Speak With No Fear (Hindi)


क्या आप भी स्टेज पर जाकर स्टेचू बन जाते हैं। मुबारक हो। आप अपनी इज्जत का कचरा करने के साथ साथ उन करोड़ों मौकों को भी लात मार रहे हैं जो एक कॉन्फिडेंट इंसान ले उड़ता है। बिना बोले घर के कोने में बैठे रहिये और दूसरों को अपनी तरक्की छीनते हुए देखिये।

लेकिन घबराइए मत। माइक एकर की किताब स्पीक विद नो फियर आपको इस डर के गड्ढे से बाहर निकालेगी। चलिए इस आर्टिकल में उन ३ लेसन को समझते हैं जो आपको जीरो से हीरो बना देंगे।


लेसन १ : अपनी कमियों और गलतियों को दिल से अपनाना (Embrace Your Imperfections)

क्या आपको लगता है कि दुनिया के सबसे बड़े स्पीकर्स कभी गलती नहीं करते। अगर आप ऐसा सोचते हैं तो आप उसी दुनिया में जी रहे हैं जहाँ लोग समझते हैं कि शादी के बाद जिंदगी बहुत सुकून भरी हो जाती है। असलियत तो यह है कि स्टेज पर खड़ा हर इंसान उतना ही डरा हुआ होता है जितना कि आप इंटरव्यू के बाहर अपनी बारी का इन्तजार करते वक्त होते हैं। माइक एकर कहते हैं कि हमारा सबसे बड़ा दुश्मन हमारा डर नहीं बल्कि परफेक्ट दिखने की वो सनक है जो हमें अंदर ही अंदर खाए जाती है।

सोचिये आप स्टेज पर गए और आपने एक शब्द गलत बोल दिया। अब आपके पास दो रास्ते हैं। या तो आप वहीं जम जाएं और अपनी बेइज्जती का मातम मनाएं या फिर उस गलती पर एक छोटा सा जोक मारकर आगे बढ़ जाएं। लोग रोबोट्स को सुनने नहीं आते। वे एक इंसान को सुनने आते हैं। और इंसान वही है जो गलती करे। अगर आप अपनी कमियों को छुपाने की कोशिश करेंगे तो आपकी बॉडी लैंग्वेज खुद ही चिल्ला चिल्ला कर सबको बता देगी कि आप अंदर से डरे हुए हैं। जैसे किसी शादी में जब आप अपनी फटी हुई पैंट छुपाने की कोशिश करते हैं तो सबको समझ आ जाता है कि कुछ तो गड़बड़ है।

जब आप यह मान लेते हैं कि हाँ मैं गलती कर सकता हूँ और इसमें कोई बड़ी बात नहीं है तो आपका आधा बोझ वहीं खत्म हो जाता है। स्टेज पर परफेक्शन नहीं बल्कि कनेक्शन मायने रखता है। अगर आपकी बात में दम है तो लोग आपकी छोटी मोटी लड़खड़ाहट को याद भी नहीं रखेंगे। वे घर जाकर यह नहीं कहेंगे कि देखो उसने एक शब्द गलत बोला था बल्कि वे यह कहेंगे कि उसकी बात सुनकर मुझे कुछ सीखने को मिला।

अपने अंदर के उस जज को चुप कराइये जो हर वक्त आपको टोकता रहता है। माइक एकर के अनुसार जब आप खुद को अपनी गलतियों के साथ स्वीकार कर लेते हैं तो आपके चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है। यह वैसी ही चमक है जैसी ऑफिस में अचानक छुट्टी मिलने पर आती है। तो अगली बार जब आप स्टेज पर जाएं और कुछ भूल जाएं तो बस मुस्कुराएं और आगे बढ़ें। क्योंकि आपकी ऑडियंस आपको गिरते हुए देखने नहीं बल्कि आपको जीतते हुए देखने आई है। आप कोई भगवान नहीं हैं जो गलती नहीं कर सकते। आप बस एक इंसान हैं जो अपनी बात दूसरों तक पहुँचाना चाहता है।


लेसन २ : तैयारी का पावर हाउस और विजुअलाइजेशन (Preparation and Visualization)

अगर आप सोचते हैं कि बड़े स्पीकर्स बिना किसी तैयारी के स्टेज पर चढ़ जाते हैं और लोग तालियाँ बजाने लगते हैं, तो आप शायद किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट में जी रहे हैं। बिना तैयारी के स्टेज पर जाना वैसा ही है जैसे बिना हेलमेट और बिना ब्रेक के पहाड़ से नीचे साइकिल चलाना। अंत में सिर्फ हड्डी और इज्जत ही टूटती है। माइक एकर अपनी किताब स्पीक विद नो फियर में साफ कहते हैं कि आपका डर आपके कॉन्फिडेंस की कमी नहीं, बल्कि आपकी तैयारी की कमी का नतीजा है। जब आप यह नहीं जानते कि आपको अगला शब्द क्या बोलना है, तो आपका दिमाग पैनिक मोड में चला जाता है और आपकी हथेलियों से पसीना ऐसे निकलता है जैसे नल की टोटी खराब हो गई हो।

तैयारी का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी स्पीच को रट्टा मारें। रट्टा मारने वाले लोग अक्सर स्टेज पर जाकर किसी अटके हुए रिकॉर्ड की तरह बजने लगते हैं। तैयारी का मतलब है अपने कंटेंट को अपनी रगों में बसा लेना। आपको पता होना चाहिए कि आप अपनी बात कहाँ से शुरू करेंगे और उसका अंत कहाँ होगा। जब आप तैयार होते हैं, तो आपका दिमाग शांत रहता है क्योंकि उसे पता है कि रास्ता कहाँ जा रहा है। यह वैसा ही है जैसे अपने ही घर में अंधेरे में भी आप बाथरूम का रास्ता ढूंढ लेते हैं क्योंकि आप उस जगह से वाकिफ हैं।

