The Future of Management (Hindi)


अगर आप अभी भी वही घिसे पिटे मैनेजमेंट के तरीकों से अपनी कंपनी चला रहे हैं तो मुबारक हो आप बहुत जल्द इतिहास का हिस्सा बनने वाले हैं। जबकि दुनिया बदल चुकी है आप अभी भी फाइलों और फालतू की मीटिंग्स में अटके हैं जो असल में किसी काम की नहीं हैं।

आज के इस आर्टिकल में हम गैरी हेमल की द फ्यूचर ऑफ मैनेजमेंट बुक के उन राज को खोलेंगे जो आपकी पुरानी सोच को पूरी तरह हिला कर रख देंगे। तैयार हो जाइए मैनेजमेंट की इस अनोखी जर्नी के लिए जहाँ हम ३ पावरफुल लेसन सीखेंगे।


लेसन १ : मैनेजमेंट इनोवेशन की असली ताकत

अक्सर जब हम इनोवेशन की बात करते हैं तो हमारे दिमाग में बस नए गैजेट्स या कोई चमकता हुआ ऐप आता है। लेकिन गैरी हेमल कहते हैं कि भाई साहब असली खेल तो पर्दे के पीछे चल रहा होता है। इसे कहते हैं मैनेजमेंट इनोवेशन। अब आप सोचेंगे कि यह किस चिड़िया का नाम है। तो सुनिए। अगर आप एक सड़ी हुई पुरानी कार में दुनिया का सबसे बेहतरीन इंजन लगा देंगे तो भी वो गड्ढों में जाकर फंसेगी ही क्योंकि उसका ढांचा ही बेकार है। हमारी कंपनियां भी कुछ ऐसी ही हैं। हम नए प्रोडक्ट तो ला रहे हैं लेकिन उन्हें मैनेज करने का तरीका वही १८वीं सदी वाला है जब लोग हाथ में डंडा लेकर काम करवाते थे।

मान लीजिए आपकी एक टीम है जो चांद पर घर बनाने का आईडिया लाती है। लेकिन आपके ऑफिस का सिस्टम ऐसा है कि उन्हें एक पेन खरीदने के लिए भी पांच अलग अलग मैनेजरों से साइन करवाने पड़ते हैं। अब आप ही बताइये कि वो चांद पर पहुँचेंगे या फाइलों के ढेर में दब जाएंगे। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप एक तेज तर्रार रेसर को कहें कि भागो तो सही लेकिन अपने पैरों में लोहे की जंजीरें बांधकर। यहाँ मैनेजमेंट इनोवेशन का मतलब है उन जंजीरों को काटना। गैरी हेमल साफ कहते हैं कि अगर आप अपनी कंपनी को अगले लेवल पर ले जाना चाहते हैं तो आपको सिर्फ यह नहीं सोचना कि आप क्या बना रहे हैं बल्कि यह सोचना है कि आप उसे कैसे मैनेज कर रहे हैं।

आजकल के कई महान मैनेजर्स को लगता है कि बस चिल्लाने से या ऑफिस में एक बढ़िया कॉफी मशीन लगवा देने से काम हो जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि जब तक आप अपने काम करने के पुराने ढर्रे को नहीं बदलेंगे तब तक कुछ नहीं होने वाला। पुराने सिस्टम में सारा दिमाग ऊपर बैठे एक दो लोगों के पास होता था और बाकी सब बस रोबोट की तरह काम करते थे। लेकिन आज की तारीख में अगर आप रोबोट पालना चाहते हैं तो असली वाले रोबोट खरीद लीजिये इंसान क्यों रखे हैं। मैनेजमेंट इनोवेशन कहता है कि दिमाग हर लेवल पर होना चाहिए। जब आप अपने कर्मचारियों को फैसले लेने की आजादी देते हैं तब असल में कंपनी ग्रो करती है।

तो क्या आप अभी भी वही पुराने टाइपराइटर वाले दिमाग से २१वीं सदी की कंपनी चलाना चाहते हैं। अगर हाँ तो तैयार रहिये क्योंकि आपकी ग्रोथ भी उसी टाइपराइटर की तरह रुकने वाली है। गैरी हेमल हमें याद दिलाते हैं कि जो कंपनियां अपने मैनेजमेंट को रिसेट नहीं करतीं उन्हें वक्त डिलीट कर देता है। इसलिए जागिए और देखिये कि आपके ऑफिस में कहाँ कहाँ वो पुरानी जंग लगी मशीनें चल रही हैं जिन्हें अब कबाड़ में फेंकने का वक्त आ गया है।


