क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो दिन भर गधों की तरह मेहनत करते हैं और शाम को सोचते हैं कि लाइफ में कुछ बड़ा क्यों नहीं हो रहा है। सच तो यह है कि आपकी मेहनत बेकार है क्योंकि आप सिर्फ हाथ पैर चला रहे हैं दिमाग नहीं। जबकि स्मार्ट लोग सिर्फ सोचने के करोड़ों रुपये कमा रहे हैं और आप बस पसीने बहाने में बिजी हैं।
आज हम डेविड गोल्डस्मथ की किताब पेड टू थिंक से वो सीक्रेट्स जानेंगे जो आपकी मेहनत को स्मार्ट वर्क में बदल देंगे। इस आर्टिकल में हम ३ पावरफुल लेसन पर बात करेंगे जो आपके सोचने के तरीके और आपके फ्यूचर को हमेशा के लिए बदल कर रख देंगे।
लेसन १ : थिंकिंग कोई टाइम पास नहीं बल्कि एक असली काम है
जरा सोचिए कि आप ऑफिस में अपनी कुर्सी पर पीछे की तरफ झुक कर बैठे हैं और छत को घूर रहे हैं। तभी आपका बॉस वहां से गुजरता है और आपको इस हालत में देखकर उसकी भौहें तन जाती हैं। उसे लगता है कि आप मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं या शायद कल रात की पार्टी के बारे में सोच रहे हैं। इंडिया में तो वैसे भी अगर आप पसीने से लथपथ नहीं हैं या कीबोर्ड पर पागलों की तरह उंगलियां नहीं चला रहे हैं तो लोग समझते हैं कि आप खाली बैठे हैं। लेकिन डेविड गोल्डस्मथ की यह किताब आपके इस डर को एक झटके में खत्म कर देती है। वह कहते हैं कि लीडर्स को काम करने के लिए नहीं बल्कि सोचने के लिए पैसे दिए जाते हैं।
आज के इस भागदौड़ वाले दौर में हमने बिजी रहने को एक मेडल की तरह पहन लिया है। अगर कोई पूछता है कि क्या हाल है तो हम बड़े गर्व से कहते हैं कि भाई बहुत बिजी हूँ। पर असलियत तो यह है कि यह बिजी रहना अक्सर एक ट्रैप होता है। हम उन कामों में उलझे रहते हैं जिनका हमारी लॉन्ग टर्म सक्सेस से कोई लेना देना नहीं होता। हम एक ऐसी रेस में दौड़ रहे हैं जहां फिनिश लाइन का किसी को पता नहीं है। असल लीडर वो नहीं है जो सबसे तेज दौड़ता है बल्कि वो है जो रुक कर यह देखता है कि दौड़ना किस तरफ है।
सोचिए उस पेंटर के बारे में जो कैनवास पर ब्रश चलाने से पहले घंटों बस खड़ा होकर उस खाली सफ़ेद कपड़े को देखता रहता है। क्या वो आलसी है। बिल्कुल नहीं। वो अपने दिमाग में उन रंगों और लकीरों का जाल बुन रहा है जो आगे चलकर एक मास्टरपीस बनने वाली हैं। ठीक वैसे ही एक बिज़नेस लीडर या एक सफल इंसान के लिए सोचना ही उसका सबसे बड़ा टूल है। जब आप सोचते हैं तब आप आने वाली मुसीबतों का हल पहले ही निकाल लेते हैं। आप वो मौके देख पाते हैं जो बाकी लोग अपनी हड़बड़ी में मिस कर देते हैं।
लोग अक्सर कहते हैं कि मेरे पास सोचने का टाइम नहीं है। यह सुनकर तो हंसी आती है। यह तो वैसा ही हुआ जैसे कोई ड्राइवर कहे कि मेरे पास पेट्रोल डलवाने का टाइम नहीं है क्योंकि मुझे गाड़ी चलानी है। बिना पेट्रोल के गाड़ी कितनी दूर जाएगी यह हम सब जानते हैं। बिना सोचे समझे की गई मेहनत आपको बस थकाएगी पर कहीं पहुंचाएगी नहीं। आपको अपने कैलेंडर में थिंकिंग टाइम फिक्स करना होगा। यह वो समय होना चाहिए जब आपका फोन साइलेंट हो और आप दुनिया के शोर से दूर सिर्फ अपनी ग्रोथ के बारे में सोच रहे हों।
जब आप यह करना शुरू करते हैं तो शुरू में आपको अजीब लगेगा। आपको लगेगा कि आप अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। पर यकीन मानिए यही वो समय है जब आप अपने भविष्य की नींव रख रहे होते हैं। आप अपने सिस्टम की खामियों को पकड़ते हैं और उन्हें ठीक करने के तरीके ढूंढते हैं। आप यह तय करते हैं कि अगले पांच साल में आप खुद को कहाँ देखना चाहते हैं। अगर आप सिर्फ आज के कामों में उलझे रहेंगे तो कल कभी आपके हिसाब से नहीं आएगा। इसलिए अपनी कुर्सी पर आराम से बैठिए और दिमाग के घोड़े दौड़ाना शुरू कीजिए क्योंकि असली पैसा तो सोचने में ही है।
