The Breakthrough Imperative (Hindi)


अगर आप भी उन मैनेजर्स में से हैं जो दिन भर गधे की तरह मेहनत करते हैं पर प्रमोशन के वक्त बॉस को सिर्फ आपकी गलतियां याद आती हैं तो बधाई हो। आप अपनी करियर की नैया खुद डुबो रहे हैं। बिना इस बुक के सीक्रेट्स जाने आप सिर्फ ऑफिस की कुर्सी तोड़ रहे हैं।

आज हम मार्क गोटफ्रेडसन की मास्टरक्लास से वह तीन पावरफुल लेसन सीखेंगे जो एक एवरेज मैनेजर को सुपरस्टार बना देते हैं। तैयार हो जाइए क्योंकि यह आर्टिकल आपके काम करने के पुराने और घिसे पिटे तरीके को पूरी तरह से बदलने वाला है।


लेसन १ : अपनी सिचुएशन का सच और आपका असली रास्ता

ज्यादातर मैनेजर्स की हालत उस ड्राइवर जैसी होती है जिसे जाना तो दिल्ली है पर वो जोश में आकर मुंबई की हाईवे पर गाड़ी भगा रहा होता है। मार्क गोटफ्रेडसन कहते हैं कि अगर आपको अपनी कंपनी या टीम में बड़ा बदलाव लाना है तो सबसे पहले आपको यह स्वीकार करना होगा कि आप अभी खड़े कहाँ हैं। लोग अक्सर अपनी समस्याओं पर पर्दा डालते हैं क्योंकि सच बोलना ऑफिस की पॉलिटिक्स में खतरनाक लग सकता है। लेकिन भाई साहब अगर आप अंधेरे में तीर चलाएंगे तो शिकार नहीं बल्कि आपका अपना करियर ही घायल होगा।

मान लीजिए आप एक ऐसी टीम के मैनेजर बने हैं जिसकी परफॉरमेंस पिछले दो साल से पाताल में है। अब आपके पास दो रास्ते हैं। पहला यह कि आप आते ही जोश में मीटिंग्स करें और सबको मोटिवेशनल कोट्स सुनाकर बोर कर दें। दूसरा रास्ता यह है कि आप शांति से बैठकर यह देखें कि आखिर कचरा कहाँ फैला है। क्या लोग आलसी हैं या फिर आपका प्रोडक्ट ही मार्केट में पिट चुका है। लेखक कहते हैं कि हर बिजनेस की एक अपनी हकीकत होती है जिसे वो कॉन्टेक्स्ट कहते हैं। अगर आप बिना कॉन्टेक्स्ट समझे बड़े बड़े वादे कर रहे हैं तो आप मैनेजमेंट नहीं बल्कि बस एक महंगी कॉमेडी कर रहे हैं।

असली स्मार्ट मैनेजर वह है जो पहले अपनी सिचुएशन को चार केटेगरी में बांटता है। क्या आपकी कंपनी बहुत तेजी से बढ़ रही है या फिर डूबते हुए जहाज को बचाना है। अगर जहाज डूब रहा है और आप डेक पर बैठकर पेंटिंग करवा रहे हैं तो आपसे बड़ा कलाकार कोई नहीं है। यहाँ ह्यूमर की बात यह है कि कई मैनेजर्स को लगता है कि बस ऑफिस में बिजी दिखने से रिजल्ट आ जाएंगे। वो ईमेल्स का जवाब देने में ऐसे मशरूफ रहते हैं जैसे कि देश की सुरक्षा उन्हीं के कीबोर्ड पर टिकी हो। पर हकीकत में वो सिर्फ असली काम से भाग रहे होते हैं।

एक रियल लाइफ एक्जाम्पल देखिए। रमेश एक नई सेल्स टीम का लीडर बना। उसने आते ही सबको नए लैपटॉप्स दिला दिए और ऑफिस में पिज्जा पार्टी शुरू कर दी। उसे लगा कि लोग खुश होंगे तो सेल्स बढ़ेगी। तीन महीने बाद सेल्स और नीचे गिर गई क्योंकि असली दिक्कत लैपटॉप नहीं बल्कि टीम की गलत ट्रेनिंग थी। रमेश ने कॉन्टेक्स्ट को समझा ही नहीं। उसने बीमारी कैंसर की थी और इलाज में सिर्फ सरदर्द की गोली दी।

इसलिए पहला नियम याद रखिए कि डेटा से प्यार करें पर अपनी आंखों पर भरोसा करें। अपनी टीम की कमियों को ऐसे पहचानिए जैसे पड़ोस वाली आंटी मोहल्ले की बुराइयां ढूंढती हैं। जब तक आप बीमारी को सही नाम नहीं देंगे तब तक आप डॉक्टर नहीं बल्कि सिर्फ एक नीम हकीम ही बने रहेंगे। यह क्लैरिटी ही आपको उस भीड़ से अलग करेगी जो सिर्फ फाइलों के ढेर में दफन होकर रह जाती है।


