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वही पुराने स्टाइल में सामान बेच रहे हो। बधाई हो, तुम्हारी कंपनी बहुत जल्द म्यूजियम में दिखेगी। दुनिया आगे निकल गई और तुम अभी भी वन टाइम सेल की भीख मांग रहे हो। अगर सब्सक्रिप्शन मॉडल नहीं समझा, तो कस्टमर भी खोओगे और अपनी इज्जत भी। क्या सच में इतने पीछे रहना चाहते हो।

आज हम टिएन जुओ की बुक सब्सक्राइबड के उन राज को खोलेंगे, जो आपके डूबते बिजनेस को एक नई रफ़्तार देंगे। यह आर्टिकल आपको बताएगा कि कैसे आज की बड़ी कंपनियां बिना सामान बेचे करोड़ों कमा रही हैं। चलिए शुरू करते हैं इन ३ शानदार लेसन्स के साथ।


लेसन १ : प्रोडक्ट बेचना बंद करो और रिश्ते निभाना शुरू करो

आज के दौर में अगर आप अभी भी इस खुशी में झूम रहे हैं कि आपने एक कस्टमर को अपना सामान चिपका दिया है, तो दोस्त आप बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। पुराने जमाने में सेल्स का मतलब होता था कि कस्टमर आया, उसने पैसे दिए, आपने सामान दिया और फिर टाटा बाय बाय। उसके बाद वह जिंदा है या मर गया, आपको कोई फर्क नहीं पड़ता था। लेकिन टिएन जुओ कहते हैं कि यह तरीका अब पूरी तरह एक्सपायर हो चुका है। अगर आप आज भी सिर्फ प्रोडक्ट बेचने के पीछे भाग रहे हैं, तो आप उस लड़के की तरह हैं जो पहली डेट पर ही शादी का प्रपोजल दे देता है और फिर ब्लॉक हो जाता है। आज का बिजनेस सामान बेचने के बारे में नहीं, बल्कि एक लंबा और गहरा रिश्ता बनाने के बारे में है।

सोचिए आपने एक बहुत महंगी दुकान से शानदार सूट खरीदा। दुकानदार ने पैसे लिए और आपको दरवाजा दिखा दिया। अब आपको उस दुकानदार से कोई मतलब नहीं और उसे आपसे कोई लेना देना नहीं। इसे कहते हैं वन टाइम ट्रांजेक्शन। लेकिन अब जरा नेटफ्लिक्स या जिम की मेंबरशिप के बारे में सोचिए। वहां आप एक बार पैसे देकर पीछा नहीं छुड़ाते। आप हर महीने जुड़ते हैं। कंपनी को हर पल पता होता है कि आप क्या देख रहे हैं या आप जिम जा भी रहे हैं या सिर्फ चंदा दे रहे हैं। यह है सब्सक्रिप्शन की असली पावर। यहाँ कस्टमर सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि वह आपके बिजनेस का हिस्सा बन जाता है। जो कंपनियां आज भी पुरानी सोच में अटकी हैं, वे धीरे धीरे गायब हो रही हैं क्योंकि वे कस्टमर का दिल जीतना भूल गई हैं।

भारत के मिडिल क्लास घरों का उदाहरण लीजिए। पहले हम लोग म्यूजिक सुनने के लिए कैसेट या सीडी खरीदते थे। एक बार खरीद ली तो दुकानदार का काम खत्म। लेकिन आज हम स्पॉटिफाई या यूट्यूब म्यूजिक इस्तेमाल करते हैं। हम म्यूजिक नहीं खरीद रहे, हम गाने सुनने की सर्विस का सब्सक्रिप्शन ले रहे हैं। अब स्पॉटिफाई को पता है कि आपको अरिजीत सिंह के दुखी गाने पसंद हैं या बादशाह के पार्टी नंबर्स। वह आपकी पसंद के हिसाब से आपको चीजें परोसता है। वह आपसे हर दिन एक रिश्ता निभा रहा है। अगर आप भी अपने बिजनेस को बढ़ाना चाहते हैं, तो यह सोचना बंद कर दीजिए कि आपका प्रोडक्ट क्या है। इसके बजाय यह सोचिए कि आपका कस्टमर कौन है और आप उसकी लाइफ में हर दिन क्या वैल्यू जोड़ सकते हैं।

