी ताकत है

क्या आपको लगता है कि अगर आप अपने एम्प्लॉई को अपनी आंखों के सामने नहीं रखेंगे, तो वह घर पर बैठकर सिर्फ फिल्में देखेगा। अगर आपकी सोच ऐसी है, तो यकीन मानिए दिक्कत काम करने वाले में नहीं बल्कि आपकी लीडरशिप में है। जेसन फ्राइड कहते हैं कि रिह्रिमोट वर्क का पूरा ढांचा भरोसे की नींव पर टिका होता है। अगर आप किसी पर इतना भरोसा नहीं कर सकते कि वह बिना डंडा चलाए काम कर सके, तो आपने उसे हायर ही क्यों किया। ऑफिस में तो मैनेजर एक पुलिस वाले की तरह घूमते रहते हैं, जैसे कोई मुजरिम भागने वाला हो।

मान लीजिए एक बॉस है जिसे लगता है कि उसकी टीम के लोग घर पर सिर्फ सो रहे हैं। वह हर पंद्रह मिनट में ग्रुप चैट पर चेक करता है कि कौन ऑनलाइन है। अब बेचारे एम्प्लॉई काम छोड़कर बस यह दिखाने में लगे रहते हैं कि वे ऑनलाइन हैं। यह वैसा ही है जैसे आप किसी को तैरना सिखाएं लेकिन उसे पानी में उतरने ही न दें क्योंकि आपको डर है कि वह डूब जाएगा। रिह्रिमोट वर्क में आपको लोगों को उनकी जिम्मेदारी का एहसास दिलाना पड़ता है, न कि उन्हें डराकर काम करवाना पड़ता है।

कम्युनिकेशन का मतलब यह नहीं है कि आप सारा दिन वीडियो कॉल पर बैठे रहें। असल में रिह्रिमोट वर्क आपको सिखाता है कि कम शब्दों में अपनी बात कैसे साफ़ तरीके से कही जाए। ऑफिस में अक्सर लंबी और उबाऊ मीटिंग्स होती हैं जिनका नतीजा जीरो निकलता है। घर से काम करते वक्त आप ईमेल या मैसेज का इस्तेमाल करते हैं, जिससे आपके पास हर बात का रिकॉर्ड रहता है। यहाँ गॉसिप की गुंजाइश कम और काम की बात ज्यादा होती है। जो लोग यह बहाना बनाते हैं कि फेस टू फेस बात किए बिना काम नहीं होता, वे असल में टेक्नोलॉजी से डरते हैं।

रिमोट वर्क का मतलब अकेलापन नहीं है। इसका मतलब है अपनी पसंद के लोगों के साथ समय बिताना। ऑफिस में आप उन लोगों के साथ आठ घंटे बिताने को मजबूर होते हैं जिन्हें शायद आप पसंद भी न करते हों। लेकिन घर से काम करते हुए आप अपने परिवार, अपने बच्चों या अपने पालतू जानवरों के साथ रह सकते हैं। जब इंसान मानसिक रूप से खुश होता है, तो उसका काम अपने आप बोलता है। ट्रस्ट ही वह जादुई चाबी है जो एक साधारण टीम को एक एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी टीम में बदल देती है।

यह समझना जरूरी है कि दुनिया तेजी से बदल रही है। रिह्रिमोट वर्क कोई मजबूरी नहीं बल्कि एक चॉइस है। अगर आप अपनी टीम पर भरोसा करना सीख जाएं और फालतू की मीटिंग्स को हटाकर सिर्फ काम पर फोकस करें, तो आप वह अचीव कर सकते हैं जो कोई भी बड़ा ऑफिस नहीं कर सकता। अपनी सोच को उस जेल से बाहर निकालिए और आजादी का स्वाद चखिए। क्योंकि असली तरक्की वह है जहाँ काम भी हो और सुकून भी।


तो दोस्तों, क्या आप भी अब उस पुरानी ऑफिस वाली सोच को छोड़कर रिह्रिमोट वर्क की आजादी को गले लगाने के लिए तैयार हैं। अपनी जिंदगी के फैसले दूसरों के हाथ में देना बंद कीजिए और खुद अपने काम के मालिक बनिए। अगर आपको लगता है कि यह लेसन आपकी जिंदगी बदल सकते हैं, तो इस आर्टिकल को उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो आज भी ट्रैफिक और ऑफिस की राजनीति में फंसे हुए हैं। चलिए मिलकर काम करने के इस नए और बेहतर तरीके को अपनाते हैं।

-----

आपकी छोटी सी Help हमें और ऐसे Game-Changing Summaries लाने में मदद करेगी। DY Books को Donate करके हमें Support करें🙏 - Donate Now




#RemoteWork #Productivity #BusinessGrowth #WorkLifeBalance #DYBooks


_

Post a Comment

Previous Post Next Post