क्या आप अभी भी गधों की तरह दिन रात पोस्ट डाल रहे हैं और व्यूज के नाम पर सिर्फ मम्मी का लाइक मिल रहा है। मुबारक हो आप अपनी जवानी और डेटा दोनों बर्बाद कर रहे हैं। बिना वायरल सीक्रेट्स के इंटरनेट पर ग्रो करना उतना ही मुश्किल है जितना दिल्ली की ट्रैफिक में शांति ढूंढना।
आज के इस जबरदस्त ब्लॉग में हम ब्रेंडन केन की किताब वन मिलियन फॉलोअर्स से वह तरीके सीखेंगे जिन्होंने रातों रात लोगों को स्टार बना दिया। अगर आप भी जीरो से हीरो बनने का सपना देख रहे हैं तो यह तीन लेसन आपकी जिंदगी बदल देंगे।
लेसन १ : टेस्टिंग का चस्का और डेटा का असली पावर
सोशल मीडिया पर अक्सर लोग यह गलती करते हैं कि वे खुद को बहुत बड़ा कलाकार समझने लगते हैं। उन्हें लगता है कि जो उन्होंने बनाया है वही दुनिया के लिए बेस्ट है। लेकिन ब्रेंडन केन कहते हैं कि आपकी पसंद और नापसंद की कोई वैल्यू नहीं है। असली बॉस तो वह ऑडियंस है जो फोन पर अंगूठा घिस रही है। सोचिए आप किसी शादी में गए और वहां आपने बहुत मेहनत से एक गाना गाया पर लोग समोसे खाने में बिजी हैं। क्या आप वहां चिल्लाएंगे कि मेरा गाना सुनो। बिल्कुल नहीं। आप शायद गाना बदल देंगे या कोई चुटकुला सुनाएंगे। यही है टेस्टिंग।
ब्रेंडन केन ने खुद एक मिलियन फॉलोअर्स सिर्फ तीस दिन में बनाए। उन्होंने यह कोई जादू से नहीं किया बल्कि टेस्टिंग से किया। वे एक ही बात को दस अलग तरीकों से पेश करते थे। वे देखते थे कि कौन सी फोटो या कौन सा वीडियो लोगों को रुकने पर मजबूर कर रहा है। हम इंडियंस की आदत है कि हम एक वीडियो डालते हैं और फिर हर पांच मिनट में रिफ्रेश करके देखते हैं कि कितने लाइक आए। जब लाइक नहीं आते तो हम किस्मत को कोसते हैं। लेकिन सच तो यह है कि आपने शायद टेस्टिंग की ही नहीं।
मान लीजिए आप फिटनेस का कंटेंट बनाते हैं। आपने एक वीडियो बनाया जिसमें आप वर्कआउट कर रहे हैं। अब इसी वीडियो के तीन अलग वर्जन बनाइये। एक में म्यूजिक तेज रखिए। दूसरे में कोई मजाकिया कमेंट्री जोड़िये। तीसरे में सिर्फ रिजल्ट दिखाइये। अब इन तीनों को टेस्ट कीजिये। जो सबसे ज्यादा चले उसे पकड़ लीजिये और बाकी को कचरे के डिब्बे में डाल दीजिये। लोग अक्सर इमोशनल होकर अपने कंटेंट से चिपक जाते हैं। उन्हें लगता है कि यह उनकी मेहनत है। भाई साहब मेहनत तो गधा भी करता है पर वह वायरल नहीं होता।
आज के जमाने में अगर आप डेटा को नहीं समझ रहे तो आप बस अंधेरे में पत्थर मार रहे हैं। ब्रेंडन सिखाते हैं कि कम पैसे खर्च करके भी आप फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एड्स चलाकर यह देख सकते हैं कि दुनिया को क्या पसंद आ रहा है। यह वैसा ही है जैसे आप किसी लड़की को इम्प्रेस करने के लिए पहले उसके दोस्तों से पूछते हैं कि उसे चॉकलेट पसंद है या फूल। बिना पूछे सीधा फूल लेकर जाएंगे तो शायद थप्पड़ भी मिल सकता है। सोशल मीडिया भी कुछ ऐसा ही है। यहाँ बिना फीडबैक के आगे बढ़ना खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारना है।
