Super Crunchers (Hindi)


अभी भी अपने पुराने घिसे पिटे इंट्यूशन और तुक्कों पर भरोसा कर रहे हैं? मुबारक हो आप अपनी बर्बादी का सामान खुद तैयार कर रहे हैं। जबकि दुनिया नंबर्स और डेटा से खेल रही है आप अभी भी बाबा आदम के जमाने के अंदाजों में फंसे हैं। स्मार्ट बनने का नया तरीका सीख लो वरना पीछे छूट जाओगे।

सुपर क्रंचर्स बुक समरी इन हिंदी के इस आर्टिकल में हम इयान एयर्स की उन सीक्रेट्स को समझेंगे जो आपको डेटा ड्रिवन डिसीजन मेकिंग कैसे करें यह सिखाएंगी। चलिए इन 3 लेसन के जरिए अपनी सोच को अपडेट करते हैं।


लेसन १ : अपने तुक्कों को रिटायरमेंट दें और नंबर्स से दोस्ती करें

क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि आपका गट फीलिंग या वह अंदर वाली आवाज एकदम सही है? जैसे कि आपको पक्का पता है कि आज बारिश होगी या फिर यह नया बिजनेस आइडिया रातों रात आपको करोड़पति बना देगा। सच तो यह है कि आपकी वह अंदर वाली आवाज अक्सर सिर्फ एक शोर होती है। इयान एयर्स अपनी किताब सुपर क्रंचर्स में सबसे पहले इसी भ्रम को तोड़ते हैं। वह कहते हैं कि इंसान का दिमाग पैटर्न ढूंढने में माहिर है लेकिन डेटा के बिना वह पैटर्न अक्सर गलत होते हैं। हम लोग अक्सर अपने पुराने अनुभवों या किसी एक घटना के आधार पर बड़े फैसले ले लेते हैं। इसे ऑथोरिटी बायस या फिर एक्सपर्ट ओपिनियन कहते हैं। लेकिन जनाब वह जमाना गया जब किसी सफेद बाल वाले अंकल ने कह दिया कि बेटा जमीन में पैसा लगा दो तो वही सच होता था। आज के समय में अगर आप नंबर्स को इग्नोर कर रहे हैं तो आप अपनी गाड़ी बिना हेडलाइट के रात में चला रहे हैं। एक्सीडेंट तो होना ही है।

मान लीजिए आपका कोई दोस्त है जो खुद को क्रिकेट का बहुत बड़ा एक्सपर्ट समझता है। वह कहता है कि आज तो यह खिलाडी पक्का शतक मारेगा क्योंकि इसकी चाल ढाल आज बहुत कॉन्फिडेंट लग रही है। अब आप उसकी बात मानकर सट्टा लगा देते हैं और वह खिलाडी पहली बॉल पर डक आउट हो जाता है। क्यों? क्योंकि आपके दोस्त ने सिर्फ अपनी फीलिंग्स पर भरोसा किया। वहीं दूसरी तरफ एक डेटा साइंटिस्ट पिछले दस मैचों के नंबर्स देखता है पिच की कंडीशन चेक करता है और फिर बताता है कि इस खिलाडी के चलने के चांस सिर्फ दस परसेंट हैं। यही फर्क है एक आम इंसान में और एक सुपर क्रंचर में। सुपर क्रंचर्स वह लोग हैं जो अपनी भावनाओं को साइड में रखकर हार्ड डेटा पर भरोसा करते हैं। आज बड़ी-बड़ी कंपनियां जैसे नेटफ्लिक्स या अमेजन आपको वही मूवी या सामान क्यों दिखाती हैं जो आपको पसंद आता है? क्या वहां कोई बाबा बैठे हैं जो आपका चेहरा देखकर बता रहे हैं? नहीं। वहां सुपर क्रंचिंग हो रही है। वह आपके पिछले हर क्लिक और हर सेकंड के बिहेवियर को नंबर्स में बदल चुके हैं।

ह्यूमन माइंड बहुत ही आलसी होता है। वह मुश्किल कैलकुलेशन करने के बजाय एक कहानी बनाना पसंद करता है। हमें लगता है कि हमारे पास बीस साल का अनुभव है तो हम जो कहेंगे वह पत्थर की लकीर होगी। लेकिन डेटा के सामने अनुभव की वैसी ही हालत हो जाती है जैसे किसी पुराने नोकिया फोन के सामने आईफोन की। अगर आप आज के दौर में स्मार्ट दिखना चाहते हैं और असल में तरक्की करना चाहते हैं तो आपको डेटा ड्रिवन डिसीजन मेकिंग कैसे करें यह सीखना ही होगा। बिना नंबर्स के आप सिर्फ एक और इंसान हैं जिसके पास एक राय है। और सच कहूँ तो राय तो आजकल हर किसी के पास मुफ्त में मिल जाती है। असली वैल्यू तो उस इंसान की है जो यह बता सके कि नंबर्स क्या बोल रहे हैं। तो अगली बार जब कोई बड़ा फैसला लेना हो तो अपने दिल की कम और एक्सेल शीट की ज्यादा सुनिए। क्योंकि दिल तो वैसे भी पागल है लेकिन नंबर्स कभी झूठ नहीं बोलते।


