Lean Customer Development (Hindi)


अगर आपको लगता है कि आपका ब्रिलियंट बिजनेस आईडिया रातों रात आपको करोड़पति बना देगा तो मुबारक हो आप अपनी बर्बादी की ओर बढ़ रहे हैं। कस्टमर से बिना बात किए हवा में महल बनाना बंद करिए वरना बाद में खाली बैंक बैलेंस देखकर रोना ही बचेगा।

क्या आप भी वही पुरानी गलती कर रहे हैं जो ९० परसेंट स्टार्टअप्स को डुबो देती है। चलिए इस आर्टिकल में हम लीन कस्टमर डेवलपमेंट के वो ३ बड़े लेसन समझेंगे जो आपके फेल होने के चांस को जीरो कर देंगे।


लेसन १ : गेस करना छोड़ो और असली दुनिया में कदम रखो

इमेजिन करिए कि आपने एक बहुत ही शानदार रेस्टोरेंट खोला है। आपने फर्नीचर पर लाखों खर्च किए और दुनिया के सबसे महंगे शेफ को काम पर रखा। लेकिन ओपनिंग वाले दिन आपको पता चलता है कि उस इलाके के लोग तो सिर्फ सादा घर का खाना ढूंढ रहे हैं। अब आप अपने उन महंगे इटालियन पास्ता का क्या करेंगे। शायद खुद ही बैठकर खाएंगे। ज्यादातर नए बिजनेसमैन यही बड़ी गलती करते हैं। वो अपने कमरे में बैठकर सोचते हैं कि दुनिया को क्या चाहिए और फिर अपना सारा पैसा और समय उस चीज को बनाने में झोंक देते हैं जिसे कोई खरीदना ही नहीं चाहता। इसे कहते हैं अपने ही आईडिया से प्यार कर बैठना और यही प्यार अक्सर बैंक अकाउंट को जीरो कर देता है।

सिंडी अल्वारेज कहती हैं कि आपका ऑफिस या आपका कमरा वो जगह नहीं है जहां आपका बिजनेस सफल होगा। असली जवाब तो बाहर की धूल और शोर में छिपे हैं। आपको अपने उन काल्पनिक कस्टमर्स के पास जाना होगा जिन्हें आपने अपने दिमाग में बसा रखा है। उनसे बात करना बोरिंग लग सकता है और शायद आपका ईगो भी बीच में आए कि मैं क्यों किसी के सामने हाथ फैलाऊं। लेकिन सच तो ये है कि बिना कस्टमर डेवलपमेंट के आप सिर्फ एक जुआ खेल रहे हैं। और यकीन मानिए मार्केट का जुआ कभी किसी को जीतने नहीं देता।

मान लीजिए राहुल नाम का एक लड़का है जिसे लगता है कि इंडिया के लोग अपनी कार साफ़ करवाने के लिए एक एप का इंतजार कर रहे हैं। राहुल ने बिना किसी से पूछे ५ लाख रुपये लगाकर एक चमकती हुई एप बनवा ली। अब जब वो सड़कों पर उतरा तो उसे पता चला कि लोग तो ५० रुपये देकर पास के छोटू से कार धुलवाना ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें एप की झंझट ही नहीं चाहिए। राहुल का पैसा भी गया और उसकी मेहनत भी। अगर राहुल एप बनाने से पहले १० कार मालिकों से बात कर लेता तो उसे पता चल जाता कि समस्या एप की कमी नहीं बल्कि भरोसेमंद लेबर की है।

लीन कस्टमर डेवलपमेंट का मतलब ही यही है कि आप बिल्डिंग से बाहर निकलें। लोगों से मिलें और उनसे पूछें कि उनकी असली प्रॉब्लम क्या है। आपको वहां जाकर इंटरव्यूअर नहीं बनना है बल्कि एक दोस्त बनकर उनकी बातें सुननी हैं। जब आप लोगों को ध्यान से सुनते हैं तो आपको पता चलता है कि आप जिस चीज को प्रॉब्लम समझ रहे थे वो तो असल में है ही नहीं। लोग आपको वो बातें बताएंगे जो आपने कभी सोची भी नहीं होंगी। यही वो गोल्ड माइन्स हैं जो आपके बिजनेस को बचाएंगी।

याद रखिये कि गेस वर्क यानी अंदाजा लगाना सिर्फ मौसम विभाग को शोभा देता है क्योंकि उनका गलत होना उनकी पहचान है। लेकिन आपके बिजनेस के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। अगर आप आज कस्टमर से बात करने की जहमत नहीं उठाएंगे तो कल कस्टमर आपकी तरफ देखेगा भी नहीं। मार्केट बहुत निर्दयी है और वो आपकी मेहनत की कदर नहीं करता बल्कि सिर्फ अपनी जरूरतों की कदर करता है। तो क्या आप तैयार हैं अपने ईगो को साइड में रखकर मार्केट की कड़वी सच्चाई सुनने के लिए।


