The 4 Disciplines of Execution (Hindi)


आप अपनी लाइफ में बहुत बिजी हैं पर फिर भी कहीं नहीं पहुँच रहे क्योंकि आप उन गधों की तरह मेहनत कर रहे हैं जिन्हें लगता है कि हर काम जरूरी है। मुबारक हो आप सिर्फ शोर मचा रहे हैं और असली गोल्स आपसे कोसों दूर भाग रहे हैं।

आज हम द ४ डिसिप्लिन्स ऑफ़ एक्जीक्यूशन बुक से वो सीक्रेट्स समझेंगे जो आपकी मेहनत को रिजल्ट्स में बदल देंगे। चलिए इन ३ पावरफुल लेसन को गहराई से समझते हैं जो आपकी काम करने की स्टाइल को पूरी तरह बदल देंगे।


लेसन १ : सबसे जरूरी गोल पर फोकस करना

हम सब की लाइफ में एक ही बीमारी है और वो है सबकुछ एक साथ पाने की चाहत। आप चाहते हैं कि आप जिम भी चले जाएं और ऑफिस में प्रमोशन भी मिल जाए और साथ ही साथ गिटार बजाना भी सीख लें। पर सच तो ये है कि जब आप हर चीज को इम्पोर्टेन्ट बना देते हैं तो असल में कुछ भी इम्पोर्टेन्ट नहीं रह जाता। द ४ डिसिप्लिन्स ऑफ़ एक्जीक्यूशन का पहला लेसन यही है कि अपने वाइल्डली इम्पोर्टेन्ट गोल यानी डब्ल्यूआईजी को पहचानो। ये वो एक या दो काम हैं जिनके बिना आपकी बाकी सारी मेहनत बेकार है।

इमेजिन करिए कि आप एक किचन में खड़े हैं जहाँ १० प्रेशर कुकर एक साथ सीटी मार रहे हैं। आप पागल हो जाएंगे कि कौन सा पहले उतारना है। हमारी लाइफ भी ऐसी ही है। हम रोजमर्रा के छोटे मोटे कामों के चक्रव्यूह में फंसे रहते हैं जिसे इस बुक में भंवर यानी व्हर्लविंड कहा गया है। ये व्हर्लविंड वो ईमेल हैं जो कभी खत्म नहीं होते या वो मीटिंग्स जिनका कोई मतलब नहीं होता। अगर आप इस भंवर से बाहर निकलकर किसी एक बड़े गोल पर फोकस नहीं करेंगे तो साल के अंत में आप वहीं खड़े होंगे जहाँ से शुरू किया था।

मान लीजिए आपकी एक दुकान है और आप चाहते हैं कि कस्टमर बढ़ें और दुकान की सफाई भी अच्छी हो और बिजली का बिल भी कम आए। अब अगर आप सारा दिन झाड़ू लगाने और लाइट बंद करने में निकाल देंगे तो नया कस्टमर खाक आएगा। यहाँ आपका वाइल्डली इम्पोर्टेन्ट गोल सिर्फ और सिर्फ सेल्स बढ़ाना होना चाहिए। बाकी सब चीजें जरूरी हो सकती हैं पर वो आपको अमीर नहीं बनाएंगी।

ज्यादातर लोग फेल इसलिए नहीं होते कि वो मेहनत नहीं करते बल्कि इसलिए होते हैं क्योंकि वो अपनी एनर्जी को १०० अलग दिशाओं में फैला देते हैं। ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक साथ ५ शादियों में जाने की कोशिश करें। आप किसी भी शादी में पनीर टिक्का शांति से नहीं खा पाएंगे और एंड में भूखे ही घर लौटेंगे। इसलिए अगर आपको असली प्रोग्रेस चाहिए तो आपको बाकी ९९ चीजों को ना कहना सीखना होगा ताकि आप उस १ चीज को हाँ कह सकें जो सच में आपकी लाइफ बदल सकती है।

क्या आपने कभी सोचा है कि आप दिन भर पागलों की तरह काम करते हैं पर फिर भी रात को सोते वक्त ऐसा क्यों लगता है कि कुछ खास हासिल नहीं हुआ। इसका जवाब यही है कि आप व्हर्लविंड के शिकार हैं। सक्सेसफुल लोग वो नहीं होते जो सबसे ज्यादा काम करते हैं बल्कि वो होते हैं जो सही काम पर अपनी पूरी जान लगा देते हैं। अब चॉइस आपकी है कि आप हर तरफ हाथ पैर मारना चाहते हैं या फिर लेजर की तरह एक ही पॉइंट पर फोकस करके पत्थर को भी काटना चाहते हैं।