लेसन २ : फोकस की पावर और सादगी का जादू

मैनेजमेंट की दुनिया में एक बहुत बड़ी बीमारी है जिसे हम कॉम्प्लेक्सिटी कहते हैं। कुछ मैनेजर्स को लगता है कि अगर उनका प्लान दस पन्नों का नहीं है या उसमें भारी भरकम शब्द नहीं हैं तो वो मैनेजर ही नहीं हैं। वो ऐसी ऐसी प्रेजेंटेशन बनाते हैं जिन्हें देखकर खुद भगवान भी कन्फ्यूज हो जाएं कि आखिर कहना क्या चाहते हो भाई। मार्क गोटफ्रेडसन साफ कहते हैं कि सफलता का रास्ता सादगी से होकर गुजरता है। अगर आप अपनी स्ट्रेटेजी को एक छोटे बच्चे को नहीं समझा सकते तो यकीन मानिए आप खुद भी उसे नहीं समझते हैं।

असल जिंदगी में हम अक्सर उन चीजों के पीछे भागते हैं जो सुनने में तो बहुत कूल लगती हैं पर असल में उनका रिजल्ट जीरो होता है। एक मैनेजर के पास दिन में सौ काम आते हैं। अब अगर आप हर किसी को अपनी प्रायोरिटी बनाएंगे तो आप किसी भी काम के नहीं रहेंगे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक साथ पांच शादियों में जाने की कोशिश करें। आप कहीं भी पेट भर खाना नहीं खा पाएंगे और थकेंगे वो अलग। लेखक सलाह देते हैं कि आपको उन दो या तीन बड़े काम को चुनना होगा जो आपके बिजनेस के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। इसे ही वो फोकस कहते हैं।

जरा सोचिए उस मैनेजर के बारे में जो सुबह ऑफिस आते ही सबसे पहले अपनी डेस्क साफ करता है। फिर वो चाय पीते हुए यह सोचता है कि ऑफिस की दीवारों का पेंट कैसा होना चाहिए। उसके बाद वो एक ऐसी मीटिंग बुलाता है जिसका कोई एजेंडा नहीं होता। शाम को जब वो घर जाता है तो बहुत थका हुआ होता है और उसे लगता है कि उसने बहुत काम किया है। पर हकीकत में उसने सिर्फ अपना और अपनी टीम का टाइम पास किया है। ऐसे मैनेजर्स को लगता है कि वो बहुत बिजी हैं पर असल में वो एक जगह खड़े होकर बस चक्कर काट रहे होते हैं।

सुरेश एक आईटी कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर था। उसकी आदत थी कि वो हर छोटी बात के लिए एक नया सॉफ्टवेयर या टूल ले आता था। टीम को काम करने से ज्यादा उन टूल्स को समझने में टाइम लगता था। सुरेश को लगता था कि वो बहुत एडवांस काम कर रहा है। लेकिन नतीजा यह निकला कि काम की स्पीड कम हो गई और डेवलपर चिढ़ने लगे। जब तक सुरेश को समझ आया कि उसे सिर्फ काम की क्वालिटी पर ध्यान देना था तब तक उसका प्रोजेक्ट हाथ से निकल चुका था। उसने चीजों को इतना उलझा दिया कि आसान काम भी पहाड़ जैसा लगने लगा।

सादगी का मतलब आलस नहीं है। सादगी का मतलब है फालतू के कचरे को हटाकर सिर्फ हीरे पर ध्यान देना। जब आप अपनी टीम को बताते हैं कि हमें सिर्फ इन तीन चीजों को जीतना है तो टीम के अंदर एक अलग ही एनर्जी आती है। उन्हें पता होता है कि उन्हें कहाँ तीर मारना है। वरना तो पूरी टीम बस अंधेरे में हाथ पैर मारती रहती है और अंत में फ्रस्ट्रेट होकर रह जाती है। अगर आप चाहते हैं कि आपके रिजल्ट्स आउटस्टैंडिंग हों तो अपनी डिक्शनरी से कन्फ्यूजन शब्द को बाहर फेंक दीजिए। क्लैरिटी ही वो हथियार है जो बड़े से बड़े कॉम्पिटिशन को खत्म कर देता है।