लेसन २ : चार तरह की थिंकिंग का परफेक्ट बैलेंस
मान लीजिए आप एक ऐसी कार चला रहे हैं जिसका स्टीयरिंग तो सही है पर ब्रेक गायब हैं या फिर इंजन बहुत दमदार है पर पहिये उल्टे लगे हैं। ऐसी कार आपको मंजिल पर नहीं बल्कि हॉस्पिटल पहुंचाएगी। डेविड गोल्डस्मथ कहते हैं कि लीडरशिप भी बिल्कुल ऐसी ही है। आपको सिर्फ एक तरह से सोचना शोभा नहीं देता। आपको चार तरह के थिंकिंग गियर्स बदलने आने चाहिए। ये चार गियर्स हैं स्ट्रैटेजिक, आपरेशनल, लीनियर और नॉन लीनियर थिंकिंग। अगर आप इनमें से किसी एक में भी कच्चे हैं तो समझ लीजिए कि आपकी तरक्की की गाड़ी बीच रास्ते में ही दम तोड़ देगी।
सबसे पहले बात करते हैं स्ट्रैटेजिक थिंकिंग की। यह वो नजरिया है जो आपको पहाड़ की चोटी पर बैठकर पूरी वादी दिखाता है। आप यह देखते हैं कि दुनिया किस तरफ जा रही है और आपको अपनी नाव किस दिशा में मोड़नी है। अक्सर हमारे यहाँ लोग बस आज का मुनाफा देखते हैं। वो यह भूल जाते हैं कि जो आज बिक रहा है वो कल शायद कबाड़ बन जाए। स्ट्रैटेजिक थिंकिंग आपको वो चश्मा देती है जिससे आप कल के खतरे और आज के छुपे हुए मौकों को देख पाते हैं। बिना इसके आप उस अंधे मुसाफिर की तरह हैं जो बहुत तेज चल तो रहा है पर उसे पता नहीं कि आगे खाई है।
इसके बाद आती है आपरेशनल थिंकिंग। यह वो हिस्सा है जो काम को जमीन पर उतारता है। अगर स्ट्रैटेजी आसमान है तो आपरेशनल जमीन है। कई बार लोग बहुत बड़े बड़े प्लान बनाते हैं जैसे कि वो अगले महीने मंगल ग्रह पर चाय की दुकान खोल लेंगे। पर जब पूछा जाता है कि दूध और चीनी कहाँ से आएगी तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता। आपरेशनल थिंकिंग आपको सिस्टम और प्रोसेस बनाना सिखाती है। यह सुनिश्चित करती है कि आपका आईडिया सिर्फ कागजों पर न रहे बल्कि हकीकत में लोगों की लाइफ बदले।
अब थोड़ा हटकर सोचते हैं यानी लीनियर और नॉन लीनियर थिंकिंग के बारे में। लीनियर थिंकिंग का मतलब है स्टेप बाय स्टेप चलना। जैसे १ के बाद २ और २ के बाद ३ आता है। यह उन कामों के लिए बेस्ट है जहाँ आपको डिसिप्लिन और रूटीन चाहिए। पर असल मजा तो नॉन लीनियर थिंकिंग में है। यह वो सोच है जो आपको बॉक्स के बाहर जाकर देखने पर मजबूर करती है। यह वो पल है जब आप सोचते हैं कि अगर हम इस काम को बिल्कुल उलटे तरीके से करें तो क्या होगा। दुनिया के जितने भी बड़े अविष्कार हुए हैं वो इसी टेढ़ी सोच का नतीजा हैं।
दिक्कत तब शुरू होती है जब आप किसी एक सोच के गुलाम बन जाते हैं। अगर आप सिर्फ स्ट्रैटेजी बनाएंगे तो आप बस सपने देखते रह जाएंगे। अगर आप सिर्फ आपरेशनल सोचेंगे तो आप एक कोल्हू के बैल बनकर रह जाएंगे जो दिन भर घूमता तो है पर कहीं पहुंचता नहीं। एक सफल लीडर वही है जो सुबह स्ट्रैटेजी बनाता है और दोपहर तक उसे लागू करने के लिए आपरेशनल प्लान तैयार कर लेता है। वो जानता है कि कब उसे सीधे रास्ते पर चलना है और कब उसे शॉर्टकट या कोई नया रास्ता ढूंढना है। यह बैलेंस ही आपको भीड़ से अलग खड़ा करता है।
लेसन ३ : अपनी वैल्यू बढ़ाना और भविष्य को आज ही जीतना
कल्पना कीजिए कि आप एक कंपनी के मालिक हैं और आपके पास दो कर्मचारी हैं। एक वो जो सुबह ९ से शाम ५ बजे तक कीबोर्ड तोड़ता है और हर छोटी बात पर आपसे पूछता है कि साहब अब क्या करूँ। दूसरा वो जो हफ्ते में सिर्फ तीन दिन आता है पर जब आता है तो ऐसी तरकीब बताता है जिससे आपके करोड़ों रुपये बच जाते हैं या मुनाफा दोगुना हो जाता है। आप किसे ज्यादा पैसे देंगे। जाहिर है दूसरे वाले को। यही वह सच है जिसे डेविड गोल्डस्मथ इस किताब में कड़वे सच की तरह पेश करते हैं। आपकी वैल्यू इस बात से नहीं मापी जाती कि आप कितने घंटे कुर्सी तोड़ते हैं बल्कि इस बात से मापी जाती है कि आपकी सोच ने सिस्टम को कितना बेहतर बनाया है।
