Jim Cramer's Real Money (Hindi)


अगर आपको लगता है कि टिप्स के पीछे भागकर आप अंबानी बन जाएंगे तो मुबारक हो आप अपनी सारी सेविंग्स डूबने की तैयारी कर चुके हैं। बिना होमवर्क के स्टॉक मार्केट में पैसा लगाना मतलब चलती ट्रेन के आगे नोट फेंकना है। क्या आपको अपनी मेहनत की कमाई से नफरत है।

जिम क्रेमर की बुक रियल मनी हमें सिखाती है कि इस पागल मार्केट में समझदारी से पैसा कैसे बनाया जाता है। चलिए जानते हैं वो ३ सीक्रेट लेसन्स जो आपको मार्केट का शिकार बनने से बचाएंगे और प्रॉफिटेबल इन्वेस्टर बनाएंगे।


लेसन १ : होमवर्क करना ही पड़ेगा वरना मार्केट आपकी छुट्टी कर देगा

अगर आपको लगता है कि आप किसी टेलीग्राम ग्रुप के जादुई टिप को फॉलो करके रातों-रात करोड़पति बन जाएंगे तो शायद आप दुनिया के सबसे बड़े भोले इंसान हैं। मार्केट में पैसा कमाना और उसे बचाना उतना ही मुश्किल है जितना सुबह बिना अलार्म के नींद से जागना। जिम क्रेमर अपनी बुक रियल मनी में सबसे पहला और सबसे कड़वा सच यही बताते हैं कि बिना होमवर्क के स्टॉक मार्केट में पैर रखना मतलब अपनी जेब में छेद करके समंदर में कूदना है। लोग क्या करते हैं। किसी दोस्त ने बोल दिया कि भाई ये वाला शेयर ले ले ये चांद तक जाएगा और आपने अपनी पूरी जमापूंजी उस पर लगा दी। फिर जब वो स्टॉक चांद की जगह जमीन के नीचे पाताल में चला जाता है तब आप भगवान को दोष देते हैं। क्रेमर कहते हैं कि स्टॉक मार्केट कोई लॉटरी का टिकट नहीं है जिसे आपने खरीदा और आपकी किस्मत चमक गई। ये एक बिजनेस है और बिजनेस में रिसर्च चलती है तुक्का नहीं।

क्रेमर का एक बहुत ही सिंपल रूल है जिसे वो वन आर होमवर्क रूल कहते हैं। उनका मानना है कि अगर आप किसी कंपनी के स्टॉक में अपना कीमती पैसा लगा रहे हैं तो कम से कम हर हफ्ते एक घंटा उस कंपनी पर रिसर्च करने के लिए निकालिये। अब आप कहेंगे कि भाई हमारे पास इतना टाइम कहाँ है। हम तो रील देखने और ऑफिस की गॉसिप में बिजी रहते हैं। तो फिर भैया मार्केट को अपना दानपात्र समझिये और हर महीने वहां जाकर अपना पैसा दान कर आइये। होमवर्क करने का मतलब ये नहीं है कि आपको बहुत बड़ा साइंटिस्ट बनना है। बस ये देखिये कि कंपनी क्या बेच रही है क्या उसका धंधा बढ़ रहा है और क्या उसके मैनेजर लोग कहीं कोई घपला तो नहीं कर रहे। अगर आप एक पिज्जा आर्डर करने से पहले दस रिव्यु पढ़ते हैं तो फिर लाखों रुपये किसी स्टॉक में डालने से पहले एक घंटा पढ़ना क्या वाकई बहुत बड़ी बात है।

