Leading the Charge (Hindi)


आप अभी भी वही घिसे पिटे लीडरशिप ज्ञान का अचार डाल रहे हैं और फिर रोते हैं कि टीम आपकी सुनती क्यों नहीं। टोनी जिनी के बैटलफील्ड वाले लेसन्स मिस करके आप अपनी ग्रोथ का खुद ही गला घोंट रहे हैं। मुबारक हो आप एक फेलियर बनने की राह पर हैं।

चिंता मत करिए आज हम लीडिंग द चार्ज बुक से वो 3 धमाकेदार लेसन्स सीखेंगे जो आपकी बोरिंग लीडरशिप स्टाइल को एक असली वारियर की तरह पावरफुल बना देंगे।


लेसन १ : अडैप्टेबिलिटी और फ्लेक्सिबिलिटी - गिरगिट की तरह रंग बदलना सीखो

अगर आप आज भी वही पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं जो आपके दादाजी के जमाने में चलता था तो बॉस आप लीडर नहीं एक म्यूजियम का पीस हैं। टोनी जिनी अपनी बुक लीडिंग द चार्ज में साफ कहते हैं कि बैटलफील्ड हो या बोर्डरूम प्लान कभी भी वैसा नहीं रहता जैसा पेपर पर दिखता है। युद्ध के मैदान में जब गोलियां चलना शुरू होती हैं तब आपकी शानदार फाइल्स और प्रेजेंटेशन सिर्फ रद्दी के भाव बिकती हैं। असली लीडर वही है जो माहौल की नब्ज को पकड़कर अपनी चाल बदल ले।

सोचिए आप एक ट्रिप पर जा रहे हैं। आपने गूगल मैप्स पर पूरा रास्ता देख लिया है। अचानक पता चलता है कि आगे का पुल टूट गया है। अब क्या आप उसी टूटे पुल से गाड़ी नीचे गिरा देंगे क्योंकि आपके प्लान में यही रास्ता था। नहीं ना। आप तुरंत दूसरा रास्ता ढूंढेंगे। लेकिन ऑफिस में जब कोई नया कॉम्पिटिटर आता है या मार्केट क्रैश होता है तब आप अपनी पुरानी स्ट्रेटेजी को सीने से लगाकर बैठ जाते हैं। यह कोई वफादारी नहीं है बल्कि बेवकूफी है।

फ्लेक्सिबिलिटी का मतलब यह नहीं कि आपका कोई स्टैंड ही नहीं है। इसका मतलब है कि आप जीतने के लिए किसी भी हद तक जाकर अपने तरीके बदल सकते हैं। टोनी जिनी ने वियतनाम से लेकर सोमालिया तक देखा है कि जो ऑफिसर सिर्फ रूल्स की किताब पढ़ते रहे वे फेल हो गए। और जिन्होंने सिचुएशन को देखकर ऑन द स्पॉट फैसले लिए उन्होंने जीत हासिल की।

आज की दुनिया में स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियां इसी वजह से डूब जाती हैं क्योंकि उनके लीडर्स को लगता है कि वे ही भगवान हैं। उनको लगता है कि मार्केट उनके हिसाब से चलेगा। लेकिन असलियत में मार्केट एक बिगड़ैल बच्चा है जो कभी भी मूड बदल सकता है। अगर आप अडैप्ट नहीं कर सकते तो आप लीड करने के लायक ही नहीं हैं।

अपने ईगो को साइड में रखिए और अपनी टीम को आजादी दीजिए कि वे भी नए आइडियाज पर काम कर सकें। अगर प्लान ए काम नहीं कर रहा तो प्लान बी पर जाने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए। याद रखिए डायनासोर बहुत ताकतवर थे लेकिन वे बदल नहीं पाए इसलिए आज सिर्फ किताबों में मिलते हैं। आप एक डायनासोर मत बनिए। अपनी अप्रोच को हर पल फ्रेश रखिए ताकि आप हर मुसीबत का सामना कर सकें।


लेसन २ : एथिकल लीडरशिप और करैक्टर - बिना रीढ़ की हड्डी के लीडर नहीं बनते

अगर आपको लगता है कि आप अपनी टीम से झूठ बोलकर और पॉलिटिक्स करके लंबे समय तक टिक पाएंगे तो शायद आप किसी गलतफहमी के शिकार हैं। टोनी जिनी कहते हैं कि एक लीडर का सबसे बड़ा हथियार उसकी बंदूक या उसकी पावर नहीं बल्कि उसका करैक्टर होता है। अगर आपका करैक्टर ढीला है तो आपकी टीम आपके लिए जान देना तो दूर आपके पीछे खड़े होने में भी शर्म महसूस करेगी। बैटलफील्ड में जब गोलियां चलती हैं तब सिपाही उस ऑफिसर की बात मानता है जिस पर उसे भरोसा होता है।

कल्पना कीजिए कि आपके ऑफिस में आग लग गई है। आपका बॉस चिल्लाकर कहता है कि सब बाहर भागो और खुद सबसे पहले अपनी जान बचाकर निकल जाता है। क्या आप अगली बार उस पर भरोसा करेंगे। बिल्कुल नहीं। आजकल के कॉर्पोरेट वर्ल्ड में लीडर्स क्रेडिट खुद ले लेते हैं और जब गलती होती है तो ठीकरा अपनी टीम के सिर पर फोड़ देते हैं। यह लीडरशिप नहीं बल्कि कायराना हरकत है। एक असली लीडर वही है जो हार की जिम्मेदारी खुद ले और जीत का सेहरा अपनी टीम के सिर पर बांधे।