लेसन २ : लीड मेजर्स पर दांव लगाना

अगर पहला लेसन यह था कि कहाँ पहुँचना है तो दूसरा लेसन यह है कि वहाँ कैसे पहुँचना है। ज्यादातर लोग अपनी पूरी लाइफ रिजल्ट्स को घूरने में निकाल देते हैं। इसे बुक की भाषा में लैग मेजर्स कहते हैं। जैसे कि महीने के एंड में आपका वजन कितना कम हुआ या आपके बैंक बैलेंस में कितने पैसे बढ़े। अब मजे की बात ये है कि जब तक आपको ये नंबर्स पता चलते हैं तब तक आप उनके बारे में कुछ नहीं कर सकते। वो पास्ट बन चुके होते हैं। आप वजन वाली मशीन पर खड़े होकर चीखने चिल्लाने से वजन कम नहीं कर सकते।

यहीं एंट्री होती है लीड मेजर्स की। ये वो छोटे छोटे और डेली वाले काम हैं जिन्हें आप कंट्रोल कर सकते हैं और जो सीधे आपके रिजल्ट को बदल देते हैं। अगर वजन कम करना आपका गोल है तो रोज कितने कदम चले और कितनी कैलोरी खाई ये आपके लीड मेजर्स हैं। अगर आप इन पर कंट्रोल कर लेंगे तो रिजल्ट अपने आप झक मारकर आपके पीछे आएगा। पर हम इंडियन्स की आदत है कि हम सीधा फल की चिंता करते हैं और पेड़ को पानी देना भूल जाते हैं।

मान लीजिए आप किसी को इम्प्रेस करने के लिए डेट पर जा रहे हैं। अब डेट कैसी रही ये तो एंड में पता चलेगा यानी ये एक लैग मेजर है। लेकिन आप कितनी अच्छी खुशबू लगा रहे हैं और आप कितनी घटिया जोक्स मारना कम करते हैं ये आपके हाथ में है। अगर आप अपने लीड मेजर्स यानी अपनी हरकतों पर काबू रखेंगे तो डेट हिट होने के चांस बढ़ जाएंगे। लेकिन अगर आप पूरे टाइम सिर्फ यही सोचते रहे कि ये मुझे पसंद करेगी या नहीं तो आप पक्का कुछ न कुछ रायता फैला देंगे।

ऑफिस में भी यही होता है। बॉस चिल्लाता है कि सेल्स कम है पर कोई ये नहीं देखता कि सेल्स कॉल कितनी हुईं। लोग सिर्फ उस मरे हुए हाथी यानी पुराने डेटा को देखते रहते हैं जो अब किसी काम का नहीं है। आपको अपनी एनर्जी उन चीजों पर लगानी है जो फ्यूचर को बदल सकें। लीड मेजर्स प्रेडिक्टिव होते हैं यानी वो आपको पहले ही बता देते हैं कि आप जीतने वाले हैं या हारने वाले हैं।

असल में लीड मेजर्स पर काम करना बोरिंग होता है। रोज वही हेल्दी खाना खाना या रोज क्लाइंट्स को फोन करना किसी को पसंद नहीं आता। हमें तो बस वो जादुई रिजल्ट चाहिए जो रातों रात हमें स्टार बना दे। पर ये बुक हमें बहुत बेबाकी से समझाती है कि अगर आप लीड मेजर्स को इग्नोर करेंगे तो आप बस एक उम्मीद के सहारे जी रहे हैं और उम्मीद कोई स्ट्रेटेजी नहीं होती। इसलिए आज से ही अपने उन २ या ३ लीड मेजर्स को चुनिए जो आपके वाइल्डली इम्पोर्टेन्ट गोल को हकीकत बना सकें।


लेसन ३ : अपना स्कोरबोर्ड और जवाबदेही

मान लीजिए आप गली में क्रिकेट खेल रहे हैं और कोई रन नहीं गिन रहा है। क्या आपको उस मैच में मजा आएगा। बिल्कुल नहीं। आप बस बल्ला घुमाएंगे और घर चले जाएंगे। लेकिन जैसे ही कोई कहता है कि २ बॉल पर १० रन चाहिए तो अचानक सबकी जान निकल आती है और फोकस बढ़ जाता है। लाइफ और बिजनेस में भी यही लॉजिक काम करता है। तीसरा लेसन कहता है कि एक ऐसा स्कोरबोर्ड बनाओ जिसे देखकर कोई भी बच्चा बता सके कि आप जीत रहे हैं या हार रहे हैं। अगर आपके पास स्कोरबोर्ड नहीं है तो आप सिर्फ काम कर रहे हैं पर आप खेल नहीं रहे हैं।