अटेंशन पाना एक साइंस है और टेस्टिंग उसका सबसे बड़ा फार्मूला है। जब आप टेस्टिंग करते हैं तो आप रिस्क कम कर देते हैं। आपको पता होता है कि कौन सा बटन दबाने पर घंटी बजेगी। इसलिए अपनी ईगो को साइड में रखिये और टेस्टिंग को अपना सबसे पक्का दोस्त बनाइये। अगर आप टेस्ट नहीं कर रहे तो आप सिर्फ उम्मीद कर रहे हैं और उम्मीद पर दुनिया कायम हो सकती है पर आपका सोशल मीडिया पेज कभी ग्रो नहीं होगा।
लेसन २ : अटेंशन की चोरी और 3 सेकंड का कुरुक्षेत्र
आज की दुनिया में सबसे कीमती चीज सोना या पैसा नहीं है बल्कि इंसानी ध्यान यानी अटेंशन है। लोग इंस्टाग्राम की रील ऐसे स्क्रॉल करते हैं जैसे कोई पुराना अखबार फेंक रहे हों। अगर आप चाहते हैं कि कोई रुककर आपको देखे तो आपको एक प्रोफेशनल चोर बनना पड़ेगा। जी हां आपको उनकी अटेंशन चुरानी होगी। ब्रेंडन केन कहते हैं कि आपके पास सिर्फ 3 सेकंड हैं। अगर इन 3 सेकंड में आपने यूजर के दिमाग की घंटी नहीं बजाई तो समझो आप गेम से बाहर हो गए।
सोचिए आप रास्ते से जा रहे हैं और अचानक कोई चिल्लाता है रुको। आप चाहे कितने भी बिजी हों एक बार मुड़कर जरूर देखेंगे। यही होता है एक पावरफुल हुक। हमारे इंडियन क्रिएटर्स अक्सर गलती क्या करते हैं। वे वीडियो शुरू करते हैं नमस्ते दोस्तों मेरा नाम पिंटू है और आज मैं आपको बताऊंगा। भाई पिंटू किसे परवाह है कि तुम कौन हो। लोग यहाँ मनोरंजन या फायदे के लिए आए हैं तुम्हारी कुंडली पढ़ने नहीं।
आपको शुरुआत में ही कुछ ऐसा दिखाना या बोलना पड़ेगा जो उनके दिमाग में सवाल खड़ा कर दे। जैसे कि क्या आप जानते हैं कि आपका फोन आपको गरीब बना रहा है। अब यह सुनते ही बंदा सोचेगा कि अरे मेरा फोन और मुझे गरीब बना रहा है कैसे। अब वह रुक गया। अब आपकी जिम्मेदारी है कि आप उसे आगे की बात बताएं। ब्रेंडन सिखाते हैं कि विजुअल हुक भी उतने ही जरूरी हैं। अगर आप वीडियो में कुछ अजीब कर रहे हैं या बैकग्राउंड में कुछ हटके दिख रहा है तो लोग अपने आप रुक जाते हैं।
मान लीजिए आप कुकिंग सिखा रहे हैं। एक तरीका है कि आप कहें आज हम पनीर बटर मसाला बनाएंगे। बोरिंग। दूसरा तरीका है कि आप हाथ में पनीर का बड़ा टुकड़ा लेकर उसे हवा में उछालें और कहें कि होटल वाले आपको नकली पनीर खिला रहे हैं। अब आया न मजा। अब लोग देखेंगे कि असली पनीर कैसा होता है। इसे कहते हैं पैटर्न इंटरप्ट। लोग एक ही तरह की चीजें देख देखकर थक चुके हैं। जब आप कुछ अलग करते हैं तो उनके दिमाग का ऑटो पायलट मोड बंद हो जाता है।
अटेंशन पाना लड़ाई लड़ने जैसा है। हर कोई आपकी ऑडियंस को अपनी तरफ खींच रहा है। नेटफ्लिक्स अमेज़न और यहाँ तक कि पड़ोस वाली पिंकी की शादी की फोटो भी आपके कंटेंट की दुश्मन है। अगर आप अपने हुक पर काम नहीं कर रहे तो आप अपनी पूरी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। याद रखिये लोग पहले आपको जज करते हैं फिर आपके कंटेंट को। अगर शुरुआत धमाकेदार नहीं है तो क्लाइमेक्स तक कोई नहीं पहुंचेगा। इसलिए अगली बार जब आप कुछ पोस्ट करें तो खुद से पूछें कि क्या मैं इसे रुककर देखता। अगर जवाब ना है तो वापस काम पर लग जाइये।
लेसन ३ : शेयरिंग की साइकोलॉजी और कम्युनिटी का जादू
