The 5 Mistakes Every Investor Makes and How to Avoid Them (Hindi)


क्या आप भी अपनी गाढ़ी कमाई को स्टॉक मार्केट के गड्ढे में फेंकने का शौक रखते हैं। मुबारक हो क्योंकि आप उन नब्बे परसेंट लोगों में शामिल हैं जो बिना दिमाग लगाए मार्केट में पैसा लुटा रहे हैं और फिर किस्मत को कोसते हैं। आपकी यह बेवकूफी आपको कभी अमीर नहीं बनने देगी।

आज हम पीटर मलौक की किताब से उन पांच बड़ी गलतियों के बारे में जानेंगे जो एक आम इन्वेस्टर को कंगाल बना देती हैं। इन लेसन्स को समझकर आप न केवल अपना पैसा बचा पाएंगे बल्कि उसे सही तरीके से बढ़ाना भी सीखेंगे। चलिए शुरू करते हैं।


लेसन १ : मार्केट टाइमिंग के चक्कर में खुद को बर्बाद करना

ज्यादातर लोग शेयर मार्केट में ऐसे कदम रखते हैं जैसे वो कोई ज्योतिष हों। उन्हें लगता है कि वो जानते हैं कि कल सुबह सेंसेक्स ऊपर जाएगा या नीचे गिरेगा। पीटर मलौक कहते हैं कि यह सबसे बड़ी गलतफहमी है जो एक इन्वेस्टर पाल सकता है। लोग टीवी खोलकर बैठ जाते हैं और उन एक्सपर्ट्स की बातें सुनते हैं जो खुद कल की भविष्यवाणी करने में फेल हो चुके हैं। मार्केट को टाइम करने की कोशिश करना वैसा ही है जैसे आप तेज बारिश में बिना छाते के यह सोचकर बाहर निकलें कि आप बूंदों के बीच से बचकर निकल जाएंगे। यह नामुमकिन है।

असल में होता यह है कि जब मार्केट ऊपर भाग रहा होता है तब सबको लगता है कि यही सही समय है पैसा लगाने का। लालच आंखों पर पट्टी बांध देता है। और जैसे ही मार्केट थोड़ा सा गिरता है वही लोग डर के मारे अपना सब कुछ बेचकर भाग जाते हैं। आप महंगे में खरीदते हैं और सस्ते में बेचते हैं। क्या यह बिजनेस करने का सही तरीका है। बिलकुल नहीं। पीटर मलौक समझाते हैं कि मार्केट में पैसा वह नहीं कमाता जो सही समय का इंतजार करता है बल्कि वह कमाता है जो मार्केट में लंबे समय तक टिका रहता है।

मान लीजिए आपके पास एक पडोसी है जिसका नाम पिंटू है। पिंटू को लगता है कि वह बहुत स्मार्ट है। उसने सुना कि फलां कंपनी का शेयर आसमान छूने वाला है। पिंटू ने अपनी पूरी सेविंग्स उसमें डाल दी। अगले हफ्ते मार्केट गिर गया। अब पिंटू की रात की नींद उड़ गई है। वह हर पांच मिनट में अपना पोर्टफोलियो चेक कर रहा है जैसे बार बार देखने से शेयर के दाम बढ़ जाएंगे। अंत में वह घबराकर घाटे में शेयर बेच देता है। दो महीने बाद वही शेयर डबल हो जाता है। पिंटू अब अपनी किस्मत को और उस टीवी वाले अंकल को गाली दे रहा है।

सच्चाई यह है कि मार्केट के सबसे अच्छे दिन कब आएंगे यह कोई नहीं जानता। अगर आप उन चंद बेहतरीन दिनों में मार्केट से बाहर रहे तो आपका रिटर्न आधा रह जाएगा। मार्केट के उतार चढ़ाव को दिल पर लेना बंद कीजिए। यह कोई सट्टा नहीं है जहाँ आपको हर गेंद पर छक्का मारना है। आपको बस क्रीज पर टिके रहना है। जब आप मार्केट को प्रेडिक्ट करने की कोशिश करते हैं तो आप इन्वेस्टमेंट नहीं कर रहे होते बल्कि आप जुआ खेल रहे होते हैं। और जुए में जीत हमेशा घर की यानी मार्केट की ही होती है। इसलिए स्मार्ट बनिए और इस मार्केट टाइमिंग के जाल से बाहर निकलिए।


