Obviously Awesome (Hindi)


आप अभी भी वही घिसी पिटी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी इस्तेमाल कर रहे हैं और फिर रोते हैं कि सेल्स क्यों नहीं हो रही। सच तो यह है कि आपका प्रोडक्ट खराब नहीं है बल्कि आपकी पोजीशनिंग कचरा है। अगर कस्टमर को समझ ही नहीं आया कि आप बेच क्या रहे हैं तो वह अपना बटुआ कभी नहीं खोलेगा।

क्या आप अपनी मेहनत को बर्बाद होते हुए देखना चाहते हैं या फिर मार्केट का असली खिलाड़ी बनना चाहते हैं। चलिए जानते हैं अप्रैल डनफोर्ड की किताब ऑब्वियसली ऑसम से वह ३ लेसन जो आपके बिजनेस की पूरी गेम बदल देंगे।


लेसन १ : गलत मार्केट में अपनी दुकान मत सजाओ

कल्पना कीजिए कि आपने दुनिया का सबसे शानदार और तेज चलने वाला कैमरा बनाया है। आप बहुत खुश हैं। आप इसे एक आर्ट गैलरी में ले जाते हैं जहां लोग पेंटिंग देख रहे हैं। आप चिल्लाते हैं कि यह कैमरा पलक झपकते ही फोटो खींच लेता है। वहां खड़ा आर्टिस्ट आपको अजीब नजरों से देखता है। वह कहता है कि भाई मुझे फोटो नहीं खींचनी मुझे तो पेंटिंग बनानी है। अब यहां गलती आपके कैमरे की नहीं है। गलती आपकी जगह चुनाव की है। आपने अपने प्रोडक्ट को गलत कॉन्टेक्स्ट में रख दिया है।

ज्यादातर स्टार्टअप और बिजनेसमैन यही गलती करते हैं। वे अपना प्रोडक्ट उन लोगों को बेचने की कोशिश करते हैं जिन्हें उसकी जरूरत ही नहीं है। या फिर वे उसे ऐसी केटेगरी में डाल देते हैं जहां उसका कोई मुकाबला ही नहीं है। अगर आप एक बहुत ही एडवांस डेटाबेस सॉफ्टवेयर बना रहे हैं और उसे सिर्फ एक स्टोर करने वाला टूल कहेंगे तो लोग उसे गूगल ड्राइव से कम्पेयर करेंगे। गूगल ड्राइव तो फ्री है। अब आपका लाखों का सॉफ्टवेयर कचरा लगने लगेगा। सिर्फ इसलिए क्योंकि आपने उसे गलत मार्केट में खड़ा कर दिया।

मार्केटिंग की दुनिया में पोजीशनिंग का मतलब यही है। यह तय करना कि आपका प्रोडक्ट किस लाइन में खड़ा होगा। अप्रैल डनफोर्ड कहती हैं कि अगर आप खुद अपनी केटेगरी तय नहीं करेंगे तो कस्टमर उसे खुद किसी न किसी पुरानी चीज से जोड़ देगा। और यकीन मानिए कस्टमर हमेशा उसे ऐसी चीज से जोड़ेगा जो आपसे सस्ती और मशहूर होगी। फिर आप बैठ कर डिस्काउंट देते रहिएगा।

मान लीजिए आपने एक ऐसी कॉफी बनाई है जो आपको १० घंटे तक सोने नहीं देगी। अब आप इसे नेसकैफे के साथ शेल्फ पर रख देते हैं। कस्टमर देखेगा और कहेगा कि यह तो बहुत महंगी है। लेकिन अगर आप इसे एनर्जी ड्रिंक की केटेगरी में रेड बुल के साथ रख दें तो खेल बदल जाएगा। अब लोग इसकी कीमत की तुलना एनर्जी से करेंगे न कि स्वाद से। यही पावर है सही कॉन्टेक्स्ट की।

हम अक्सर सोचते हैं कि हमारा प्रोडक्ट सबके लिए है। यह सबसे बड़ी बेवकूफी है। सबके लिए होने का मतलब है किसी के लिए भी न होना। आपको वह एक कोना ढूंढना होगा जहां आपका प्रोडक्ट भगवान की तरह पूजा जाए। अगर आप एक छोटे शहर में फरारी बेचने की कोशिश करेंगे तो लोग बस माइलेज पूछ कर निकल जाएंगे। वहां आपको ट्रैक्टर बेचना चाहिए। प्रोडक्ट वही है बस नजरिया बदलना है।

अगर आपकी सेल्स नहीं बढ़ रही है तो शायद आपका प्रोडक्ट बुरा नहीं है। शायद आप गलत महफिल में गाना गा रहे हैं। लोग आपकी आवाज नहीं बल्कि शोर सुन रहे हैं। इसलिए सबसे पहले यह देखो कि आपकी असली जगह कहां है। क्या आप एक जनरल स्टोर के आइटम हैं या किसी लग्जरी शोरूम के खास मेहमान। एक बार सही केटेगरी मिल गई तो आधे से ज्यादा काम वही खत्म हो जाता है।


