The Achievement Habit (Hindi)


क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अगले दस साल तक सिर्फ "सोचते" रहने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं? मुबारक हो, आप अपनी लाइफ को बर्बादी के हाईवे पर ले जा रहे हैं। बिना एक्शन के आपकी बड़ी-बड़ी प्लानिंग सिर्फ एक जोक है और दुनिया आपकी इसी नाकामी पर हंस रही है।

अगर आप अपनी लाइफ का रिमोट कंट्रोल दूसरों को देकर थक चुके हैं, तो बर्नार्ड रोथ की किताब 'द अचीवमेंट हैबिट' आपको आईना दिखाएगी। चलिए जानते हैं वो ३ पावरफुल लेसन जो आपको विशिंग मोड से निकालकर अचीविंग मोड में डाल देंगे।


लेसन १ : बहाने बनाना छोड़ो और जिम्मेदारी लो

अगर बहाने बनाने की कोई ओलंपिक होती तो कसम से इंडिया के पास गोल्ड मेडल्स की लाइन लग जाती। हम लोग बहाने बनाने में इतने उस्ताद हैं कि खुद को भी यकीन दिला देते हैं कि हम फेल नहीं हुए हैं बल्कि किस्मत ने हमारे साथ प्रैंक कर दिया है। बर्नार्ड रोथ अपनी किताब 'द अचीवमेंट हैबिट' में सबसे पहले इसी गुब्बारे को फोड़ते हैं। वो कहते हैं कि अचीवमेंट कोई जादू नहीं है बल्कि एक आदत है। और इस आदत की सबसे पहली दुश्मन है हमारी 'एक्सक्यूज' बनाने की बीमारी।

जरा सोचिए, आप सुबह अलार्म बजने पर उसे स्नूज करते हैं। फिर जब आप ऑफिस या कॉलेज के लिए लेट होते हैं, तो आप ट्रैफिक को गाली देते हैं। आप कहते हैं कि सड़क पर गाड़ियां बहुत थी इसलिए मैं लेट हो गया। पर सच तो ये है कि आप लेट इसलिए हुए क्योंकि आपने वो स्नूज बटन दबाया था। ट्रैफिक तो हर रोज वही रहने वाला है। अब आप कहेंगे कि यार ये तो छोटी सी बात है। लेकिन यही छोटी बातें मिलकर आपकी जिंदगी का पैटर्न बन जाती हैं।

हम अक्सर कहते हैं कि मेरे पास टाइम नहीं है। भाई, दिन में २४ घंटे ही होते हैं और ये एलन मस्क से लेकर पड़ोस के उस चिंटू तक सबके लिए बराबर हैं जो फिट रहने के लिए रोज जिम जाता है। जब आप कहते हैं कि टाइम नहीं है, तो आप असल में झूठ बोल रहे होते हैं। सच ये है कि वो काम आपकी प्रायोरिटी नहीं है। आप नेटफ्लिक्स पर बिंज वॉच करने के लिए ५ घंटे निकाल सकते हैं पर अपनी स्किल सुधारने के लिए आधा घंटा नहीं मिलता। ये तो वही बात हुई कि आप जिम के बाहर खड़े होकर समोसे खा रहे हैं और फिर भगवान को कोस रहे हैं कि वजन क्यों नहीं कम हो रहा।

बर्नार्ड रोथ समझाते हैं कि जब हम दूसरों को या हालातों को जिम्मेदार ठहराते हैं, तो हम अपनी पावर उनके हाथ में दे देते हैं। अगर बॉस की वजह से मेरा दिन खराब हुआ, तो मतलब बॉस के पास मेरी खुशी का रिमोट है। क्या आप इतने सस्ते हैं कि आपका मूड कोई भी खराब कर दे? अपनी लाइफ की जिम्मेदारी लेना सीखिए। अगर आप फेल हुए हैं, तो मानिए कि आपकी तैयारी में कमी थी। जब आप अपनी गलती मानते हैं, तभी आप उसे सुधारने की ताकत भी पाते हैं।

हमारे समाज में 'बेचारा' बनने का बड़ा शौक है। हमें लगता है कि अगर हम अपनी परेशानियां गिनाएंगे तो लोग हमें सहानुभूति देंगे। सहानुभूति तो मिल जाएगी दोस्त, पर सक्सेस नहीं मिलेगी। लोग आपकी कहानी सुनकर 'आह' और 'ओह' करेंगे और फिर अपने काम पर निकल जाएंगे। कोई आपके लिए आपकी जंग नहीं लड़ेगा। अचीवमेंट की आदत तब पड़ती है जब आप ये समझना शुरू करते हैं कि आपकी लाइफ का स्टियरिंग व्हील आपके हाथ में है।

आप आज जहाँ भी हैं, अपने फैसलों की वजह से हैं। अगर आपको अपनी जगह पसंद नहीं है, तो हिलिए, आप कोई पेड़ नहीं हैं। बहाने बनाना बंद करना ही वो पहला कदम है जो आपको एक लूजर से विनर बनाता है। अपनी कमियों को सार्काज्म की चादर में मत ढको, उन्हें ठीक करो। याद रखिए, दुनिया को सिर्फ आपके रिजल्ट्स दिखते हैं, आपके आंसू भरी दास्ताने नहीं।


