Steal the Show (Hindi)


आप पूरी जिंदगी बस एक साइड एक्टर बनकर बैठे रहेंगे और लोग आपको इग्नोर करते रहेंगे क्योंकि आपको पता ही नहीं है कि स्टेज पर आग कैसे लगानी है। अपनी एवरेज परफॉरमेंस पर तालियां भूल जाइए जनाब, लोग आपकी बोरिंग बातों पर सो रहे हैं और आप अपना करियर और इज्जत दोनों खो रहे हैं।

आज हम माइकल पोर्ट की बुक स्टील द शो के बारे में बात करेंगे। यह बुक आपको सिखाएगी कि कैसे आप अपनी लाइफ के हर मोमेंट में एक स्टार बन सकते हैं। चलिए इन ३ लेसन के जरिए अपनी लाइफ को बदलने का सफर शुरू करते हैं।


लेसन १ : अपनी लाइफ को एक परफॉरमेंस की तरह जीना सीखिए

सोचिए आप एक बहुत इम्पोर्टेन्ट जॉब इंटरव्यू के लिए बैठे हैं। आपके हाथ कांप रहे हैं और आप पसीने से तरबतर हैं। आप वहां खुद को बेचने गए हैं पर आपकी हालत देखकर लग रहा है कि आप वहां किसी मर्डर सीन के गवाह बनने आए हैं। माइकल पोर्ट कहते हैं कि यही आपकी सबसे बड़ी गलती है। आप सोचते हैं कि परफॉरमेंस सिर्फ फिल्मों या थियेटर के बड़े स्टेज पर होती है। लेकिन असलियत तो यह है कि जब आप सुबह सोकर उठते हैं और दुनिया से इंटरैक्ट करना शुरू करते हैं, तब से आपकी परफॉरमेंस शुरू हो जाती है। चाहे आप अपने बॉस से सैलरी बढ़ाने की बात कर रहे हों या पहली बार किसी लड़की से मिलने कैफे गए हों, आप हर वक्त एक रोल निभा रहे होते हैं। अगर आप इसे सिर्फ एक नॉर्मल बातचीत समझेंगे तो आप कभी वह इम्पैक्ट नहीं डाल पाएंगे जो एक स्टार डालता है। लोग आपको याद ही नहीं रखेंगे क्योंकि आपने उन्हें कुछ यादगार दिया ही नहीं। आप तो बस एक भीड़ का हिस्सा बनकर रह गए जो बस अपनी बारी का इन्तजार कर रहा था।

जरा अपने उस दोस्त के बारे में सोचिए जो किसी भी पार्टी में जाता है तो सबकी नजरें उसी पर टिक जाती हैं। क्या वह कोई जादूगर है? बिल्कुल नहीं। वह बस एक बेहतर परफॉर्मर है जिसे पता है कि कब कौन सा मुखौटा पहनना है। पोर्ट हमें बताते हैं कि एक्टिंग का मतलब झूठ बोलना नहीं है। इसका मतलब है अपने अंदर के उस वर्जन को बाहर लाना जो उस सिचुएशन के लिए सबसे बेस्ट है। अगर आप एक लीडर के तौर पर अपनी टीम को मोटिवेट कर रहे हैं तो आपको एक जोश भरे लीडर का रोल प्ले करना ही होगा। अगर आप वहां ढीले ढाले होकर खड़े रहेंगे और कहेंगे कि चलो काम कर लो तो आपकी टीम काम नहीं करेगी बल्कि वह भी सो जाएगी। अपनी पर्सनालिटी को एक संदूक की तरह मत बनाइये जिसमें बस एक ही पुराना कपड़ा रखा हो। अपनी लाइफ को एक बड़ा स्टेज मानिए जहाँ हर कैमरा आप पर है। जब आप इस माइंडसेट से जीते हैं तो आपका कॉन्फिडेंस अपने आप सातवें आसमान पर पहुँच जाता है।