इसके साथ ही आता है विजुअलाइजेशन का जादू। माइक एकर हमें सलाह देते हैं कि स्टेज पर जाने से पहले अपनी आँखें बंद करें और खुद को एक सफल प्रेजेंटेशन देते हुए देखें। खुद को मुस्कुराते हुए, लोगों की आँखों में आँखें डालकर बात करते हुए और अंत में लोगों की तालियाँ सुनते हुए महसूस करें। हमारा दिमाग कल्पना और हकीकत के बीच ज्यादा फर्क नहीं समझता। जब आप बार-बार खुद को जीतते हुए देखते हैं, तो स्टेज पर जाकर आपका शरीर खुद-ब-खुद वैसे ही रिएक्ट करने लगता है।

लेकिन अगर आप यह सोचकर बैठेंगे कि यार अगर मैं गिर गया तो क्या होगा, अगर माइक बंद हो गया तो क्या होगा, तो यकीन मानिए आपके साथ वही होगा जो आप सोच रहे हैं। इसे कहते हैं उल्टी तैयारी। डरे हुए लोग हमेशा बुरे अंजाम की तैयारी करते हैं। आपको बस अपनी सोच का गियर बदलना है। तैयारी को एक बोझ की तरह नहीं बल्कि एक ढाल की तरह इस्तेमाल कीजिये। जितनी मजबूत आपकी तैयारी होगी, उतना ही कमजोर आपका डर होगा। और जब डर कमजोर होता है, तभी असली परफॉर्मर बाहर आता है।


लेसन ३ : ऑडियंस को अपना दोस्त बनाइए (Focus on the Audience, Not Yourself)

ज्यादातर लोग स्टेज पर इसलिए कांपते हैं क्योंकि उनका सारा ध्यान खुद पर होता है। मैं कैसा दिख रहा हूँ। मेरा पेट बाहर तो नहीं दिख रहा। मेरी आवाज कहीं फटी हुई तो नहीं लग रही। अगर आप भी यही सब सोच रहे हैं, तो आप एक स्पीकर नहीं बल्कि खुद के सबसे बड़े दुश्मन हैं। माइक एकर कहते हैं कि पब्लिक स्पीकिंग का असली राज 'आई' (I) से हटकर 'यू' (You) पर आना है। जब आप यह सोचते हैं कि आप यहाँ सिर्फ अपनी इज्जत बचाने आए हैं, तो डर लगना लाजमी है। लेकिन जिस पल आप यह सोचते हैं कि आप यहाँ सामने बैठे लोगों की मदद करने आए हैं, आपका सारा डर गायब हो जाता है।

मान लीजिये आप सड़क पर जा रहे हैं और आपको कोई घायल इंसान दिखता है जिसे तुरंत मदद की जरूरत है। क्या उस वक्त आप यह सोचते हैं कि लोग आपको देखते हुए क्या कहेंगे या आपकी शर्ट पर खून के धब्बे कैसे लगेंगे। बिल्कुल नहीं। आपका पूरा ध्यान उस इंसान की जान बचाने पर होता है। स्पीकिंग भी बिल्कुल वैसी ही है। आपकी ऑडियंस किसी न किसी समस्या का हल ढूंढने आई है। वे वहां आपकी शक्ल देखने नहीं, बल्कि आपके पास जो जानकारी है, उसे लेने आए हैं। जब आप अपना ध्यान अपनी घबराहट से हटाकर उनकी जरूरतों पर लगा देते हैं, तो आपका दिमाग रिलैक्स हो जाता है।

ऑडियंस आपके दुश्मन नहीं हैं जो आपको जज करने के लिए बैठे हैं। वे तो चाहते हैं कि आप अच्छा बोलें ताकि उनका समय बर्बाद न हो। वे आपकी टीम में हैं। जब आप उनसे बात करते हैं, तो ऐसे बात कीजिये जैसे आप अपने किसी पुराने दोस्त को सलाह दे रहे हों। भारी भरकम शब्दों का इस्तेमाल करना बंद कीजिये। जितना सरल और सीधा आपका तरीका होगा, लोग आपसे उतना ही ज्यादा जुड़ेंगे।

याद रखिये, स्टेज पर खड़ा होना एक जिम्मेदारी है, बोझ नहीं। जब आप दूसरों को वैल्यू देने की नीयत से खड़े होते हैं, तो कुदरत भी आपका साथ देती है। तो अगली बार जब माइक आपके हाथ में हो और दिल की धड़कनें तेज हों, तो बस एक लंबी सांस लीजिये और खुद से कहिये कि मैं यहाँ इन लोगों की लाइफ में कुछ अच्छा जोड़ने आया हूँ। इसके बाद जो जादू होगा, उसे देखकर आप खुद हैरान रह जाएंगे।


दोस्तों, डर सिर्फ एक सिग्नल है कि आप कुछ बड़ा करने जा रहे हैं। इसे अपनी कमजोरी मत बनने दीजिये। आज ही अपनी अगली स्पीच या मीटिंग के लिए इन ३ लेसन को अपनाइये। याद रखिये, दुनिया को आपकी आवाज सुनने की जरूरत है। क्या आप आज अपना पहला कदम उठाने के लिए तैयार हैं। कमेंट्स में 'यस' लिखिये और इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर कीजिये जो स्टेज के नाम से ही भाग खड़ा होता है।

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