अगर आप एक जूते बेचने वाली कंपनी हैं, तो सिर्फ जूते बेचकर शांत मत बैठिए। एक ऐसा क्लब बनाइए जहाँ रनिंग टिप्स मिलें, हेल्थ ट्रैक हो और कस्टमर को लगे कि आप उसकी फिटनेस की फिक्र करते हैं। जब कस्टमर को आपसे वैल्यू मिलती रहेगी, तो वह कहीं और जाने की सोचेगा भी नहीं। जो लोग सिर्फ सेल्स के टारगेट पूरे करने में लगे हैं, वे एक दिन खाली हाथ रह जाएंगे। असली पैसा तो रिपीट कस्टमर में है जो आपके पास बार बार आए। इसलिए अपनी ईगो को साइड में रखिए और प्रोडक्ट के बजाय इंसान पर ध्यान दीजिए। याद रखिए, सामान तो कोई भी बेच लेगा, लेकिन भरोसा जीतना हर किसी के बस की बात नहीं है।

जब आप इस रिश्ते को निभाना सीख जाते हैं, तभी आप अगले कदम की ओर बढ़ते हैं जहाँ आपको पता चलता है कि आपका कस्टमर असल में चाहता क्या है। और यह तभी मुमकिन है जब आपके पास सही जानकारी हो, जिसके बारे में हम अगले लेसन में बात करेंगे।


लेसन २ : डेटा की ताकत को पहचानो और कस्टमर के दिमाग को पढ़ो

अगर आप बिना डेटा के बिजनेस चला रहे हैं, तो आप उस ड्राइवर की तरह हैं जो आंखों पर पट्टी बांधकर हाइवे पर गाड़ी दौड़ा रहा है। सुनने में यह थोड़ा फिल्मी लग सकता है, लेकिन सच तो यही है कि पुराने बिजनेस मॉडल में हम अंधेरे में तीर मारते थे। आपने एक लाख साबुन बनाए और मार्केट में फेंक दिए। अब आपको क्या पता कि उसे कौन इस्तेमाल कर रहा है। वह साबुन किसी सुदूर गांव के चाचा इस्तेमाल कर रहे हैं या शहर की कोई मैडम, आपको रत्ती भर भी खबर नहीं होती थी। लेकिन टिएन जुओ कहते हैं कि सब्सक्रिप्शन मॉडल आपको 'सुपर पावर' देता है। यह पावर है अपने कस्टमर को करीब से जानने की। अब आप सिर्फ सामान नहीं बेच रहे, आप जानकारी इकट्ठी कर रहे हैं।

आज के जमाने में डेटा ही असली सोना है। सोचिए, जब आप नेटफ्लिक्स पर कोई फिल्म आधी छोड़ देते हैं, तो उन्हें पता चल जाता है कि आपको वह बोरिंग लगी। जब आप किसी खास तरह के गानों को बार बार सुनते हैं, तो एल्गोरिदम समझ जाता है कि आपका मूड कैसा है। यह कोई जादू नहीं है, यह डेटा का खेल है। जो कंपनियां आज टॉप पर हैं, वे इसलिए नहीं हैं कि उनके पास बहुत पैसा है, बल्कि इसलिए हैं क्योंकि उन्हें आपसे ज्यादा आपके बारे में पता है। वे जानते हैं कि आपको कब भूख लगेगी और आपको कौन सा रंग पसंद आएगा। अगर आप अभी भी यह सोच रहे हैं कि "मुझे डेटा की क्या जरूरत, मेरा बिजनेस तो बढ़िया चल रहा है", तो समझ लीजिए कि आप अपनी बर्बादी के वारंट पर खुद साइन कर रहे हैं।