लेसन २ : भविष्य को देखने के लिए क्रिस्टल बॉल नहीं बल्कि पुराना डेटा चाहिए

क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग भविष्य के बारे में इतनी सटीक बात कैसे कर लेते हैं? नहीं मैं उन ज्योतिषियों की बात नहीं कर रहा जो आपकी हथेली देखकर बताते हैं कि आपकी शादी कब होगी। मैं बात कर रहा हूँ उन सुपर क्रंचर्स की जो डेटा के दम पर यह बता देते हैं कि अगले साल किस चीज के दाम बढ़ेंगे या कौन सी फिल्म फ्लॉप होगी। इयान एयर्स कहते हैं कि भविष्य कोई रहस्यमयी पहेली नहीं है बल्कि यह बीते हुए कल का एक रिपीटेड वर्जन है। अगर आपके पास पुराना डेटा है तो आप भविष्य के ट्रेंड्स को ऐसे देख सकते हैं जैसे किसी साफ शीशे के आर-पार। हम लोग अक्सर यह गलती करते हैं कि हर नई सिचुएशन को एकदम अनोखा मान लेते हैं। हमें लगता है कि जो आज हो रहा है वह पहले कभी नहीं हुआ। लेकिन नंबर्स की दुनिया में सब कुछ एक पैटर्न है। जो लोग नंबर्स को क्रंच करना जानते हैं वह असल में वक्त से आगे की सोच सकते हैं।

मान लीजिए आप एक रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं और आप अपनी वाइफ के हाथ के बने समोसे के फैन हैं। आप सोचते हैं कि क्योंकि मुझे यह समोसे पसंद हैं तो पूरी दुनिया को पसंद आएंगे और आप लाखों का इन्वेस्टमेंट कर देते हैं। छह महीने बाद पता चलता है कि लोग समोसे नहीं बल्कि पास्ता खाना पसंद कर रहे हैं। यहाँ आपने क्या गलती की? आपने अपने स्वाद को यूनिवर्सल सच मान लिया। वहीं एक सुपर क्रंचर क्या करेगा? वह उस इलाके के पिछले पांच साल के फूड डिलीवरी डेटा को निकालेगा। वह देखेगा कि किस मौसम में लोग क्या ऑर्डर करते हैं और किस उम्र के लोग वहां ज्यादा रहते हैं। वह बिना एक भी समोसा तले यह बता देगा कि आपका बिजनेस चलेगा या नहीं। लोग इसे जादू कह सकते हैं लेकिन यह सिर्फ शुद्ध गणित है। डेटा एनालिसिस से सक्सेस कैसे पायें इसका सबसे बड़ा राज यही है कि आप अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर अंधेरे में तीर मारना बंद करें।

अक्सर हमें लगता है कि बहुत जटिल समस्याओं के लिए बहुत जटिल समाधान चाहिए। लेकिन सुपर क्रंचर्स हमें सिखाते हैं कि सिंपल रिग्रेशन और डेटा माइनिंग से हम उन चीजों का अंदाजा लगा सकते हैं जो एक आम इंसान की सोच से बाहर हैं। क्या आपको पता है कि आपकी क्रेडिट कार्ड कंपनी को आपसे पहले पता चल जाता है कि आपका डिवोर्स होने वाला है? डरावना है न? लेकिन यह सच है। वह आपके खर्च करने के बदलते पैटर्न को देखते हैं और उनके नंबर्स उन्हें अलर्ट दे देते हैं। वह यह नहीं देखते कि आप दुखी हैं या नहीं वह सिर्फ यह देखते हैं कि आपने अचानक से नए कपड़ों या जिम मेंबरशिप पर खर्च करना क्यों शुरू कर दिया। जब आप नंबर्स को इस गहराई से समझने लगते हैं तो आप सिर्फ एक ऑब्जर्वर नहीं बल्कि एक प्रेडिक्टर बन जाते हैं। स्मार्ट बनने का नया तरीका यही है कि आप हवा में बातें करना छोड़ें और फैक्ट्स पर गौर करें। भविष्य उन्हीं का है जो डेटा को डिकोड करना जानते हैं।


