क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो सोचते हैं कि बिजनेस सिर्फ बड़े-बड़े सपनों और मोटिवेशनल कोट्स से चलता है? मुबारक हो, आप बहुत जल्द सड़क पर आने वाले हैं। अगर आपको लगता है कि आपकी ९५ परसेंट चीजें सही हैं तो आप सेफ हैं, तो शायद आपको हारने का शौक है।
सफलता की कहानियाँ पढ़ना बंद कीजिए और जरा कड़वे सच सुनने की हिम्मत जुटाइए। आज हम तिलमन फर्टिटा की बुक शट अप एंड लिसन की मदद से वो ३ लेसन देखेंगे, जो आपके डूबते हुए बिजनेस को किनारे लगा सकते हैं।
लेसन १ : नो योर नंबर्स (अपने नंबर्स को समझें)
अगर आप अपने बिजनेस के नंबर्स को नहीं जानते, तो असल में आप बिजनेस कर ही नहीं रहे हैं, आप बस तुक्का लगा रहे हैं। तिलमन फर्टिटा का पहला और सबसे कड़वा सच यही है कि आंकड़े झूठ नहीं बोलते, लेकिन आपकी फीलिंग्स आपको धोखा दे सकती हैं। लोग अक्सर पूछते हैं कि बिजनेस में फेलियर क्यों मिलता है? जवाब सिंपल है, क्योंकि उन्हें लगता है कि गल्ले में पैसा आ रहा है तो सब ठीक है। पर क्या आपको पता है कि आपकी एक कॉफी की कप पर असली प्रॉफिट कितना है? या फिर आपके ऑफिस के बिजली बिल का एक यूनिट आपके प्रोडक्ट की कीमत को कैसे बढ़ा रहा है? अगर आप इन छोटे नंबर्स से नजरें फेर रहे हैं, तो आप अपनी बर्बादी का इन्विटेशन खुद लिख रहे हैं।
मान लीजिए आप एक फैंसी कैफे खोलते हैं। आप डेकोरेशन पर लाखों खर्च करते हैं क्योंकि आपको लगता है कि इंस्टाग्राम पर फोटो अच्छी आएगी तो कस्टमर दौड़ते हुए आएंगे। लेकिन महीने के आखिर में जब आप हिसाब जोड़ते हैं, तो पता चलता है कि आपने जितनी कॉफी बेची, उससे ज्यादा तो दूध और चीनी में पैसे उड़ गए। क्यों? क्योंकि आपने नंबर्स पर ध्यान नहीं दिया। आपको लगा कि बस भीड़ है तो प्रॉफिट भी होगा। ये वैसी ही बात हुई कि आप अपनी कार की स्पीड तो देख रहे हैं, लेकिन ये भूल गए कि पेट्रोल की टंकी में छेद है। आप बहुत तेज भाग रहे हैं, लेकिन मंजिल तक पहुंचने से पहले ही आपका इंजन दम तोड़ देगा।
बिजनेस में नंबर्स को जानना केवल अकाउंटेंट का काम नहीं है, ये आपका काम है। आपको पता होना चाहिए कि आपके बिजनेस का ब्रेक ईवन पॉइंट क्या है। आपको ये भी पता होना चाहिए कि कौन सा कस्टमर आपको कमा कर दे रहा है और कौन सा सिर्फ आपका टाइम और रिसोर्स खा रहा है। कई बार हमें लगता है कि बड़ा टर्नओवर मतलब बड़ी जीत है। पर भाई साहब, अगर टर्नओवर करोड़ों में है और प्रॉफिट जीरो है, तो आप एक चैरिटी चला रहे हैं, बिजनेस नहीं। और ईमानदारी से कहूँ तो चैरिटी के लिए भी फंड्स लगते हैं, जो आपके पास एक दिन खत्म हो जाएंगे।
तिलमन कहते हैं कि जब वो अपने किसी होटल या रेस्टोरेंट में जाते हैं, तो वो सिर्फ खाने का स्वाद नहीं देखते। वो देखते हैं कि कितनी प्लेट्स गंदी हैं, कितने लोग वेटिंग में हैं और स्टाफ का बिहेवियर कैसा है। ये सब नंबर्स में बदल जाता है। अगर आप अपने नंबर्स को गले नहीं लगाएंगे, तो आपके नंबर्स आपको गला दबाकर मार देंगे। लोग सोचते हैं कि नंबर्स बोरिंग होते हैं। हाँ, शायद वो बोरिंग हों, लेकिन बैंक बैलेंस का खाली होना उससे कहीं ज्यादा दुखद होता है। इसलिए अपनी ईगो को साइड में रखिये, अपनी एक्सेल शीट खोलिए और एक-एक पैसे का हिसाब रखिये। क्योंकि जो इंसान अपने नंबर्स का मालिक नहीं होता, वो अपनी किस्मत का गुलाम बन जाता है।
