क्या आप अभी भी हर महीने नए कस्टमर ढूंढने के लिए पागलों की तरह भाग रहे है? अगर हां, तो मुबारक हो, आप बिजनेस नहीं बल्कि मजदूरी कर रहे है। पुराने ढर्रे पर चलकर आप बस अपनी किस्मत और पैसा दोनों बर्बाद कर रहे है और आपका कॉम्पिटिटर चैन की नींद सो रहा है।
आज हम जॉन वारिलो की किताब द ऑटोमेटिक कस्टमर की मदद से जानेंगे कि कैसे आप अपने बिजनेस को एक नोट छापने वाली मशीन बना सकते है। यह आर्टिकल आपको उन सीक्रेट्स के बारे में बताएगा जो आपके हर महीने की सेल की टेंशन को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे।
लेसन १ : द सब्सक्रिप्शन माइंडसेट - कस्टमर को मेहमान नहीं, घर का सदस्य बनाओ
जरा सोचिए, आप एक दुकानदार है और हर सुबह दुकान खोलते ही आप ऊपर वाले से दुआ करते है कि आज कोई नया कस्टमर आ जाए। यह तो वही बात हो गई कि आप हर रोज कुआं खोद रहे है और हर रोज पानी पी रहे है। अगर किसी दिन कुआं नहीं खुदा, तो क्या आप प्यासे मर जाएगे? ज्यादातर इंडियन बिजनेस इसी डर मे जीते है। जॉन वारिलो कहते है कि अगर आप अमीर बनना चाहते है, तो आपको कस्टमर को एक बार सामान बेचकर भूल जाने वाली आदत छोड़नी होगी। आपको चाहिए द ऑटोमेटिक कस्टमर।
मान लीजिए आपके मोहल्ले मे एक जिम है। वहां का मालिक हर महीने पोस्टर लगाता है कि 'आइए और बॉडी बनाइए'। वह हर महीने नए लोगो के पीछे भागता है। अब उसी के बगल मे एक दूसरा जिम खुलता है जो कहता है कि 'हमे आपकी एक महीने की फीस नहीं चाहिए, आप बस हमारे मेंबर बन जाइए और हर महीने आपके अकाउंट से एक छोटा सा अमाउंट अपने आप कट जाएगा'। पहले वाले मालिक की हालत उस कुंवारे लड़के जैसी है जो हर रोज नई डेट ढूंढता है, जबकि दूसरा मालिक उस शादीशुदा आदमी की तरह है जिसका रिश्ता फिक्स है।
सब्सक्रिप्शन मॉडल का असली जादू यही है। जब आप किसी को कुछ बेचते है, तो वह एक ट्रांजेक्शन होता है। लेकिन जब आप किसी को सब्सक्रिप्शन देते है, तो वह एक रिलेशनशिप बन जाता है। भारत मे हम लोग 'जुगाड़' और 'डिस्काउंट' के पीछे पागल रहते है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपका दूधवाला या अखबार वाला आपसे ज्यादा सुकून मे क्यों है? क्योंकि उसे पता है कि महीने की पहली तारीख को उसके पास पैसा अपने आप आएगा। उसे हर सुबह आपके पैर नहीं पड़ने पड़ते कि 'साहब आज दूध ले लो'।
आजकल के दौर मे अगर आप अपने बिजनेस मे रिकरिंग रेवेन्यू यानी बार बार आने वाला पैसा नहीं जोड़ रहे है, तो आप बस एक ऐसी नाव चला रहे है जिसमे छेद है। आप जितना मर्जी पानी बाहर निकाल ले, नाव डूबेगी ही। लेकिन जैसे ही आप सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाते है, आप उस छेद को हमेशा के लिए बंद कर देते है। अब आपको यह टेंशन नहीं है कि अगले महीने बिजली का बिल कैसे भरा जाएगा, क्योंकि आपके पास ऑटोमेटिक कस्टमर की एक फौज खड़ी है।
सर्कस के शेर और जंगल के शेर मे यही फर्क है। सर्कस के शेर को हर बार रिंग मास्टर के इशारे पर नाचना पड़ता है तब जाकर उसे खाना मिलता है। लेकिन अगर आप अपने बिजनेस के जंगल के राजा बनना चाहते है, तो आपको ऐसा सिस्टम बनाना होगा जहां शिकार खुद चलकर आपके पास आए। और वह शिकार है सब्सक्रिप्शन। लोग कहते है कि भाई साहब हमारा बिजनेस अलग है, हमारे यहाँ यह नहीं चलेगा। सच तो यह है कि दुनिया मे ऐसा कोई बिजनेस नहीं है जिसे सब्सक्रिप्शन मे न बदला जा सके। बस कमी है तो आपके नजरिए की।
लेसन २ : नाइन सब्सक्रिप्शन मॉडल्स - हर बिजनेस के लिए एक अलग चाबी
लोग अक्सर मुझसे कहते है कि भाई साहब, मेरा तो लोहे का काम है या मै तो बस समोसे बेचता हू, मै सब्सक्रिप्शन कैसे शुरू करू? जॉन वारिलो कहते है कि अपनी अक्ल के घोड़े दौड़ाओ, क्योंकि दुनिया मे नौ तरह के ऐसे मॉडल है जो किसी भी धंधे को बदल सकते है। आपको बस अपनी फिटिंग देखनी है। अगर नेटफ्लिक्स फिल्म बेच सकता है और अमेज़न प्राइम घर का राशन, तो आप क्यों पीछे है?