लेसन ३ : बड़े बड़े एक्सपर्ट्स को टाटा बाय बाय बोलिए क्योंकि डेटा ही असली बॉस है

हम एक ऐसी दुनिया में पले बढ़े हैं जहाँ हमें सिखाया गया है कि 'अनुभव' ही सब कुछ है। जब भी हमें कोई सलाह चाहिए होती है हम उस इंसान के पास भागते हैं जिसके सिर के बाल सफेद हो चुके होते हैं। हमें लगता है कि अगर किसी ने तीस साल तक एक ही काम किया है तो वह कभी गलत नहीं हो सकता। लेकिन इयान एयर्स अपनी इस किताब में एक कड़वा सच बताते हैं। वह कहते हैं कि डेटा के इस दौर में एक्सपर्ट्स के ओपिनियन अक्सर पक्षपाती और गलत होते हैं। एक एक्सपर्ट अपनी पुरानी यादों और ईगो के जाल में फंसा होता है। जबकि डेटा को आपकी ईगो से कोई लेना देना नहीं होता। वह तो बस वह सच दिखाता है जो सामने है। आज के समय में एक्सपर्ट्स की हार इसलिए हो रही है क्योंकि वह बदलते हुए नंबर्स को स्वीकार नहीं कर पाते। वह अपनी पुरानी थ्योरीज को पकड़कर बैठे रहते हैं जबकि दुनिया सुपर क्रंचिंग की मदद से काफी आगे निकल चुकी होती है।

एक बड़ा ही मजेदार किस्सा वाइन एक्सपर्ट्स का है। सालों से कुछ बड़े वाइन चखने वाले एक्सपर्ट्स यह बताते आ रहे थे कि कौन सी वाइन सबसे अच्छी है और किसकी कीमत ज्यादा होनी चाहिए। वह इसे एक आर्ट मानते थे जिसे सिर्फ कुछ ही लोग समझ सकते हैं। फिर मैदान में आए एक सुपर क्रंचर जिन्होंने सिर्फ मौसम के डेटा जैसे बारिश की मात्रा और टेम्परेचर का इस्तेमाल करके एक गणितीय फार्मूला बनाया। उस फार्मूले ने वाइन को चखे बिना ही यह बता दिया कि कौन सी वाइन फ्यूचर में महंगी बिकेगी। सारे एक्सपर्ट्स ने उनका मजाक उड़ाया। लेकिन जानते हैं क्या हुआ? कुछ सालों बाद जब वह वाइन तैयार हुई तो उस फार्मूले की प्रेडिक्शन एक्सपर्ट्स के ओपिनियन से कहीं ज्यादा सटीक निकली। एक्सपर्ट्स को लगा कि उनकी बेइज्जती हो गई है लेकिन सच तो यह था कि नंबर्स ने उनकी बरसों की मेहनत को एक सेकंड में मात दे दी थी। यही पावर है थिंकिंग बाय नंबर्स की जो आपको भीड़ से अलग खड़ा करती है।

तो क्या इसका मतलब यह है कि इंसानी दिमाग की कोई वैल्यू नहीं है? बिल्कुल है लेकिन वह वैल्यू तब बढ़ जाती है जब आप उसे डेटा के साथ जोड़ देते हैं। इयान एयर्स हमें यह नहीं कह रहे कि हम मशीन बन जाएं। वह बस यह कह रहे हैं कि अपनी लिमिटेड बुद्धि के भरोसे करोड़ों का दांव न खेलें। बिजनेस में नंबर्स की ताकत को समझना अब एक ऑप्शन नहीं बल्कि जरूरत बन गया है। आज के दौर का असली लीडर वह नहीं है जिसके पास सबसे ज्यादा तजुर्बा है बल्कि वह है जिसके पास सबसे सटीक डेटा है और उसे पढ़ने की काबिलियत है। अगर आप अब भी अपनी फीलिंग्स के आधार पर फैसले ले रहे हैं तो आप अपनी सक्सेस को किस्मत के भरोसे छोड़ रहे हैं। याद रखिये किस्मत कभी भी बदल सकती है लेकिन डेटा हमेशा सॉलिड रहता है। इसलिए एक्सपर्ट्स की बातों को गौर से सुनें पर अपना आखिरी फैसला हमेशा डेटा की कसौटी पर परख कर ही लें। डेटा ही आज का असली भगवान है।


दोस्तों, सुपर क्रंचर्स सिर्फ एक किताब नहीं है बल्कि यह आपकी सोच को रिबूट करने का एक सॉफ्टवेयर है। हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ जानकारी की कोई कमी नहीं है बस उसे समझने का नजरिया चाहिए। अगर आप आज भी डेटा की ताकत को नजरअंदाज कर रहे हैं तो यकीन मानिए आप खुद को पीछे धकेल रहे हैं। अपनी जिंदगी के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े फैसलों में नंबर्स को जगह दीजिये। क्या आप अपनी लाइफ में कोई ऐसा फैसला लेने वाले हैं जहाँ आप कन्फ्यूज्ड हैं? नीचे कमेंट में बताइये कि क्या आप उस फैसले के लिए डेटा की मदद लेंगे या फिर वही पुराना गट फीलिंग वाला रास्ता अपनाएंगे? इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो अभी भी सिर्फ किस्मत के भरोसे बैठे हैं। चलिए मिलकर स्मार्ट बनते हैं और डेटा की इस लहर पर सवार होते हैं।

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