अक्सर लोग कहते हैं कि मैं तो जैसा हूँ वैसा ही रहूँगा। भाई साहब यह एटीट्यूड आपको कहीं नहीं ले जाएगा। अगर आप एक बोरिंग इंसान हैं तो क्या आप पूरी उम्र बोरिंग ही बने रहना चाहते हैं? एक्टिंग आपको वह बनने की आजादी देती है जो आप बनना चाहते हैं। यह अपने असली चेहरे को छुपाना नहीं बल्कि अपने पोटेंशियल को निखारना है। जब आप किसी मीटिंग में घुसते हैं तो आपका चलना, आपका हाथ मिलाना और आपकी आंखों की चमक यह सब आपकी स्क्रिप्ट का हिस्सा होना चाहिए। अगर आप बिना तैयारी के बस वहां चले गए तो आप एक फेल एक्टर की तरह बाहर आएंगे जिसे कोई दोबारा साइन नहीं करना चाहता। अपनी लाइफ के हीरो बनिए ना कि वह एक्स्ट्रा जो पीछे खड़ा होकर बस तालियां बजाता है। याद रखिए कि दुनिया एक बहुत बड़ा थियेटर है और आप अपनी लाइफ के डायरेक्टर भी हैं और एक्टर भी। तो अपनी अगली परफॉरमेंस के लिए तैयार हो जाइए क्योंकि तालियां तभी बजेंगी जब आप स्टेज को अपना बना लेंगे।


लेसन २ : रिहर्सल और तैयारी ही असली आजादी का रास्ता है

लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि भाई वह लड़का स्टेज पर इतना नेचुरल कैसे लगता है? क्या वह पैदा ही माइक हाथ में लेकर हुआ था? सच तो यह है कि जिसे आप नेचुरल टैलेंट समझ रहे हैं वह असल में पागलों की तरह की गई रिहर्सल का नतीजा है। माइकल पोर्ट इस बुक में एक बहुत बड़ा सच बताते हैं कि जितना ज्यादा आप तैयारी करेंगे उतने ही ज्यादा आप आजाद महसूस करेंगे। आप बिना तैयारी के किसी प्रेजेंटेशन में चले जाते हैं और सोचते हैं कि वहां जाकर जो मन में आएगा बोल देंगे। फिर वहां जाकर आप ए... उम... और ओ... जैसे शब्दों की माला जपने लगते हैं। आपकी हालत उस दूल्हे जैसी हो जाती है जो घोड़ी पर तो बैठ गया है पर उसे पता ही नहीं कि शादी किससे होनी है। बिना रिहर्सल के आप कभी भी कॉन्फिडेंट नहीं दिख सकते क्योंकि आपका दिमाग तो उस वक्त अगली लाइन ढूँढने में लगा होता है।

रिहर्सल करने का मतलब यह नहीं है कि आप किसी रोबोट की तरह रट्टा मार लें। इसका मतलब है कि आप अपनी स्क्रिप्ट को इतना जी लें कि वह आपके खून में मिल जाए। जब आपको पता होता है कि आपकी अगली बात क्या है तो आप अपनी ऑडियंस की आंखों में देख पाते हैं। आप स्टेज पर इधर उधर घूम पाते हैं और लोगों के रिएक्शन के हिसाब से अपनी बातों को मोड़ पाते हैं। सोचिए एक स्टैंडअप कॉमेडियन के बारे में जो आपको हंसा हंसा कर लोटपोट कर देता है। आपको लगता है कि वह सब मजाक अभी उसके दिमाग में आया है? बिल्कुल नहीं। उसने उस एक मिनट के जोक को कम से कम सौ बार अपने आईने के सामने बोला होगा। उसने अपनी हर सांस और हर इशारे को प्लान किया होगा। जब आप इतनी मेहनत करते हैं तभी आप स्टेज पर जाकर यह दिखा पाते हैं कि आप कितने कूल और रिलैक्स्ड हैं। जो दिखता है वह होता नहीं और जो होता है वह किसी को दिखता नहीं।

तैयारी न करना असल में अपनी ऑडियंस की बेइज्जती करना है। आप उनका कीमती वक्त बर्बाद कर रहे हैं क्योंकि आपने अपना होमवर्क नहीं किया। आप सोचते हैं कि आप बहुत स्मार्ट हैं और ऐन मौके पर कुछ न कुछ जुगाड़ कर लेंगे। पर असलियत में आप बस अपनी घबराहट को छुपाने की कोशिश कर रहे होते हैं। रिहर्सल आपको वह सेफ्टी नेट देती है जो गिरने के डर को खत्म कर देता है। जब डर खत्म होता है तभी असली कला बाहर आती है। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी बातों को सुनकर खड़े होकर तालियां बजाएं तो आपको अकेले में पसीना बहाना ही होगा। अपनी स्पीच को रिकॉर्ड कीजिए और उसे सुनिए। अपनी बॉडी लैंग्वेज को चेक कीजिए कि कहीं आप डरे हुए चूहे जैसे तो नहीं लग रहे। जब आप खुद को बार बार तैयार करते हैं तो आप स्टेज के मालिक बन जाते हैं। तब आप परफॉर्म नहीं कर रहे होते बल्कि आप उस पल को जी रहे होते हैं।