चलिए, भारत के हिसाब से सबसे मजेदार मॉडल्स को देखते है। पहला है सब्सक्रिप्शन बॉक्स मॉडल। मान लीजिए आपकी ब्यूटी पार्लर की दुकान है। आप हर महीने अपनी क्लाइंट को एक छोटा सा बॉक्स भेजते है जिसमे नए शैम्पू, क्रीम या लिपस्टिक के सैम्पल्स होते है। अब उसे हर महीने नया सामान मिल रहा है और आपको बिना कुछ किए हर महीने फिक्स पैसा। यह वैसा ही है जैसे दिवाली के गिफ्ट का डब्बा हर महीने आपके घर आए, बस फर्क यह है कि यहाँ पैसे आप दे रहे है और खुशी भी आपको ही मिल रही है।
दूसरा कमाल का मॉडल है सरप्राइज बॉक्स। इसमें कस्टमर को पता ही नहीं होता कि अंदर क्या है। इंडिया मे लोगो को सस्पेंस बहुत पसंद है, चाहे वो टीवी सीरियल का क्लाइमेक्स हो या शादी वाला लिफाफा। अगर आप एक बुक स्टोर चलाते है, तो आप हर महीने अपने रीडर को एक 'मिस्ट्री बुक' भेज सकते है। उसे हर महीने एक नया सरप्राइज मिलता है और आपको एक वफादार कस्टमर।
फिर आता है नेटवर्क मॉडल। यह तो आजकल हर जगह है। जैसे डेटिंग एप्स या व्हाट्सएप। यहाँ वैल्यू तब बढ़ती है जब ज्यादा लोग जुड़ते है। अगर आप एक ऐसी कम्युनिटी बना ले जहां लोग एक दूसरे की मदद कर सके और उसके लिए एक छोटी सी फीस ले, तो समझ लीजिए आपकी लॉटरी लग गई। यह वैसा ही है जैसे मोहल्ले की किटी पार्टी, बस यहाँ सब कुछ प्रोफेशनल और बड़े स्केल पर होता है।
एक और जबरदस्त मॉडल है पीस ऑफ माइंड। यह डर पर बिकता है। जैसे इंश्योरेंस या आपके घर के एक्वागार्ड की सर्विस। आप कस्टमर को यह भरोसा देते है कि 'भाई तू सो जा, तेरी सरदर्दी मेरी है'। अगर आप प्लम्बर है, तो आप एक साल का मेंटेनेंस प्लान बेच सकते है। अब कस्टमर को पाइप फटने का डर नहीं और आपको हर महीने कमाई की टेंशन नहीं। यह सुनकर तो वो सास भी खुश हो जाएगी जो हमेशा अपने दामाद की कमाई की फिक्र करती है।
लोग अक्सर गलती यह करते है कि वो बहुत बड़ा और महंगा प्लान बना देते है। अरे भाई, इंडिया मे लोगो को 'छोटा रिचार्ज' ज्यादा पसंद आता है। आप अपने मॉडल को इतना आसान बनाइए कि कस्टमर को पेमेंट करते वक्त दर्द न हो। अगर आप उसे एक साथ दस हजार का बिल थमा देंगे, तो वो गायब हो जाएगा। लेकिन अगर आप उसे पांच सौ रुपये महीना बोलेंगे, तो वो कहेगा 'अरे इतना तो मै पान मसाला खाकर थूक देता हू'। यही साइकोलॉजी है जो एक आम दुकानदार को एक चतुर बिजनेसमैन से अलग करती है।
लेसन ३ : कैश फ्लो मैजिक - बिना कर्ज लिए बिजनेस के राजा बनिए
अक्सर इंडियन स्टार्टअप्स और छोटे बिजनेसमैन के साथ एक ही दिक्कत होती है - 'भाई, धंधा तो बहुत है पर हाथ मे पैसा नहीं है'। यह वैसी ही बात है जैसे आपके पास चमचमाती कार तो है पर पेट्रोल डलवाने के पैसे नहीं। जॉन वारिलो कहते है कि सब्सक्रिप्शन मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह नहीं है कि आपको बार बार पैसा मिलता है, बल्कि सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको पैसा एडवांस मे मिलता है। और बिजनेस की दुनिया मे 'कैश' ही असली भगवान है।