लेसन २ : कस्टमर की हां में हां मत मिलाओ बल्कि उनकी मजबूरी समझो

जब आप कस्टमर के पास जाते हैं तो आप अक्सर एक मासूम गलती करते हैं। आप उनसे पूछते हैं कि क्या आपको मेरा यह आईडिया पसंद आया। अब सामने वाला इंसान भले ही मन में सोच रहा हो कि यह क्या कचरा है लेकिन तमीज के नाते वह मुस्कुराकर कह देगा कि हां भाई बहुत बढ़िया है। आप खुशी के मारे उछलने लगते हैं और घर जाकर अपनी जमा पूंजी उस आईडिया पर लगा देते हैं। मुबारक हो आपने अभी अभी अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है। सिंडी अल्वारेज कहती हैं कि कस्टमर से कभी यह मत पूछो कि उसे आपका प्रोडक्ट कैसा लगा। क्योंकि लोग झूठ बोलते हैं और वो भी बहुत सफाई से।

आपको एक जासूस की तरह उनके व्यवहार को ऑब्जर्व करना होगा। लोग जो कहते हैं और जो वो असल में करते हैं उसमें जमीन आसमान का फर्क होता है। सोचिए एक अंकल सुबह पार्क में सबको ज्ञान देते हैं कि बाहर का जंक फूड नहीं खाना चाहिए लेकिन शाम होते ही वही अंकल चाट के ठेले पर सबसे ज्यादा भीड़ लगाए खड़े होते हैं। बिजनेस में भी यही होता है। अगर आप लोगों से पूछेंगे कि क्या आप हेल्थ एप के लिए पैसे देंगे तो सब हां कहेंगे। लेकिन जब असल में पैसे मांगने की बारी आएगी तो सबके बहाने शुरू हो जाएंगे। आपको उनकी बातों पर नहीं बल्कि उनके पुराने खर्चों और उनकी आदतों पर ध्यान देना है।

मान लीजिए पूजा एक नया और यूनिक मेकअप बॉक्स बेचना चाहती है जो बहुत ही फैंसी दिखता है। वह अपनी सहेलियों से पूछती है कि क्या तुम इसे खरीदोगी। सब सहेलियां कहती हैं कि यार यह तो बहुत क्यूट है जरूर लेंगे। पूजा ने १००० डिब्बे बनवा लिए। नतीजा क्या हुआ। एक भी डिब्बा नहीं बिका। क्यों। क्योंकि उन सहेलियों के पास पहले से ही तीन तीन बॉक्स पड़े थे जो वो इस्तेमाल भी नहीं कर रही थीं। पूजा को उनसे यह नहीं पूछना चाहिए था कि उन्हें बॉक्स पसंद है या नहीं। उसे यह पूछना चाहिए था कि पिछला मेकअप बॉक्स उन्होंने कब और क्यों खरीदा था और उसे इस्तेमाल करने में क्या दिक्कत आती है।

सच्चाई यह है कि कस्टमर को आपके प्रोडक्ट में कोई दिलचस्पी नहीं है। उसे सिर्फ अपनी प्रॉब्लम सुलझाने में इंटरेस्ट है। अगर आप किसी को गड्ढा खोदते हुए देखते हैं तो उसे ड्रिल मशीन नहीं चाहिए बल्कि उसे वह गड्ढा चाहिए जो उसे काम पूरा करने में मदद करे। आपको यह समझना होगा कि कस्टमर अभी उस प्रॉब्लम को कैसे सॉल्व कर रहा है। क्या वह बहुत परेशान है। क्या वह उस पर पैसे खर्च कर रहा है। अगर वह अपनी समस्या के लिए आज कोई जुगाड़ भी नहीं कर रहा है तो इसका मतलब है कि उसे आपके प्रोडक्ट की जरूरत ही नहीं है।

आपका काम लोगों को यह यकीन दिलाना नहीं है कि आपका आईडिया महान है। आपका काम तो यह ढूंढना है कि लोगों के जीवन में ऐसी कौन सी दर्दनाक कमी है जिसके लिए वो खुशी खुशी अपनी जेब ढीली कर देंगे। जब आप लोगों से सवाल पूछते हैं तो उनके पास्ट यानी बीते हुए समय के बारे में पूछें। उनसे उनके सपनों के बारे में मत पूछिए क्योंकि सपने तो हर कोई हसीन ही देखता है। हकीकत तो उन बिलों में होती है जो वो हर महीने भरते हैं।