मान लीजिए आपकी एक कॉफी शॉप है। पुराने तरीके में कोई आया, कॉफी पी और चला गया। आपको उसका नाम तक नहीं पता। लेकिन अगर आप सब्सक्रिप्शन मॉडल अपनाते हैं, तो आपको पता चलेगा कि राहुल नाम का लड़का हर सोमवार सुबह ८ बजे 'कैपुचीनो' पीने आता है। अब आप उसे सोमवार की सुबह एक स्पेशल मैसेज भेज सकते हैं या उसके आने से पहले ही उसकी कॉफी तैयार रख सकते हैं। उसे लगेगा कि आप उसका कितना ख्याल रखते हैं, जबकि आप सिर्फ डेटा का सही इस्तेमाल कर रहे हैं। डेटा का मतलब सिर्फ नंबर्स नहीं होता, इसका मतलब होता है अपने कस्टमर की जरूरतों को उनकी बोलने से पहले ही पूरा कर देना।

भारत में आज हर कोई ऑनलाइन शॉपिंग कर रहा है। कभी सोचा है कि आपको वही विज्ञापन क्यों दिखते हैं जिनकी चीजें आप कल ढूंढ रहे थे। यह डेटा की ही कलाकारी है। जो बिजनेस इस जानकारी को इग्नोर करते हैं, वे उस दुकानदार की तरह हैं जो गर्मी में स्वेटर बेचने की कोशिश कर रहा है। आपको पता होना चाहिए कि हवा किस तरफ बह रही है। सब्सक्राइबड बुक हमें सिखाती है कि हमें अपने प्रोडक्ट को लगातार बेहतर बनाना होगा और यह तभी होगा जब हम फीडबैक लूप में रहेंगे। हर क्लिक, हर व्यू और हर खरीद एक कहानी कहती है। अगर आप उस कहानी को पढ़ना सीख गए, तो आपको सफल होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती।

लेकिन याद रखिए, डेटा होना एक बात है और उसका सही इस्तेमाल करना दूसरी। डेटा का अचार नहीं डालना है, बल्कि उसे एक्शन में बदलना है। अगर आपको पता है कि लोग आपकी सर्विस का एक खास फीचर इस्तेमाल नहीं कर रहे, तो उसे हटा दीजिए। अगर कोई चीज सुपरहिट है, तो उसे और बेहतर बनाइए। बिना डेटा के बिजनेस चलाना मतलब अपनी किस्मत को जुए पर लगाना है। और जो लोग समझदार होते हैं, वे जुआ नहीं खेलते, वे दिमाग लगाते हैं। जब आप डेटा को समझ लेते हैं, तभी आप अपनी कंपनी को एक मॉडर्न मशीन बना पाते हैं।


लेसन ३ : हर कंपनी को एक सॉफ्टवेयर कंपनी की तरह सोचना होगा

अगर आप सोचते हैं कि आप सिर्फ लोहा बेचते हैं, या कपड़ा बेचते हैं, या फिर समोसे बेचते हैं, तो आप अपनी ग्रोथ पर खुद ही ताला लगा रहे हैं। टिएन जुओ इस किताब में एक बहुत बड़ी कड़वी सच्चाई बताते हैं कि भविष्य में हर कंपनी को एक सॉफ्टवेयर कंपनी की तरह काम करना पड़ेगा। अब इसका मतलब यह नहीं है कि आपको कोडिंग सीखनी है या रातों रात इंजीनियर बन जाना है। इसका मतलब यह है कि आपका प्रोडक्ट सिर्फ एक फिजिकल चीज नहीं, बल्कि एक डिजिटल एक्सपीरियंस होना चाहिए। जो लोग इस बात को मजाक में ले रहे हैं, उनके लिए एक मिनट का मौन। क्योंकि नोकिया और कोडक ने भी कभी बदलाव को मजाक में ही लिया था।