मान लीजिए आपने एक टिफिन सर्विस शुरू की। अगर आप रोज खाना खिलाकर शाम को पैसे मांगेंगे, तो आधे लोग तो अगले दिन 'कल दूंगा' बोलकर गायब हो जाएगे। आपकी पूरी जिंदगी बस वसूली करने मे निकल जाएगी। लेकिन अगर आप कहे कि 'भाई साहब, महीने की पहली तारीख को पेमेंट कर दो, तभी गरम रोटी मिलेगी', तो आपके पास पूरा पैसा महीने की शुरुआत मे ही आ जाएगा। अब इस पैसे से आप कच्चा माल खरीद सकते है, नया कुक रख सकते है और अपने बिजनेस को बढ़ा सकते है। आप बैंक के पास लोन मांगने नहीं जाते, बल्कि आपके कस्टमर ही आपके बैंक बन जाते है।
इसे कहते है नेगेटिव वर्किंग कैपिटल। सुनने मे बड़ा भारी शब्द लगता है, लेकिन इसका मतलब बड़ा सिंपल है - दूसरों के पैसे पर अपना धंधा बढ़ाना। जब आपके पास पैसा पहले आता है और सर्विस आप बाद मे देते है, तो आपकी रिस्क लेने की ताकत बढ़ जाती है। आप अपने कॉम्पिटिटर को धूल चटा सकते है क्योंकि वो अभी भी कल की उधारी वसूलने मे लगा है और आप अगले साल की प्लानिंग कर रहे है। यह वैसा ही है जैसे शादी मे दूल्हा घोड़ी पर बैठने से पहले ही शगुन के पैसे जेब मे रख लेता है।
लेकिन याद रखिए, यह जादू तभी काम करेगा जब आपकी सर्विस मे दम होगा। अगर आपने पैसे एडवांस ले लिए और खाना ठंडा खिलाया, तो लोग सब्सक्रिप्शन कैंसिल करने मे एक सेकंड भी नहीं लगाएंगे। आज के दौर मे कस्टमर के पास ऑप्शन बहुत है। इसलिए आपको अपनी सर्विस को इतना स्मूथ बनाना होगा कि कस्टमर को आपके बिना अपनी लाइफ अधूरी लगे। जैसे आज हमे नेटफ्लिक्स या अमेज़न के बिना अपना वीकेंड अधूरा लगता है।
तो अब फैसला आपके हाथ मे है। क्या आप वही पुराने दुकानदार बने रहना चाहते है जो हर शाम खाली गल्ले को देखकर उदास होता है? या आप एक ऐसा सिस्टम बनाना चाहते है जो आपके सोते वक्त भी आपके बैंक बैलेंस को बढ़ाता रहे? याद रखिए, किस्मत के भरोसे बैठने वाले को उतना ही मिलता है जितना मेहनत करने वाले छोड़ देते है। आज ही अपने बिजनेस मे सब्सक्रिप्शन का तड़का लगाइए और देखिए कैसे आपका छोटा सा काम एक ब्रांड बन जाता है।
अगर आप भी अपने बिजनेस को लेकर सीरियस है और उधारी के चक्कर से बाहर निकलना चाहते है, तो आज ही नीचे कमेंट मे लिखे 'YES'। हमे बताए कि आप अपने काम मे कौन सा सब्सक्रिप्शन मॉडल शुरू करने वाले है। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करे जो दिन रात मेहनत तो करता है पर महीने के आखिर मे उसके पास कुछ नहीं बचता। याद रखिए, बदलना तो पड़ेगा, आज नहीं तो कल।
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