जब लोग अपने पड़ोसी की सलाह पर स्टॉक खरीद लेते हैं। वो पड़ोसी जिसे खुद ये नहीं पता कि उसके घर का बिल कितना आया है लेकिन वो आपको बताएगा कि कौन सा शेयर मल्टीबैगर बनेगा। ऐसे लोग मार्केट के लिए चारे की तरह होते हैं जिन्हें बड़े मगरमच्छ यानी इन्स्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स मजे से खा जाते हैं। क्रेमर कहते हैं कि आपको अपना स्टॉक वैसे ही चुनना चाहिए जैसे आप अपने लिए लाइफ पार्टनर चुनते हैं। क्या आप किसी अजनबी से सिर्फ इसलिए शादी कर लेंगे क्योंकि आपके दोस्त ने कहा कि वो इंसान अच्छा है। नहीं ना। तो फिर स्टॉक के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों। मार्केट में हर दिन हजारों कंपनियां ऊपर-नीचे होती हैं। आपको उन सब के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। आपको बस अपनी चुनी हुई चंद कंपनियों के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए।

जब आप होमवर्क करते हैं तो आपके अंदर एक अलग लेवल का कॉन्फिडेंस आता है। जब मार्केट गिरता है और सब लोग डर के मारे भाग रहे होते हैं तब आप शांति से बैठे होते हैं क्योंकि आपको पता है कि आपने जिस कंपनी को खरीदा है वो मजबूत है। ये वैसा ही है जैसे एग्जाम से पहले अगर आपने पढ़ाई की है तो पेपर चाहे कितना भी कठिन आए आप पैनिक नहीं करेंगे। लेकिन अगर आप नकल के भरोसे गए हैं तो फिर तो ऊपर वाला ही मालिक है। तो आज से ही ये कसम खा लीजिये कि किसी की टिप पर नहीं अपनी मेहनत पर भरोसा करेंगे। मार्केट में फ्री का लंच सिर्फ चूहे के जाल में मिलता है और आप चूहे नहीं हैं। अपनी मेहनत की कमाई को इज्जत दीजिये और उसे किसी बेकार कंपनी में डालने से पहले थोड़ा दिमाग लगाइये। होमवर्क कीजिये पैसा अपने आप आपके पीछे भागेगा।


लेसन २ : डाइवर्सिफिकेशन आपका कवच है और लालच आपका दुश्मन

अगर आप अपना सारा पैसा एक ही टोकरी में रख रहे हैं तो यकीन मानिए आप उस टोकरी के साथ-साथ खुद को भी खाई में गिराने का इंतज़ाम कर रहे हैं। जिम क्रेमर कहते हैं कि डाइवर्सिफिकेशन कोई बोरिंग थ्योरी नहीं है बल्कि ये एक लाइफ जैकेट है जो आपको डूबने से बचाती है। हमारे यहाँ इंडिया में लोगों को लगता है कि अगर किसी एक सेक्टर में आग लगी है तो बस सारा पैसा वहीं डाल दो। कल को अगर आईटी सेक्टर ऊपर जा रहा है तो लोग अपना घर जमीन बेचकर आईटी स्टॉक्स खरीद लेते हैं। फिर जब मार्केट में थोड़ी सी सर्दी लगती है और वो सेक्टर छींक देता है तो इन लोगों को निमोनिया हो जाता है। क्रेमर का साफ कहना है कि कभी भी एक ही सेक्टर के प्यार में पागल मत हो जाइये। प्यार करना है तो अपनी फैमिली से कीजिये स्टॉक्स से नहीं।

जिम क्रेमर एक बहुत मजेदार बात कहते हैं कि आपको कम से कम पांच अलग-अलग सेक्टर्स में पैसा फैलाकर रखना चाहिए। अब कुछ लोग कहेंगे कि भाई मेरे पास तो सिर्फ पचास हजार रुपये हैं इसमें क्या क्या खरीद लूँ। देखिये बॉस बात पैसों की नहीं आपकी सोच की है। अगर आप पांच अलग कंपनियों के शेयर ले रहे हैं और वो पांचों की पांचों बैंकिंग सेक्टर की हैं तो उसे डाइवर्सिफिकेशन नहीं उसे बेवकूफी कहते हैं। मान लीजिये सरकार ने बैंक के नियमों में कुछ बदलाव कर दिया तो आपके पांचों स्टॉक्स एक साथ गोता लगाएंगे। उस वक्त आपका पोर्टफोलियो लाल रंग से ऐसा चमकेगा जैसे किसी ने होली खेली हो। असली समझदारी इसमें है कि आप थोडा पैसा टेक में रखें थोडा एफएमसीजी में थोडा फार्मा में और थोडा बैंकिंग में। इससे ये होगा कि अगर एक सेक्टर सो रहा है तो दूसरा आपको कमाकर देगा।