लेसन २ : रीजन्स और एक्सक्यूज में फर्क समझो

क्या आपको कभी लगा है कि आप अपनी लाइफ के सबसे बड़े वकील हैं? जब भी हम कोई काम नहीं करते, तो हमारा दिमाग कोर्ट रूम की तरह हाजिर हो जाता है और ऐसे-ऐसे दलीलें देता है कि जज भी रो पड़े। बर्नार्ड रोथ कहते हैं कि हम जिसे 'रीजन' या कारण कहते हैं, वो असल में सिर्फ एक सोफिस्टिकेटेड बहाना यानी 'एक्सक्यूज' होता है। हम खुद को झूठ बोलने में इतने माहिर हो चुके हैं कि हमें खुद की बकवास भी सच लगने लगती है।

मान लीजिए आपने सोचा कि आप कल से रोज सुबह दौड़ना शुरू करेंगे। सुबह हुई, खिड़की से बाहर देखा और हल्की सी बूंदाबांदी हो रही थी। आपने तुरंत खुद से कहा कि आज बारिश है, अगर भीग गया तो जुकाम हो जाएगा, फिर ऑफिस का काम रुकेगा, इसलिए आज सोना ही बेहतर है। वाह! क्या लॉजिक है। आपने अपनी आलस को 'सेहत की चिंता' का नाम दे दिया। ये 'रीजन' नहीं है दोस्त, ये सिर्फ एक घटिया एक्सक्यूज है। अगर आपके घर में आग लगी होती, तो क्या आप बारिश रुकने का इंतज़ार करते? नहीं ना? तब आप बस भागते।

सच्चाई तो ये है कि जब हमें कोई काम वाकई में करना होता है, तो हम रास्ता निकाल लेते हैं। और जब नहीं करना होता, तो हम 'रीजन' निकाल लेते हैं। बर्नार्ड रोथ के अनुसार, हर वो कारण जो आपको आपके गोल से दूर रखता है, वो एक झूठ है। हम अक्सर कहते हैं कि मुझे ये बिजनेस शुरू करना था पर मेरे पास पैसे नहीं थे। या मुझे वो कोर्स करना था पर घर वालों ने सपोर्ट नहीं किया। ये सब सुनने में बहुत लॉजिकल लगते हैं, पर असल में ये सिर्फ सेफ्टी नेट्स हैं ताकि हम अपनी नाकामी का ठीकरा किसी और पर फोड़ सकें।

जरा उस दोस्त को याद कीजिए जो हमेशा कहता है कि उसे पतला होना है, लेकिन जब पार्टी में फ्री का पिज्जा आता है, तो वो कहता है कि आज तो चीट डे है। उसका 'रीजन' है सेलिब्रेशन, पर हकीकत में वो अपनी इच्छाशक्ति की कमी को छिपा रहा है। हम अपनी लाइफ में ऐसे ही छोटे-छोटे 'रीजन' की दीवार खड़ी कर लेते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि हमें बाहर का नजारा क्यों नहीं दिख रहा।

रोथ हमें सिखाते हैं कि 'कारणों' की खोज करना बंद करो। कारण हमें पास्ट में अटका कर रखते हैं। "मैंने ऐसा क्यों किया?" या "ये मेरे साथ क्यों हुआ?" ये सवाल आपको सिर्फ दुख देंगे। इसकी जगह ये पूछिए कि "अब मैं क्या कर सकता हूँ?"। जब आप कारणों की गहराई में जाना छोड़ देते हैं, तो आप एक्शन की दुनिया में कदम रखते हैं। जिंदगी में 'क्यों' से ज्यादा 'कैसे' इम्पोर्टेंट है।

अगर आप आज भी वही घिसे-पिटे कारण दे रहे हैं जो आप पिछले पांच साल से दे रहे थे, तो यकीन मानिए आप कहीं नहीं जा रहे। आप बस एक गोल घेरे में दौड़ रहे हैं और सोच रहे हैं कि आपने बहुत लंबा सफर तय कर लिया है। अपनी दलीलों को कूड़ेदान में डालिए। ये समझना शुरू कीजिए कि आपके 'रीजन' सिर्फ आपकी कमजोरी के कवर हैं। जिस दिन आप इन कवर्स को हटा देंगे, उस दिन आपको समझ आएगा कि अचीवमेंट की असली रुकावट बाहर का मौसम या खाली बैंक अकाउंट नहीं, बल्कि आपकी खुद की सोच थी।