ज्यादातर कंपनियों में डेटा इतना पेचीदा होता है कि उसे समझने के लिए नासा के साइंटिस्ट बुलाने पड़ें। लेकिन ये बुक कहती है कि आपका स्कोरबोर्ड सिंपल और विजुअल होना चाहिए। जब आप अपनी प्रोग्रेस को अपनी आँखों के सामने देखते हैं तो आपके अंदर का वो कॉम्पिटिटिव इंसान जाग जाता है जो हारना पसंद नहीं करता। बिना स्कोरबोर्ड के इंसान उस ड्राइवर की तरह है जो आंखें बंद करके गाड़ी चला रहा है और उम्मीद कर रहा है कि वो सही जगह पहुँच जाएगा। ये उम्मीद नहीं बल्कि खुदकुशी का प्लान है।

मान लीजिए आप पैसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर आप सिर्फ मन में सोचेंगे तो महीने के एंड में आप अपनी सेविंग्स को पार्टी में उड़ा देंगे। लेकिन अगर आपके फ्रिज पर एक चार्ट लगा हो जहाँ हर हफ्ते की सेविंग्स लाल या हरे रंग से मार्क की गई हो तो आपको पिज्जा आर्डर करते वक्त शर्म आएगी। वो स्कोरबोर्ड आपको सच बताता रहेगा कि आप अपने सपनों के साथ वफादार हैं या गद्दारी कर रहे हैं।

और सिर्फ स्कोरबोर्ड काफी नहीं है इसके बाद आती है जवाबदेही यानी कैडेंस ऑफ़ एकाउंटेबिलिटी। इसका मतलब है हर हफ्ते एक छोटी सी मीटिंग जहाँ आप अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट देते हैं। ये वो वक्त है जब आप बहाने नहीं बल्कि रिजल्ट्स टेबल पर रखते हैं। हम इंडियन्स को बहाने बनाने में महारत हासिल है जैसे कि लाइट चली गई थी या इंटरनेट स्लो था। लेकिन जब आप अपने साथियों के सामने खड़े होकर अपना स्कोर बताते हैं तो आपकी ईगो आपको झूठ बोलने से रोकती है।

ये तीनों लेसन एक साथ मिलकर एक चेन की तरह काम करते हैं। पहले आपने अपना सबसे जरूरी लक्ष्य चुना फिर आपने उन छोटे एक्शन पर ध्यान दिया जो रिजल्ट बदल सकते हैं और अब आप एक स्कोरबोर्ड के जरिए खुद को ट्रैक कर रहे हैं। ये एक फिल्म की तरह है जहाँ हीरो को पता है कि विलेन कौन है और उसे मारने के लिए उसे रोज ट्रेनिंग करनी है और अंत में जीतना ही है। अगर आप इसमें से एक भी कड़ी तोड़ेंगे तो आपकी सक्सेस की कहानी अधूरी रह जाएगी।

अब वक्त आ गया है कि आप खुद से एक कड़वा सवाल पूछें। क्या आप वाकई अपने गोल्स को लेकर सीरियस हैं या आप बस बिजी होने का नाटक कर रहे हैं। लाइफ बहुत छोटी है और इसे व्हर्लविंड यानी फालतू के कामों में बर्बाद करना सबसे बड़ी बेवकूफी है। उठिए अपना स्कोरबोर्ड बनाइए और दुनिया को दिखा दीजिए कि आप यहाँ सिर्फ भीड़ का हिस्सा बनने नहीं बल्कि लीड करने आए हैं। याद रखिए एक्जीक्यूशन ही वो इकलौती चीज है जो एक सपने देखने वाले और एक विनर के बीच का अंतर तय करती है।


अगर आप भी अपनी लाइफ में सिर्फ भाग रहे हैं पर कहीं पहुँच नहीं रहे हैं तो आज ही अपना एक वाइल्डली इम्पोर्टेन्ट गोल कमेंट में लिखें। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ शेयर करें जो हमेशा बिजी रहता है पर जिसके पास दिखाने के लिए कोई रिजल्ट नहीं है। चलिए साथ मिलकर इस भंवर से बाहर निकलते हैं और असली सक्सेस को गले लगाते हैं।

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