बिना एथिक्स के लीडरशिप वैसी ही है जैसे बिना पेट्रोल की फरारी। बाहर से चमक तो बहुत मारती है लेकिन एक इंच आगे नहीं बढ़ती। टोनी जिनी ने मिलिट्री में देखा है कि जब एक लीडर अपने उसूलों से समझौता करता है तो पूरी यूनिट का मोरल गिर जाता है। अगर आप अपने एम्प्लॉई को ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हैं लेकिन खुद क्लाइंट से झूठ बोलते हैं तो आप एक जोकर से ज्यादा कुछ नहीं हैं। लोग आपकी बातों को नहीं आपके एक्शन्स को फॉलो करते हैं।

जरा सोचिए अगर आपका लीडर आपसे कहे कि ओवरटाइम करो क्योंकि कंपनी मुश्किल में है और खुद उसी समय वेकेशन पर निकल जाए। क्या आपका खून नहीं खौलेगा। ईमानदारी का मतलब यह नहीं कि आप बहुत भोले बन जाएं। इसका मतलब है कि आप जो कहते हैं वही करते हैं। अगर आपने कोई वादा किया है तो उसे निभाना आपकी जिम्मेदारी है। करैक्टर का असली टेस्ट तब होता है जब कोई देख न रहा हो।

आपकी डिग्री या आपका एक्सपीरियंस आपको एक कुर्सी दिला सकता है लेकिन इज्जत सिर्फ आपका करैक्टर ही दिलाएगा। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी बातों को पत्थर की लकीर मानें तो पहले खुद को उस काबिल बनाइये। याद रखिए दुनिया में टैलेंटेड लोगों की कमी नहीं है लेकिन ईमानदार लीडर्स ढूंढने से भी नहीं मिलते। आप वह दुर्लभ लीडर बनिए जिसकी पीठ पीछे लोग बुराई नहीं बल्कि तारीफों के पुल बांधें।


लेसन ३ : कोलबोरेटिव विजन - वन मैन शो छोड़ो और टीम को हीरो बनाओ

अगर आपको लगता है कि आप अकेले पूरी दुनिया जीत लेंगे और बाकी सब सिर्फ आपकी उंगलियों पर नाचने वाले कठपुतली हैं तो आप गलत रास्ते पर हैं। टोनी जिनी साफ कहते हैं कि एक विजन तब तक सिर्फ एक सपना है जब तक वह पूरी टीम का साझा मकसद न बन जाए। बैटलफील्ड में एक जनरल अकेले जंग नहीं जीतता। उसे अपने सबसे छोटे सिपाही से लेकर टॉप ऑफिसर तक सबका साथ चाहिए होता है। अगर आपका विजन केवल आपके केबिन की दीवारों तक सीमित है तो उसे कचरे के डिब्बे में डाल देना ही बेहतर है।

सोचिए आप एक क्रिकेट मैच खेल रहे हैं। आप कप्तान हैं और चाहते हैं कि टीम जीते। लेकिन आपने किसी को यह नहीं बताया कि फील्डिंग कहां करनी है या बॉलिंग किसे करनी है। आप बस मैदान के बीच में खड़े होकर चिल्ला रहे हैं। नतीजा क्या होगा। आप बुरी तरह हारेंगे और लोग आप पर हँसेंगे। यही हाल उन लीडर्स का होता है जो अपनी टीम को अंधेरे में रखते हैं। कोलबोरेटिव विजन का मतलब है कि आपकी टीम को यह पता होना चाहिए कि वे जो काम कर रहे हैं उसका बड़ा मकसद क्या है।

अक्सर ऑफिस में मैनेजर अपनी टीम को गधों की तरह काम पर लगा देते हैं। उन्हें लगता है कि ज्यादा जानकारी देने से लोग सिर पर चढ़ जाएंगे। लेकिन सच तो यह है कि जब लोगों को अपने काम की वैल्यू समझ आती है तब वे अपना सौ परसेंट देते हैं। टोनी जिनी ने सोमालिया जैसे मुश्किल ऑपरेशन्स में देखा कि जब अलग-अलग देशों की सेनाओं ने मिलकर काम किया तभी मिशन सफल हो पाया। वहां कोई एक आदमी बॉस नहीं था बल्कि एक कॉमन गोल बॉस था।

अगर आप हर छोटे काम में टांग अड़ाते हैं यानी माइक्रोमैनेजमेंट करते हैं तो आप अपनी टीम का कॉन्फिडेंस मार रहे हैं। एक असली लीडर लोगों को रास्ता दिखाता है और फिर उन्हें अपनी काबिलियत दिखाने का मौका देता है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी गैर मौजूदगी में भी काम परफेक्ट हो तो आपको लोगों को एम्पॉवर करना ही होगा। उन्हें डिक्टेटर की तरह आर्डर मत दीजिये बल्कि एक कोच की तरह गाइड कीजिये।

एक लीडर की सफलता इस बात से नहीं मापी जाती कि उसने कितनी ऊंचाई छुई बल्कि इस बात से मापी जाती है कि उसने अपने साथ कितने लोगों को ऊंचा उठाया। जिस दिन आपकी टीम आपका विजन अपना समझकर काम करने लगेगी उस दिन आपको सक्सेस के पीछे भागना नहीं पड़ेगा। सक्सेस खुद आपके पीछे भागती हुई आएगी।


लीडरशिप कोई पोस्ट नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है। आज ही अपने अंदर के उस वारियर को जगाइये जो सिर्फ खुद के लिए नहीं बल्कि अपनी पूरी टीम के लिए लड़ता है। अगर आपने आज कुछ नया सीखा है तो इसे अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसे एक अच्छे लीडर बनने की जरूरत है। कमेंट्स में बताएं कि इन तीनों में से कौन सा लेसन आपकी लाइफ बदल सकता है। उठिए और आज से ही लीड करना शुरू कीजिये।

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