Talent Is Never Enough (Hindi)


क्या आपको भी लगता है कि आपका 'टैलेंट' आपको दुनिया का अगला सुपरस्टार बना देगा। अगर हाँ, तो मुबारक हो, आप एक बहुत बड़े भ्रम में जी रहे हैं। बिना सही चॉइस के आपका टैलेंट सिर्फ एक कबाड़ है जो आपको कभी उस आलीशान जिंदगी तक नहीं ले जाएगा जिसका आप सपना देखते हैं।

इस आर्टिकल में हम जॉन सी मैक्सवेल की बुक टैलेंट इस नेवर इनफ से वो ३ कीमती लेसन सीखेंगे जो आपके टैलेंट को असली रिजल्ट्स में बदल देंगे। चलिए समझते हैं कि सिर्फ टैलेंटेड होना आपकी सबसे बड़ी हार कैसे बन सकता है।


लेसन १ : बिलीव लिफ्ट्स योर टैलेंट (आपका भरोसा ही आपके टैलेंट की असली ताकत है)

क्या आपको सच में लगता है कि आपके पास बहुत टैलेंट है। अगर हाँ, तो बधाई हो, आप उन करोड़ों लोगों में शामिल हैं जो बस यही सोचकर घर बैठे हैं कि एक दिन दुनिया उन्हें खुद ढूँढते हुए आएगी। जॉन सी मैक्सवेल अपनी किताब में बहुत साफ़ कहते हैं कि टैलेंट तो बस एक शुरुआत है। असली खेल तो इस बात का है कि आपको अपने उस टैलेंट पर भरोसा कितना है। अब आप कहेंगे कि भाई भरोसा तो बहुत है, बचपन में स्कूल के फंक्शन में डांस किया था तब से ही खुद को ऋतिक रोशन समझ रहा हूँ। लेकिन दोस्त, ये वो वाला फिल्मी भरोसा नहीं है।

असली भरोसे का मतलब है वो ताकत जो आपके टैलेंट को जमीन से उठाकर आसमान तक ले जाए। मान लीजिए आपके पास दुनिया की सबसे महँगी फेरारी कार है। लाल रंग की, चमकती हुई, एकदम झकास। लेकिन अगर उस कार में पेट्रोल ही नहीं है, तो वो कार आपके गैराज की शोभा बढ़ाने के अलावा और क्या करेगी। कुछ नहीं। आपका टैलेंट वो फेरारी कार है और आपका खुद पर विश्वास वो पेट्रोल है। बिना पेट्रोल के वो कार सिर्फ लोहे का एक डिब्बा है। वैसे ही बिना भरोसे के आपका टैलेंट सिर्फ एक ठंडी पड़ी राख है।

हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग हैं जो बहुत टैलेंटेड हैं। कोई बहुत अच्छा गाता है, कोई कोडिंग में उस्ताद है, तो कोई गजब की पेंटिंग बनाता है। लेकिन फिर भी वो लोग अपनी लाइफ में वहीं के वहीं खड़े हैं। क्यों। क्योंकि उन्हें लगता है कि शायद वो इस बड़े मंच के काबिल नहीं हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने कोशिश की और फेल हो गए तो लोग क्या कहेंगे। ये जो 'लोग क्या कहेंगे' वाली बीमारी है न, ये आपके टैलेंट को दीमक की तरह खा जाती है। आप अपने टैलेंट को एक पिंजरे में बंद करके रखते हैं और उम्मीद करते हैं कि वो उड़कर बाज़ बन जाएगा। भाई, बाज़ बनने के लिए पहले पिंजरा खोलना पड़ता है और खुद पर ये यकीन करना पड़ता है कि आपके पंख हवा का दबाव झेल सकते हैं।

कुछ लोग तो इतने कॉन्फिडेंट होते हैं कि उन्हें लगता है कि वो सिर्फ अपनी शक्ल दिखाकर ही इंटरव्यू क्लियर कर लेंगे। ये भरोसा नहीं, ये ओवर-कॉन्फिडेंस है। असली भरोसा वो है जब आपको पता हो कि आपके पास हुनर है और आप उस हुनर को निखारने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। जब आप खुद पर यकीन करते हैं, तब आपका टैलेंट अपनी लिमिट्स को तोड़ देता है। आप वो काम भी कर जाते हैं जो कल तक आपको नामुमकिन लगते थे।

सोचिए, अगर सचिन तेंदुलकर को खुद पर भरोसा नहीं होता कि वो इंटरनेशनल बॉलर्स को खेल सकते हैं, तो क्या वो आज क्रिकेट के भगवान होते। नहीं न। उनके पास टैलेंट था, लेकिन उस टैलेंट को मैदान पर उतारने के लिए जिस जिगर की जरूरत थी, वो उनके अटूट विश्वास से आया था। इसलिए, अगर आप भी अपने टैलेंट को एक नई ऊँचाई पर देखना चाहते हैं, तो पहले अपनी सोच के दायरे को बड़ा कीजिये। अपने टैलेंट को अपनी चॉइस का साथ दीजिये। क्योंकि जब तक आप खुद अपनी वैल्यू नहीं समझेंगे, ये दुनिया आपको फूटी कौड़ी भी नहीं देगी।


