क्या आप भी उन महान बिजनेस ओनर्स में से हैं जो कस्टमर से पैसे ऐंठते ही उसे भूल जाते हैं। बधाई हो आप अपनी बरबादी का रास्ता खुद साफ कर रहे हैं। बिना कस्टमर रिटेंशन के आपका बिजनेस एक फटे हुए थैले जैसा है जिसमें आप चाहे जितना पैसा डालें सब नीचे से निकल जाएगा।
इस आर्टिकल में हम जोई कोलमैन की किताब नेवर लूज अ कस्टमर अगेन से वह सीक्रेट्स जानेंगे जो आपके क्लाइंट्स को आपका दीवाना बना देंगे। चलिए इन ३ पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं और आपके बिजनेस को नेक्स्ट लेवल पर ले जाते हैं।
लेसन १ : पहले १०० दिन का असली खेल
जरा सोचिए आपकी नई नई शादी हुई है और शादी के अगले ही दिन आपका पार्टनर आपसे बात करना बंद कर दे। आपको कैसा लगेगा। आप सोचेंगे कि क्या मैंने कोई गलती कर दी या फिर यह इंसान ही गलत है। बिजनेस की दुनिया में भी यही होता है। जब कोई कस्टमर आपको पहली बार पैसे देता है तो वह अपनी मेहनत की कमाई आप पर दांव पर लगाता है। लेकिन जैसे ही ट्रांजैक्शन पूरा होता है ज्यादातर बिजनेस वाले ऐसे गायब हो जाते हैं जैसे गधे के सिर से सींग। जोई कोलमैन कहते हैं कि सेल्स होने के बाद के पहले १०० दिन ही यह तय करते हैं कि वह कस्टमर आपके साथ बुढापे तक रहेगा या अगले हफ्ते ही किसी और के पास चला जाएगा।
अक्सर हम सेल्स करने के बाद जश्न मनाने लगते हैं और भूल जाते हैं कि असली काम तो अब शुरू हुआ है। एक बार पेमेंट मिलने के बाद कस्टमर के दिमाग में खरीदार का पछतावा यानी बायर रिमोर्स पैदा होता है। वह खुद से सवाल करता है कि क्या मैंने सही फैसला लिया। क्या यह कंपनी मेरा फोन उठाएगी। क्या इनके प्रोडक्ट में वाकई दम है। अगर आप इस दौरान चुप बैठ गए तो समझो आपने अपने पैर पर कुल्हाडी मार ली है। कस्टमर को इस समय सबसे ज्यादा प्यार और ध्यान की जरूरत होती है।
मान लीजिए आपने एक बहुत महंगा जिम मेंबरशिप लिया। आपने मोटी फीस भरी और जोश में जिम पहुँचे। लेकिन वहाँ कोई आपको पूछने वाला नहीं है। ट्रेनर अपने मोबाइल में लगा है और रिसेप्शन वाली मैडम आपको ऐसे देख रही हैं जैसे आप कोई बिन बुलाए मेहमान हों। अब आप अगले दिन वहाँ जाने से पहले दस बार सोचेंगे। आपका दिमाग कहेगा कि भाई पैसे डूब गए। वहीं दूसरी तरफ अगर जिम का मैनेजर आपको गेट पर रिसीव करे और पहले दिन आपको एक पर्सनल डाइट प्लान और वेलकम किट दे तो आपका कॉन्फिडेंस आसमान छू जाएगा। आप खुद ही चार दोस्तों को बोलोगे कि भाई जिम हो तो ऐसा।
ज्यादातर इंडियन बिजनेस में यही दिक्कत है कि हम कस्टमर को केवल एक नोट छापने की मशीन समझते हैं। हमें लगता है कि एक बार माल बिक गया तो अब हमारी जिम्मेदारी खत्म। लेकिन जोई कोलमैन के अनुसार यह तो बस शुरुआत है। आपको इन १०० दिनों को एक फिल्म की तरह डिजाइन करना चाहिए। हर हफ्ते कस्टमर को कुछ नया और सरप्राइजिंग मिलना चाहिए। कभी एक थैंक यू नोट तो कभी एक छोटा सा गिफ्ट। जब आप बिना मांगे कुछ एक्स्ट्रा देते हैं तो कस्टमर को लगता है कि उसे लूटा नहीं गया है बल्कि उसे वैल्यू मिली है।
आज के सोशल मीडिया के दौर में एक दुखी कस्टमर हजार लोगों को आपके बारे में बुरा बोल सकता है। और एक खुश कस्टमर आपके लिए फ्री में मार्केटिंग कर सकता है। तो तय आपको करना है कि आप अपने कस्टमर को एक एटीएम मशीन समझना चाहते हैं या एक इंसान। अगर आप इन पहले १०० दिनों में उसका दिल जीत लेते हैं तो फिर वह आपकी कंपनी का परमानेंट हिस्सा बन जाता है। वह आपकी गलतियों को भी माफ कर देता है क्योंकि आपने उसके साथ एक रिश्ता बनाया है न कि केवल एक सौदा।