क्या आपने कभी सोचा है कि आप वही फालतू मेम्स अपने दोस्तों को क्यों भेजते हैं। क्या आप उनका भला चाहते हैं। बिल्कुल नहीं। आप असल में अपनी इमेज बना रहे होते हैं। ब्रेंडन केन कहते हैं कि सोशल मीडिया पर लोग कंटेंट सिर्फ इसलिए शेयर नहीं करते कि वह अच्छा है। वे इसलिए शेयर करते हैं क्योंकि वह कंटेंट उनके बारे में कुछ कहता है। जब आप कोई मोटिवेशनल कोट शेयर करते हैं तो आप दुनिया को बता रहे होते हैं कि देखो मैं कितना पॉजिटिव इंसान हूँ। जब आप कोई पॉलिटिकल जोक शेयर करते हैं तो आप अपनी विचारधारा दिखा रहे होते हैं।
अगर आपका कंटेंट लोगों की ईगो को सहला नहीं रहा या उन्हें दूसरों की नजर में कूल नहीं बना रहा तो भूल जाइये कि वह वायरल होगा। ब्रेंडन का सबसे बड़ा मंत्र यही है कि कंटेंट को शेयर करने लायक बनाइये। लोग खुद के एडवोकेट होते हैं। वे वही चीज अपनी दीवार पर लगाएंगे जिससे उनकी वैल्यू बढ़े। मान लीजिये आप निवेश के बारे में बता रहे हैं। अगर आप सिर्फ ज्ञान देंगे तो कोई शेयर नहीं करेगा। लेकिन अगर आप यह बताएंगे कि कैसे एक चाय वाला करोड़पति बन गया तो लोग इसे धड़ाधड़ शेयर करेंगे। क्यों। क्योंकि वे अपने दोस्तों को दिखाना चाहते हैं कि देखो मुझे कितनी अंदर की बात पता है।
आप व्हाट्सएप ग्रुप्स को देखिये। वहां सबसे ज्यादा क्या चलता है। या तो कोई डर वाली बात या फिर कोई गर्व महसूस कराने वाली चीज। शेयरिंग की जड़ें इमोशंस में छुपी होती हैं। अगर आपका कंटेंट किसी को हंसा नहीं रहा रुला नहीं रहा या हैरान नहीं कर रहा तो वह बस एक और डिजिटल कचरा है। आपको अपनी ऑडियंस के साथ एक रिश्ता बनाना होगा। उन्हें महसूस कराइये कि आप उनकी टीम में हैं। जब आप अपनी कम्युनिटी से बात करते हैं तो वे आपके लिए सिपाही बन जाते हैं। वे खुद आपके कंटेंट को प्रमोट करेंगे।
ब्रेंडन कहते हैं कि वन मिलियन फॉलोअर्स पाना कोई मंजिल नहीं है बल्कि एक शुरुआत है। उन फॉलोअर्स को एक कम्युनिटी में बदलना असली कला है। अगर आपके पास दस लाख लोग हैं पर कोई आपसे बात नहीं करना चाहता तो आप अकेले ही खड़े हैं। आपको लोगों को इन्वॉल्व करना होगा। उनसे सवाल पूछिए उनकी राय लीजिये और उन्हें जताइये कि उनका कमेंट आपके लिए मायने रखता है। जब लोग आपके कंटेंट में खुद को देखने लगते हैं तब असली वायरल धमाका होता है।
सोशल मीडिया का यह सफर बड़ा अजीब है। यहाँ कभी कभी सबसे बेकार दिखने वाली चीज हिट हो जाती है और बहुत मेहनत से बनाया हुआ वीडियो फ्लॉप। लेकिन अगर आप इन तीन लेसन यानी टेस्टिंग हुक और शेयरिंग की साइकोलॉजी को समझ गए तो आपको कोई नहीं रोक सकता। यह खेल सिर्फ नंबरों का नहीं है बल्कि इंसानी दिमाग को समझने का है। ब्रेंडन केन की यह बातें सिर्फ एक किताब नहीं बल्कि डिजिटल युग का एक हथियार हैं। अब फैसला आपके हाथ में है कि आप सिर्फ स्क्रॉल करते रहना चाहते हैं या दुनिया को अपने पीछे चलाना चाहते हैं।
याद रखिये कि आज का जमाना अटेंशन का है और जिसके पास अटेंशन है उसके पास पावर है। तो उठिये और अपनी पहली पोस्ट को टेस्ट करना शुरू कीजिये। क्या पता अगला वायरल स्टार आप ही हों। अगर यह लेसन आपकी समझ में आए हों तो इस ज्ञान को सिर्फ अपने पास मत रखिये। इसे शेयर कीजिये और दूसरों की नजर में भी स्मार्ट बन जाइये।
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