अगले लेसन में हम देखेंगे कि कैसे वो छोटी सी ५ परसेंट वाली गलती आपके पूरे साम्राज्य को मिट्टी में मिला सकती है।
लेसन २ : द ९५/५ रूल (९५/५ का नियम)
ज्यादातर लोग अपने बिजनेस में ९५ परसेंट चीजों को सही करके बड़े खुश हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि अगर खाना अच्छा है, लोकेशन बढ़िया है और मार्केटिंग जबरदस्त है, तो वो जीत गए। लेकिन तिलमन फर्टिटा कहते हैं कि यहीं पर आप सबसे बड़ी गलती करते हैं। ये वो बचा हुआ ५ परसेंट है जो आपकी रातों की नींद उड़ाने वाला है। आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ ५ परसेंट ही तो है, इतना तो चलता है। पर जनाब, यही ५ परसेंट वो छेद है जो आपके पूरे जहाज को डुबोने के लिए काफी है। लोग आपकी ९५ परसेंट अच्छाइयों को भूल जाएंगे, लेकिन वो ५ परसेंट कमी उनके दिमाग में पत्थर की लकीर बन जाएगी।
सोचिए आप एक बहुत महंगे और मशहूर रेस्टोरेंट में अपनी डेट के साथ जाते हैं। वहाँ का एम्बिएंस कमाल का है, म्यूजिक दिल को छू लेने वाला है और वेटर ने भी आपको राजा की तरह ट्रीट किया। अब तक सब ९५ परसेंट परफेक्ट है। लेकिन जैसे ही आप अपना पहला निवाला लेते हैं, आपको पता चलता है कि सब्जी में नमक की जगह चीनी डली है। क्या आप उस रेस्टोरेंट की तारीफ करेंगे? बिल्कुल नहीं। आप घर आकर सबको यही बताएंगे कि वहां का खाना कितना बकवास था। आपने उस ५ परसेंट गलती की वजह से ९५ परसेंट मेहनत पर पानी फेर दिया। कस्टमर को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका बैकएंड कितना स्ट्रॉन्ग है, उसे सिर्फ उस एक खराब अनुभव से मतलब है।
तिलमन का ये नियम हमें सिखाता है कि परफेक्शन की तलाश कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। अगर आपके ऑफिस का रिसेप्शनिस्ट चिड़चिड़ा है, तो आपकी करोड़ों की डील वहीं दम तोड़ सकती है। अगर आपके एप में एक छोटा सा बग है जो पेमेंट के वक्त अटक जाता है, तो यूजर दोबारा कभी लौटकर नहीं आएगा। लोग अक्सर बड़े बदलावों के पीछे भागते हैं, लेकिन वो उन छोटी दरारों को भरना भूल जाते हैं जहाँ से पानी रिस रहा है। आप दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड बन सकते हैं, लेकिन अगर आप उस ५ परसेंट को इग्नोर करेंगे, तो आपकी साख गिरने में ५ सेकंड भी नहीं लगेंगे।
हकीकत तो ये है कि हम सब आलसी हैं। हमें लगता है कि छोटी-मोटी गलतियों को नजरअंदाज करना ही स्मार्टनेस है। लेकिन बिजनेस की दुनिया में ये स्मार्टनेस नहीं, बल्कि खुदकुशी है। आपको अपनी ईगल आई (चील जैसी नजर) से उस ५ परसेंट को ढूंढना होगा। क्या आपका वॉशरूम गंदा है? क्या आपकी पैकिंग फटी हुई है? क्या आपका सेल्समैन बात करते वक्त फोन चला रहा है? ये छोटी चीजें ही असल में बड़ी चीजें हैं। आप भले ही ९५ परसेंट जंग जीत चुके हों, लेकिन वो आखिरी ५ परसेंट ही तय करेगा कि आपको मेडल मिलेगा या सिर्फ सांत्वना पुरस्कार।
अगले लेसन में हम बात करेंगे कि कैसे एक स्पंज की तरह बनकर आप अपने कॉम्पिटिशन को धूल चटा सकते हैं और मार्केट में अपनी जगह बना सकते हैं।
लेसन ३ : बी अ स्पंज (एक स्पंज की तरह बनें)