लेसन २ : डाइवर्सिफिकेशन को इग्नोर करने की सजा

इन्वेस्टिंग की दुनिया में एक बहुत ही मशहूर गलती है जिसे लोग बड़े गर्व के साथ करते हैं और वह है एक ही सेक्टर या एक ही स्टॉक से प्यार कर बैठना। पीटर मलौक कहते हैं कि डाइवर्सिफिकेशन कोई बोरिंग शब्द नहीं है बल्कि यह आपकी दौलत के लिए एक लाइफ जैकेट की तरह है। बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर उन्होंने किसी एक हॉट कंपनी में अपना सारा पैसा लगा दिया तो वो रातों रात अंबानी बन जाएंगे। लेकिन सच तो यह है कि बिना डाइवर्सिफिकेशन के आप सिर्फ एक बड़े हादसे का इंतजार कर रहे होते हैं। अगर वह एक कंपनी डूबी तो आपकी पूरी लाइफ की मेहनत एक पल में गायब हो जाएगी।

जरा अपने चिंटू भाई के बारे में सोचिए। चिंटू को किसी ने टिप दी कि रियल एस्टेट ही असली सोना है। चिंटू ने अपनी बैंक एफडी तोड़ी और शहर के किनारे एक जमीन में सारा पैसा झोंक दिया। अब चिंटू को लग रहा है कि वह जमीन का राजा है। लेकिन तभी पता चलता है कि वहां से कोई हाई कोर्ट का स्टे लग गया है या वहां कोई डेवलपमेंट नहीं होने वाला। अब चिंटू न तो उसे बेच सकता है और न ही उस पैसे को कहीं और इस्तेमाल कर सकता है। चिंटू का सारा एसेट एक ही जगह अटक गया है। इसे ही कहते हैं एक ही घोड़े पर पूरी बाजी लगा देना।

स्मार्ट इन्वेस्टिंग का मतलब है कि आपका पैसा अलग अलग जगह जैसे स्टॉक्स, बांड्स, गोल्ड और रियल एस्टेट में बंटा होना चाहिए। अगर मार्केट गिरता है तो शायद गोल्ड आपका साथ दे दे। अगर स्टॉक्स नहीं चल रहे तो बांड्स से कुछ इनकम आ जाए। इसे ही पीटर मलौक सही मायने में रिस्क को मैनेज करना कहते हैं। लोग अक्सर यह गलती इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि डाइवर्सिफिकेशन से उनका प्रॉफिट कम हो जाएगा। लेकिन भाई मेरे, थोड़े कम प्रॉफिट के साथ चैन की नींद सोना उस डर से कहीं बेहतर है कि कल सुबह आपका पोर्टफोलियो जीरो न हो जाए।

अक्सर लोग अपनी ही कंपनी के शेयर्स में बहुत ज्यादा इन्वेस्ट कर देते हैं जहाँ वो काम करते हैं। सोचिए अगर उस कंपनी को घाटा हुआ तो आपकी नौकरी भी जाएगी और आपके इन्वेस्टमेंट की वैल्यू भी गिरेगी। यह तो वही बात हुई कि आपने अपना घर भी उसी सूखी लकड़ी के ढेर पर बना लिया जिसमें आप आग लगाने वाले हैं। मार्केट में कोई भी चीज परमानेंट नहीं है। आज की नंबर वन कंपनी कल को इतिहास के पन्नों में खो सकती है। इसलिए अपनी ईगो को साइड में रखिए और अपने पोर्टफोलियो को फैलाकर रखिए। जब आपके पास अलग अलग एसेट्स होंगे तो आपको किसी एक न्यूज या एक क्रैश से डर नहीं लगेगा।

पिछले लेसन में हमने देखा कि मार्केट को टाइम करना बेवकूफी है और अब हमने समझा कि सारा पैसा एक जगह लगाना उससे भी बड़ी बेवकूफी है। लेकिन इन सबसे भी बड़ा दुश्मन आपके अंदर ही बैठा है जिसके बारे में हम अगले लेसन में बात करेंगे।