लेसन २ : पदानुक्रम या हाइरार्की का खात्मा

मैनेजमेंट इनोवेशन की बात तो हो गई लेकिन ये सब तब तक मुमकिन नहीं है जब तक आप अपने ऑफिस की उस ऊंची मीनार को नहीं गिराते जिसे हम हाइरार्की कहते हैं। पुराने जमाने में राजा होता था और उसके नीचे प्रजा। फिर आए हमारे प्यारे कॉर्पोरेट ऑफिस जहाँ एक बॉस होता है और उसके नीचे बेचारे एम्प्लॉई। गैरी हेमल बड़े प्यार से समझाते हैं कि ये पिरामिड वाला सिस्टम अब एक्सपायर हो चुका है। सच तो ये है कि जितना बड़ा पिरामिड होता है उसके अंदर उतनी ही ज्यादा घुटन होती है। आपने देखा होगा कि कैसे एक छोटा सा फैसला लेने के लिए ईमेल की ऐसी चेन बनती है जैसे किसी की शादी का न्योता घूम रहा हो।

सोचिये कि आप एक जहाज पर हैं जो डूब रहा है। आपको पता है कि छेद कहाँ है और उसे कैसे भरना है। लेकिन आप उसे तब तक नहीं भर सकते जब तक कैप्टन का असिस्टेंट उसके सेकंड असिस्टेंट से पूछकर आपको परमिशन न दे दे। जब तक परमिशन आएगी तब तक आप और आपका जहाज दोनों समुद्र की गहराइयों में मछलियों के साथ डिनर कर रहे होंगे। आज के बिजनेस की दुनिया में भी यही हो रहा है। जो लोग असल में ग्राहकों से बात कर रहे हैं या काम कर रहे हैं उनके पास कोई पावर नहीं होती। और जो लोग एयर कंडीशनर वाले कमरों में बैठकर रिपोर्ट पढ़ रहे हैं उनके पास सारी पावर होती है। क्या ये मजाक नहीं है।

गैरी हेमल कहते हैं कि अगर आपको फ्यूचर का हिस्सा बनना है तो आपको इस बॉस वाले कल्चर को खत्म करना होगा। आज की जनरेशन को डंडे के जोर पर काम करवाना नामुमकिन है। उन्हें आजादी चाहिए। उन्हें ऐसा माहौल चाहिए जहाँ उनका आईडिया किसी मैनेजर के ईगो की वजह से कूड़ेदान में न फेंक दिया जाए। अक्सर ऑफिस में लोग काम कम करते हैं और अपने ऊपर वाले को खुश करने की जुगाड़ ज्यादा लगाते हैं। इसे ही हम ऑफिस पॉलिटिक्स कहते हैं। अगर आप अपनी आधी एनर्जी सिर्फ चापलूसी में लगा रहे हैं तो कंपनी के लिए क्या खाक वैल्यू क्रिएट करेंगे।

हाइरार्की का मतलब सिर्फ ऊंचे पद नहीं हैं बल्कि ये एक मानसिक बेड़ी है। ये लोगों को ये सोचने पर मजबूर कर देती है कि अरे मैं तो सिर्फ एक छोटा सा जूनियर हूँ मैं कैसे कुछ नया सोच सकता हूँ। लेकिन हकीकत ये है कि इनोवेशन किसी की औकात या पद देखकर नहीं आता। वो तो बस एक आजाद दिमाग में पैदा होता है। इसलिए अगर आप अपनी कंपनी में टैलेंट को रोकना चाहते हैं और उसे आगे बढ़ाना चाहते हैं तो ये बॉस और चमचे वाला खेल बंद कीजिये। सबको बराबर का मौका दीजिये और देखिये कैसे वो लोग कमाल करते हैं जिन्हें आपने अब तक बस एक नंबर समझा हुआ था।