लेसन ३ : रिजल्ट्स की जवाबदेही और एक्शन का असली खेल

मैनेजमेंट की दुनिया में बातें करना सबसे आसान काम है। आप शानदार सूट पहनकर और हाथ में कॉफी का मग लेकर बड़ी-बड़ी फिलॉसफी झाड़ सकते हैं। लेकिन मार्क गोटफ्रेडसन कहते हैं कि दिन के आखिर में सिर्फ एक ही चीज मायने रखती है और वो है 'रिजल्ट्स'। अगर आपके पास दुनिया का सबसे बेस्ट प्लान है पर आपकी टीम उसे जमीन पर नहीं उतार पा रही है तो उस प्लान की कीमत रद्दी के भाव भी नहीं है। एक महान मैनेजर वो नहीं है जो सिर्फ सपने दिखाता है बल्कि वो है जो उन सपनों को हकीकत के आंकड़ों में बदल देता है। इसे ही लेखक 'जवाबदेही' या एकाउंटेबिलिटी कहते हैं।

जवाबदेही का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी टीम पर चिल्लाएं या उन्हें डराएं। असली जवाबदेही का मतलब है हर इंसान को यह पता होना चाहिए कि उसकी जिम्मेदारी क्या है और उसे कब तक पूरा करना है। कई ऑफिसों में कल्चर ऐसा होता है कि जब कोई काम बिगड़ता है तो सब एक-दूसरे की तरफ उंगली दिखाने लगते हैं। मैनेजर कहता है कि टीम ने काम नहीं किया और टीम कहती है कि मैनेजर ने इंस्ट्रक्शन सही नहीं दिए। यह 'पासिंग द पार्सल' का खेल आपके करियर के लिए जहर है। एक लीडर के तौर पर आपको नतीजे की पूरी जिम्मेदारी खुद लेनी पड़ती है।

जरा उस मैनेजर की कल्पना कीजिए जो मीटिंग में तो शेर बनता है पर जब बॉस रिपोर्ट मांगता है तो वो भीगी बिल्ली बन जाता है। वो बहाने बनाने में इतना माहिर होता है कि उसे ऑस्कर मिल जाना चाहिए। कभी सर्वर डाउन था तो कभी क्लाइंट का मूड खराब था। मार्क कहते हैं कि बहाने बनाना बंद कीजिए क्योंकि मार्केट को आपके संघर्ष की कहानियों में कोई दिलचस्पी नहीं है उसे सिर्फ आउटपुट चाहिए। अगर आप रिजल्ट नहीं दे रहे हैं तो आप बस कंपनी का बिजली का बिल बढ़ा रहे हैं और कुछ नहीं।

अजय एक ऑपरेशंस मैनेजर था। उसने अपनी टीम के लिए बहुत सख्त नियम बनाए थे पर वो खुद कभी समय पर ऑफिस नहीं आता था। जब प्रोजेक्ट लेट हुआ तो उसने अपनी टीम के जूनियर लड़के को सबके सामने डांट दिया। उसे लगा कि ऐसा करने से उसकी पावर बढ़ेगी। पर हुआ इसका उल्टा। टीम का भरोसा टूट गया और अगले महीने तीन अच्छे एम्प्लॉईज ने इस्तीफा दे दिया। अजय यह भूल गया कि जवाबदेही ऊपर से शुरू होती है। अगर आप खुद मिसाल नहीं बनेंगे तो आपकी टीम सिर्फ घड़ी की सुइयां देखेगी आपका काम नहीं करेगी।

सफल मैनेजर बनने के लिए आपको 'एक्शन ओरिएंटेड' होना पड़ेगा। ज्यादा सोचना और कम करना एक बीमारी है। जब आप अपनी टीम में एक ऐसा माहौल बनाते हैं जहाँ हर कोई अपने काम का मालिक खुद होता है तब जाकर 'ब्रेकथ्रू' रिजल्ट्स मिलते हैं। याद रखिए कि लोग आपके शब्दों को नहीं बल्कि आपके एक्शन को फॉलो करते हैं। अपनी टीम को जीतना सिखाइए और जीत का क्रेडिट उन्हें दीजिए पर हार की जिम्मेदारी खुद के कंधों पर लीजिए। यही वो क्वालिटी है जो आपको एक बॉस से उठाकर एक लीडर बना देती है।


मैनेजमेंट कोई रॉकेट साइंस नहीं है पर यह हर किसी के बस की बात भी नहीं है। अगर आप आज भी पुराने तरीकों से अटके हुए हैं तो समय आ गया है खुद को अपडेट करने का। इस आर्टिकल में बताए गए लेसन को सिर्फ पढ़कर छोड़ मत दीजिएगा बल्कि कल सुबह ऑफिस जाते ही इनमें से कम से कम एक लेसन को लागू करके देखिए। अपनी टीम के साथ बैठिए सच का सामना कीजिए और फालतू की चीजों को कचरे के डिब्बे में डाल दीजिए। कमेंट में बताइए कि एक मैनेजर के तौर पर आपकी सबसे बड़ी चुनौती क्या है। चलिए मिलकर आपके करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हैं। शेयर कीजिए इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त के साथ जो मैनेजर तो बन गया है पर अभी भी उलझा हुआ है।

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