आज के इस दौर में अगर आप अपनी स्किल को अपडेट नहीं कर रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपनी एक्सपायरी डेट के बहुत करीब हैं। लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि उनकी सैलरी नहीं बढ़ रही या उनका बिज़नेस ठप पड़ा है। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आपने अपनी सोच में क्या नया जोड़ा है। लेसन ३ हमें सिखाता है कि हमें खुद को एक असेट यानी संपत्ति की तरह देखना चाहिए। जैसे एक घर की कीमत वक्त के साथ बढ़ती है वैसे ही आपकी सोचने की क्षमता की कीमत भी बढ़नी चाहिए। अगर आप वही काम कर रहे हैं जो आज से पांच साल पहले करते थे तो आप ग्रो नहीं कर रहे हैं बस बूढ़े हो रहे हैं।
भविष्य को रिडेफाइन करने का मतलब है कि आप आज वो बीज बोएं जिसका फल आपको कल मिले। इसमें रिस्क लेना भी शामिल है पर वो रिस्क अंधेरे में छलांग लगाना नहीं बल्कि कैलकुलेटेड होना चाहिए। अक्सर लोग बदलाव से डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि जो चल रहा है उसे क्यों छेड़ना। पर भाई साहब अगर नोकिया और कोडेक ने भी यही सोचा होता तो आज वो म्यूजियम में नहीं होते। लेसन ३ हमें कंफर्ट जोन से बाहर निकालकर उस दुनिया में ले जाता है जहाँ हम अपनी कमजोरियों को पहचानते हैं और उन्हें अपनी ताकत बनाते हैं। आपको यह समझना होगा कि दुनिया आपके पसीने की कद्र तभी करेगी जब उसके पीछे आपका दिमाग लगा होगा।
एक और बात जो यह लेसन बहुत खूबसूरती से समझाता है वो है डेलिगेशन की कला। बहुत से लीडर्स को लगता है कि अगर उन्होंने सारा काम खुद नहीं किया तो सब बिगड़ जाएगा। यह सोच दरअसल आपकी तरक्की की सबसे बड़ी दुश्मन है। जब आप छोटे छोटे कामों में खुद को उलझा लेते हैं तो आप बड़े मुद्दों पर सोचने का मौका खो देते हैं। अपनी वैल्यू बढ़ाने का मतलब है कि आप दूसरों को ट्रेन करें ताकि वो रूटीन काम संभाल सकें और आप फ्री होकर उस भविष्य की प्लानिंग कर सकें जो आपकी कंपनी या करियर को अगले लेवल पर ले जाए। याद रखिए एक राजा खुद तलवार लेकर हर लड़ाई नहीं लड़ता वो सिर्फ अपनी रणनीति से जंग जीतता है।
अंत में यह याद रखिए कि आपकी सोच ही आपका भविष्य तय करती है। अगर आप आज यह डिसीजन लेते हैं कि आप सिर्फ एक वर्कर नहीं बल्कि एक थिंकर बनेंगे तो यकीन मानिए आपकी आधी जंग वहीं खत्म हो जाती है। यह किताब हमें सिर्फ काम करना नहीं सिखाती बल्कि काम को मैनेज करना और उसके जरिए अपनी पहचान बनाना सिखाती है। अब गेंद आपके पाले में है। क्या आप वही पुराने ढर्रे पर चलना चाहते हैं या अपनी सोच के दम पर अपनी किस्मत खुद लिखना चाहते हैं। फैसला आपका है क्योंकि भविष्य उन्हीं का होता है जो आज उसके बारे में सोचने की हिम्मत रखते हैं।
दोस्तों, अगर आपको आज का यह आर्टिकल पसंद आया और आप अपनी लीडरशिप स्किल्स को सच में बेहतर बनाना चाहते हैं तो आज ही अपने कैलेंडर में ३० मिनट का थिंकिंग टाइम फिक्स करें। नीचे कमेंट में लिखकर बताएं कि आप आज से अपनी लाइफ में कौन सा एक बड़ा बदलाव लाने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें जो दिन भर काम तो बहुत करते हैं पर फिर भी परेशान रहते हैं। आपकी एक शेयरिंग किसी की पूरी लाइफ बदल सकती है।
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