लेसन २ : कस्टमर की घबराहट और आपका रोल
क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आपने ऑनलाइन कोई महंगा फोन आर्डर किया और जैसे ही पेमेंट बटन दबाया आपके दिल की धडकन तेज हो गई। आप बार-बार अपना बैंक बैलेंस चेक करते हैं और फिर फोन के रिव्यु देखने लगते हैं कि कहीं मैंने गलत तो नहीं कर दिया। इसे कहते हैं बायर रिमोर्स और यह हर कस्टमर के साथ होता है चाहे वह सुई खरीदे या हवाई जहाज। जोई कोलमैन कहते हैं कि एक स्मार्ट बिजनेस ओनर वह है जो कस्टमर के इस डर को पहचान ले और उसे सुकून देने के लिए तुरंत एक्शन ले। अगर आप इस वक्त खामोश रहे तो कस्टमर का डर नफरत में बदल सकता है।
ज्यादातर दुकानदार सोचते हैं कि पेमेंट मिल गई मतलब जंग जीत ली। लेकिन असलियत में कस्टमर उस वक्त सबसे ज्यादा डरा हुआ होता है। उसे लगता है कि कहीं उसके पैसे डूब तो नहीं गए। क्या उसे वही मिलेगा जिसका वादा किया गया था। अगर आप इस मौके पर उसे एक कॉल करके या एक प्यारा सा मैसेज भेजकर यह बता दें कि उसका फैसला एकदम सही था तो आप उसकी नजरों में हीरो बन जाते हैं। यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है बस एक इंसान का दूसरे इंसान से जुडाव है। लेकिन हमारे यहाँ तो हाल यह है कि पैसे मिलते ही सेल्समैन का चेहरा ऐसा हो जाता है जैसे उसने आपको पहचाना ही न हो।
मान लीजिए आपने किसी नामी कंपनी से वाटर प्यूरीफायर खरीदा। आपने पैसे दे दिए और अब आप घर पर इंतजार कर रहे हैं। दो दिन बीत गए और कोई नहीं आया। आप कस्टमर केयर को फोन करते हैं और वह आपको म्यूजिक सुनाकर होल्ड पर डाल देते हैं। अब आपका खून खौलेगा और आप कसम खाएंगे कि दोबारा इनसे कभी कुछ नहीं लूंगा। लेकिन सोचिए अगर पेमेंट करते ही आपके पास एक वीडियो मैसेज आए जिसमें कंपनी का मालिक आपको थैंक यू बोले और बताए कि आपका प्रोडक्ट पैक हो रहा है। साथ ही आपको एक ट्रैकिंग लिंक मिले जहाँ आप देख सकें कि आपका सामान कहाँ है। आपका गुस्सा गायब हो जाएगा और आप खुद को स्पेशल महसूस करेंगे।
सच्चाई तो यह है कि लोग प्रोडक्ट नहीं खरीदते बल्कि वह भरोसा खरीदते हैं। जब आप कस्टमर की घबराहट को दूर करते हैं तो आप दरअसल उस भरोसे को मजबूत कर रहे होते हैं। आपको उसे यह यकीन दिलाना होगा कि आप उसके साथ हैं। जोई कोलमैन सुझाव देते हैं कि आपको अपनी टीम को ट्रेनिंग देनी चाहिए कि वे कस्टमर के डर को समझें। अगर कोई क्लाइंट बहुत ज्यादा सवाल पूछ रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह आपको परेशान कर रहा है बल्कि वह बस यह पक्का करना चाह रहा है कि उसके पैसे सुरक्षित हैं।
भारत में लोग भावनाओं से जल्दी जुडते हैं। अगर आप किसी को यह महसूस करा दें कि वह आपके लिए केवल एक नंबर नहीं है तो वह आपके ब्रांड के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। वह आपके बारे में अपने रिश्तेदारों और पडोसियों को बताएगा। यह फ्री की पब्लिसिटी उस करोड़ों के विज्ञापन से कहीं ज्यादा असरदार है जो टीवी पर आते हैं। इसलिए अगली बार जब कोई आपसे कुछ खरीदे तो उसे अकेला मत छोडिए। उसके डर को हाथ थामकर दूर कीजिए और फिर देखिए वह कैसे आपका पक्का फैन बन जाता है।
लेसन ३ : कस्टमर को अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाना
क्या आपको लगता है कि एक बार सामान बेच दिया और कस्टमर खुश हो गया तो आपकी कहानी खत्म हो गई। अगर हाँ तो आप बहुत बडी गलतफहमी में हैं। जोई कोलमैन कहते हैं कि असली जादू तब शुरू होता है जब आपका कस्टमर खुद आपके बिजनेस की मार्केटिंग करने लगे। इसे वह एडवोकेट फेज कहते हैं। जब आपका क्लाइंट बिना किसी कमीशन या लालच के दुनिया के सामने खडा होकर चिल्लाए कि भाई अगर कुछ लेना है तो इसी कंपनी से लो। लेकिन यहाँ तक पहुँचने के लिए आपको उसे एक ऐसी जर्नी पर ले जाना होगा जहाँ वह खुद को आपके बिजनेस का एक जरूरी हिस्सा समझने लगे।
सोचिए आपने किसी लोकल दुकान से एक सूट सिलवाया। मास्टर जी ने टाइम पर डिलीवरी दी और फिटिंग भी लाजवाब थी। आप खुश होकर घर आ गए। लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई। दो महीने बाद जब आपके घर में कोई शादी थी तब मास्टर जी का फोन आता है और वह पूछते हैं कि साहब सूट कैसा चल रहा है। क्या कोई बटन ढीला तो नहीं हुआ। अगर कुछ काम हो तो बताइएगा। अब आप उनके इस जेस्चर से इतने प्रभावित हो जाएंगे कि अगली बार जब आपका कोई दोस्त सूट सिलवाने की बात करेगा तो आप उसे हाथ पकडकर उसी दुकान पर ले जाएंगे। यही है कस्टमर को अपना ब्रांड एम्बेसडर बनाना।
ज्यादातर इंडियन स्टार्टअप्स और बिजनेस केवल एक्विजिशन यानी नए लोग लाने के पीछे पागल रहते हैं। वे फेसबुक और गूगल पर लाखों फूंक देते हैं ताकि नए लोग आएँ। लेकिन जो पुराने लोग हैं जो उन पर भरोसा कर चुके हैं उन्हें वे कचरे के डिब्बे में डाल देते हैं। यह वैसा ही है जैसे आप एक बाल्टी भर रहे हों जिसमें नीचे से छेद है। आप चाहे जितनी तेज पानी डालें बाल्टी कभी नहीं भरेगी। जोई कोलमैन का कहना है कि अगर आप अपने पुराने कस्टमर्स को स्पेशल फील कराते रहें तो आपको नए कस्टमर्स के लिए एक रुपया भी खर्च करने की जरूरत नहीं पडेगी। वे खुद चलकर आपके पास आएंगे क्योंकि आपके पुराने कस्टमर्स ने उनकी गारंटी ली है।
इस लेवल पर पहुँचने के लिए आपको अपने कस्टमर के फीडबैक को भगवान का प्रसाद समझना होगा। अगर कोई कस्टमर शिकायत कर रहा है तो खुश हो जाइए क्योंकि वह अभी भी आपसे जुडा रहना चाहता है। असली खतरा उस कस्टमर से है जो बिना कुछ बोले चुपचाप दूसरे ब्रांड के पास चला जाता है। आपको अपने क्लाइंट्स के साथ एक कम्युनिटी बनानी चाहिए। उन्हें एक्सक्लूसिव इवेंट्स में बुलाइए या उन्हें अपने नए प्रोडक्ट की टेस्टिंग सबसे पहले करने दीजिए। जब आप उन्हें यह महसूस कराते हैं कि उनकी राय आपके लिए मायने रखती है तो वे आपके ब्रांड को अपनी प्रॉपर्टी समझने लगते हैं।
लोग यह भूल सकते हैं कि आपने उन्हें क्या बेचा था लेकिन वे यह कभी नहीं भूलेंगे कि आपने उन्हें कैसा महसूस कराया था। बिजनेस केवल लेन देन का नाम नहीं है बल्कि यह भावनाओं का आदान प्रदान है। अगर आप अपने कस्टमर के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं और उसके मुश्किल वक्त में उसके काम आ सकते हैं तो वह आपके साथ सात जन्मों का रिश्ता निभाएगा। नेवर लूज अ कस्टमर अगेन सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि यह बिजनेस करने का एक नया और नेक तरीका है।
तो क्या आप आज से अपने कस्टमर को सिर्फ एक क्लाइंट की तरह देखना बंद करेंगे। चलिए आज ही अपने किसी पुराने कस्टमर को फोन कीजिए और सिर्फ उनका हाल चाल पूछिए। बिना किसी मतलब के। बिना कुछ बेचने की कोशिश किए। फिर देखिए कैसे आपके बिजनेस की दुनिया बदल जाती है। अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अपना बिजनेस शुरू कर रहे हैं। नीचे कमेंट में बताएं कि आपका सबसे खराब कस्टमर एक्सपीरियंस क्या रहा है।
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