लेसन ३ : अपनी ऑडियंस के हीरो बनिए खुद के नहीं

ज्यादातर लोग जब स्टेज पर जाते हैं या किसी मीटिंग में बोलते हैं तो उनके दिमाग में बस एक ही सवाल होता है कि मैं कैसा लग रहा हूँ? क्या लोग मेरे बारे में अच्छा सोच रहे हैं? भाई साहब अगर आप सिर्फ अपने बारे में ही सोच रहे हैं तो आप परफॉर्मर नहीं बल्कि एक मतलबी इंसान हैं। माइकल पोर्ट कहते हैं कि एक महान परफॉर्मर वह होता है जो अपनी ईगो को दरवाजे के बाहर छोड़कर आता है। आपका काम खुद को महान दिखाना नहीं है बल्कि अपनी ऑडियंस की लाइफ में कुछ वैल्यू जोड़ना है। अगर आप स्टेज पर खड़े होकर बस अपनी तारीफों के पुल बांध रहे हैं तो यकीन मानिए लोग मन ही मन आपको गालियां दे रहे हैं। लोग आपको सुनने इसलिए आए हैं क्योंकि उन्हें अपनी किसी प्रॉब्लम का हल चाहिए। अगर आप उन्हें वह नहीं दे सकते तो आपका चमकदार कोट और आपकी भारी आवाज किसी काम की नहीं है।

अक्सर आपने देखा होगा कि कुछ लोग बहुत ज्ञान झाड़ते हैं और कठिन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें लगता है कि इससे लोग उन्हें बहुत इंटेलिजेंट समझेंगे। पर असल में वह सिर्फ अपनी असुरक्षा को छुपा रहे होते हैं। एक सच्चा परफॉर्मर अपनी ऑडियंस के साथ एक गहरा रिश्ता बनाता है। वह उनके डर को समझता है और उनकी उम्मीदों को पहचानता है। जब आप दूसरों की मदद करने के इरादे से बोलते हैं तो आपके अंदर से डर गायब हो जाता है। क्योंकि तब आपका फोकस खुद पर नहीं बल्कि सामने वाले पर होता है। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे आप अपने किसी दोस्त को किसी मुसीबत से बाहर निकलने की सलाह दे रहे हों। उस वक्त आप यह नहीं सोचते कि आपका हाथ कैसा हिल रहा है या आपकी आवाज कैसी है। आप बस यह चाहते हैं कि आपका दोस्त आपकी बात समझ जाए। यही एटीट्यूड आपको दुनिया का सबसे बड़ा इन्फ्लुएंसर बना सकता है।

स्टील द शो का असली मतलब यही है कि आप लोगों के दिलों को जीत लें। और दिल तभी जीते जाते हैं जब आप सच्चे होते हैं। अपनी गलतियों को स्वीकार करने में मत डरिए और अपनी कमजोरियों को दिखाने में मत शर्माइए। लोग परफेक्ट लोगों से नहीं बल्कि उन लोगों से जुड़ते हैं जो उनकी तरह इंसान होते हैं। जब आप स्टेज पर खड़े होकर अपनी ऑडियंस के फायदे की बात करते हैं तो वह खुद ब खुद आपको अपना लीडर मान लेते हैं। वह तालियां जो आप अपने लिए चाहते थे वह अब आपके मैसेज के लिए बजने लगती हैं। तो अगली बार जब आप कहीं भी कुछ बोलने जाएं तो खुद से पूछिए कि मैं आज इन लोगों की जिंदगी कैसे बेहतर बना सकता हूँ? जिस दिन आपको इस सवाल का जवाब मिल गया उस दिन आपको स्टैंडिंग ओवेशन लेने से कोई नहीं रोक पाएगा।


जिंदगी एक मौका है अपनी छाप छोड़ने का और हर दिन एक नया स्टेज है। अब यह आपके हाथ में है कि आप पीछे छुपकर दूसरों की सक्सेस देखते रहेंगे या खुद स्टेज के बीचों बीच खड़े होकर अपनी कहानी सुनाएंगे। माइकल पोर्ट के ये लेसन सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं बल्कि आजमाने के लिए हैं। जाइए और आज अपनी पहली परफॉरमेंस दीजिए। कमेंट में हमें बताइए कि आप अपनी लाइफ के किस डर को खत्म करके स्टेज पर आग लगाने वाले हैं। इस आर्टिकल को उनके साथ शेयर कीजिए जो अपनी आवाज दुनिया तक पहुँचाना चाहते हैं।

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