लेसन २ : प्रिपरेशन फोकसिस योर टैलेंट (तैयारी आपके टैलेंट को सही निशाना देती है)

अब मान लीजिए आपके पास भरोसा तो कूट-कूट कर भरा है। आप सुबह उठते ही आईने में खुद को देखते हैं और कहते हैं कि आज तो मैं आग लगा दूँगा। लेकिन भाई, आग लगाने के लिए माचिस और मिट्टी के तेल की तैयारी भी तो करनी पड़ती है न। जॉन सी मैक्सवेल कहते हैं कि बिना तैयारी के टैलेंट वैसा ही है जैसे एक बिना लगाम का घोड़ा। वो दौड़ तो बहुत तेज सकता है, लेकिन किस तरफ जाएगा, ये किसी को नहीं पता। हो सकता है वो आपको सीधे किसी खाई में ले जाकर गिरा दे। तैयारी वो लगाम है जो आपके टैलेंट को भटकने नहीं देती।

अक्सर हम उन लोगों को देखकर जलते हैं जो रातों-रात स्टार बन जाते हैं। हमें लगता है कि यार इसकी किस्मत कितनी अच्छी है, क्या टैलेंट है बंदे में। लेकिन हम उस 'रातों-रात' के पीछे की उन हजारों रातों को नहीं देखते जो उस बंदे ने तैयारी में बिताई होती हैं। बिना तैयारी के मैदान में उतरना वैसा ही है जैसे बिना हेलमेट और बिना बैट के शोएब अख्तर की गेंद का सामना करना। वहाँ आपका टैलेंट सिर्फ आपको अस्पताल के बेड तक पहुँचाएगा, बाउंड्री के पार नहीं। तैयारी आपके टैलेंट को एक स्ट्रक्चर देती है। वो आपको बताती है कि कब शॉट मारना है और कब बॉल को छोड़ देना है।

हमारे यहाँ इंडिया में एक बहुत बड़ी समस्या है। हम हर चीज 'जुगाड़' से करना चाहते हैं। हमें लगता है कि ऐन मौके पर कुछ न कुछ तो कर ही लेंगे। एग्जाम की रात को पूरी किताब खत्म करने का जो टैलेंट हमारे अंदर है, वो हमें लगता है कि जिंदगी के हर मोड़ पर काम आएगा। लेकिन दोस्त, लाइफ कोई कॉलेज का एग्जाम नहीं है जहाँ आप रट्टा मारकर पास हो जाएंगे। यहाँ कॉम्पिटिशन उन लोगों से है जो तब भी प्रैक्टिस कर रहे थे जब आप सो रहे थे। तैयारी का मतलब सिर्फ ये नहीं है कि आप काम करना जानते हैं, इसका मतलब ये है कि आप उस काम को हर मुश्किल हालात में करना जानते हैं।

सोचिये एक ऐसे सर्जन के बारे में जिसे बहुत टैलेंटेड माना जाता है। लेकिन वो ऑपरेशन थिएटर में जाने से पहले केस स्टडी ही नहीं करता। वो कहता है कि अरे मैं तो बहुत टैलेंटेड हूँ, सीधा चीरा लगा दूँगा। क्या आप ऐसे डॉक्टर से अपना इलाज करवाएंगे। बिलकुल नहीं। क्योंकि टैलेंट के साथ जब तैयारी नहीं जुड़ती, तो वो रिस्की बन जाता है। तैयारी आपको कॉन्फिडेंस देती है और आपके डर को खत्म करती है। जब आप तैयार होते हैं, तो आप किस्मत के भरोसे नहीं बैठते। आप खुद अपनी किस्मत लिखते हैं।

तैयारी का मतलब है अपने टैलेंट को रोज घिसना। अगर आप एक राइटर हैं, तो रोज लिखना पड़ेगा। अगर आप एक कोडर हैं, तो रोज लॉजिक बनाने पड़ेंगे। ये मत सोचिये कि जब बड़ा प्रोजेक्ट आएगा तब अपना टैलेंट दिखा दूँगा। बड़ा प्रोजेक्ट उन्हीं के पास आता है जो छोटे-छोटे कामों में अपनी तैयारी पक्की रखते हैं। याद रखिये, जब मौका दरवाजे पर दस्तक देता है, तो वो ये नहीं पूछता कि क्या आप तैयार हैं। वो बस आता है और अगर आप तैयार नहीं हैं, तो वो पड़ोस वाले के पास चला जाता है जो शायद आपसे कम टैलेंटेड था लेकिन पूरी तैयारी के साथ बैठा था। इसलिए अपने टैलेंट को तैयारी का चश्मा पहनाइये ताकि उसे अपना लक्ष्य साफ़ नजर आए।