असली मजाक तो उन लोगों के साथ होता है जो सोचते हैं कि वो मार्केट से ज्यादा स्मार्ट हैं। वो एक ही पेनी स्टॉक पकड़ते हैं और सोचते हैं कि ये अगला रिलायंस बनेगा। वो स्टॉक बढ़ता नहीं है लेकिन उनकी धड़कनें जरूर बढ़ा देता है। क्रेमर कहते हैं कि आपको एक बैलेंस्ड पोर्टफोलियो बनाना चाहिए जो आपको रात को चैन की नींद सोने दे। क्या आप सिर्फ आलू खाकर पूरी जिंदगी बिता सकते हैं। नहीं ना। आपको प्रोटीन भी चाहिए विटामिन्स भी चाहिए। वैसे ही आपके पोर्टफोलियो को भी वैरायटी चाहिए। अगर आपका पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाइड नहीं है तो आप इन्वेस्टमेंट नहीं कर रहे बल्कि आप कसीनो में जुआ खेल रहे हैं। और कसीनो में अंत में जीत हमेशा हाउस की होती है आपकी नहीं।

डाइवर्सिफिकेशन का मतलब ये भी नहीं है कि आप सौ कंपनियां खरीद लें। क्रेमर के हिसाब से दस से पंद्रह स्टॉक्स काफी हैं। उससे ज्यादा संभालना आपके बस की बात नहीं होगी क्योंकि हमने पहले लेसन में बात की थी होमवर्क की। अगर आपने सौ कंपनियां ले लीं तो क्या आप हर हफ्ते सौ घंटे होमवर्क करेंगे। क्या आप सुपरमैन हैं। बिल्कुल नहीं। तो उतनी ही जिम्मेदारी लीजिये जितनी आप निभा सकें। अपनी लिमिट पहचानिये और मार्केट की लहरों पर सर्फिंग करना सीखिए न कि उनमें डूबना। जब मार्केट में अफरा तफरी मचती है तो डाइवर्सिफाइड इन्वेस्टर आराम से बैठकर चाय पीता है क्योंकि उसे पता है कि उसका कवच मजबूत है। बाकी लोग पैनिक में अपना माल बेच रहे होते हैं और नुकसान करवा रहे होते हैं। तो इस पागल दुनिया में अगर आपको समझदार बने रहना है तो अपने रिस्क को बांटना सीखिए।


लेसन ३ : डिसिप्लिन और रूल्स ही आपको इस पागल मार्केट में जिंदा रखेंगे

मार्केट में पैसा कमाना आसान है पर उस पैसे को बचाकर घर ले जाना सबसे मुश्किल काम है। जिम क्रेमर कहते हैं कि स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जहाँ आपकी भावनाएं ही आपकी सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती हैं। जब मार्केट ऊपर जाता है तो हमारे अंदर का लालच जाग जाता है और जब मार्केट गिरता है तो डर हमें घेर लेता है। जो इंसान अपने इमोशंस पर कंट्रोल नहीं कर सकता वो कभी भी एक अच्छा इन्वेस्टर नहीं बन सकता। क्रेमर का मानना है कि आपको हमेशा अपने रूल्स के हिसाब से चलना चाहिए न कि अपनी फीलिंग्स के हिसाब से। अगर आपने तय किया है कि आप किसी स्टॉक को एक खास प्रॉफिट पर बेच देंगे तो फिर वहां से निकल जाइये। उस स्टॉक से शादी करने की कोशिश मत कीजिये क्योंकि स्टॉक्स को आपसे कोई प्यार नहीं है।