सोचिए एक कार कंपनी के बारे में। पुराने जमाने में कार बेची और काम खत्म। लेकिन आज टेस्ला जैसी कंपनियां क्या कर रही हैं। वे कार को एक पहियों वाला आईफोन मानती हैं। अगर कार में कोई दिक्कत आती है या कोई नया फीचर जोड़ना होता है, तो वे कार वापस नहीं बुलाते, बल्कि एक सॉफ्टवेयर अपडेट भेज देते हैं। सुबह जब आप सोकर उठते हैं, तो आपकी कार पहले से बेहतर हो चुकी होती है। इसे कहते हैं सॉफ्टवेयर वाली सोच। अब आप कहेंगे कि भाई मैं तो जूते बेचता हूँ, मैं सॉफ्टवेयर कंपनी कैसे बनूँ। तो जनाब, आप ऐसे जूते बना सकते हैं जो एक ऐप से कनेक्ट हों, जो यूजर के स्टेप्स काउंट करें और जब जूता घिस जाए तो अपने आप नया जोड़ा ऑर्डर करने का सुझाव दें।

भारत के नजरिए से देखें तो हमारे यहाँ के छोटे बिजनेस भी अब डिजिटल हो रहे हैं। एक दूध बेचने वाला भी अब व्हाट्सएप और पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल करके अपने बिजनेस को एक सिस्टम में ढाल रहा है। उसे पता है कि किस घर में कितना दूध जाता है और कब पेमेंट लेनी है। यह भी एक तरह का छोटा सॉफ्टवेयर माइंडसेट ही है। अगर आप अपने काम में टेक्नोलॉजी को नहीं जोड़ेंगे, तो आप उन लाइनों में खड़े मिलेंगे जहाँ लोग सिर्फ शिकायतें करते हैं। आपको एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना होगा जहाँ आपका कस्टमर आपसे डिजिटली जुड़ा रहे। जब आप सॉफ्टवेयर की तरह सोचते हैं, तो आप स्केलेबल हो जाते हैं। यानी आप एक साथ लाखों लोगों को बिना किसी सिरदर्द के सर्विस दे सकते हैं।

कुछ लोग अभी भी फाइलें दबाकर बैठे हैं और सोचते हैं कि उनका बिजनेस अमर है। हकीकत यह है कि अगर आपका बिजनेस किसी के स्मार्टफोन में नहीं है, तो समझो वह दुनिया में ही नहीं है। आपको अपनी सर्विस को इतना आसान और सुलभ बनाना होगा कि यूजर को एक बटन दबाते ही सब मिल जाए। सब्सक्रिप्शन मॉडल तभी कामयाब होता है जब उसके पीछे एक मजबूत डिजिटल ढांचा हो। यह ढांचा ही तय करता है कि कस्टमर आपके साथ टिका रहेगा या किसी और के पास चला जाएगा। याद रखिए, आज का मुकाबला आपके पड़ोस की दुकान से नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे स्मार्ट टेक कंपनियों से है।

इसलिए अपनी सोच की जंग हटाइए और अपने बिजनेस में टेक को अपना दोस्त बनाइए। जब आपकी कंपनी एक सॉफ्टवेयर की तरह अपडेट होना सीख जाएगी, तभी आप मार्केट के लीडर बनेंगे। यह सफर आसान नहीं है, लेकिन जो रिस्क नहीं लेता, वह रिस्क में ही रहता है। अब फैसला आपके हाथ में है कि आपको पुराना कबाड़ बनना है या कल का भविष्य।


तो दोस्तों, टिएन जुओ की बुक सब्सक्राइबड हमें सिखाती है कि दुनिया बदल चुकी है। अब सामान बेचने का नहीं, बल्कि लोगों के साथ जुड़ने और उनकी लाइफ का हिस्सा बनने का वक्त है। अगर आप अभी भी वही घिसे पिटे तरीके अपना रहे हैं, तो रुकिए और सोचिए। क्या आप अपने कस्टमर को सच में जानते हैं। क्या आप उन्हें सिर्फ एक क्लाइंट समझते हैं या एक पार्टनर। इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद, आज ही अपने बिजनेस या काम करने के तरीके में एक छोटा सा डिजिटल बदलाव लाइये। अगर यह जानकारी आपको काम की लगी, तो इसे अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी पुरानी सोच में अटके हैं। कमेंट में बताइए कि आप किस सर्विस का सब्सक्रिप्शन सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। याद रखिए, सब्सक्राइब करेंगे तभी तो आगे बढ़ेंगे।

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