लेसन ३ : परसवेरेंस सस्टेन्स योर टैलेंट (लगातार टिके रहने की जिद ही आपके टैलेंट को बचाती है)

अब आपके पास भरोसा भी है और आपने तैयारी भी चकाचक कर ली है। लेकिन क्या आपको लगता है कि इतना काफी है। बिलकुल नहीं। लाइफ कोई १०० मीटर की रेस नहीं है जिसे आप एक बार में जोश दिखाकर जीत लेंगे। ये एक लंबी मैराथन है। यहाँ टैलेंट आपको स्टार्टिंग लाइन पर तो खड़ा कर सकता है, लेकिन फिनिशिंग लाइन पार करवाने के लिए आपको 'परसवेरेंस' यानी लगातार टिके रहने की जिद चाहिए होगी। जॉन सी मैक्सवेल कहते हैं कि बहुत से टैलेंटेड लोग आधे रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं क्योंकि उनमें टिके रहने का दम नहीं होता।

आजकल के जमाने में हमें सब कुछ 'इंस्टेंट' चाहिए। २ मिनट में नूडल्स, १० सेकंड में रील और एक महीने में करोड़पति बनने का सपना। अगर दो बार कोशिश करने के बाद रिजल्ट नहीं मिला, तो हम अपना टैलेंट समेटकर बैठ जाते हैं और किस्मत को कोसने लगते हैं। भाई, अगर एडिसन ने १० बार फेल होने के बाद हार मान ली होती, तो शायद आज हम मोमबत्ती जलाकर ये आर्टिकल पढ़ रहे होते। टैलेंट एक चिंगारी की तरह है, लेकिन उस चिंगारी को मशाल बनाए रखने के लिए आपको लगातार मेहनत का घी डालना पड़ता है। मुश्किलें तो आएंगी ही, क्योंकि दुनिया का काम ही है आपके रास्ते में कांटे बिछाना। अब ये आपके ऊपर है कि आप उन कांटों पर नाचते हैं या वहीं बैठकर रोने लगते हैं।

जरा उन लोगों को देखिये जो नए साल पर जिम ज्वाइन करते हैं। पहले दिन वो पूरे टैलेंट के साथ डंबल उठाते हैं, इंस्टाग्राम पर फोटो डालते हैं—'नो पेन नो गेन'। लेकिन तीसरे दिन जब शरीर का कोना-कोना दर्द करने लगता है, तो उनका सारा टैलेंट सोफे पर लेटकर चिप्स खाने में निकल जाता है। यही अंतर है एक टैलेंटेड इंसान और एक कामयाब इंसान में। कामयाब इंसान तब भी काम करता है जब उसका मन नहीं होता, जब उसे लग रहा होता है कि सब कुछ बेकार है।

परसवेरेंस का मतलब ये नहीं है कि आप पागलों की तरह एक ही दीवार पर सिर मारते रहें। इसका मतलब है कि आप अपनी चॉइस पर अडिग रहें और हर हार से एक नया लेसन सीखें। जब आप बार-बार गिरकर खड़े होते हैं, तो आपका टैलेंट और भी ज्यादा निखर कर बाहर आता है। वो पत्थर जो छैनी की मार नहीं सह सकता, वो कभी मूरत नहीं बनता। वैसे ही वो टैलेंट जो रिजेक्शन और फेलियर की मार नहीं सह सकता, वो कभी लेजेंड नहीं बनता।

अंत में, बात बस इतनी सी है कि टैलेंट आपको भीड़ से अलग तो दिखा सकता है, लेकिन उस भीड़ से आगे निकलने के लिए आपको अपनी चॉइस को मजबूत करना होगा। भरोसा रखिये, तैयारी कीजिये और तब तक मत रुकिए जब तक मंजिल मिल न जाए। क्योंकि दुनिया सिर्फ उगते हुए सूरज को सलाम करती है और उगने के लिए तपना पड़ता है। अब फैसला आपका है—क्या आप सिर्फ एक टैलेंटेड फेलियर बनकर रहना चाहते हैं या अपनी चॉइस से अपनी तकदीर बदलना चाहते हैं। उठिये, अपने टैलेंट को सही दिशा दीजिये और आज से ही काम पर लग जाइये।


टैलेंट भगवान का दिया हुआ गिफ्ट है, लेकिन उस टैलेंट का सही इस्तेमाल करना आपका भगवान को दिया हुआ गिफ्ट है। कमेंट्स में मुझे जरूर बताएं कि आप अपने टैलेंट को निखारने के लिए आज कौन सी एक नई चॉइस करने वाले हैं। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो बहुत टैलेंटेड तो है लेकिन बस आलस की वजह से पीछे छूटा हुआ है। चलिए, साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं।

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