लेसन २ : अपने असली दुश्मन को पहचानो

अक्सर बिजनेस वाले सोचते हैं कि उनका मुकाबला मार्केट की बड़ी कंपनियों से है। अगर आप एक नया एप बना रहे हैं तो आपको लगता है कि आपका कम्पटीशन फेसबुक या गूगल है। लेकिन रुकिए। अप्रैल डनफोर्ड एक बहुत ही मजेदार बात कहती हैं। आपका असली कॉम्पिटिटर वह नहीं है जो आपके जैसा प्रोडक्ट बेच रहा है। आपका असली दुश्मन है 'पुराना तरीका' या 'कुछ न करने की आदत'।

मान लीजिए आपने एक बहुत ही एडवांस टास्क मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर बनाया है। आपको लगता है कि आपका मुकाबला माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल से है। लेकिन असल में आपका मुकाबला उस डायरी और पेन से है जिसे आपका कस्टमर पिछले १० साल से इस्तेमाल कर रहा है। वह इंसान अपनी डायरी से इतना प्यार करता है कि उसे आपका सॉफ्टवेयर एक बोझ लगता है। जब तक आप उसे यह नहीं बताएंगे कि डायरी इस्तेमाल करने से उसका कितना नुकसान हो रहा है तब तक वह आपकी तरफ देखेगा भी नहीं।

मार्केट में टिकने के लिए आपको यह समझना होगा कि कस्टमर आपके बिना कैसे जी रहा है। क्या वह अपना काम जुगाड़ से चला रहा है। क्या वह किसी सस्ते और बेकार अल्टरनेटिव से खुश है। जब तक आप उस जुगाड़ की कमियां नहीं दिखाएंगे तब तक आपकी वैल्यू जीरो है। लोग बदलाव से डरते हैं। उन्हें पुरानी आदत छोड़ने में दर्द होता है। आपको उस दर्द से बड़ा फायदा दिखाना होगा।

यहां अक्सर लोग अपनी तारीफ करने लगते हैं। हम बेस्ट हैं। हम नंबर वन हैं। अरे भाई यह सब पुरानी बातें हो गई हैं। आज का कस्टमर स्मार्ट है। उसे यह बताओ कि अगर वह आज नहीं बदला तो कल वह कितना पीछे छूट जाएगा। उसे दिखाओ कि उसका कॉम्पिटिटर कैसे मॉडर्न टूल्स यूज करके उससे आगे निकल रहा है। जब उसे हारने का डर लगेगा तब वह आपके पास दौड़ता हुआ आएगा।

एक कंपनी ने एक बहुत ही शानदार रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर बनाया। उन्होंने बहुत विज्ञापन किया कि इसमें लेजर सेंसर है और यह बहुत तेज है। लेकिन सेल्स नहीं बढ़ी। क्यों। क्योंकि लोगों को लगा कि झाड़ू मारना तो फ्री है फिर पैसे क्यों खर्च करें। तब कंपनी ने अपनी स्ट्रैटेजी बदली। उन्होंने रोबोट के फीचर्स नहीं बल्कि 'समय की बर्बादी' पर फोकस किया। उन्होंने दिखाया कि झाड़ू मारने में जो २ घंटे खराब होते हैं उसमें आप अपने बच्चों के साथ खेल सकते हैं। अब मुकाबला झाड़ू से नहीं बल्कि 'फैमिली टाइम' से था।

यही आपको भी करना है। अपने फीचर्स की लिस्ट मत रटिए। यह देखिए कि आपका कस्टमर आपके प्रोडक्ट के बिना क्या खो रहा है। क्या उसका पैसा बर्बाद हो रहा है। क्या उसका सुकून छिन रहा है। जिस दिन आपने कस्टमर की उस पुरानी और बेकार आदत को अपना दुश्मन बना लिया उस दिन आपकी सेल्स रॉकेट की तरह ऊपर जाएगी। याद रखिए लोग नया खरीदने के लिए नहीं बल्कि अपनी पुरानी परेशानी खत्म करने के लिए पैसे देते हैं।


लेसन ३ : सिर्फ फीचर्स मत बेचो, जादू दिखाओ

अब तक आपने अपनी सही महफिल चुन ली और अपने दुश्मन को भी पहचान लिया। लेकिन अब बारी आती है सबसे मुश्किल काम की और वो है अपनी बात मनवाना। अक्सर लोग अपने प्रोडक्ट की तारीफ करते वक्त टेक्निकल रट्टा मारने लगते हैं। हमारा सॉफ्टवेयर क्लाउड पर है, इसमें एआई है, इसकी बैटरी ५००० एमएएच की है। सच कहूं तो कस्टमर को घंटा फर्क नहीं पड़ता कि आपके प्रोडक्ट के अंदर क्या लगा है। उसे बस इस बात से मतलब है कि उसके जीवन का कौन सा सरदर्द खत्म हो रहा है।