बिजनेस की दुनिया में अगर आप ये सोचकर बैठ गए हैं कि आपको सब कुछ आता है, तो समझ लीजिये आपका पतन शुरू हो चुका है। तिलमन फर्टिटा का तीसरा और सबसे कीमती लेसन है कि हमेशा एक स्पंज की तरह बनिए। एक स्पंज को आप कहीं भी डाल दें, वो हर बूंद को सोख लेता है। वैसे ही एक सफल बिजनेसमैन को हर छोटी-बड़ी जानकारी, फीडबैक और मार्केट के बदलाव को सोख लेना चाहिए। अगर आप एक पत्थर की तरह सख्त रहेंगे, तो वक्त की लहरें आपको घिसकर छोटा कर देंगी, लेकिन अगर आप स्पंज बनेंगे, तो आप हर अनुभव के साथ और भी बड़े और बेहतर होते जाएंगे।
जरा सोचिए उस दुकानदार के बारे में जो पिछले २० साल से एक ही ढर्रे पर काम कर रहा है। उसे लगता है कि उसके दादाजी के जमाने का तरीका आज भी बेस्ट है। फिर अचानक पास में एक नया लड़का आता है, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है, होम डिलीवरी शुरू करता है और उस पुराने दुकानदार के सारे कस्टमर्स को ले उड़ता है। पुराना दुकानदार अब बैठकर किस्मत को कोस रहा है। भाई साहब, किस्मत का कोई दोष नहीं है। आपकी दिक्कत ये थी कि आपने सीखना बंद कर दिया था। आपने ये मानने से इनकार कर दिया कि जमाना बदल रहा है। जब आपके आसपास का माहौल बदल रहा हो और आप आँखें मूंदकर बैठे हों, तो आप स्पंज नहीं, बल्कि वो पुराने जमाने के लैंडलाइन फोन बन चुके हैं जिसकी अब किसी को जरूरत नहीं है।
तिलमन कहते हैं कि जब भी वो किसी नए शहर या नए होटल में जाते हैं, तो वो वहां की छोटी-छोटी चीजों को ऑब्जर्व करते हैं। वो वेटर से बात करते हैं, सफाई देखते हैं और यहाँ तक कि मेन्यू कार्ड के फॉन्ट तक को नोटिस करते हैं। वो सिर्फ घूमने नहीं जाते, वो सीखने जाते हैं। एक सच्चा स्पंज कभी ये नहीं कहता कि 'मुझे ये पता है'। वो हमेशा पूछता है, 'क्या मैं इसे और बेहतर कर सकता हूँ?'। अगर आपका कॉम्पिटिटर आपसे आगे निकल रहा है, तो उससे जलने के बजाय ये देखिए कि वो ऐसा क्या सोख रहा है जो आप मिस कर रहे हैं। ईगो को जेब में डालकर दूसरों से सीखना ही असली बुद्धिमानी है।
अक्सर लोग अपनी सफलता के नशे में इतने चूर हो जाते हैं कि वो सुनना बंद कर देते हैं। वो अपने एम्प्लॉईज की बात नहीं सुनते, वो अपने कस्टमर्स की शिकायतें नहीं सुनते। उन्हें लगता है कि वो सबसे स्मार्ट इंसान हैं। लेकिन असलियत ये है कि मार्केट आपसे ज्यादा स्मार्ट है। अगर आप मार्केट की आवाज को नहीं सोखेंगे, तो मार्केट आपको थूककर बाहर फेंक देगा। एक स्पंज की तरह हर दिन कुछ नया सीखिए, चाहे वो आपके ऑफिस का इंटर्न ही क्यों न सिखा रहा हो। क्योंकि ज्ञान कहीं से भी आए, वो आपके बिजनेस की प्यास बुझाने के काम ही आता है।
तो क्या आप तैयार हैं अपने बिजनेस को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए? तिलमन फर्टिटा के ये ३ लेसन—अपने नंबर्स को जानना, उस ५ परसेंट की गलती को पकड़ना और हमेशा एक स्पंज की तरह सीखते रहना—सिर्फ किताबी बातें नहीं हैं। ये वो औजार हैं जिनसे आप अपनी सफलता की कहानी लिख सकते हैं। याद रखिये, बिजनेस में कोई शॉर्टकट नहीं होता, बस कड़ी मेहनत और सही जानकारी होती है। आज ही अपनी डायरी उठाइए, अपने नंबर्स चेक कीजिए और देखिए कि वो कौन सी ५ परसेंट कमी है जो आपको रोक रही है। उठिए, सीखिए और जीतिए।
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