लेसन ३ : डर और लालच के गुलाम बनना

पीटर मलौक के अनुसार एक इन्वेस्टर का सबसे बड़ा दुश्मन कोई मार्केट क्रैश या खराब कंपनी नहीं है, बल्कि उसका अपना दिमाग है। इंसान का दिमाग आज भी वैसे ही काम करता है जैसे हजारों साल पहले गुफाओं में करता था। जब हमें खतरा दिखता है तो हम भागते हैं और जब हमें फल दिखता है तो हम उस पर टूट पड़ते हैं। इन्वेस्टिंग में यही दो भावनाएं 'डर' और 'लालच' के रूप में सामने आती हैं। जब मार्केट रिकॉर्ड तोड़ रहा होता है, तब आपका लालच जागता है। आपको लगता है कि पड़ोस वाला शर्मा जी करोड़पति बन गया तो मैं पीछे क्यों रहूं। फिर आप बिना सोचे समझे ऊंचे दाम पर कचरा शेयर्स खरीद लेते हैं।

ठीक इसके उल्टा, जब मार्केट में गिरावट आती है और हर तरफ लाल निशान दिखता है, तब आपका डर हावी हो जाता है। आप टीवी पर न्यूज़ देखते हैं 'मार्केट डूबा' और आपको लगता है कि अब सब खत्म होने वाला है। डर के मारे आप अपना पोर्टफोलियो लॉस में बेचकर बाहर निकल जाते हैं। इसे ही कहते हैं हाई पर खरीदना और लो पर बेचना। पीटर मलौक साफ कहते हैं कि जो इंसान अपने इमोशंस पर कंट्रोल नहीं रख सकता, वह कभी भी सफल इन्वेस्टर नहीं बन सकता। आपका पोर्टफोलियो आपकी इंटेलिजेंस से नहीं बल्कि आपके डिसिप्लिन से बढ़ता है।

अब जरा राजू की कहानी सुनिए। राजू ने एक अच्छी कंपनी के शेयर खरीदे। छह महीने बाद मार्केट थोड़ा नीचे आया। अब राजू को लगने लगा कि कंपनी बर्बाद हो जाएगी। वह रात को उठ उठ कर ग्राफ चेक करने लगा। उसकी बीवी ने पूछा क्या हुआ, तो राजू बोला कि हमारा पैसा डूब रहा है। डर के मारे राजू ने सब बेच दिया और पांच हजार का घाटा सह लिया। अगले ही महीने मार्केट वापस ऊपर चला गया। राजू अब चिड़चिड़ा हो गया है और सबको सलाह देता फिर रहा है कि शेयर मार्केट तो जुआ है। असल में मार्केट जुआ नहीं था, राजू का अपने डर पर काबू न होना उसकी सबसे बड़ी हार थी।

सफल होने का राज बहुत सिंपल है। एक प्लान बनाइए और उस पर टिके रहिए। जब सब डरे हुए हों, तब आपको शांत रहना है और जब सब लालच में हों, तब आपको सावधान रहना है। पीटर मलौक सुझाव देते हैं कि आपको बार बार अपना पोर्टफोलियो चेक करना बंद कर देना चाहिए। जितना ज्यादा आप उसे देखेंगे, उतना ही आपका मन उसे बदलने का करेगा। इन्वेस्टिंग एक मैराथन है, सौ मीटर की रेस नहीं। अगर आप हर पांच मिनट में अपने जूतों के फीते चेक करेंगे तो आप कभी फिनिश लाइन तक नहीं पहुंच पाएंगे। अपने इमोशंस को खिड़की से बाहर फेंकिए और डेटा पर भरोसा कीजिए।


इन्वेस्टिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है बल्कि खुद को काबू में रखने का एक खेल है। पीटर मलौक की यह बातें हमें सिखाती हैं कि अगर हम मार्केट को टाइम करना छोड़ दें, अपने इन्वेस्टमेंट को डाइवर्सिफाई करें और अपने डर व लालच पर कंट्रोल रखें, तो अमीर बनने से हमें कोई नहीं रोक सकता। याद रखिए, आपकी वेल्थ रातों रात नहीं बल्कि सालों की शांति और सही फैसलों से बनती है।

अब समय है खुद से एक सवाल पूछने का। क्या आप भी मार्केट के डर से भागने वालों में से हैं या आप एक पक्के इरादे वाले इन्वेस्टर बनेंगे। अपनी राय नीचे कमेंट्स में जरूर बताएं और इस आर्टिकल को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो हर गिरावट पर घबरा जाते हैं। चलिए साथ मिलकर अमीर बनते हैं।

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