लेसन ३ : कंपनी को कम्युनिटी बनाना

मैनेजमेंट इनोवेशन समझ लिया और बॉस गिरी भी छोड़ दी। लेकिन अब सवाल ये है कि लोग आपके साथ जुड़ेंगे क्यों। क्या सिर्फ महीने की पहली तारीख को आने वाली सैलरी के लिए। गैरी हेमल कहते हैं कि अगर आपकी कंपनी में लोग सिर्फ पैसों के लिए आ रहे हैं तो आप एक बिजनेस नहीं बल्कि एक दिहाड़ी मजदूरों का अड्डा चला रहे हैं। जब तक आप अपनी कंपनी को एक 'कॉर्पोरेशन' से बदलकर एक 'कम्युनिटी' नहीं बनाएंगे तब तक आप वो जोश पैदा नहीं कर पाएंगे जो इतिहास रचता है। लोग किसी कागज के टुकड़े यानी कॉन्ट्रैक्ट के लिए अपनी जान नहीं झोंकते वो किसी बड़े मकसद या कम्युनिटी के लिए लड़ते हैं।

जरा सोचिये कि आप किसी शादी में गए हैं जहाँ आपको खाना परोसने के पैसे मिल रहे हैं। आप बस अपना काम खत्म करके घर भागना चाहेंगे। लेकिन वही शादी अगर आपके सगे भाई की है तो आप बिना सोए बिना खाए पूरी रात काम करेंगे। क्यों। क्योंकि वहाँ आप एक कम्युनिटी का हिस्सा हैं। गैरी हेमल का कहना है कि आज की कंपनियों में इसी जज्बे की कमी है। हम एम्प्लॉई को बस एक रिसोर्स समझते हैं जैसे कि वो कोयला या पेट्रोल हो। पेट्रोल खत्म हुआ तो नया डलवा लिया। लेकिन इंसान पेट्रोल नहीं होता। उसके पास इमोशन होते हैं सपने होते हैं और सबसे जरूरी बात उसके पास एक दिल होता है।

एक कम्युनिटी में लोग एक दूसरे की परवाह करते हैं। वहाँ कोई किसी का पैर नहीं खींचता बल्कि सब एक ही दिशा में भाग रहे होते हैं। आज की दुनिया में जहाँ हर कोई अकेला महसूस कर रहा है अगर आपका ऑफिस उन्हें एक परिवार जैसा अहसास दे दे तो वो आपकी कंपनी को छोड़ने की सोचेंगे भी नहीं। लेकिन इसके लिए आपको उन्हें ये यकीन दिलाना होगा कि उनका काम सिर्फ एक्सेल शीट भरना नहीं है बल्कि वो दुनिया में कोई बड़ा बदलाव ला रहे हैं। जब एक सफाई कर्मचारी को भी ये महसूस होता है कि उसके काम से किसी की जान बच सकती है तब वो सिर्फ सफाई नहीं करता बल्कि वो सेवा करता है।

फ्यूचर का मैनेजमेंट कोई सॉफ्टवेयर नहीं है बल्कि ये इंसानियत को वापस लाने का एक तरीका है। अगर आप अपने लोगों को भरोसा देंगे उन्हें सम्मान देंगे और उन्हें एक बड़े मिशन का हिस्सा बनाएंगे तो वो आपको वो नतीजे देंगे जो कोई भी मॉडर्न मशीन नहीं दे सकती। गैरी हेमल की ये बुक हमें यही सिखाती है कि मैनेजमेंट का मतलब कंट्रोल करना नहीं बल्कि लोगों के अंदर की उस चिंगारी को सुलगाना है जिसे हम जुनून कहते हैं। तो क्या आप तैयार हैं अपनी कंपनी को एक ठंडी मशीन से बदलकर एक जीती जागती कम्युनिटी बनाने के लिए।


दोस्तों, गैरी हेमल की ये बातें सिर्फ थ्योरी नहीं हैं बल्कि आज के जमाने में टिके रहने का एकमात्र रास्ता हैं। अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया और आप अपनी लाइफ या ऑफिस में इनमें से कोई भी बदलाव लाना चाहते हैं तो नीचे कमेंट में अपना सबसे बड़ा चैलेंज शेयर करें। इस आर्टिकल को अपने उस दोस्त या बॉस के साथ जरूर शेयर करें जिसे मैनेजमेंट की नई सोच की सख्त जरूरत है। आइये मिलकर काम करने के तरीके को बदलते हैं।

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