अप्रैल डनफोर्ड कहती हैं कि लोग फीचर्स नहीं खरीदते, वे उस फीचर से होने वाला फायदा यानी वैल्यू खरीदते हैं। इसे एक मजेदार उदाहरण से समझिए। मान लीजिए आप एक ड्रिल मशीन बेच रहे हैं। आप कस्टमर को बता रहे हैं कि इसकी मोटर कितनी पावरफुल है और यह कितनी तेज घूमती है। कस्टमर बोर हो रहा है। उसे ड्रिल मशीन नहीं चाहिए, उसे तो दीवार पर एक छेद चाहिए ताकि वो अपनी बीवी के साथ वाली फोटो टांग सके और घर में शांति बनी रहे। अगर आप उसे यह विश्वास दिला दें कि यह मशीन बिना शोर किए और बिना दीवार खराब किए एक परफेक्ट छेद कर देगी, तो वो बिना मोलभाव किए उसे खरीद लेगा।

हम अक्सर अपनी खूबियों के जाल में फंस जाते हैं। हमें लगता है कि जितनी ज्यादा चीजें हम गिनाएंगे, उतना ही हम कूल लगेंगे। लेकिन असल में आप कस्टमर को कन्फ्यूज कर रहे हैं। अगर आपके पास १० फीचर्स हैं, तो उनमें से उन २ को पकड़िए जो आपके कॉम्पिटिटर के पास सपने में भी नहीं हैं। उन्हें अपना 'यूनिक वैल्यू' बनाइए। बाकी ८ फीचर्स तो बस साथ में मिलने वाली मूंगफली की तरह होने चाहिए। असली फोकस उस एक बड़े धमाके पर होना चाहिए जो किसी और के पास नहीं है।

सोचिए अगर डोमिनोज सिर्फ यह कहता कि हमारा पिज्जा बहुत टेस्टी है, तो क्या वो इतना बड़ा ब्रांड बनता। कभी नहीं। उन्होंने फोकस किया एक प्रॉब्लम पर और वो थी 'भूख और समय'। उन्होंने फीचर नहीं बल्कि वादा बेचा कि ३० मिनट में पिज्जा घर आएगा वरना फ्री मिलेगा। यहां टेस्ट से ज्यादा वैल्यू उस 'समय' की थी। उन्होंने अपनी पोजीशनिंग ही बदल दी।

आज के जमाने में अगर आप सिर्फ एक और ऑप्शन बनकर मार्केट में उतरेंगे, तो आप भीड़ में खो जाएंगे। आपको वो एक वजह देनी होगी जो कस्टमर को मजबूर कर दे यह कहने पर कि यही तो मुझे चाहिए था। अपनी बातों में थोड़े इमोशन डालिए, थोड़ी असलियत दिखाइए। जब आप किसी की समस्या को अपनी समस्या समझकर उसका हल देते हैं, तो सेल्स अपने आप होती है। सेल्स कोई जादू नहीं है, यह बस सही इंसान को सही चीज सही तरीके से बताने का नाम है।

तो अपनी पीपीटी और ब्रोशर से उन भारी भरकम शब्दों को हटा दीजिए जिन्हें डिक्शनरी में ढूंढना पड़े। सीधा बोलिए, साफ बोलिए और ऐसा बोलिए कि कस्टमर को लगे कि आप उसके दिल की बात कर रहे हैं। जिस दिन आप फीचर्स की जगह वैल्यू और इमोशन बेचने लगेंगे, उस दिन आपको किसी डिस्काउंट की जरूरत नहीं पड़ेगी। लोग आपके पास खुद खिंचे चले आएंगे क्योंकि आप उनके लिए 'ऑब्वियसली ऑसम' बन चुके होंगे।


बिजनेस करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस सही नजरिया चाहिए। अगर आप अभी भी वही पुरानी गलतियां कर रहे हैं, तो रुकिए और सोचिए। क्या आप सही मार्केट में हैं। क्या आप सही दुश्मन से लड़ रहे हैं। और क्या आप सच में वो वैल्यू दे रहे हैं जिसकी कस्टमर को तलाश है। ऑब्वियसली ऑसम सिर्फ एक किताब नहीं है, यह एक आईना है जो आपको आपकी गलतियां दिखाता है। आज ही अपने प्रोडक्ट को नए नजरिए से देखिए और उसे वो पहचान दीजिए जिसका वो हकदार है।

अगर आपको भी लगता है कि आपकी पोजीशनिंग में सुधार की जरूरत है, तो नीचे कमेंट में अपना बिजनेस टाइप लिखें और हम उस पर चर्चा करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जिसका स्टार्टअप सेल्स के लिए जूझ रहा है। चलिए मिलकर एक 'ऑसम' कम्युनिटी बनाते हैं।

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