लेसन ३ : छोटा स्टेप लो और हर फीडबैक से खुद को बदलो

अब तक आपने कस्टमर से बात कर ली और उनकी असली जरूरतों को भी समझ लिया। अब बारी आती है उस चीज को बनाने की जिसे दुनिया खरीदे। लेकिन यहां भी एक बहुत बड़ा ट्रैप है। बहुत से लोग सोचते हैं कि जब तक उनका प्रोडक्ट एकदम परफेक्ट नहीं होगा तब तक वो उसे मार्केट में नहीं उतारेंगे। वो हफ़्तों और महीनों तक कोडिंग करते हैं या डिजाइनिंग में वक्त बर्बाद करते हैं ताकि वो दुनिया को एक मास्टरपीस दिखा सकें। लेकिन दोस्त यह कोई फिल्म की शूटिंग नहीं है कि एक बार फ्लॉप हुई तो सब खत्म। बिजनेस में अगर आप बहुत देर से मार्केट में उतरते हैं तो तब तक या तो कस्टमर की जरूरत बदल चुकी होती है या फिर कोई और बाजी मार ले जाता है।

सिंडी अल्वारेज हमें सिखाती हैं कि परफेक्ट बनने की जिद छोड़ो और काम चलाऊ यानी मिनिमम वायबल प्रोडक्ट (MVP) के साथ मैदान में उतरो। इसका मतलब यह नहीं है कि आप कोई कचरा बनाकर बेचें। इसका मतलब यह है कि आप सिर्फ वही एक फीचर कस्टमर को दें जो उसकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम को सॉल्व करता हो। बाकी की चमक धमक और फालतू फीचर्स बाद में भी जोड़े जा सकते हैं। आपका असली मकसद पैसा कमाना नहीं बल्कि यह सीखना होना चाहिए कि क्या लोग आपके बेसिक आईडिया के लिए भी तैयार हैं।

मान लीजिए सुमित को एक ऑनलाइन सब्जी बेचने का बड़ा बिजनेस शुरू करना है। अब सुमित चाहता तो पहले ही दिन एक करोड़ की वेबसाइट और १० डिलीवरी ट्रक खरीद लेता। लेकिन उसने अक्ल लगाई। उसने सिर्फ एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और अपने पड़ोस के २० लोगों को जोड़ दिया। उसने उनसे कहा कि जिसे जो सब्जी चाहिए बस मैसेज कर दे। सुमित ने देखा कि लोग सब्जी तो कम लेकिन ताजे फल ज्यादा मांग रहे थे। अगर सुमित ने पहले ही सब्जियां भर ली होतीं तो उसका नुकसान तय था। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए उसे समझ आ गया कि मार्केट की डिमांड क्या है। इसे कहते हैं लीन तरीके से काम करना।

आपको अपने प्रोडक्ट को लगातार अपडेट करना होगा। कस्टमर जब आपके पहले वर्जन को इस्तेमाल करेगा तो वो आपको गाली भी दे सकता है और सुझाव भी। इन गालियों को और सुझावों को प्रसाद समझकर ग्रहण करिए। हर फीडबैक आपके प्रोडक्ट को बेहतर बनाने की एक सीढ़ी है। बहुत से लोग अपने प्रोडक्ट की बुराई सुनकर इमोशनल हो जाते हैं जैसे किसी ने उनके बच्चे को काला कह दिया हो। लेकिन याद रखिए बिजनेस में कोई इमोशन नहीं चलता। अगर कस्टमर को कोई चीज पसंद नहीं आ रही तो उसे तुरंत बदल डालिए।

यह प्रोसेस एक चक्र की तरह है। आप कुछ बनाते हैं फिर उसे मार्केट में टेस्ट करते हैं फिर कस्टमर से फीडबैक लेते हैं और फिर दोबारा सुधार करते हैं। जो लोग इस चक्र को जितनी जल्दी घुमाना सीख जाते हैं वो उतनी ही जल्दी सक्सेसफुल हो जाते हैं। मार्केट में टिके रहने का इकलौता मंत्र यही है कि आप कभी भी यह न सोचें कि आपने सब कुछ सीख लिया है। हर दिन एक नया लेसन होता है और हर कस्टमर एक नया टीचर। तो अपनी कुर्सी से उठिए और आज ही अपना छोटा सा प्रोटोटाइप तैयार करिए।


लीन कस्टमर डेवलपमेंट कोई रॉकेट साइंस नहीं है बल्कि यह तो आम इंसान की समझदारी है जिसे हम अक्सर भूल जाते हैं। बिजनेस सिर्फ ऑफिस में बैठकर चार्ट बनाने का नाम नहीं है बल्कि लोगों के बीच जाकर उनकी लाइफ को आसान बनाने का नाम है। अगर आप आज भी सिर्फ अपने अंदाजों पर भरोसा कर रहे हैं तो आप एक बहुत गहरे गड्ढे की तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन अगर आप कस्टमर की आवाज को अपना कंपास बना लेंगे तो यकीन मानिए आपको सफल होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक पाएगी।

तो अब आपकी बारी है। नीचे कमेंट बॉक्स में बताइए कि आपके पास ऐसा कौन सा आईडिया है जिसे आप आज ही टेस्ट करना चाहते हैं। और हां अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो अपना नया स्टार्टअप शुरू करने का सपना देख रहे हैं। शायद आपका एक शेयर किसी को डूबने से बचा ले।

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