लेसन ३ : एक्शन लेने की आदत डालो

क्या आपने कभी उन लोगों को देखा है जो हमेशा 'तैयारी' ही करते रहते हैं? वो दुनिया की हर वर्कशॉप अटेंड करेंगे, सारी मोटिवेशनल किताबें पढ़ लेंगे और हर दूसरे दिन एक नया 'ग्रेट आईडिया' लेकर आएंगे। पर जब काम शुरू करने की बारी आती है, तो वो गायब हो जाते हैं। बर्नार्ड रोथ कहते हैं कि विशिंग (चाहना) और डूइंग (करना) के बीच में एक बहुत बड़ी खाई है, जिसमें ज्यादातर लोग गिरकर मर जाते हैं। अचीवमेंट कोई इत्तेफाक नहीं है, ये काम को अंजाम देने की एक कंक्रीट आदत है।

हम अक्सर सोचते हैं कि जब सही वक्त आएगा, तब मैं शुरुआत करूँगा। भाई, ये 'सही वक्त' कोई बस नहीं है जो स्टैंड पर आएगी और आपको बिठाकर ले जाएगी। सही वक्त जैसा कुछ नहीं होता, जो है बस अभी है। आप 'कोशिश' करने और 'करने' के बीच का फर्क समझिए। मान लीजिए आपके हाथ में एक पेन है और मैं आपसे कहूँ कि इसे उठाने की 'कोशिश' करो। अगर आपने उसे उठा लिया, तो आपने काम 'किया'। अगर आपने उसे नहीं उठाया, तो आपने 'नहीं किया'। पर 'कोशिश' जैसा कुछ बीच में होता ही नहीं है। या तो आप करते हैं, या आप नहीं करते।

हम अपनी लाइफ में बहुत सारी एनर्जी सिर्फ ये सोचने में बर्बाद कर देते हैं कि "क्या होगा अगर मैं फेल हो गया?"। भाई, तुम अभी भी तो फेल ही हो क्योंकि तुमने कुछ किया ही नहीं। बिना कुछ किए भी तो आप वहीं खड़े हैं जहाँ से शुरू किया था। तो फिर डर किस बात का है? बर्नार्ड रोथ अपनी इस किताब में 'डिजाइन थिंकिंग' का कॉन्सेप्ट लाते हैं। वो कहते हैं कि अपनी लाइफ को एक प्रोजेक्ट की तरह देखो। अगर एक तरीका काम नहीं कर रहा, तो उसे बदलो और दूसरा ट्राई करो। रुकना कोई ऑप्शन नहीं होना चाहिए।

जरा सोचिए उस इंसान के बारे में जो पिछले तीन साल से कह रहा है कि वो जिम जाएगा। वो रोज रात को जूते साफ करके रखता है, डाइट चार्ट बनाता है और सुबह अलार्म बजते ही उसे बंद करके सो जाता है। वो जिम जाने की 'इच्छा' रखता है, पर उसे 'करने' की आदत नहीं है। अचीवमेंट तब शुरू होती है जब आप जूते पहनकर घर से बाहर निकल जाते हैं, चाहे आपका मन हो या ना हो। इमोशंस के गुलाम मत बनिए। आपका मन तो हमेशा आपको कंफर्ट जोन में रखने की साजिश करेगा। आपको उस साजिश को नाकाम करना है।

अचीवमेंट हैबिट का मतलब है कि आप अपनी कमिटमेंट के पक्के हैं। अगर आपने खुद से कहा है कि आप आज १० पेज लिखेंगे, तो फिर चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए, आप वो लिखेंगे। लोग अक्सर पूछते हैं कि मोटिवेशन कैसे लाएं? सच तो ये है कि मोटिवेशन काम शुरू करने से नहीं आता, बल्कि काम करने के बाद जो छोटे-छोटे रिजल्ट्स मिलते हैं, उनसे आता है। जब आप कुछ अचीव करते हैं, तो आपका दिमाग आपको और करने के लिए पुश करता है।

तो अब सवाल ये है कि क्या आप अब भी अपनी विश लिस्ट लेकर बैठे रहेंगे या उसे डस्टबिन में डालकर असली काम शुरू करेंगे? दुनिया सिर्फ उन्हीं का नाम याद रखती है जिन्होंने मैदान में उतरकर पसीना बहाया है, उनका नहीं जो स्टैंड्स में बैठकर कमेंट्री कर रहे थे। अपनी लाइफ के हीरो बनिए, साइड रोल में रहकर दूसरों की तालियां बजाना बंद कीजिए।


'द अचीवमेंट हैबिट' हमें सिर्फ एक बात सिखाती है कि हमारी लाइफ का हर रिजल्ट हमारे एक्शन का आईना है। अगर आपको आईने में अपनी शक्ल पसंद नहीं आ रही, तो आईना तोड़ने से कुछ नहीं होगा, अपनी आदतें बदलनी पड़ेंगी। आज से ही बहाने बनाना छोड़िए और अपनी लाइफ की कमान अपने हाथ में लीजिए।

अब आप बताइए, वो कौन सा एक काम है जिसे आप पिछले कई महीनों से टाल रहे हैं? आज कमेंट में हमें बताइए और कसम खाइए कि आज ही उसका पहला स्टेप पूरा करेंगे। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करता है पर करता कुछ नहीं। चलिए, मिलकर बहानेबाजी की इस दुनिया से बाहर निकलते हैं।

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