अक्सर लोग क्या करते हैं। मान लीजिये आपने एक शेयर खरीदा और वो बीस परसेंट बढ़ गया। अब आपका दिमाग बोलेगा कि भाई ये तो और बढ़ेगा इसे अभी मत बेच। आप लालच में रुके रहते हैं और फिर अचानक मार्केट गिरता है और आपका सारा प्रॉफिट गायब हो जाता है। क्रेमर कहते हैं कि प्रॉफिट बुक करना कोई गुनाह नहीं है। असल में पैसा वही है जो आपके बैंक अकाउंट में आ जाए वरना स्क्रीन पर दिख रहा नंबर सिर्फ एक धोखा है। क्या आपने कभी किसी को प्रॉफिट बुक करके गरीब होते देखा है। बिल्कुल नहीं। डिसिप्लिन का मतलब है कि आपको पता होना चाहिए कि कब एंट्री लेनी है और कब एग्जिट मारना है। बिना प्लान के ट्रेड करना वैसा ही है जैसे बिना ब्रेक की गाड़ी पहाड़ पर चलाना। एक न एक दिन एक्सीडेंट होना तय है।

लोग अपने नुकसान वाले स्टॉक्स को सालों तक पकड़ कर बैठे रहते हैं। वो सोचते हैं कि कभी न कभी तो ये ऊपर आएगा ही। क्रेमर इसे सबसे बड़ी बेवकूफी मानते हैं। वो कहते हैं कि अपनी गलतियों को जल्दी स्वीकार करना सीखिए। अगर आपने कोई गलत स्टॉक ले लिया है और उसका धंधा चौपट हो गया है तो उससे बाहर निकलिए। लोग अक्सर अच्छे स्टॉक्स बेच देते हैं और कचरा स्टॉक्स को संजोकर रखते हैं जैसे वो कोई खानदानी गहना हो। ये वैसा ही है जैसे आप अपने गार्डन से गुलाब के फूल तोड़ दें और खरपतवार को पानी दें। क्या ऐसे आपका गार्डन कभी सुंदर बनेगा। स्टॉक मार्केट में अगर आपको सर्वाइव करना है तो आपको अपनी हार माननी आनी चाहिए। हार मानना कमजोरी नहीं बल्कि एक स्मार्ट इन्वेस्टर की निशानी है।

जिम क्रेमर यही कहते हैं कि मार्केट हमेशा सही होता है और आप गलत हो सकते हैं। मार्केट से लड़ने की कोशिश कभी मत कीजिये। अगर मार्केट गिर रहा है तो उसमें अपनी बहादुरी दिखाने की जरूरत नहीं है। अपने रूल्स पर टिके रहिये और पैनिक मत कीजिये। स्टॉक मार्केट में सक्सेस का रास्ता चार्ट्स या ग्राफ्स से नहीं बल्कि आपके दिमाग के डिसिप्लिन से होकर गुजरता है। अगर आप अपने लालच और डर को काबू में कर लेंगे तो आप उन ९० परसेंट लोगों से आगे निकल जाएंगे जो सिर्फ नुकसान करते हैं। याद रखिये मार्केट आपको अमीर बनाने के लिए नहीं बैठा है आपको खुद अपनी मेहनत और डिसिप्लिन से वहां से पैसा निकालना होगा।


तो दोस्तों, क्या आप आज से ही अपने इन्वेस्टमेंट के लिए होमवर्क करना शुरू करेंगे या फिर अभी भी किसी मिस्टीरियस टिप के इंतजार में अपनी मेहनत की कमाई लुटाते रहेंगे। याद रखिये आपकी फाइनेंशियल फ्रीडम सिर्फ आपके हाथ में है। नीचे कमेंट में लिखिए कि आपका सबसे पसंदीदा स्टॉक मार्केट रूल क्या है और इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिये जो बिना सोचे समझे कहीं भी पैसा लगा देते हैं। चलिए साथ मिलकर इस इन्सेन मार्केट में सेन इन्वेस्टर बनते हैं।

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